22/01/2026
बथुआ (Lamb's quarters), जिसका वैज्ञानिक नाम Chenopodium album है, एक अत्यंत पौष्टिक और औषधीय गुणों से भरपूर पौधा है। भारत में इसे मुख्य रूप से सर्दियों के मौसम में साग के रूप में खाया जाता है।
बथुआ को "सुपरफूड" माना जाता है क्योंकि इसमें पोषक तत्वों की मात्रा बहुत अधिक होती है:
विटामिन: यह विटामिन A, C और B-कॉम्प्लेक्स का बेहतरीन स्रोत है।
खनिज: इसमें कैल्शियम, लोहा (Iron), फास्फोरस और पोटेशियम प्रचुर मात्रा में पाया जाता है।
प्रोटीन: इसमें पालक की तुलना में अधिक प्रोटीन और फाइबर होता है।
बथुआ में ऑक्सालिक एसिड (Oxalic acid) होता है, इसलिए इसे कच्चा खाने के बजाय उबालकर या पकाकर खाना ज्यादा बेहतर होता है। जिन लोगों को गुर्दे की पथरी (Kidney stones) की समस्या हो, उन्हें इसका सेवन सीमित मात्रा में करना चाहिए।
खान-पान: भारत में इसका उपयोग बथुआ का साग, रायता, पराठे और कढ़ी बनाने में किया जाता है। इसके बीज भी खाए जा सकते हैं।
आयुर्वेद: आयुर्वेद में इसका उपयोग पाचन सुधारने, कब्ज दूर करने और रक्त को साफ करने के लिए किया जाता है। यह लिवर और तिल्ली (Spleen) के विकारों में भी लाभकारी माना जाता है
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हम सात पीढ़ी से आयुर्वेद का काम करे रहे है खानदानी वैध है
वैध द्वारा नाड़ी देख कर इलाज किया जाता है और देसी जड़ी बूटी से इलाज किया जाता है
जैसे :- चर्म रोग - खाज खुजली, फोड़ा फुंसी, सोरायसिस, एग्जिमा, फफुन्स एलर्जी, बालों का झड़ना, डेंड्रफ,
* स्त्री रोग:- लिकोरिया या सफेद पानी, लालपानी, मासिक धर्म कामना, मासिक धर्म ज्यादा आना, बच्चेदानी में इन्फेक्शन, बच्चेदानी बाहर आना, रक्त प्रदर, पेशाब में जलन, पेडू में दर्द, निसंतान दंपति
★ वात रोग:- जोड़ों का दर्द, रिंगणबाय, संध्याबाय, कमर दर्द,L4,L5, सर्वाइकल दर्द, लकवा, पैरालाइज मोटापा, दुबला पतला,
★ पेट के रोग:- एसिडिटी या अम्लपित,गैस, सर दर्द, वायु मस्सा, खूनी मस्सा,कब्ज, अल्सर,आव पेचिस,
★ गुप्त रोग :- स्वपन दोष, शीघ्रपतन,सेक्स की कमजोरी, शुक्राणु शारीरिक कमजोरी, आदि का इलाज किया जाता है नीचे
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Shashi Kant