29/04/2021
"On the Origin of species". Charles Darwin द्वारा लिखी इस पुस्तक मे Natural selection theory बताई गई है,संक्षेप मे इसका सिद्धांत है कि हर प्रजाति,अधिसंख्या मे प्रजनन करके संतति उत्पन्न करती है,परन्तु जो प्रकृति से तारतम्य बना ले जाते हैं वही दीर्घकाल तक अस्तित्व मे रहते हैं,मतलब survival of the fittest.
Primal life से लेकर कुछ सौ वर्ष पूर्व तक हम प्रकृति को चकमा देने मे सफल रहे और हमारी आबादी बढ़ती गयी।
वर्तमान परिवेश मे इंसान के लिए हर तरफ कृत्रिम वातावरण बचा रह गया और प्रायः लोग इस कृत्रिमता मे survive करने के लिए संघर्ष रत हो गये,जैसे भौतिक संसाधन जुटाना,सामाजिक प्रतिष्ठा बनाना AC, Refrigerator,car, आदि के सहारे प्रकृति की class attend करना छोड़ दिया न गर्मी का अहसास न जाड़े का,ना बारिश मे भीगने का तर्जुबा ना वातावरण से साक्षात्कार,ऐसी प्रजाति प्रकृति से बहुत दूर चली गयी,अब जब प्रकृति का अभ्यास ही नही किया कभी तो उसकी परीक्षा मे उत्तीर्ण होना तो मुश्किल ही होगा,हो भी रहा है।
प्रकृति का कठिन प्रश्न पत्र सबको मिला है इस समय पर उत्तीर्ण वही हो रहे हैं जिनका अभ्यास था,जिन्होने syllabus पूरा पढ़ा था,कृत्रिम संसाधनों से वंचित वर्ग अच्छे से perform कर रहा है,वो अस्पताल मे बेड नही खोज रहा न उसे वेंटिलेटर चाहिए 8-10 दिन खांसी बुखार के बाद वो पहले के जैसे।
बाकी की हालत तो हमे पता ही है।
इस बार के natural selection process से ये तो स्पष्ट है कि प्रकृति की class हमे attend करनी पड़ेगी,थोड़ा पसीना,थोड़ी ठिठुरन सहनी होगी।
या तो शतप्रतिशत कृत्रिमता के लिए तैयार कर लें खुद को,पानी ही नही हवा भी कैन मे लेकर चलना पड़ेगा।
"सर्वे सन्तु निरामयः"🙏