Shri Param Hans Acupressure Heal & Learn Center

Shri Param Hans Acupressure Heal & Learn Center this is a therapy which can cure any problem or a deases with acupressure, acupuncture, sujok therap

02/12/2025
28/10/2025

*कमज़ोरी और चक्कर आना हो सकता है खून की कमी का संकेत, ये देसी फूड्स तुरंत बढ़ाएंगे हीमोग्लोबिन*

1. चुकंदर (Beetroot):

चुकंदर आयरन, फोलिक एसिड और विटामिन C से भरपूर है। रोज इसका सलाद या जूस लेने से खून की कमी जल्दी दूर होती है।

2. अनार (Pomegranate):

अनार में आयरन, विटामिन A, C और E के साथ पोटेशियम भी होता है। यह खून को बढ़ाता है और कमजोरी दूर करता है।

3. गुड़ और तिल:

गुड़ में आयरन और तिल में कैल्शियम व अन्य मिनरल्स होते हैं। इनका लड्डू या मिश्रण खाएं।

4. हरी पत्तेदार सब्ज़ियां:

पालक, मेथी, सरसों, बथुआ आदि में भरपूर आयरन और फोलिक एसिड होता है, जो हीमोग्लोबिन बढ़ाने में मदद करते हैं।

5. सेब और खरबूजा:

सेब और खरबूजा में भी आयरन व विटामिन C मिलता है। इन्हें रोजाना खाने से फायदा होता है।

6. ड्राई फ्रूट्स:

खजूर, किशमिश, अंजीर व बादाम जैसे ड्राई फ्रूट्स हीमोग्लोबिन बढ़ाने में मददगार हैं।

7. दालें और अंकुरित अनाज:

मसूर, चना और मूंग जैसी दालें और स्प्राउट्स आयरन व प्रोटीन से भरपूर होते हैं।

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16/10/2025

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16/10/2025

🍁🍁
*मौसम बदलते ही क्यों बीमार पड़ते हैं लोग?*
क्या ये सिर्फ सर्दी-जुकाम है या इसके पीछे छिपा है बड़ा राज़...

1️⃣ जब मौसम बदलता है तो हमारे शरीर को नए तापमान और माहौल के हिसाब से एडजस्ट होना पड़ता है। लेकिन इस दौरान इम्यून सिस्टम थोड़ा कमजोर पड़ जाता है। यही मौका वायरस और बैक्टीरिया पकड़ लेते हैं।

2️⃣ ठंडी से गर्मी या गर्मी से बरसात हर बदलाव में हवा की नमी और तापमान बदलता है। इससे सर्दी-जुकाम, खांसी और बुखार जैसी बीमारियाँ आसानी से फैलती हैं।

3️⃣ मौसम बदलने पर एलर्जी भी बढ़ती है। परागकण (pollen), धूल और फफूंदी (fungus) हवा में ज्यादा तैरने लगते हैं। जिन्हें एलर्जी होती है, वे छींक, नाक बंद और खुजली जैसी दिक्कत झेलते हैं।

4️⃣ बरसात में नमी बढ़ने से मच्छर और बैक्टीरिया का प्रकोप तेज़ हो जाता है। यही वजह है कि इस समय डेंगू, मलेरिया और टाइफाइड जैसी बीमारियाँ बढ़ जाती हैं।

5️⃣ मौसम बदलते वक्त हम अक्सर ध्यान नहीं देते और कपड़ों, खाने-पीने या दिनचर्या में अचानक बदलाव कर देते हैं। जैसे ठंडे पानी का सेवन या रात में बिना कंबल सो जाना। यही शरीर को बीमार कर देता है।

6️⃣ बचाव के लिए ज़रूरी है –

हल्का और संतुलित खाना

पर्याप्त नींद

समय पर पानी पीना

मौसम के हिसाब से कपड़े पहनना

और सबसे ज़रूरी, इम्यूनिटी को मजबूत रखना

7️⃣ याद रखिए, मौसम बदलना प्रकृति का नियम है। लेकिन अपने शरीर की सुरक्षा करना हमारा काम है। छोटी सावधानियाँ हमें बड़ी बीमारियों से बचा सकती हैं।

🙏🙏

11/09/2025

Walking 10,000 steps a day but seeing no results?
Harvard study reveals
5 bad habits that cancel out the benefits
1. Poor posture can create bigger problems.
2. The wrong shoes may be hurting your body.
3. Lack of hydration can lead to dizziness.
4. Skipping warm-up can risk injury.
5. Overstriding can damage joints.

10/09/2025

कैल्शियम की कमी

1.
पानी में अदरक डाल कर उबालें। इस पानी में शहद और हल्का नींबू निचोड़ें। सुबह 20 दिन तक पिएं। कैल्शियम की आपूर्ति होगी।
2.
अंकुरित अनाज में कैल्शियम प्रचूर मात्रा में होता है।

09/09/2025

*कमाल की है मूंग की दाल*

*हम इसे बीमारियों में क्यों खाते हैं..?*

सभी जानते हैं कि दालें प्रोटीन से भरपूर होती हैं, लेकिन दालों में सबसे उत्तम, स्वास्थवर्द्धक तथा शक्तिवर्द्धक दाल मूंग की होती है।

मूंग की दाल की खास बात है कि यह सुपाच्य होती है।
इसके अतिरिक्त मूंग की दाल में कार्बोहाइड्रेट, कई प्रकार के विटामिन, फॉस्फोरस और खनिज तत्व पाए जाते हें, जो अनेक बीमारियों से लड़ने की क्षमता रखते हैं।

मूंग साबूत हो या धुली, पोषक तत्वों से भरपूर होती है।

अंकुरित होने के बाद तो इसमें पाए जाने वाले पोषक तत्वों कैल्शियम, आयरन, प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट और विटामिन्स की मात्रा दोगुनी हो जाती है।

अंकुरित मूंग दाल में मैग्नीशियम, कॉपर, फोलेट, राइबोफ्लेविन, विटामिन-सी, फाइबर, पोटेशियम, फॉस्फोरस, मैग्नीशियम, आयरन, विटामिन बी-6, नियासिन, थायमिन और प्रोटीन होता है।

कुछ लोगों को लगता है कि मूंग दाल बीमारी में खाने के लिए होती है, जबकि मूंग दाल में इतने पौष्टिक तत्व होते है कि अपनी खुराक में उसे शामिल करना ही चाहिए।

मात्र एक कटोरी पकी हुई मूंग की दाल में 100 से भी कम केलौरी होती है।

इसे खाने के बाद लम्बे समय तक भूख नहीं लगती है।

रात के खाने में रोटी के साथ एक कटोरी मूंग दाल खाने से भरपूर पोषण मिलता है और जल्द ही बढ़ा वजन कम होता है।

इस तरह मोटापा घटने में मूंग दाल महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

शोध बताते हैं कि मूंग दाल खाने से त्वचा कैंसर से सुरक्षा भी मिलती है।

मूंग की मदद से आसानी से *रक्तचाप* को नियंत्रित किया जा सकता है, साथ ही मूंग *कोलेस्ट्रॉल* के स्तर को भी कम करती है।

ये सोडियम के प्रभाव को कम कर देती है, जिससे रक्तचाप बढ़ता नहीं है।

मूंग *आयरन* की कमी को पूरा करने में सक्षम है।

आमतौर पर, शाकाहारी लोग अपने खाने में कम आयरन लेते हैं।

अपनी खुराक में मूंग को शामिल करके आयरन की कमी दूर की जा सकती है, जिससे एनीमिया का जोखिम भी अपनी आप कम हो जाएगा।

दाद, खाज-खुजली की समस्या में मूंग की दाल को छिलके सहित पीस कर लेप बनाकर उसे प्रभावित जगह पर लगाने से लाभ होता है।

टायफॉयड होने पर मूंग की दाल खाने से मरीज को बहुत आराम मिलता है।

किसी भी बीमारी के बाद शरीर कमजोर हो जाता है।

मूंग की दाल खाने से शरीर को ताकत मिलती है।

मूंग की दाल के लेप से ज्यादा पसीना आना भी रुक जाता है।

दाल को हल्का गर्म करके पीस लें। फिर इस पाउडर में कुछ मात्रा पानी की मिला कर लेप की तरह पूरे शरीर पर मालिश करें, ज्यादा पसीना आने की शिकायत दूर हो जाएगी।

मूंग को अंकुरित करके भी उपयोग में लाया जा सकता है, यह बहुत ही गुणकारी और स्वास्थ्वर्द्धक है तथा इसके सेवन से अनेक रोगों से बचाव किया जा सकता है और मुक्ति पायी जा सकती है।

अंकुरित मूंग का सेवन अवश्य करना चाहिए क्योंकि यह शरीर में आवश्यक तत्वों की कमी पूरी करती है और शरीर को मजबूत बनाती है।

यह सुपाच्य भी है।
इससे बेहतर शाकाहारी खाद्य सामग्री कोई नहीं होती है।

अंकुरित मूंग में ग्लूकोज लेवल बहुत कम होता है इस वजह से मधुमेह रोगी इसे खा सकते हैं।

अंकुरित मूंग के सेवन से पाचन क्रिया हमेशा सही बनी रहती है जिसके कारण पेट सम्बंधी समस्या नहीं होती है और जीवन खुशहाल रहता है।

अंकुरित मूंग में शरीर के विषाक्त तत्वों को निकालने का गुण होता है।

इसके सेवन से शरीर में विषाक्त तत्वों में कमी आती है और शरीर स्वस्थ तथा चुस्त रहता है।

अंकुरित मूंग का नियमित सेवन करने से उम्र का असर जल्दी ही चेहरे पर दिखाई नहीं देता है।

अंकुरित मूंग में पेप्टिसाइड होता है जो रक्तचाप को संतुलित रखता है और शरीर को स्वस्थ एवं सुदृढ़ बनाए रखने में कारगर होता है।

अंकुरित मूंग में फाइबर की भरपूर मात्रा होती है, जिससे अपच और कब्ज की समस्या नहीं होती है तथा पाचन क्रिया दुरुस्त बनी रहती है।

मूंग की दाल में ऐसे गुण होते हैं जो शरीर की प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ा देते हैं और उसे बीमारियों से लड़ने की ताकत देते हैं।

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