Jyotish Vastu

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02/11/2021

🧘‍♂सर्वज्ञ ...*कुछ विशिष्ट उपाय*

📯धनतेरस की शाम को घर के ईशान (उत्तरपूर्व)में गाय के घी का दीपक जलाएं बत्ती के रूप में रुई के स्थान पर लाल धागा(कलावा) प्रयोग करें दीपक में थोड़ी सी केसर भी डाल दें इस उपाय से धन आगमन का रास्ता साफ हो जाता है |

📯धनतेरस के दिन श्री कनकधारा स्त्रोत धन प्राप्ति व दरिद्रता दूर करने के लिए अचूक पाठ है अधिक लाभ हेतु इसे धनतेरस से शुरू करके 40 दिन कर सकते है |

📯 स्थिर धन के लिए धनतेरस पर १३ दीप घर के अंदर १३ दीप घर के बाहर दहलीज और मुंडेर पर रखें इनमे से १ दीप दक्षिण दिशा में ज़रूर जलाये. |

📯छोटी दीपावली को कच्ची घानी (सरसो) के तेल के दीपक में फूलदार लौंग डालकर हनुमान जी की आरती करें इससे अनिष्ट दूर होगा और धन प्राप्ति होने लगेगी |

📯 दीपावली से शुरू करके लगातार २१दिनों तक दरिद्रदहन श्री शिव स्त्रोत्र पढ़ें ये आर्थिक समृद्धि को बढ़ाएंगे चमत्कारिक उपाय है |

📯 हल्दी से रंगे हुए कपड़े के एक टुकड़े में १ मुट्ठी नागकेसर,१मुट्ठी गेंहू,१हल्दी की गाँठ ,१तांबे का सिक्का,११मुट्ठी सबूत नमक,तांबे की छोटी सी पादुकाएं बांधकर रसोई घर मे टांग दे यह एक चमत्कारी उपाय है माँ लक्ष्मी जी के साथ माँ अन्नपूर्णा की भी कृपा प्राप्त होगी तथा पारिवारिक कलह भी दूर होगा |

*अधिक जानकारी के लिए संपर्क करें* 🏌 🕉️ *सर्वज्ञ* +81.9810234535 ,+91.9997354548 e-mail :sarvagyasachin@gmail.comhttps://m.facebook.com/story.php?story_fbid=3171638113120034&id=100008216292500

02/11/2021

🧘‍♂ *सर्वज्ञ* धनतेरस पर आरोग्य के लिए विशेष...🌸

📯धनतेरस यानी अपने धन, भाग्य और आरोग्य को तेरह गुणा बनाने और उसमें वृद्धि करने का दिवस
इस दिन यमराज और भगवान धनवंतरी के साथ ही धन की देवी मां लक्ष्मी और धन के स्वामी कुबेर की पूजा का बड़ा महत्त्व है।
📯महर्षि धन्वंतरी को आयुर्वेद व स्वस्थ जीवन प्रदान करने वाले देवता के रूप में भी पूजनीय है, स्वस्थ जीवन के लिए स्वास्थ्य के देवता धन्वंतरी की आराधना की जाती है।
📯शास्त्रों के अनुसार भगवान धनवंतरी देवताओं के वैद्य हैं। इनकी भक्ति और पूजा से रोगों से मुक्ति एवं आरोग्य सुख - स्वास्थ्य मिलता है। मान्यता है कि भगवान धनवंतरी विष्णु के अंशावतार हैं। संसार में चिकित्सा विज्ञान के विस्तार और प्रसार के लिए ही भगवान विष्णु ने धनवंतरी का अवतार लिया था।
🌸धनवंतरि की पूजा
रोगनाश की कामना के लिए भगवान धनवंतरि के मंत्र का जाप करें-

1. ऊँ रं रूद्र रोगनाशाय धन्वन्तर्ये फट्।।

2. सत्यं च येन निरतं रोगं विधूतं,अन्वेषित च सविधिं आरोग्यमस्य।
गूढं निगूढं औषध्यरूपं, धनवंतरिं च सततं प्रणमामि नित्यं।।
🌸धन सम्पदा और ऐश्वर्य के लिए कुबेर की पूजा
समस्त धन सम्पदा और ऐश्वर्य के स्वामी कुबेर के लिए धनतेरस के दिन शाम को 13 दीप समर्पित किए जाते हैं।
🌸मंत्र
"ऊँ यक्षाय कुबेराय वैश्रवणाय धनधान्यादिपतये धनधान्य समृद्धि मे देहि दापय स्वाहा।।"
📯लक्ष्मी की कृपा पाने के लिए मंत्र
लक्ष्मी जी की कृपा पाने के लिए अष्टदल कमल बनाकर कुबेर, लक्ष्मी एवं गणेश जी की स्थापना कर उपासना की जाती है। इस अनुष्ठान में पांच घी के दीपक जलाकर और कमल, गुलाब आदि पुष्पों से उत्तर दिशा की ओर मुख करके पूजन करना लाभप्रद होता है।
🌸ओम् श्रीं श्रीयै नम:
📯मान्यता अनुसार धनतेरस पर करने योग्य कुछ ज्योतिष उपाय
- यदि आप धनतेरस के दिन शाम के समय घर के मुख्य द्वार पर तेल का दीपक में दो काली गुंजा डाल दें, तो साल भर आर्थिक अनुकूलता बनी रहेगी। आपका उधार दिया हुआ धन भी प्राप्त हो जाएगा।
- यदि आपके संचित धन का लगातार खर्च हो रहा है तो धनतेरस के दिन पीपल के पांच पत्ते लेकर उन्हे पीले चंदन में रंगकर बहते हुए जल में छोड़ दें।
- बरगद से पांच फल लाकर उसे लाल चंदन में रंगकर नए लाल वस्त्र में कुछ सिक्कों के साथ बांधकर अपने घर अथवा दुकान में किसी कील से लटका दें।
- यदि आपको अचानक धन लाभ की आशा हो तो धनतेरस के दिन शाम के समय पीपल वृक्ष के समीप तेल का पंचमुखी दीपक जलाएं।
-यदि व्यवसाय में बार-बार हानि हो रही हो या घर में बरकत ना रहती हो तो धनतेरस के दिन से गाय को रोज चारा डालने का नियम लें।
- यदि जीवन में आर्थिक स्थिरता नहीं हो तो धनतेरस के दिन दो कमलगट्टे लेकर उन्हें माता लक्ष्मी के मंदिर में अर्पित करें।
- यदि आप आर्थिक परेशानी से जुझ रहे हैं तो धनतेरस के दिन शाम को लक्ष्मीजी के मंदिर में नारियल चढ़ाएं।
-यदि आप निरंतर कर्ज में उलझ रहें हो तो धनतेरस के दिन श्मशान के कुएं का जल लाकर किसी पीपल वृक्ष पर चढ़ाएं।
- धनतेरस के दिन गुलर के ग्यारह पत्तों को मोली से बांधकर यदि किसी वट वृक्ष पर बांध दिया जाए, तो आपकी आर्थिक स्थिति सुदृढ़ होगी।
- यदि आप आर्थिक समस्या से परेशान है, किंतु रूकावटें आ रही हों, तो आक की रूई का दीपक शाम के समय किसी तिराहे पर रखने से आपको धन लाभ होगा।
- जीवन स्थायी सुख-समृद्धि हेतु प्रत्येक धनतेरस की रात में पूजन करने वाले स्थान पर ही रात्रि में जागरण करना चाहिए।
- यदि व्यवसाय में शिथिलता हो तो केले के दो पौधे रोपकर उनकी देखभाल करें तथा उनके फलों को नहीं खाएं।
- पीत वस्त्र में नागकेसर, हल्दी, सुपारी, एक सिक्का, ताँबे का टुकड़ा, चावल पोटली बना लें। इस पोटली को शिवजी के सम्मुख रखकर, धूप-दीप से पूजन करके सिद्ध कर लें फिर आलमारी, तिजोरी, भण्डार में कहीं भी रख दें। यह धनदायक प्रयोग है।

📯धनतेरस दीपदान का महत्व..
धनतेरस की सायंकाल को गृहलक्ष्मी द्वारा यमदेव निमित्त दक्षिण दिशा में दीपदान किया जाता है। मान्यता है ऐसा करने से यमराज के कोप से सुरक्षा मिलती है और पूरा परिवार स्वस्थ रहता है।
शास्त्रों के अनुसार एक पीपल का पौधा लगाने वाले व्यक्ति को जीवन में किसी भी प्रकार को कोई दुख नहीं सताता है। कभी भी पैसों की कमी नहीं रहती है। पीपल का पौधा लगाने के बाद उसे नियमित रूप से जल अर्पित करना चाहिए। जैसे-जैसे यह वृक्ष बड़ा होगा आपके घर-परिवार में सुख-समृद्धि बढ़ती जाएगी, धन बढ़ता जाएगा। पीपल के बड़े होने तक इसका पूरा ध्यान रखना चाहिए तभी आश्चर्यजनक लाभ प्राप्त होंगे।

📯 *विशेष* -
*जन्म कुंडली अनुसार व्यक्तिगत रूप से उपायों को जानने के लिए...संपर्क करें* .+91.9810234535,++91.9997354548 e-mail :sarvagyadachin@hmail.com https://m.facebook.com/story.php?story_fbid=3171638113120034&id=100008216292500

01/11/2021

🕉 *सर्वज्ञ🧘‍♂️सनातन (हिन्दू)धर्म के १० महत्वपूर्ण तथ्य 📯 *१० ध्वनियां*
१.घंटी
२.शंख
३.बांसुरी
४.वीणा
५. मंजीरा ६.करतल
७.बीन (पुंगी)
८.ढोल
९.नगाड़ा
१०.मृदंग
📯 *१० कर्तव्य*
१. संध्यावंदन
२. व्रत
३. तीर्थ
४. उत्सव
५. दान
६. सेवा
८. संस्कार
८. यज्ञ
९. वेदपाठ
१०. सनातन धर्म प्रचार
📯 *१० दिशाएं*
दिशाएं १० होती हैं जिनके नाम और क्रम इस प्रकार हैं १.उर्ध्व
२.ईशान
३.पूर्व
४.आग्नेय
५.दक्षिण
६.नैऋत्य
७.पश्चिम
८.वायव्य
९.उत्तर
१०.अधो
📯 *१० दिग्पाल*
१० दिशाओं के १० दिग्पाल अर्थात द्वारपाल होते हैं या देवता होते हैं। १.उर्ध्व के ब्रह्मा, २.ईशान के शिव व ईश
३.पूर्व के इंद्र ४.आग्नेय के अग्नि या वह्रि
५.दक्षिण के यम ६.नैऋत्य के नऋति
७.पश्चिम के वरुण, ८.वायव्य के वायु और मारुत
९.उत्तर के कुबेर
१०.अधो के अनंत
📯 *१० देवीय आत्मा*
१.कामधेनु गाय २.गरुढ़ ३.संपाति-जटायु ४.उच्चै:श्रवा अश्व ५.ऐरावत हाथी ६.शेषनाग-वासुकि ७.रीझ मानव ८.वानर मानव ९.येति,
१०.मकर।
📯 *१० देवीय वस्तुएं*
१.कल्पवृक्ष, २.अक्षयपात्र, ३.कर वच कुंडल, ४.दिव्य धनुष और तरकश
५.पारस मणि ६.अश्वत्थामा की मणि
७.स्यंमतक मणि ८.पांचजन्य शंख ९.कौस्तुभ मणि १०. संजीवनी बूटी
📯 *१०पवित्र पेय*
१.चरणामृत २.पंचामृत ३.पंचगव्य ४.सोमरस
५.अमृत
६.तुलसी रस ७.खीर
८.आंवला रस
९. ......
१०.......
📯 *१० महाविद्या*
१.काली
२.तारा ३.त्रिपुरसुंदरी
४. भुवनेश्‍वरी ५.छिन्नमस्ता ६.त्रिपुरभैरवी ७.धूमावती ८.बगलामुखी ९.मातंगी १०.कमला
📯 *१० उत्सव*
१.नवसंवत्सर(चैत्र शुक्ल प्रतिपदा) २.मकर संक्रांति ३.वसंत पंचमी ४.पोंगल
५.होली ६.दीपावली ७.रामनवमी ८.कृष्ण जन्माष्‍टमी ९.महाशिवरात्री १०.नवरात्रि
📯 *१०बाल पुस्तकें*
१.पंचतंत्र २.हितोपदेश ३.जातक कथाएं ४.उपनिषद कथाएं ५.वेताल पच्चिसी ६.कथासरित्सागर ७.सिंहासन बत्तीसी ८.तेनालीराम ९.शुकसप्तति १०.बाल कहानी संग्रह
📯 *१० पूजा*
१.गंगा दशहरा २.आंवला नवमी पूजा
३.वट सावित्री ४.तुलसी विवाह पूजा ५.शीतलाष्टमी ६.गोवर्धन पूजा ७.हरतालिका तिज ८.दुर्गा पूजा ९.भैरव पूजा १०. छठ पूजा
📯 *१० धार्मिक स्थल*
१२ ज्योतिर्लिंग
५१ शक्तिपीठ
४ धाम
७पुरी
७नगरी
४ मठ आश्रम
१० समाधि स्थल
७ सरोवर
१० पर्वत
१० गुफाएं
📯 *१० पूजा के फूल*
१.आंकड़ा
२.गेंदा
३.पारिजात
४.चंपा
५.कमल
६.गुलाब
७.चमेली
८.गुड़हल
९.कनेर १०.रजनीगंधा
📯 *१० धार्मिक सुगंध*
१.गुग्गुल
२.चंदन
३.गुलाब
४.केसर
५.कर्पूर
६.अष्टगंथ ७.गुढ़-घी
८.समिधा
९.मेहंदी
१०.चमेली
📯 *१० यम-नियम*
१.अहिंसा
२.सत्य
३.अस्तेय ४.ब्रह्मचर्य ५.अपरिग्रह
६.शौच
७.संतोष
८.तप
९.स्वाध्याय १०.ईश्वर-प्रणिधान
📯 *१० सिद्धांत*
१.एको ब्रह्म द्वितीयो नास्ति (एक ही ईश्‍वर है दूसरा नहीं)
२.आत्मा अमर है
३.पुनर्जन्म होता है
४.मोक्ष ही जीवन का लक्ष्य है
५.कर्म का प्रभाव होता है, जिसमें से ‍कुछ प्रारब्ध रूप में होते हैं इसीलिए कर्म ही भाग्य है
६.संस्कारबद्ध जीवन ही जीवन है,
७.ब्रह्मांड अनित्य और परिवर्तनशील है,
८.संध्यावंदन-ध्यान ही सत्य है ९.वेदपाठ और यज्ञकर्म ही धर्म है
१०.दान ही पुण्य है।
👆 *ऊपर लिखी जानकारियों को अपने बच्चों को बचपन से ही बताए।।*
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30/08/2021

🧘‍♂मक्खन मिश्री और केसर मिलाकर तुलसी पत्ते के साथ कान्हा जी को भोग लगाएं और पूजा आरती के बाद प्रसाद रूप में खाएं ! करके देंखे कमाल होगा | 🏌सर्वज्ञ +91.9810234535

06/08/2021

🧘‍♂सर्वज्ञ ..... 🔱"अर्धनारेश्वर" = स्त्री +पुरुष = पूर्णब्रह्म
(शिव महापुराण)🍃 📯‘शंकर: पुरुषा: सर्वे स्त्रिय: सर्वा महेश्वरी ।’
अर्थात्– समस्त पुरुष भगवान सदाशिव के अंश और समस्त स्त्रियां भगवती शिवा की अंशभूता हैं, उन्हीं भगवान अर्धनारीश्वर से यह सम्पूर्ण चराचर जगत् व्याप्त हैं ।
सृष्टि में तीन तत्व है-ऋण-धन-बीज जिसके जीवंत नाम है-"पुरुष,स्त्री और बीज" या "इलेक्ट्रॉन,प्रोट्रान,न्युट्रान" । 📯प्राचीन कथाओं में पाओगे की ईश्वर और ईश्वरी के युगलावस्था को एकल ब्रह्म कहा है उसका मतलब है शिव या शक्ति भी अकेले है तो पूर्ण ब्रह्म नही है । जीव की जन्मयात्रामे महत्त्व स्वरूप भी दो या ज्यादा भागमे जब विभाजित हो जाता है और जब कर्म उपासना से जीव ब्रह्म भावको प्राप्त करने लगता है तब विभाजित अंश एक हो जाते है । दोनो के मिलन से ही पूर्ण ब्रह्मत्व प्राप्त कर महाब्राह्म में विलीन हो सकता है । यही ही जीवकी पूर्ण मुक्ति "मोक्ष" । किसी भी प्रयोजन हेतु ब्रह्म भी अपनी अर्द्धशक्ति को साथ लाते है जैसे विष्णु के साथ उनकी पत्नी लक्ष्मी तब उन्ही के पृथ्वी रूप राम-सीता व कृष्ण-राधा या रुक्मणी है क्योकि ईश्वर को चतुर्थ धर्म का स्वयं पालन करते हुए समाज की चतुर्थ धर्म पालन का ज्ञान देना और प्रचारित करना है उसके जाने के बाद उस सिद्धांत के अनेक आचार्य विवाहित या अविवाहित हो सकते है । पर इसमें कोई संदेह नही है उन्हें भी पूर्ण आत्मा स्वरूप होना ही पड़ता है । तंत्रमार्ग में भैरव ओर भैरवी स्वरूप बनकर उपासना का भी यही हेतु है ।
📯सर्व प्रथम ब्रह्मा ने चार मानस पुत्र –सनक, सनंदन, सनातन, सनत्कुमार बनाए जो योग साधना में लीन होगये | पुनः संकल्प से नारद, भृगु, कर्म, प्रचेतस, पुलह, अन्गिरिसि, क्रतु, पुलस्त्य, अत्रि, मरीचि १० प्रजापति बनाए..वे भी साधना लीन रहे .... पुनः संकल्प द्वारा....९ पुत्र- भृगु, मरीचि, पुलस्त्य, अंगिरा, क्रतु, अत्रि, वशिष्ठ, दक्ष, पुलह.. एवं -९ पुत्रियां ख्याति, भूति , सम्भूति, प्रीति, क्षमा, प्रसूति आदि उत्पन्न कीं |
यद्यपि ये सभी संकल्प द्वारा संतति प्रवृत्त थे परन्तु कोई निश्चित, सतत स्वचालित प्रक्रिया व क्रम नहीं था ( सब एकान्गी थे--प्राणियों व वनस्पतियों में भी ), अतः ब्रह्मा का जीव-सृष्टि सृजन कार्य का तीब्र गति से प्रसार नहीं हो रहा था अतः सृष्टि क्रम समाप्त नही हो पा रहा था | ब्रह्मा चिंतित व गंभीर समस्या के समाधान हेतु मननशील थे, कि वे इस प्रकार कब तक मानवों, प्राणियों को बनाते रहेंगे .... कोई निश्चित स्वचालित प्रणाली होनी चाहिए कि जीव स्वयं ही उत्पन्न होता जाये एवं मेरा कार्य समाप्त हो |
चिन्तित ब्रह्मा ने पुनः प्रभु का स्मरण किया व तप किया--- तब 📯अर्ध- नारीश्वर ( द्विलिन्गी) रूप में रूद्रदेव जो शम्भु- महेश्वर व माया का सम्मिलित रूप था, प्रकट हुए, जिसने स्वयम को क्रूर-सौम्या; शान्त-अशान्त; श्यामा-गौरी; शीला-अशीला आदि ११ नारी भाव एवम ११ पुरुष भावों में विभक्त किया। रुद्रदेव के ये सभी ११-११ स्त्री-पुरुष भाव सभी जीवों में समाहित हुए, ये 11-स्थायी भाव.....जो अर्धनारीश्वर भाव में उत्पन्न हुए 📯१. रति, २. हास, ३. शोक, ४. क्रोध, ५. उत्साह, ६. भय, ७. घृणा, ८. विस्मय, ९.निर्वेद,. १०. संतान प्रेम, ११. समर्पण।... इस प्रकार काम सृष्टि का प्रादुर्भाव एवं लिंग चयन हुआ। उसी प्रकार ब्रह्मा ने भी स्वयम के दायें-बायें भाग से मनु व शतरूपा को प्रकट किया, जिनमे रुद्रदेव के ११-११ नर-नारी- भाव समाहित होने से वे प्रथम मानव सृष्टि की रचना शुरू हुई ।
महादेव के अर्धनारेश्वर स्वरूप का यजन पूजन दाम्पत्य सुख , धन , धान्य, ऐश्वर्य प्रदान करता है । ब्रह्मचारी साधक , साधु , योगी अपनी प्रबल शक्तिसे विभाजित आत्म शक्ति को आकर्षित करके पूर्ण आत्मा स्वरूप धारण करके ब्रह्म में विलीन हो जाते है ।
📯"अर्धनारीनटेश्वर स्तोत्र"
१.चाम्पेयगौरार्धशरीरकायै कर्पूरगौरार्धशरीरकाय ।
धम्मिल्लकायै च जटाधराय नम: शिवायै च नम: शिवाय ।।
आधे शरीर में चम्पापुष्पों-सी गोरी पार्वतीजी हैं और आधे शरीर में कर्पूर के समान गोरे भगवान शंकरजी सुशोभित हो रहे हैं । भगवान शंकर जटा धारण किये हैं और पार्वतीजी के सुन्दर केशपाश सुशोभित हो रहे हैं । ऐसी पार्वतीजी और भगवान शंकर को प्रणाम है ।।
२.कस्तूरिकाकुंकुमचर्चितायै चितारज:पुंजविचर्चिताय ।
कृतस्मरायै विकृतस्मराय नम: शिवायै च नम: शिवाय ।। पार्वतीजी के शरीर में कस्तूरी और कुंकुम का लेप लगा है और भगवान शंकर के शरीर में चिता-भस्म का पुंज लगा है । पार्वतीजी कामदेव को जिलाने वाली हैं और भगवान शंकर उसे नष्ट करने वाले हैं, ऐसी पार्वतीजी और भगवान शंकर को प्रणाम है ।।
३.चलत्क्वणत्कंकणनूपुरायै पादाब्जराजत्फणीनूपुराय ।
हेमांगदायै भुजगांगदाय नम: शिवायै च नम: शिवाय ।।
भगवती पार्वती के हाथों में कंकण और पैरों में नूपुरों की ध्वनि हो रही है तथा भगवान शंकर के हाथों और पैरों में सर्पों के फुफकार की ध्वनि हो रही है । पार्वतीजी की भुजाओं में बाजूबन्द सुशोभित हो रहे हैं और भगवान शंकर की भुजाओं में सर्प सुशोभित हो रहे हैं । ऐसी पार्वतीजी और भगवान शंकर को प्रणाम है ।।
४.विशालनीलोत्पललोचनायै विकासिपंकेरुहलोचनाय ।
समेक्षणायै विषमेक्षणाय नम: शिवायै च नम: शिवाय ।।
पार्वतीजी के नेत्र प्रफुल्लित नीले कमल के समान सुन्दर हैं और भगवान शंकर के नेत्र विकसित कमल के समान हैं । पार्वतीजी के दो सुन्दर नेत्र हैं और भगवान शंकर के (सूर्य, चन्द्रमा तथा अग्नि) तीन नेत्र हैं । ऐसी पार्वतीजी और भगवान शंकर को प्रणाम है ।।
५.मन्दारमालाकलितालकायै कपालमालांकितकन्धराय ।
दिव्याम्बरायै च दिगम्बराय नम: शिवायै च नम: शिवाय ।।
पार्वतीजी के केशपाशों में मन्दार-पुष्पों की माला सुशोभित है और भगवान शंकर के गले में मुण्डों की माला सुशोभित हो रही है । पार्वतीजी के वस्त्र अति दिव्य हैं और भगवान शंकर दिगम्बर रूप में सुशोभित हो रहे हैं । ऐसी पार्वतीजी और भगवान शंकर को प्रणाम है ।।
६.अम्भोधरश्यामलकुन्तलायै तडित्प्रभाताम्रजटाधराय ।
निरीश्वरायै निखिलेश्वराय नम: शिवायै च नम: शिवाय ।।
पार्वतीजी के केश जल से भरे काले मेघ के समान सुन्दर हैं और भगवान शंकर की जटा विद्युत्प्रभा के समान कुछ लालिमा लिए हुए चमकती दीखती है । पार्वतीजी परम स्वतन्त्र हैं अर्थात् उनसे बढ़कर कोई नहीं है और भगवान शंकर सम्पूर्ण जगत के स्वामी हैं । ऐसी पार्वतीजी और भगवान शंकर को प्रणाम है ।।
७.प्रपंचसृष्ट्युन्मुखलास्यकायै समस्तसंहारकताण्डवाय ।
जगज्जनन्यैजगदेकपित्रे नम: शिवायै च नम: शिवाय ।।
भगवती पार्वती लास्य नृत्य करती हैं और उससे जगत की रचना होती है और भगवान शंकर का नृत्य सृष्टिप्रपंच का संहारक है । पार्वतीजी संसार की माता और भगवान शंकर संसार के एकमात्र पिता हैं । ऐसी पार्वतीजी और भगवान शंकर को प्रणाम है ।।
८.प्रदीप्तरत्नोज्ज्वलकुण्डलायै स्फुरन्महापन्नगभूषणाय ।
शिवान्वितायै च शिवान्विताय नम: शिवायै च नम: शिवाय ।।
पार्वतीजी प्रदीप्त रत्नों के उज्जवल कुण्डल धारण किए हुई हैं और भगवान शंकर फूत्कार करते हुए महान सर्पों का आभूषण धारण किए हैं । भगवती पार्वतीजी भगवान शंकर की और भगवान शंकर भगवती पार्वती की शक्ति से समन्वित हैं । ऐसी पार्वतीजी और भगवान शंकर को प्रणाम है ।।
📯 स्तुति का फल
एतत् पठेदष्टकमिष्टदं यो भक्त्या स मान्यो भुवि दीर्घजीवी ।
प्राप्नोति सौभाग्यमनन्तकालं भूयात् सदा तस्य समस्तसिद्धि: ।।
आठ श्लोकों का यह स्तोत्र अभीष्ट सिद्धि करने वाला हैं । जो व्यक्ति भक्तिपूर्वक इसका पाठ करता है, वह समस्त संसार में सम्मानित होता है और दीर्घजीवी बनता है, वह अनन्त काल के लिए सौभाग्य व समस्त सिद्धियों को प्राप्त करता है ।
।। इति आदिशंकराचार्य विरचित अर्धनारीनटेश्वरस्तोत्रम् सम्पूर्णम् ।।
📯श्री कृष्ण ने गीता में यही बोध दिया :-
"अनन्याश्चिन्तयन्तो मां ये जनाः पर्युपासते।
तेषां नित्याभियुक्तानां योगक्षेमं वहाम्यहम्।।
🍃जो मुजमे समर्पित होते है में उनके अधीन हो जाता हूं ।
ऐसे दिव्य गुणों मनोभाव से सृजित सभी स्त्री शक्तिओ को वंदन करता हूँ । 🏌सर्वज्ञ इंफोसिस +91.9810234535

गुरु पर्व ....
23/07/2021

गुरु पर्व ....

23/05/2021

🧘‍♂सर्वज्ञ .... 🔆"सूर्य देव को अर्घ्य वैज्ञानिक एवं ज्योतिषीय लाभ".....
📯सूर्य को जल देना पुरानी परम्परा है, परन्तु किसी ने यह जानने का प्रयास किया की क्यूँ दिया जाता है सूर्य को जल? और क्या प्रभाव होता है इससे मानव शरीर पर❓...
🌸पूरी जानकारी के लिए अंत तक पढ़े, थोडा समय लगेगा परन्तु जानकारी महत्वपूर्ण है।🌸
📯सूर्य देव अलग अलग रंग अलग अलग आवर्तियाँ उत्पन्न करते हैं, अंत में इसका उल्लेख करूँगा, मानव शरीर रासायनिक तत्वों का बना है, रंग एक रासायनिक मिश्रण है।
📯जिस अंग में जिस प्रकार के रंग की अधिकता होती है शरीर का रंग उसी तरह का होता है, जैसे त्वचा का रंग गेहुंआ, केश का रंग काला और नेत्रों के गोलक का रंग सफेद होता है।
📯शरीर में रंग विशेष के घटने-बढने से रोग के लक्षण प्रकट होते हैं, जैसे खून की कमी होना शरीर में लाल रंग की कमी का लक्षण है।
📯सूर्य स्वास्थ्य और जीवन शक्ति का भण्डार है| मनुष्य सूर्य के जितने अधिक सम्पर्क में रहेगा उतना ही अधिक स्वस्थ रहेगा।
📯जो लोग अपने घर को चारों तरफ से खिडकियों से बन्द करके रखते हैं और सूर्य के प्रकाश को घर में घुसने नहीं देते वे लोग सदा रोगी बने रहते हैं।
📯जहां सूर्य की किरणें पहुंचती हैं, वहां रोग के कीटाणु स्वत: मर जाते हैं और रोगों का जन्म ही नहीं हो पाता। सूर्य अपनी किरणों द्वारा अनेक प्रकार के आवश्यक तत्वों की वर्षा करता है और उन तत्वों को शरीर में ग्रहण करने से असाध्य रोग भी दूर हो जाते हैं।
📯सूर्य पृथ्वी पर स्थित रोगाणुओं 'कृमियों' को नष्ट करके प्रतिदिन रश्मियों का सेवन करने वाले व्यक्ति को दीर्घायु भी प्रदान करता है।
📯सूर्य की रोग नाशक शक्ति के बारे में अथर्ववेद के एक मंत्र में स्पष्ट कहा गया है कि सूर्य औषधि बनाता है, विश्व में प्राण रूप है तथा अपनी रश्मियों द्वारा जीवों का स्वास्थ्य ठीक रखता है।
📯अथर्ववेद में कहा गया है कि सूर्योदय के समय सूर्य की लाल किरणों के प्रकाश में खुले शरीर बैठने से हृदय रोगों तथा पीलिया के रोग में लाभ होता है।प्राकृतिक चिकित्सा में आन्तरिक रोगों को ठीक करने के लिए भी नंगे बदन सूर्य स्नान कराया जाता है।
📯वर्तमान में जो बच्चे पैदा होते ही पीलिया रोग के शिकार हो जाते हैं उन्हें सूर्योदय के समय सूर्य किरणों में लिटाया जाता है जिससे अल्ट्रा वायलेट किरणों के सम्पर्क में आने से उनके शरीर के पिगमेन्ट सेल्स पर रासायनिक प्रतिक्रिया प्रारम्भ हो जाती है।
और बीमारी में लाभ होता है, डाक्टर भी नर्सरी में कृत्रिम अल्ट्रावायलेट किरणों की व्यवस्था लैम्प आदि जला कर भी करते हैं।
📯सूर्य को कभी हल्दी या अन्य रंग डाल कर जल दिया जाता है, जल को हमेशा अपने सर के ऊपर से सूर्य और अपने हिर्दय के बीच से छोड़ना चाहिए।
📯ध्यान रहे की सूर्य चिकित्सा दिखता तो आसान है पर (विशेषज्ञ9810234535) से सलाह लिये बिना ना शुरू करें।
📯जैसा की हम जानते हैं कि सूर्य की रोशनी में सात रंग शामिल हैं .. और इन सब रंगो के अपने अपने गुण और लाभ है ...
📯 लाल रंग🍃 यह ज्वार, दमा, खाँसी, मलेरिया, सर्दी, ज़ुकाम, सिर दर्द और पेट के विकार आदि में लाभ कारक है।
📯हरा रंग🍃 यह स्नायुरोग, नाडी संस्थान के रोग, लिवर के रोग, श्वास रोग आदि को दूर करने में सहायक है।
📯 पीला रंग🍃 चोट ,घाव रक्तस्राव, उच्च रक्तचाप, दिल के रोग, अतिसार आदि में फ़ायदा करता है
📯नील रंग🍃 दाह, अपच, मधुमेह आदि में लाभकारी है।
📯बैंगनी रंग🍃 श्वास रोग, सर्दी, खाँसी, मिर् गी ..दाँतो के रोग में सहायक है।
📯 नारंगी रंग🍃 वात रोग . अम्लपित्त, अनिद्रा, कान के रोग दूर करता है।
📯 आसमानी रंग🍃 स्नायु रोग, यौनरोग, सरदर्द, सर्दी- जुकाम आदि में सहायक है।
📯सुरज का प्रकाश रोगी के कपड़ो और कमरे के रंग के साथ मिलकर रोगी को प्रभावित करता है।अतः दैनिक जीवन मे हम अपने जरूरत के अनुसार अपने परिवेश एवम् कपड़ो के रंग इत्यादि मे फेरबदल करके बहुत सारे फायदे उठा सकते हैं।

📯सूर्य देव को अर्घ्य ज्योतिषीय दृष्टिकोण🔆
इस संसार में सूर्य को प्रत्यक्ष देव कहा जाता है क्योंकि हर व्यक्ति इनके साक्षात दर्शन कर सकता है। रविवार सूर्य का दिन है और सप्तमी तिथि के देवता भी सूर्य है। अगर सप्तमी तिथि रविवार के दिन पड़े तो उसका अति विशेष महत्व होता है इस दिन सूर्य देव की उपासना का विशेष महत्व है। रविवारीय सप्तमी भानु सप्तमी या सूर्य सप्तमी कहलाती है। इस दिन सूर्य को अर्घ्य देने का भी विशेष महत्व है। तांबे के पात्र में लाल चन्दन,लाल पुष्प, अक्षत डालकर प्रसन्न मन से सूर्य मंत्र का जाप करते हुए उन्हें अर्ध्य देना चाहिए। तीन बार अर्घ्य देकर प्रणाम करना चाहिए। इस अर्घ्य से भगवान ‍सूर्य प्रसन्न होकर अपने भक्तों की हर संकटो से रक्षा करते हुए उन्हें आरोग्य, आयु, धन, धान्य, पुत्र, मित्र, तेज, यश, कान्ति, विद्या, वैभव और सौभाग्य को प्रदान करते हैं । सूर्य देव कि कृपा प्राप्त करने के लिए प्रतिदिन सूर्योदय से पूर्व ही शैया त्याग कर शुद्ध, पवित्र जल से स्नान के पश्चात उगते हुए सूर्य को अर्ध्य देना चाहिए।
📯 सूर्यदेव सबसे तेजस्वी और कांतिमय माने गए हैं। अतएवं सूर्य आराधना से ही व्यक्ति को सुंदरता और तेज कि प्राप्ति भी होती है । ह्रदय रोगियों को सूर्य की उपासना करने से विशेष लाभ होता है। उन्हें आदित्य ह्रदय स्तोत्र का नित्य पाठ करना चाहिए। इससे सूर्यदेव निरोगी और दीर्घ आयु का वरदान देते है।
📯सूर्यदेव की कृपा पाने के लिए जातक को प्रत्येक रविवार अथवा माह के किसी भी शुक्ल पक्ष के रविवार को गुड़ और चावल को नदी अथवा बहते पानी में प्रवाहित करना चाहिए । तांबे के सिक्के को भी नदी में प्रवाहित करने से भी सूर्य की कृपा बनी रहती है। रविवार के दिन स्वयं भी मीठा भोजन करें एवं घर के अन्य सदस्यों को भी इसके लिए प्रेरित करें। हाँ भगवान सूर्यदेव को उस दिन गुड़ का भोग अवश्य लगाए ।
📯ज्योतिषशास्त्र में सूर्य को राजपक्ष अर्थात सरकारी क्षेत्र एवं अधिकारियों का कारक ग्रह बताया गया है। व्यक्ति कि कुंडली में सूर्य बलवान होने से उसे सरकारी क्षेत्र में सफलता एवं अधिकारियों से सहयोग मिलता है। कैरियर एवं सामाजिक प्रतिष्ठा में उन्नति के लिए भी सूर्य की अनुकूलता अनिवार्य है।
📯सूर्यदेव की आराधना का सर्वोत्तम समय सुबह सूर्योदय का ही होता है। आदित्य हृदय का नियमित पाठ करने एवं रविवार को तेल, नमक नहीं खाने तथा एक समय ही भोजन करने से भी लाभ होता है|
📯यदि किसी के पास आपका पैसा फँसा हो तो आप नित्य उगते हुए सूर्य को ताम्बे के पात्र में गुड, अक्षत, लाल चन्दन लाल फूल और लाल मिर्च के 11 दाने डालकर अर्ध्य दें और सूर्यदेव से मन ही मन अपने फंसे हुए धन को प्राप्त करने के लिए प्रार्थना करें, इस उपाय से तेज और यश की प्राप्ति होती है, आत्मविश्वास बढ़ता हैफँसा हुआ धन शीघ्र प्राप्त होताहै|
📯मनोवांछित फल पाने के लिए निम्न मंत्र का उच्चारण करें।
🔆ॐ ह्रीं ह्रीं सूर्याय सहस्रकिरणराय मनोवांछित फलम् देहि देहि स्वाहा।।
📯सूर्यदेव के किसी भी आसान और सिद्ध मंत्र का जाप श्रद्धापूर्वक करें।
🔆ॐ घृणि सूर्याय नम:।।
🔆ॐ ह्रां ह्रीं ह्रौं स: सूर्याय नम:।।
🔆ॐ ह्रीं घृणि सूर्य आदित्य श्रीं ओम्।
🔆ॐ आदित्याय विद्महे मार्तण्डाय धीमहि तन्न सूर्य: प्रचोदयात्।
🔆ऊं घृ‍णिं सूर्य्य: आदित्य:
🔆ॐ ह्रीं ह्रीं सूर्याय सहस्रकिरणराय मनोवांछित फलम् देहि देहि स्वाहा।।
🔆ॐ ऐहि सूर्य सहस्त्रांशों तेजो राशे जगत्पते, अनुकंपयेमां भक्त्या, गृहाणार्घय दिवाकर:।
🔆ॐ ह्रीं घृणिः सूर्य आदित्यः क्लीं ॐ।
🔆ॐ ह्रीं ह्रीं सूर्याय नमः।
📯निम्न मंत्रो का किसी भी कृष्ण पक्ष के प्रथम रविवार से आरम्भ करे सूर्योदय काल इसके लिये सर्वोत्तम है लाल ऊनि आसान पर सूर्याभिमुख बैठ कर मानसिक जप करना सर्वोत्तम है इसके प्रभाव से व्यक्ति में सूर्य जैसे गुण आते है, चेहरे पर कांति आती है।आकर्षण बढ़ता है नेत्र रोगों में में लाभकारी है तथा कुंडली मे सूर्य के अशुभ फलों में कमी आती है
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07/05/2021

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🏌Sabhi apna vaccine ragistration zarur karen vaccination karake khudko aur desh ki suraksha me yogdaan de.

ॐ राम रामाय नमः
27/04/2021

ॐ राम रामाय नमः

07/04/2021
27/03/2021

🧘‍♂होलीका (फाल्गुन पूर्णिमा) के सरल उपाय..... 📯 एक श्रीफल अर्थात नारियल ओर नींबू एक कागज की पूडिया के अंदर राई बांध लेवे जिसको काली सरसों भी कहते हैं कुछ नमक सादा या काला जो उपलब्ध होे उन सभी को एक साथ बांधे ओर पूरे मकान के अंदर सात बार घुमाए जो बीमार रहते हैं विविध प्रकार के जादू टोने के चक्कर में आए हुए हो या कोई प्रेत बाधा किसी प्रकार की हवा के चक्कर में आए हुए हैं उन सब के लिए सात सात बार सर से पैर तक उतार लेना चाहिए या घुमा लेना चाहिए पुरे मकान के अंदर भी घुमाएं अन्दर से बाहर की ओर घुमाया फिर रात्रि को जब होलिका दहन होता है उसके अंदर होली के अंदर प्रवाहित कर दें जिस तरह होलिका दहन होगी आपके कष्टो का भी निवारण जरूर होगा ये उपाय अपने ऑफिस या दुकान मे भी कर सकते है।
📯 घर के प्रत्येक सदस्य को होलिका दहन में देशी घी में भिगोई हुई दो लौंग, एक बताशा और एक पान का पत्ता अवश्य चढ़ाना चाहिए । होली की ग्यारह परिक्रमा करते हुए होली में सूखे नारियल की आहुति देनी चाहिए। इससे सुख-समृद्धि बढ़ती है, कष्ट दूर होते हैं।
📯 होली पर पूरे दिन अपनी जेब में काले कपड़े में बांधकर काले तिल रखें। रात को जलती होली में उन्हें डाल दें। यदि पहले से ही कोई टोटका होगा तो वह भी खत्म हो जाएगा।
📯 होली दहन के समय ७ गोमती चक्र लेकर भगवान से प्रार्थना करें कि आपके जीवन में कोई शत्रु बाधा न डालें। प्रार्थना के पश्चात पूर्ण श्रद्धा व विश्वास के साथ गोमती चक्र दहन में डाल दें।
📯 होली दहन के दूसरे दिन होली की राख को घर लाकर उसमें थोडी सी राई व नमक मिलाकर रख लें। इस प्रयोग से भूतप्रेत या नजर दोष से मुक्ति मिलती है।
📯 होली के दिन से शुरु होकर बजरंग बाण का ४० दिन तक नियमित पाठ करनें से हर मनोकामना पूर्ण होगी।
📯 यदि व्यापार या नौकरी में उन्नति न हो रही हो, तो २१ गोमती चक्र लेकर होली दहन के दिन रात्रि में शिवलिंग पर चढा दें।
📯 नवग्रह बाधा के दोष को दूर करने के लिए होली की राख से शिवलिंग की पूजा करें तथा राख मिश्रित जल से स्नान करें।
📯 होली वाले दिन किसी गरीब को भोजन अवश्य करायें।
📯 होली की रात्रि को सरसों के तेल का चौमुखी दीपक जलाकर पूजा करें व भगवान से सुख - समृद्धि की प्रार्थना करें। इस प्रयोग से बाधा निवारण होता है।
📯 यदि बुरा समय चल रहा हो, तो होली के दिन पेंडुलम वाली नई घडी पूर्वी या उत्तरी दीवार पर लगाए। परिणाम स्वयं देखे।
📯राहु का उपाय - एक नारियल का गोला लेकर उसमे अलसी का तेल भरकर..उसी में थोडा सा गुड डाले..फिर उस नारियल के गोले को राहू से ग्रस्त व्यक्ति अपने शारीर के अंगो से स्पर्श करवाकर जलती हुई होलिका में डाल देवे. पुरे वर्ष भर राहू से परेशानी की संभावना नहीं रहेगी.
📯 मनोकामना की पूर्ति हेतु होली के दिन से शुरू करके प्रतिदिन हनुमान जी को पांच लाल पुष्प चढ़ाएं, मनोकामना शीघ्र पूर्ण होगी।
📯 होली की प्रातः बेलपत्र पर सफेद चंदन की बिंदी लगाकर अपनी मनोकामना बोलते हुए शिवलिंग पर सच्चे मन से अर्पित करें। बाद में सोमवार को किसी मंदिर में भोलेनाथ को पंचमेवा की खीर अवश्य चढ़ाएं, मनोकामना पूरी होगी।
📯स्वास्थ्य लाभ हेतु मृत्यु तुल्य कष्ट से ग्रस्त रोगी को छुटकारा दिलाने के लिए जौ के आटे में काले तिल एवं सरसों का तेल मिला कर मोटी रोटी बनाएं और उसे रोगी के ऊपर से सात बार उतारकर भैंस को खिला दें। यह क्रिया करते समय ईश्वर से रोगी को शीघ्र स्वस्थ करने की प्रार्थना करते रहें।
📯 व्यापार लाभ के लिए होली के दिन गुलाल के एक खुले पैकेट में एक मोती शंख और चांदी का एक सिक्का रखकर उसे नए लाल कपड़े में लाल मौली से बांधकर तिजोरी में रखें, व्यवसाय में लाभ होगा।
📯 होली के अवसर पर एक एकाक्षी नारियल की पूजा करके लाल कपड़े में लपेट कर दूकान में या व्यापार स्थल पर स्थापित करें। साथ ही स्फटिक का शुद्ध श्रीयंत्र रखें। उपाय निष्ठापूर्वक करें, लाभ में दिन दूनी रात चौगुनी वृद्धि होगी।
📯धनहानि से बचाव के लिए होली के दिन मुखय द्वार पर गुलाल छिड़कें और उस पर द्विमुखी दीपक जलाएं। दीपक जलाते समय धनहानि से बचाव की कामना करें। जब दीपक बुझ जाए तो उसे होली की अग्नि में डाल दें। यह क्रिया श्रद्धापूर्वक करें, धन हानि से बचाव होगा।
📯दुर्घटना से बचाव के लिए होलिका दहन से पूर्व पांच काली गुंजा लेकर होली की पांच परिक्रमा लगाकर अंत में होलिका की ओर पीठ करके पांचों गुन्जाओं को सिर के ऊपर से पांच बार उतारकर सिर के ऊपर से होली में फेंक दें।
📯 होली के दिन प्रातः उठते ही किसी ऐसे व्यक्ति से कोई वस्तु न लें, जिससे आप द्वेष रखते हों। सिर ढक कर रखें। किसी को भी अपना पहना वस्त्र या रुमाल नहीं दें। इसके अतिरिक्त इस दिन शत्रु या विरोधी से पान, इलायची, लौंग आदि न लें। ये सारे उपाय सावधानीपूर्वक करें, दुर्घटना से बचाव होगा। आत्मरक्षा हेतु किसी को कष्ट न पहुंचाएं, किसी का बुरा न करें और न सोचें। आपकी रक्षा होगी।
📯अगर आपके घर में कोई शारीरिक कष्टों से पीड़ित है - ओर उसको रोग छोड़ नहीं रहे है - तो ११ अभिमंत्रित गोमती चक्र बीमार ब्यक्ति के शरीर से २१ बार उसार कर होली की अग्नि में डाल दे शारीरिक कष्टों से शीघ्र मुक्ति मिल जायेगी
📯अगर बुध ग्रह आपकी कुंडली में संतान प्राप्ति में बाधा दाल रहा है तो किसी भी बच्चे वाली गरीब महिला को होली वाले दिन से शुरु कर एक महीने तक हरी-सब्जियाँ दें। माता वैष्णो-देवी से संतान की प्रार्थना करें।
📯शीघ्र विवाह हेतु : जो युवा विवाह योग्य हैं और सर्वगुण संपन्न हैं, फिर भी शादी नहीं हो पा रही है तो यह उपाय करें। होली के दिन किसी शिव मंदिर जाएं और अपने साथ १ साबूत पान, १ साबूत सुपारी एवं हल्दी की गांठ रख लें। पान के पत्ते पर सुपारी और हल्दी की गांठ रखकर शिवलिंग पर अर्पित करें। इसके बाद पीछे देखें बिना अपने घर लौट आएं। यही प्रयोग अगले दिन भी करें। इसके साथ ही समय-समय शुभ मुहूर्त में यह उपाय किया जा सकता है। जल्दी ही विवाह के योग बन जाएंगे।
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