04/12/2019
#WamanMeshram
डा. बाबासाहब अम्बेडकर के आन्दोलन के चार मुख्य सूत्र थे ...
(१) इस देश का सामाजिक ढाँचा जिसे हम हिन्दू धर्म व्यवस्था अथवा ब्राह्मणवादी व्यवस्था कहते है, यह व्यवस्था बुनियादी रुप से गलत है. इसमें एक सीमा से अधिक सुधार संभव नहीं है. इसलिए ऐसी समाज व्यवस्था को नष्ट कर नई समाज व्यवस्था का निर्माण किया जाए|
(२) जिन मुठ्ठी भर लोगों ने अपने स्वार्थ के लिए ऐसी गलत व्यवस्था बनायी है, वे लोग अपने आप यह व्यवस्था परिवर्तन का कार्य कभी नहीं करेंगे. इसलिए जिन लोगों का इस व्यवस्था ने पतन किया है, जो लोग इससे दुखी हैं उन लोगों को एक-जुट होकर इस परिवर्तन के लिए संघर्ष करना चाहिए तभी यह कार्य संभव है|
(३) वर्तमान ब्राह्मणवादी व्यवस्था ने समाज के बहुसंख्यक लोगों को सभी मानवीय अधिकारों से वंचित कर रखा है. इसलिए जब तक उन्हें समान अधिकार नहीं मिलते तब तक उनका उत्थान संभव नहीं है. इसलिए उन्हें समान अधिकार दिलाना, यह एक लक्ष्य बाबासाहब अम्बेडकर ने बनाया था|
(४) हजारों वर्षो से इस देश की बहिष्कृत तथा शोषित जनता को केवल दूसरों के बराबर अधिकार मिलने से ही उनका उत्थान नहीं हो सकता. यह एक ऐसी दौड़ होगी जिसमे एक आदमी बलवान और दूसरा कमजोर है. एक पहले से ही आगे खडा है और दूसरा पीछे खडा है. परिणाम यह होगा कि पीछे का आदमी इस दौड में कभी भी कामयाब नहीं हो सकेगा. इसलिए जब इस देश की शोषित और शासित जनता को यहॉ के उच्च वर्णियों के साथ समान अधिकारों के उपयोग के लिए स्पर्धा करनी है, तो पहले उन्हें उच्च वर्णियों के बराबर लाना जरुरी है.
इसलिए जिन लोगों को हजारों वर्षो से नीचे गिराया गया है उन्हें पहले उनकी गिरावट से ऊपर उठाया जाए अर्थात पहले उन्हें रसातल से धरातल पर लाया जाये ताकि वे दूसरों की बराबरी कर सके इसलिए वे जब तक दूसरों के बराबर नहीं आते विशेष अधिकार दिए जाए. ये विशेष अधिकार आज आरक्षण के अधिकार के नाम से प्रचलित हैं|
-वामन मेश्राम