12/11/2025
ब्रिटेन और अमेरिका से लौटे चिकित्सा क्षेत्र से जुड़े लोग बताते हैं कि अमेरिका में स्पेशलिस्ट डॉक्टर के अपॉइंटमेंट के लिए एक महीने तक प्रतीक्षा करनी पड़ती है। ब्रिटेन की नेशनल हेल्थ सर्विस की हालत और ज्यादा खराब है। ब्रिटेन में जनरल फिजिशियन को दिखाने का टाइम ही तीन हफ्ते तक खिंच रहा है। यहां तक कि कैंसर जैसी गंभीर जानलेवा बीमारी के संदिग्ध मरीजों के जल्दी diagnosis के लिए सरकार को 28 दिन की appointment की मियाद तय करनी पडी है। डॉक्टरों की भारी कमी से जूझते ब्रिटेन ने अपॉइंटमेंट का टाइम घटाने के लिए भारत से दो साल पहले तीन हजार डॉक्टरों की मांग की थी।
कई लोगों के अनुभव और मीडिया रिपोर्ट्स के आधार पर में ये दावे के साथ कह सकता हूं कि भारत का स्वास्थ्य तंत्र अमेरिका और यूरोप के कई देशों से बेहतर है। हमारे यहां कार्डियोलोजी, न्यूरोलॉजी जैसे किसी भी स्पेशलिस्ट का अपॉइंटमेंट उसी दिन मिल जाता है। यह बात भी कई मीडिया रिपोर्ट्स से जाहिर है कि भारतीय डॉक्टरों का निदान और ट्रीटमेंट भी अमेरिका और यूरोप से बेहतर और 80 प्रतिशत तक सस्ता है। मतलब जो सर्जरी अमेरिका में एक लाख में होगी वो भारत में बीस हजार में हो जाएगी।
भारत मेडिकल टूरिज्म का बड़ा केंद्र है।2022 में दुनियाभर के 78 देशों से लगभग 20 लाख लोग भारत में इलाज के लिए आए। 2026 तक भारत में मेडिकल टूरिज्म से देश को 13 अरब डॉलर की विदेशी मुद्रा की आय होने का अनुमान है।
सैद्धांतिक रूप से इतनी दुरुस्त स्वास्थ तंत्र के बावजूद भारत के खुद के नागरिकों का चिकित्सा क्षेत्र का अनुभव अच्छा नहीं है। ज्यादातर की शिकायत है कि डॉक्टर ठीक से नहीं देखते, महंगे टेस्ट और दवाईयां या बेमतलब के प्रोसिजर और सरकारी अस्पतालों में लंबी भीड़ के चलते गरीब आदमी की हैसियत से बाहर है।
मेरा मानना है कि पब्लिक अवेयरनेस या जागरूकता का अभाव इन बुरे अनुभवों का मुख्य कारण है। भारत के स्वास्थ तंत्र की थोड़ी सी जानकारी लंबी कतारों के अनुभव और डॉक्टरों द्वारा कम टाइम देने और महंगे खर्चे से बचा सकती है।
भारत की स्वास्थ व्यवस्था के तीन स्तर है। पहले स्तर पर है प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र। प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र पहाड़ी क्षेत्रों में बीस हजार, ग्रामीण क्षेत्रों में तीस हजार और शहरी क्षेत्रों में पचास हजार की आबादी पर एक होता है। ग्रामीण क्षेत्र में पीएचसी पर एक MBBS चिकित्साधिकारी तैनात होता है। टीकाकरण अभियान , मलेरिया टीबी उन्मूलन जैसे कई राष्ट्रीय और राज्य सरकार के स्वास्थ कार्यक्रमों का संचालन पीएचसी से ही होता है। इसके अलावा प्रसव पूर्ण मातृत्व देखभाल की सुविधाएं पीएचसी पर उपलब्ध होती हैं। पीएचसी पर भारत सरकार द्वारा जारी की गई एसेंशियल ड्रग लिस्ट की सभी दवाईयां उपलब्ध होती है। इलाज की बात करें तो गांव की पीएचसी मुख्य काम प्राथमिक उपचार के बाद उच्च केंद्र पर रेफर करना है। जैसे एक्सीडेंट के गंभीर मामलों में खून बहने से रोकना और मरहम पट्टी के बाद फ्रैक्चर के लिए हड्डी रोग विशेषज्ञ को रेफर करना। भारत में 31 हजार से ज्यादा प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र है।
स्वास्थ तंत्र के दूसरे स्तर पर आते हैं कम्युनिटी हेल्थ सेंटर या सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र, उप जिला अस्पताल और जिला अस्पताल। भारत में 6000 से ज्यादा सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र , 771 जिला अस्पताल और 1242 उप जिला अस्पताल है।सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र पर जनरल फिजिशियन, सर्जन, गाइनेकोलॉजिस्ट और पीडियाट्रिशियन या शिशु रोग विशेषज्ञ होते हैं। यहां सभी छोटे मोटे ऑपरेशन, नॉर्मल डिलीवरी बच्चों की बीमारियों के इलाज की व्यवस्था होती हैं। सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र पर 30 बेड होते हैं और गंभीर मरीजों के लिए भर्ती की भी व्यवस्था होती है। मेरे गांव के पास नादौती, गुढ़ा चंद्र जी, वजीरपुर, पीलोदा और खण्डिप सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र हैं।
उप जिला अस्पताल और जिला अस्पताल में न्यूरोलॉजी कार्डियोलोजी आदि सुपरस्पेशलिटी को छोड़ कर सभी तरह के स्पेशलिस्ट जैसे फिजिशियन, सर्जन, गाइनेकोलॉजिस्ट, पीडियाट्रिशियन, स्किन स्पेशलिस्ट, हड्डी रोग विशेषज्ञ, मनोरोग विशेषज्ञ, नाक कान गला विशेषज्ञ, आंखों के स्पेशलिस्ट की सेवाएं उपलब्ध होती है। उप जिला अस्पताल में 31 से 100 तक बेड होते हैं और जिला अस्पताल में 100 से 500 के बीच। यहां ज्यादातर जांचें और 24 घंटे इमरजेंसी सुविधा उपलब्ध होती है। सवाई माधोपुर, गंगापुर सिटी और करौली में जिला अस्पताल है, हिंडौन में उप जिला अस्पताल।
स्वास्थ तंत्र के तीसरे स्तर पर आते हैं मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल जेसे एम्स, सफदरजंग, SMS आदि। यहां सभी स्पेशलिटी और सुपर स्पेशलिटी के साथ 24 घंटे इमरजेंसी, 24 घंटे ऑपरेशन थियेटर, आईसीयू और 24 घंटे जांच की व्यवस्था होती है। मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल पर मरीजों के इलाज के अलावा, डॉक्टरों और नर्सों की ट्रेनिंग और रिसर्च सुविधाएं भी उपलब्ध होती हैं।
भारत के 95 प्रतिशत मरीजों का इलाज सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र और जिला अस्पताल पर हो जाएगा। मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल जाने की जरूरत मुश्किल से सिर्फ 5 प्रतिशत मरीजों को पड़ेगी। लेकिन जागरूकता के अभाव में लोग या तो निजी अस्पताल जाते हैं या फिर सीधे मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल। मेरे गांव से इलाज के लिए शहर जाने वाले ज्यादातर लोग या तो गंगापुर के किसी निजी अस्पताल में दिखाएंगे या जयपुर जाएंगे। जब कि उनमें से ज्यादातर का इलाज नजदीकी सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र पर या गंगापुर सिटी के जिला अस्पताल में हो जाएगा। सीधे मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल जाने का परिणाम ये होता है कि SMS में खांसी बुखार जैसी छोटी मोटी बीमारी के मरीजों की भीड़ हो जाएगी और जानलेवा बीमारियों के मरीजों को लंबी लाइन का सामना करना पड़ेगा। कायदे से मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल में बिना छोटे अस्पताल से रेफर किए बिना मरीज नहीं लिए जाने चाहिए। लेकिन ऐसी पॉलिसी बनाना मुश्किल होगा।
सीधे बड़े अस्पताल जाने के पीछे लोगों की ये धारणा भी हो सकती हैं कि बड़े अस्पताल में बड़े या ज्यादा अच्छे डॉक्टर होते होंगे। लेकिन ये सिर्फ गलतफहमी है। MBBS और MD आदि के पढ़ाई के लिए भारतीय चिकित्सा आयोग पूरे देश में यूनिफॉर्म पाठ्यक्रम रखता है। पूरे देश भर के मेडिकल कॉलेजों में डॉक्टर एक जैसी ही किताबें पढ़ते हैं सेम दवाईयां है और सेम ही बीमारियां। जैसे मनोरोग विशेषज्ञ या फिजिशियन या सर्जन या किसी और स्पेशलिस्ट की बात करें तो एम्स दिल्ली और किसी भी सरकारी कॉलेज से पढ़े किसी डॉक्टर और गंगापुर के जिला अस्पताल पर तैनात डॉक्टर के ज्ञान, अनुभव,ट्रीटमेंट में रत्ती भर भी फर्क नहीं पड़ेगा। मेरे विचार से किसी भी मरीज को सिर से पैर तक किसी भी बीमारी के इलाज के लिए पहला संपर्क सीएचसी या जिला अस्पताल पर होना चाहिए। इससे। SMS जैसे बड़े अस्पताल में अनावश्यक भीड़ कम होगी और सभी जरूरतमंद लोगों को बिना किसी संघर्ष के इलाज मिल पाएगा। में देश के सबसे बड़े अस्पताल में काम करता हूं और इसलिए जरूरत पड़ने पर अपने अस्पताल में ही कंसल्ट करता हूं। कभी गांव रहूंगा तो पीलोदा की सीएचसी या गंगापुर के जिला अस्पताल में ही कंसल्ट करूंगा। अगर सभी मरीज उस प्रक्रिया से चलें तो जनता को सभी बीमारियों का इलाज सुलभ होगा। चिकित्सा के मामले में जनता की मुसीबतों के लिए कुछ हद तक जनता खुद भी जिम्मेदार है।