18/09/2022
गर्भावस्था के दौरान क्यों व कितनी बार सोनोग्राफी करवानी चाहिए?
गर्भावस्था में नियमित अल्ट्रासाउंड जांच कराना बहुत जरूरी माना जाता है। अल्ट्रासाउंड जांच से डॉक्टर को ये समझने में मदद मिलती है कि गर्भस्थ शिशु की ग्रोथ सही चल रही है या नहीं। गर्भावस्था के दौरान कई प्रकार के अल्ट्रासाउंड डॉक्टर द्वारा सुझाए जा सकते हैं जैसे एनोमली स्कैन, एनोमली स्कैन क्या है (Anomaly Scan) यहाँ जानें।
मेडिकल साइंस इस बात की पुष्टि करता है कि गर्भावस्था के दौरान होने वाले अल्ट्रासाउंड से हानि की सम्भावना बेहद कम है और यह शिशु पर कोई विपरीत प्रभाव नहीं डालता है। डॉक्टर हमेशा स्थिति की गंभीरता को समझते हुए ही अल्ट्रासाउंड की सलाह देते हैं। कुछ टेस्ट ऐसे होते हैं जो प्रत्येक तिमाही में एक बार जरूर कराने चाहिए।
गर्भावस्था में पहला अल्ट्रासाउंड, वायबेलिटी स्कैन नाम से जाना जाता है जो कि 6 से 9 सप्ताह में करवाने की सलाह दी जाती है।
इसके बाद एक न्युकल ट्रांसलुसेंसी अल्ट्रासाउंड होता है जिसे NT स्कैन कहा जाता है, यह एक जरूरी टेस्ट है जो कि ग्याहरवें हफ्ते से लेकर तेरहवें हफ्ते के बीच किया जाता है।
इसके बाद डॉक्टर 3 से 4 स्कैन और करते हैं जिससे शिशु की ग्रोथ का सटीक अनुमान लगा सकते हैं।
इस आधार पर कहा जा सकता है कि गर्भावधि के दौरान 4 से 5 अल्ट्रासाउंड करवाने में कोई हर्ज़ नहीं है।
गर्भावस्था में अल्ट्रासाउंड के फायदे -
अल्ट्रासाउंड गर्भावस्था की सटीक पुष्टि करता है।
अल्ट्रासाउंड से यह भी पता चलता है कि भ्रूण कहीं गर्भाशय के बाहर तो नहीं पनप रहा, इसे एक्टोपिक प्रेग्नेसी कहते हैं।
शिशु की दिल की धड़कन सही चल रही है या नहीं यह भी अल्ट्रासाउंड से पता किया जा सकता है।
शिशु के हाथ पैर और तंत्रिका तंत्र का सही विकास चल रहा है या नहीं, इसकी जानकारी अल्ट्रासाउंड से मिलती है।
अल्ट्रासाउंड से शिशु का वजन पता चलता है और यह एक्पेक्टेड डेट ऑफ़ डिलीवरी(EOD) भी बताता है।
डॉक्टर बाबूलाल गोदारा
प्रसूति एवं स्त्री रोग विशेषज्ञ
कृष्णा हॉस्पिटल धोरीमना