Corporate Yoga : Yoga For All

Corporate Yoga : Yoga For All Our Corporate Yoga classes allow busy employees to increase this internal energy field within themse They help to recharge the body with cosmic energy .

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*प्राणायाम का राजा है नाड़ीशोधन, कफ विकारों से छुटकारा पाने के लिए रोजाना करें*आयुर्वेद के अनुसार नाड़ी शोधन प्राणायाम क...
25/06/2021

*प्राणायाम का राजा है नाड़ीशोधन, कफ विकारों से छुटकारा पाने के लिए रोजाना करें*

आयुर्वेद के अनुसार नाड़ी शोधन प्राणायाम के जरिए शरीर की 72 हजार नाड़ियों को शुद्ध किया जा सकता है। किसी भी प्राणायाम को शुरू करने से पहले इसे करना उपयोगी है।
अगर आप भी तनाव और कफ विकारों से छुटकारा पाना चाहती हैं तो प्राणायाम का राजा माने वाले वाले नाड़ीशोधन को अपने रूटीन में शामिल करें।
नाड़ी' शब्द का अर्थ है, 'मार्ग' या 'शक्ति का प्रवाह' और 'शोधन' का अर्थ होता है, 'शुद्ध करना'। नाड़ी शोधन का अर्थ हुआ, वह अभ्यास जिससे नाड़ियों का शुद्धिकरण हो। नाड़ी शोधनम प्रभावी प्राणायाम है जो मस्तिष्क, शरीर और भावनाओं को सही रखता है। मेडिटेशन अभ्यास शुरू करने से पहले आप इस प्राणायाम का अभ्यास मस्तिष्क को शांत करने के लिए कर सकते हैं। नाड़ी शोधनम प्राणायाम से चिंता, तनाव या अनिंद्रा की समस्या से राहत मिलती है।

इस लेख में नाड़ी शोधन प्राणायाम के फायदे और उसे करने के तरीके के बारे में बताया गया है।

नाड़ी शोधन प्राणायाम के फायदे इस प्रकार हैं -

नाड़ी शोधन से पूरे शरीर को ऑक्सीजन सही मात्रा में पहुंचता है।
इस प्राणायम से विषाक्त तत्व बाहर निकलते हैं और रक्त शुद्ध होता है।
मस्तिष्क के कार्य करने की क्षमता बढ़ती है।
इससे शांति, विचारों में स्पष्टता और एकाग्रता की प्राप्ति भी होती है। जिन्हें मानसिक रूप से समस्याएं होती है उन्हें इस प्राणायाम का अभ्यास करना चाहिए।
यह शरीर में उर्जा को बढ़ाता है और तनाव व चिंता में कमी लाता है।

नाड़ी शोधन प्राणायाम करने का तरीका हम यहाँ विस्तार से बता रहे हैं, इसे ध्यानपूर्वक पढ़ें –

दाहिने हाथ की उंगलियों को मुंह के सामने लाएं। तर्जनी और बीच की उंगली को धीरे से माथे के बीचों बीच रखें। दोनों उंगलियों पर दबाव न डालें, आराम से उंगलियों को रखें।
अंगूठा दाहिने नासिकाछिद्र के उपर और अनामिका बाएं नासिकाछिद्र के उपर रहे। ये दोनों (अंगूठा व अनामिका) बारी-बारी से नासिकाओं को दबाकर उनके श्वास-प्रवाह को नियंत्रित करते हैं। पहले एक नासिकाछिद्र को दबाकर दूसरे से सांस लें और उसके बाद दूसरे नासिकाछिद्र से भी यही प्रक्रिया दोहरायें।
कनिष्ठा उंगली को आराम से अंदर की तरफ मोड़ लें।
लंबे समय तक अभ्यास करने के लिए कोहनी को बाएं हाथ का सहारा दें। लेकिन इस बात का ध्यान रखें कि सहारा देते समय आपकी छाती मुड़नी नही चाहिए।

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22/05/2021

जीवन में सुख संतान से होता है लेकिन दुनिया में कई लोग है जिनको संतान सुख नहीं मिल पाता और उसका कारण है महिला या पुरु.....

यूरिक एसिड के कारण अगर बढ़ रही है हाथों-पैरों में सूजन तो ये घरेलू उपाय हो सकते हैं कारगर साबित:-स्ट्रॉबेरी, ब्लूबेरी और...
22/05/2021

यूरिक एसिड के कारण अगर बढ़ रही है हाथों-पैरों में सूजन तो ये घरेलू उपाय हो सकते हैं कारगर साबित:-

स्ट्रॉबेरी, ब्लूबेरी और रास्पबेरी में एंटी-इंफ्लेमेटरी और एंटी-ऑक्सीडेंट गुण मौजूद होते हैं। यह शरीर में यूरिक एसिड की मात्रा को कंट्रोल करने में कारगर है। बेरीज यूरिक एसिड के क्रिस्टल्स को तोड़कर, उन्हें जोड़ों में जमा नहीं होने देता।
शरीर में प्यूरीन नामक तत्व के ब्रेकडाउन से बने यूरिक एसिड बनता है। हालांकि, जब इसकी मात्रा शरीर में बढ़ने लगती है तो यह क्रिस्टल्स के रूप में हड्डियों के बीच में जमा होने लगता है। जिसके कारण गठिया-बाय, गाउट, जोड़ों में दर्द, उठने-बैठने में तकलीफ, सूजन समेत कई तरह की गंभीर समस्याएं होने लगती हैं। हाई यूरिक एसिड की समस्या को मेडिकल टर्म में हाइपरयूरिसेमिया कहा जाता है।
यूरिक एसिड खून में पाया जाने वाला एक ऐसा केमिकल होता है, जो कार्बन और नाइट्रोजन एटम से बने प्यूरीन के टूटने से बनता है। आज के समय में अनहेल्दी खानपान और लाइफस्टाइल के कारण लोग यूरिक एसिड की समस्या से जूझ रहे हैं। हालांकि, अगर इस समस्या के कारण आपके हाथों और पैरों में सूजन बढ़ रही है, तो आप इन घरेलू उपायों की मदद ले सकते हैं।

हाथ-पैरों की सूजन कम करने के लिए अपनाएं ये घरेलू उपाय:

1.-सेब: सेब को लेकर यह कहावत मशहूर है कि प्रतिदिन एक सेब का सेवन करने से कभी डॉक्टर के पास जाने की जरूरत नहीं पड़ती। सेब में सभी तरह के पोषक तत्व मौजूद होते हैं, जो खून में यूरिक एसिड को बेअसर करते हैं। सेब में मौजूद औषधीय गुण हड्डियों को मजबूत करने के साथ ही हाथों-पैरों की सूजन से छुटकारा दिलाने में भी कारगर हैं।

2.बेरीज: स्ट्रॉबेरी, ब्लूबेरी और रास्पबेरी में एंटी-इंफ्लेमेटरी और एंटी-ऑक्सीडेंट गुण मौजूद होते हैं। यह शरीर में यूरिक एसिड की मात्रा को कंट्रोल करने में कारगर है। बेरीज यूरिक एसिड के क्रिस्टल्स को तोड़कर, उन्हें जोड़ों में जमा नहीं होने देतीं।
3.ककड़ी-गाजर: ककड़ी-गाजर में भरपूर मात्रा में पानी मौजूद होता है, जो शरीर से टॉक्सिक पदार्थों को फ्लश आउट करने में कारगर है। इनमें मौजूद एंटी-ऑक्सीडेंट गुण एंजाइम के उत्पादन को रोकता है। ऐसे में आपको नियमित तौर पर ककड़ी-गाजर आदि का सेवन करना चाहिए

4.संतरा: एक शोध में यह बात सामने आई है कि प्रतिदिन 500 मिलीग्राम विटामिन-सी का सेवन करने से शरीर में यूरिक एसिड की मात्रा को कंट्रोल किया जा सकता है। संतरे में भरपूर मात्रा में विटामिन-सी मौजूद होता है, जो यूरिक एसिड के लेवल को कम करने में कारगर है।

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*शरीर, व्यवहार और मन को नियंत्रित करता है योग*         स्वास्थ्य को सामान्यतः शरीर से जोड़कर देखा जाता है लेकिन पूर्ण स्...
20/04/2021

*शरीर, व्यवहार और मन को नियंत्रित करता है योग*

स्वास्थ्य को सामान्यतः शरीर से जोड़कर देखा जाता है लेकिन पूर्ण स्वास्थ्य के लिए शरीर के साथ-साथ मन का शांत व संतुलित होना तथा भावों में निर्मलता आवश्यक है। शरीर और मन दोनों का स्वस्थ रहना पूर्ण स्वास्थ्य की आवश्यक है। योग शरीर, व्यवहार, मन और भावनाओं को नियंत्रित करने वाली एक जीवनशैली है। यह दिल, दिमाग के संबंधों या विशेषताओं को बढ़ाने वाली एक जीवनशैली है।मेरे विचार से यही योग की परिभाषा है। आप योग के छोटे-छोटे नियमों को अपने व्यवहार में लाते हैं तो आपका व्यवहार अच्छा होने लगता है। आप थोड़ा-बहुत विश्राम और ध्यान करने लगते हैं तो आप अपनी जिंदगी में तनाव व चिंताओं से बेहतर तरीके से निपटने लगते हैं।एक स्वस्थ शरीर में ही स्वस्थ मन और आत्मा का निवास होता है। आओ अब जानते हैं कि योग करने से जीवन में क्या प्रभाव पड़ता है।
जब हम कहते हैं कि योग सीखना चाहिए, इसका यह मतलब नहीं कि आसन सीखना। यदि आप योग सीखना चाहते हैं तो योग के सभी अंगों को धीरे-धीरे सीखें। शुरुआत अंग संचालन से करते हैं और फिर धीरे-धीरे यम, नियम साधते हुए आसन, प्राणायाम, प्रत्याहार व धारणा साधने की सोचते हैं। इस बीच उसे ध्यान, बंध, मुद्रा और क्रियाओं को भी सीखना चाहिए। यदि यह सभी सीख लिया तो समझो कि आप योगी बन गए।

*पहला प्रभाव शरीर होता है स्वस्थ*

यदि आहार नियम का पालन करते हुए लगातार सूर्य नमस्कार के साथ आप योग के प्रमुख आसन करते रहते हैं तो 4 माह बाद आपका शरीर एकदम लचीला होकर स्वस्थ हो जाएगा

*मन रहता है हमेशा प्रसन्न*

योग करते रहने से मन में कभी भी उदासी, खिन्नता और क्रोध नहीं रहता है। मन हमेशा प्रसन्नचित्त रहता है
मस्तिष्क में किसी भी प्रकार का द्वंद्व और विकार नहीं रहता है। व्यक्ति की सोच बहुत ही विस्तृत होकर साफ-सुथरी व स्पष्ट।

*मिट जाते हैं मानसिक रोग*

यदि किसी भी प्रकार का मानसिक रोग है तो वह मिट जाएगा, जैसे चिंता, घबराहट, बेचैनी, अवसाद, शोक, शंकालु प्रवृत्ति, नकारात्मकता, द्वंद्व या भ्रम आदि। एक स्वस्थ मस्तिष्क ही खुशहाल जीवन और उज्ज्वल भविष्य की रचना कर सकता है

*बदल जाता है व्यक्तित्व*

योग करते रहने से व्यक्ति का व्यक्तित्व और चरित्र बदल जाता है। वह अपने भीतर से नकारात्मकता और बुरी आदतों को बाहर निकाल देता है। 2 तरह के लोग होते हैं,अंतर्मुखी और बहिर्मुखी। लेकिन योग करते रहने से व्यक्ति दोनों के बीच संतुलन स्थापित करना सीख जाता है। योगी व्यक्ति का व्यक्तित्व अलग ही होता है। भीड़ में उसकी अलग ही पहचान बनती है।

(((शरीर, मन और आत्मा को एकसाथ लाता है योग)))
*****योगा कर्मषु कौशलम*****
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प्राणायाम के द्वारा रोगों का उपचारप्राणायम योग की एक महत्वपूर्ण क्रिया है जिसमे हम अपने शरीर के पाचनतंत्र को सुद्रिड करक...
11/04/2021

प्राणायाम के द्वारा रोगों का उपचार
प्राणायम योग की एक महत्वपूर्ण क्रिया है जिसमे हम अपने शरीर के पाचनतंत्र को सुद्रिड करके समस्त हैं अंदरूनी बिमारियों से मुक्ति पा सकते हैं ! जैसा कि सर्बविधित है की हमारा सरीर पञ्च तत्वों से बना है ! जो कि समय के साथ-साथ बनते टूटते रहते हैं ! उन तत्वों की कमी को पूरा करने के लिए हम खाना खाते हैं, पानी की पूर्ती के लिए पानी पीते हैं, और आक्सीजन की पूर्ती के लिए साँस लेते हैं तथा बेकार हुए तत्वों को बिभिन्न रास्तों से सरीर से बाहर किया जाता है ! इस भोजन,पानी को ग्रहण करने से लेकर अनुपयोगी तत्वों को सरीर से बाहर करने तक की क्रियाओं को उपापचय क्रिया कहते हैं ! तथा साँस लेने छोड़ने की क्रिया को श्वासोश्वास क्रिया कहते हैं !

किन्ही कारणों से अगर हमारी उपापचय क्रिया या श्वासोश्वास की क्रिया में बाधाएं पड़ती हैं तो बिभिन्न प्रकार रोग उत्पन्न हो जाते हैं ! लेकिन अगर हम निरंतर प्राणायम करते हैं तो इनसे बचा जा सकता है ! प्राणायाम करने के लिए किसी खास आसन की जरूरत नहीं है ! किसी भी तरह की आराम की स्तिथि में बैठकर या बीमार होने से लेटकर भी किया जा सकता है और केवल खाने के तुरंत बाद के समय को छोड़कर कभी भी किया जा सकता है ! प्राणायाम मुख्यतया निम्न ७ प्रकार की कृयाओं के योग को कहते हैं जिन्हें निरंतर क्रमवार करने से सभी प्रकार के रोगों में निश्चित लाभ होता है !
१- भ्रस्तिका.

२- अनुलोम विलोम.

३- कपालभाती.

४- वाह्य प्राणायाम.

५- उज्जई

६- भ्रामिका.

७- उद्गीत.

इन क्रियाओं को करने के लिए सबसे पहले हम किसी शान्त जगह में अपनी सुबिधा के अनुसार आसन चुनकर आराम से बैठते हैं तथा अपना पूरा ध्यान केन्द्रित करके प्राणायाम शुरु करते हैं !

1.भ्रस्तिका- इस क्रिया में हम गहरी साँस फेफड़ो में भरकर तेजी से छोड़ते हैं ! ऐसा करने से एक तो हमारे फेफड़ों का फैलाव बढ़ता है जिससे उनमे ज्यादा हवा भरने से ज्यादा ऑक्सीजन को अवशोषित किया जा सकता है और दूसरा तेजी से स्वास बाहर छोड़ने से साँस की नालियों में आई रुकावट को दूर किया जा सकता है. इस क्रिया को कम से कम पांच बार करना चाहिए या समय होने पर कितनी बार भी कर सकते हैं ! इस क्रिया से फेफड़ों की सभी बिमारियों से निजात मिल सकती है तथा रोकथाम हो जाती है !

2.अनुलोम विलोम- प्राणायाम की ये क्रिया बहुत ही महत्वपूर्ण है या यों कहें की अपना आप में सम्पूर्ण प्राणायाम है ! इसके द्वारा हमारे तंत्रिका तंत्र को साधा जा सकता है जो सरीर की सभी क्रियाकलापों के लिए जिम्मेदार होते हैं ! इस क्रिया में हम दायें हाथ के अंगूठे की मदद से दायीं नाक को बंद करते हैं तथा बायीं नाक से गहरी साँस फेफड़ों में भरते हैं ! फिर किसी भी उंगली की मदद से बायीं नाक को बंद करके दायीं नक् से धीरे-धीरे साँस बाहर छोड़ते हैं ! इस क्रिया के समय का अनुपात अगर २:१:४:१ यानि जितना समय आपको साँस अन्दर खीचने में लगा उसके आधे समय तक साँस को अन्दर रोकें तथा साँस छोड़ने में साँस लेने के समय से दो गिना समय लगायें तथा फिर पहले की तरह साँस रोके रखें तथा अब यही क्रिया बिपरीत यानि दायें नाक से साँस ले और बाएं नाक से छोड़ें ! ये इस क्रिया का एक चक्र पूरा हुआ. ऐसे ही चक्र समय के अनुसार ज्यादा से ज्यादा बार दोहराएँ ! इस क्रिया से लगभग सभी रोगों में लाभ होता है इसलिय इसे अधिक समय देना चाहिए !

3.कपालभाति- जैसा की सर्बविधित है कि पाचनतंत्र की कमी अनेकों रोगों को जन्म देती है ! प्राणायाम की इस क्रिया को करने से पाचनतंत्र में लाभ होता है ! साथ ही पेट की मांस पेशियां तथा स्वास की नलियां भी मजबूत होती हैं ! ये क्रिया करने के लिए पद्मासन या सुखासन में बैठ कर ध्यान मुद्रा बनायीं जाती है तथा साँस को पेट की मांस पेशियों को झटके के साथ सिकोड़ कर तेजी से छोड़ा जाता है ! ये क्रिया कम से कम ५ मिनट तक करनी चाहिए ! जिससे पेट के सभी रोगों को ठीक किया जा सकता है तथा रोगों की रोकथाम की जा सकती है !

4.वाह्य प्राणायाम- प्राणायाम की इस क्रिया से भी पेट की मांस पेशियों को मजबूती मिलती है. जिससे अनेकों प्रकार के रोगों से मुक्ति मिलती है ! इस क्रिया में सबसे पहले लम्बी साँस लेते हैं फिर धीरे धीरे पूरी साँस छोड़ते है जिससे फेफड़े पूरी तरह खली हो जाएँ अब पेट की मांसपेसियों को सिकोड़ कर पेट की आंतों को ऊपर की और खींचते हैं तथा थोड़ी को छाती से लगाकर सामर्थ के अनुसार कुछ देर इसी स्तिथि में रुकते हैं फिर धीरे धीरे साँस लेते हुए सामान्य स्तिथि में आते हैं ! ये क्रिया कम से कम ५ बार दोहरानी चाहिए !

5.उज्जई- इस क्रिया से खासकर थाईरोइड और गले की बिमारियों में लाभ होता है. इस क्रिया में गले की मांसपेसियों को सिकोड़ कर तेजी से आवाज के साथ साँस खींचते हैं ! ये क्रिया कम से कम एक मिनट तक करते हैं !

6.भ्रान्म्री- जैसा की नाम से ही ज्ञात होता है की इस क्रिया का सम्बन्ध भंवरे से होगा . प्राणायाम की इस क्रिया में सुखासन या पद्मासन में बैठ कर हाथ के अंगूठों से दोनों कानों को बंद करते हैं और दोनों हाथों की बीच की उँगलियों से दोनों आँखों को बंद करते हैं तथा तर्जनी उँगलियों को दोनों भोंओं से लगाकर रखते हैं ! फिर गहरी साँस लेते हैं और धीरे धीरे भँवरे की तरह हलकी आवाज के साथ धीरे धीरे छोड़ते हैं ! ये क्रिया करते समय ध्यान आवाज पर केन्द्रित करते हैं तथा इसी क्रिया को कम से कम १० बार दोहराते हैं ! इस क्रिया से मानसिक शांति मिलती है और उच्च रक्त चाप और तंत्रिका तंत्र सम्बंधित रोगों में बहुत जल्दी आराम मिलता है !

7.उद्गीत- इस प्राणायाम को भी भ्रान्म्री की तरह ही पद्मासन या शुखासन में बठकर ध्यानमुद्रा बनाते हैं और लम्बी साँस खींचकर ॐ की ध्वनि के साथ ध्यान केन्द्रित करते हुए धीरे धीरे छोड़ते हैं ! इस प्रकार की क्रिया में कम से कम एक मिनट का समय लग्न चाहिए ! तथा १० से अधिक बार इस क्रिया को दोहराते हैं ! इस क्रिया से आत्म सुद्धि तथा मानसिक शांति मिलती है तथा मानसिक और तनाव से होने वाले रोगों में अत्यधिक लाभ मिलता है !

रोजाना नियमित सुबह साम नित्य क्रिया से निवृत्त होकर प्राणायाम का अभ्यास करने से सारे रोग दूर हो जाते हैं और समस्त सरीर चुस्त और दुरुस्त रहता है !

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🙏 *Set Reminder for Today Evening* 🙏Join *Vijay kumar* from USA Workshop on*Meditation & The Science of Consciousness* 1...
14/03/2021

🙏 *Set Reminder for Today Evening* 🙏

Join *Vijay kumar* from USA Workshop on
*Meditation & The Science of Consciousness* 1Hours Deep Relaxation

(A UNIQUE MEDITATION TECHNIQUE)

BENEFITS
 5 Times Relaxed State
 Restful Alertness
 Reduction of Negativity
 Helps in De-addiction

Date : *14/03/2021*
Time: *07:00 PM*
Join by-
Zoom link : https://us02web.zoom.us/j/9173230403
Zoom meeting id : *9173230403*

Thanks🙏🙏
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Brainएक्सरसाइज आपकी याददाश्त और सोचने की क्षमता बढ़ा सकती है, तो आइये जानते है कैसे :-एक्सरसाइज ना सिर्फ बॉडी के लिए जरू...
12/03/2021

Brainएक्सरसाइज आपकी याददाश्त और सोचने की क्षमता बढ़ा सकती है, तो आइये जानते है कैसे :-
एक्सरसाइज ना सिर्फ बॉडी के लिए जरूरी है बल्कि दिमाग के लिए भी जरूरी है। बॉडी की एक्सरसाइज हम जिम में ट्रेनिंग लेकर या फिर किसी और माध्यम से जानकारी हासिल करके कर लेते हैं, लेकिन आपने यह सोचा है कि ब्रेन को भी एक्सरसाइज की जरूरत होती है। ब्रेन हमारी बॉडी का अहम अंग है बाडी के बाकी हिस्सों की तरह ब्रेन को भी एक्सरसाइज की जरूरत है। ब्रेन की एक्सरसाइज हमारे ब्रेन को एक्टिव और शॉर्प बनाती हैं। ये दिमाग के सेल्स के बीच कनेक्टिव टिशू को बढ़ाती है, जिससे उन्हें अधिक कुशलता से काम करने में मदद मिलती है। इस प्रोसेस को न्यूरोप्लास्टी के रूप में जाना जाता है जो कि ब्रेन की क्षमता को बढ़ाती है। एक्सरसाइज दिमाग को और अधिक मेहनत करने के लिए मजबूर करती है जिससे याददाश्त में सुधार आता है। आप भी चाहते हैं कि आपका ब्रेन दुरूस्त रहे तो अपने ग्रे सेल्स को बढ़ाने के लिए कुछ ब्रेन एक्सरसाइज जरूर करें। आइए हम आपको बताते हैं कि आप ब्रेन की कौन-कौन सी एक्सरसाइज कर सकते हैं।

1.मेडिटेशन ब्रेन के लिए एक बेस्ट पद्धति है:

मेडिटेशन दिमाग की ना सिर्फ बेस्ट एक्सरसाइज है ब्लकि ये दिमाग को शांत भी रखता है। मेडिटेशन तनाव और चिंता को कम करने में मदद करता है। मेडिटेशन आपकी मेमोरी को फाइन-ट्यून करने में मदद करता है और ब्रेन की क्षमता को बढ़ाता है। ध्यान रखें कि मेडिटेशन किसी शांत जगह पर ही करें। कोशिश करें कि हर दिन 5 मिनट तक मेडिटेशन जरूर करें।
2.कुछ नया सीखें:

आप हमेशा कुछ नया सीखने की कोशिश करें। नया सीखने से मेमोरी फंक्शन में सुधार होता है। आप अपनी जिंदगी में किसी भी फिल्ड से कुछ भी दिलचस्पी रखते हैं तो उस हुनर को सीखने का जज़्बा पैदा करें। आपको म्यूजिक में दिलचस्पी है तो म्यूजिक इंस्ट्रूमेंट चलाना सीखे या फिर डांस करना सीखे। हर दिन कुछ नया सीखकर ही आप अपनी मेमोरी फंक्शन में सुधार कर सकते हैं।

3.सभी कामों में एकाग्रता को कायम रखें:

चाहे आप खाना बना रहे हों, खाना खा रहे हों या सब्जी खरीद रहे हों अपने सभी कामों में एकाग्रता बनाएं रखें। इससे आपके ब्रेन को मजबूत बनाने में मदद मिलती है। एकाग्रता बनाए रखने के लिए अपनी नज़र, महक, आवाज़ और स्पर्श पर ध्यान दें।

4.संगीत सुनने की आदत डालें:

संगीत सुनना भी ब्रेन की एक्सरसाइज है। कई रिसर्च बताती हैं कि अपनी पसंद के गाने सुनने से रचनात्मक सोच में सुधार होता है। संगीत दिमाग के फंक्शन करने की क्षमता को बेहतर बनाता है।

5.अपना स्किल दूसरों को सीखाएं:

अपने दिमाग को शॉर्प बनाने के लिए आप अपना स्किल दूसरों को सीखाएं। अगर आप अपना स्किल दूसरों को सीखाते हैं तो आपको उसके लिए अतिरिक्त अभ्यास करने की जरूरत नहीं होती। आपका ब्रेन इस स्किल को बेहतर लर्न करता है

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110092

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