25/02/2026
कठिन परिस्थितियाँ चाहे कितनी भी चुनौतीपूर्ण क्यों न हों, मनुष्य का आत्मविश्वास और साहस उसे हर अंधकार से बाहर निकाल सकता है। “नर हो, न निराश करो मन को” संघर्ष, धैर्य और सकारात्मक सोच की शक्ति को दर्शाती है। जब प्रयासों के बाद भी राह कठिन लगे, तब यही शब्द मन को संभालते हैं और आगे बढ़ने की प्रेरणा देते हैं।
लीटरेरी सोसाइटी के सदस्यों द्वारा “प्रयाग” श्रृंखला की इस प्रस्तुति में मैथिलीशरण गुप्त जी की प्रेरणादायी कविता “नर हो, न निराश करो मन को” का सस्वर पाठ प्रस्तुत किया गया है। हमें आशा है कि यह आपके मन को प्रफुल्लित कर जीवन में सकारात्मक सोच और कर्मशीलता की नई ऊर्जा का संचार करे।
https://youtu.be/frQDfZpDMI8?si=LPnY-_8fTJ25B-Yl