
06/02/2024
जय माता दी
Astrologer Subhash Jha
पंच महापुरुष राजयोग अपार सफलता दिलाता है
जब किसी की जन्म कुंडली में मंगल, बुध, बृहस्पति, शुक्र अथवा शनि, इनमें से कोई भी ग्रह उच्च, स्वराशि अथवा मूलत्रिकोण का विशेष बलवान होकर केंद्र में बैठ जाए तो पंच महापुरुष राजयोग बनता है। सर्वश्रेष्ठ योग उच्च राशि में, उससे कम बली मूल त्रिकोण राशि में व उससे कम बली स्वराशि में बनता है। मंगल के द्वारा रूचक नामक पंच महापुरुष राजयोग, बुध के द्वारा भद्र, देवगुरू बृहस्पति द्वारा हंस पंच महापुरुष राजयोग, शुक्र द्वारा मालव्य योग एवं शनि के द्वारा शशक नामक पंच महापुरुष राजयोग का सृजन होता है।
कई प्रकार के होते हैं पंच महापुरुष योग
जन्म कुंडली में एक से अधिक पंच महापुरुष योग भी हो सकता है, यदि एक ग्रह उपर्युक्त प्रकार से पंच महापुरुष जैसा विशेष राजयोग बनाए तो मनुष्य भाग्यवान होता है, भाग्य के सहारे उसकी जीवन की गाड़ी निरंतर चलती रहती है, कभी किसी चीज की जीवन में कमी नहीं होती। यदि दो प्रकार के पंच महापुरुष योग कुंडली में बन रहे हों तो व्यक्ति राजा के समान पृथ्वी पर सुख-समृद्धि प्राप्त करता है। इसी प्रकार तीन या तीन से अधिक राजयोग हों तो व्यक्ति जीवन में सर्वोच्च पद-प्रतिष्ठा, मान-सम्मान प्राप्त कर महान हस्तियों की श्रेणी में आता है। ज्योतिष के प्राचीन ग्रंथ ऐसे विलक्षण व्यक्तियों को राजा से भी उपर चक्रवर्ती सम्राट का दर्जा देते हैं। कुछ विद्वान जन्म कुंडली की जन्म लग्न के अतिरिक्त चंद्र कुंडली अथवा चंद्रलग्न से बनने वाले पंच महापुरुष योगों का भी विशेष फल मानते हैं।
Astrologer Subhash Jha
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