06/04/2026
लंदन की इस ठंडी हवा में आज मेरी धड़कनें बहुत तेज हैं, और साँसें कुछ थमी हुई सी... आँखों के सामने रह-रह कर कल्याणपुर के उस छोटे से क्लिनिक की तस्वीर घूम रही है, जहाँ से मैंने होम्योपैथी के माध्यम से लोगों की सेवा का संकल्प लिया था।
आज जब मैं ब्रिटिश पार्लियामेंट की ऐतिहासिक दीवारों और ऑक्सफ़ोर्ड यूनिवर्सिटी के विद्वान गलियारों के बीच खड़ा हूँ, तो ऐसा महसूस हो रहा है जैसे कोई बड़ा सपना हकीकत बनकर मेरी आँखों के सामने खड़ा है।
मेरे साथी होम्योपैथी डॉक्टरों और प्रिय मित्रों,
यह कामयाबी सिर्फ नीतिश की नहीं है। यह जीत उस हर डॉक्टर की है जो एक छोटी सी शीशी में दुनिया को चंगा करने का हौसला रखता है। यह जीत उस मिट्टी की है जिसने मुझे लड़ना और बढ़ना सिखाया। यहाँ तक का सफर आसान नहीं था, लेकिन आपकी दुआओं ने मुझे वो संबल दिया
मैं आज भावुक भी हूँ और गौरवान्वित भी। दिल की धड़कनें बढ़ी हुई हैं क्योंकि जिम्मेदारी बड़ी है भारत की इस महान चिकित्सा पद्धति को दुनिया के सबसे ऊंचे मंच पर प्रतिष्ठित करने की।
आपकी दुआएं मेरी ऊर्जा हैं, आपका प्रेम मेरा साहस।
गांव के एक साधारण लड़के को इस मुकाम तक पहुँचाने के लिए आप सभी का हृदय से आभार। बस अपना आशीर्वाद और स्नेह इसी तरह बनाए रखें, ताकि 'वर्ल्ड होम्योपैथी समिट' के माध्यम से हम इतिहास रच सकें।
जय हिन्द,जय होम्योपैथी,जय माँ दुर्गे