Dr J.M.Tripathi

Dr  J.M.Tripathi homoeopathic doctor

25/12/2025
भारत रत्न श्रद्धेय अटल बिहारी बाजपेई जी जन्म जयंती पर सादर नमन,🌹🙏🙏🌹
25/12/2025

भारत रत्न श्रद्धेय अटल बिहारी बाजपेई जी जन्म जयंती पर सादर नमन,🌹🙏🙏🌹

16/12/2025

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"परंपरा को स्वीकार करने का अर्थ बंधन नहीं, अनुशासन का स्वेच्छा से वरण है "
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वंदे मातरम्, वंदे मातरम्!सुजलाम्, सुफलाम्, मलयज शीतलाम्,शस्यश्यामलाम्, मातरम्!वंदे मातरम्!शुभ्रज्योत्सनाम् पुलकितयामिनीम...
10/12/2025

वंदे मातरम्, वंदे मातरम्!
सुजलाम्, सुफलाम्, मलयज शीतलाम्,
शस्यश्यामलाम्, मातरम्!
वंदे मातरम्!

शुभ्रज्योत्सनाम् पुलकितयामिनीम्,
फुल्लकुसुमित द्रुमदल शोभिनीम्,
सुहासिनीम् सुमधुर भाषिणीम्,
सुखदाम् वरदाम्, मातरम्!
वंदे मातरम्, वंदे मातरम्॥

कोटि कोटि कण्ठ कल कल निनाद कराले
द्विसप्त कोटि भुजैर्धृत खरकरवाले
के बोले मा तुमी अबले
बहुबल धारिणीम् नमामि तारिणीम्
रिपुदलवारिणीम् मातरम्॥
वंदे मातरम्!

तुमि विद्या तुमि धर्म, तुमि ह्रदि तुमि मर्म
त्वं हि प्राणाः शरीरे
बाहुते तुमि मा शक्ति,
हृदये तुमि मा भक्ति,
तोमारै प्रतिमा गडि मन्दिरे-मन्दिरे मातरम्॥
वंदे मातरम्!

त्वं हि दुर्गा दशप्रहरणधारिणी
कमला कमलदल विहारिणी
वाणी विद्यादायिनी, नमामि त्वाम्
नमामि कमलां अमलां अतुलाम्
सुजलां सुफलां मातरम्॥
वंदे मातरम्!
भारत माता की जय

मानो कोई दिव्य सितारा उदित हुआ हो…महाराष्ट्र के अहिल्यानगर के युवा देवव्रत महेश रेखे ने मात्र 19 वर्ष की आयु में ऐसा अद्...
03/12/2025

मानो कोई दिव्य सितारा उदित हुआ हो…

महाराष्ट्र के अहिल्यानगर के युवा देवव्रत महेश रेखे ने मात्र 19 वर्ष की आयु में ऐसा अद्भुत कार्य कर दिखाया है, जिसे सुनकर हर सनातनी का हृदय गर्व से भर उठे।

🔱 दण्डक्रम वेद पारायण के अंतर्गत
🔱 25 लाख से अधिक वेद पदों का
🔱 लगातार 50 दिनों तक
🔱 बिना किसी ग्रंथ के सहारे,
🔱 बिना एक भी त्रुटि,
उच्चारण कर उन्होंने सनातन वेद परंपरा की ध्वजा और भी ऊँची कर दी है।

उनकी वाणी में तप है, साधना है, और अप्रतिम दिव्यता का तेज है।
ऐसी अलौकिक प्रतिभा सदियों में कभी-कभार जन्म लेती है।

देवव्रत जी को हृदय से साधुवाद एवं शुभाशीष।

अभिनंदन! अभिनंदन!

दर्शन के बाद मंदिर की पैड़ी पर क्यों बैठते थे हमारे बुजुर्ग?● पैड़ी पर बैठकर क्यों बोलते थे एक श्लोक - पुराने समय में मं...
22/11/2025

दर्शन के बाद मंदिर की पैड़ी पर क्यों बैठते थे हमारे बुजुर्ग?

● पैड़ी पर बैठकर क्यों बोलते थे एक श्लोक - पुराने समय में मंदिर की पैड़ी पर बैठकर एक श्लोक बोला जाता था, जिसे लोग अब भूलते जा रहे हैं, यह श्लोक न केवल आध्यात्मिक रूप से महत्वपूर्ण है, बल्कि जीवन के प्रति एक सुंदर दृष्टिकोण भी देता है, वह श्लोक है: अनायासेन मरणम् | बिना देन्येन जीवनम् | देहान्ते तव सानिध्यम् | देहि मे परमेश्वरम्

● श्लोक का अर्थ और गहरा संदेश: अनायासेन मरणम् - अर्थ: हमारी मृत्यु बिना किसी कष्ट के हो, हम कभी बिस्तर पर पड़े-पड़े दुख झेलकर मृत्यु को प्राप्त न हों, चलते-फिरते ही शरीर का त्याग हो जाए।

● बिना देन्येन जीवनम् - अर्थ: जीवन में कभी किसी पर आश्रित न होना पड़े, न लकवे की स्थिति आए, न किसी पर बोझ बनने की स्थिति, भगवान की कृपा से सम्मानपूर्वक जीवन बीते।

● देहान्ते तव सानिध्यम - अर्थ: मृत्यु के समय भगवान का सानिध्य मिले, जैसी भीष्म पितामह जब प्राण त्याग रहे थे, तब स्वयं भगवान उनके सामने उपस्थित थे।

● देहि मे परमेश्वरम् - अर्थ: हे प्रभु, हमें ऐसा ही शुभ और पवित्र जीवन तथा मृत्यु का वरदान दें।

● प्रार्थना और याचना में अंतर - प्रार्थना भगवान से श्रेष्ठ, आध्यात्मिक निवेदन है, इसमें सांसारिक वस्तुएं गाड़ी, पैसा, घर, नौकरी नहीं मांगी जातीं, ये सब तो भगवान आपकी पात्रता के अनुसार स्वयं देते हैं, याचना केवल सांसारिक पदार्थों के लिए की जाती है, जबकि प्रार्थना जीवन की उच्चतर इच्छा का निवेदन है।

● मंदिर में आंखें क्यों न बंद करें - मंदिर में प्रवेश करते समय और दर्शन करते समय आंखें खुली रखनी चाहिए, भगवान के स्वरूप, चरण, मुख, श्रृंगार सबको ध्यान से निहारना चाहिए, दर्शन करने के बाद पैड़ी पर बैठकर आंखें बंद करें और जो रूप देखा है, उसका मन में ध्यान करें, अगर ध्यान में स्वरूप न आए तो पुनः दर्शन करें, यही शास्त्र का निर्देश है।

पाँच तत्त्वों में बसता है भगवान—अपने भीतर झाँकिये , वही साक्षात् दर्शन है।”🙏
21/11/2025

पाँच तत्त्वों में बसता है भगवान—अपने भीतर झाँकिये , वही साक्षात् दर्शन है।”🙏

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