Dhadhimati ayurvedic

Dhadhimati ayurvedic nadi pariskshan ,ayurvedic diet and treatments of many ailments and diseases.

23/01/2026

आपके शहर फतेहपुर में नाड़ी या नब्ज देखकर वैद्य द्वारा इलाज किया जाता है हमारे साथ पीढ़ी से आयुर्वेद का काम है हर पीढ़ी मे वैद्य नाड़ी या नब्ज देख कर सफल इलाज किया जाता है जैसे
महिलाओं को होने वाले रोग
स्त्री रोग = लिकोरिया या सफेद पानी, लाल पानी, मासिक धर्म कम आना, मासिक धर्म ज्यादा आना, बच्चेदानी में ओवरीन की गांठ या रसोली होना, बच्चेदानी में इन्फेक्शन होना या बदबू आना, रक्त पदर, जैसे मासिक धर्म आ जाने के बाद में नहीं रुकना, पेट में दर्द होना, पेडू में दर्द होना, पेशाब में जलन होना, गर्भाशय कमजोर होना,
जिसके बार-बार बच्चे आउट होना, बच्चेदानी में खुजली होना, बच्चेदानी बाहर आना, नींसंतान दंपत्ति जिसके बच्चे नहीं लगा इनका सफल इलाज किया जाता है
स्थान,= दधिमती आयुर्वैदिक स्टोर
आशा राम जी मंदिर व पोदार
स्कूल के बीच में
फतेहपुर शेखावाटी
मो 9783865031

कच्ची हल्दी (Kachi Haldi) हल्दी के पौधे की ताजी जड़ होती है, जिसका उपयोग आयुर्वेद और भारतीय रसोई में सदियों से किया जा र...
23/01/2026

कच्ची हल्दी (Kachi Haldi) हल्दी के पौधे की ताजी जड़ होती है, जिसका उपयोग आयुर्वेद और भारतीय रसोई में सदियों से किया जा रहा है। यह अदरक जैसी दिखती है, लेकिन अंदर से इसका रंग गहरा नारंगी या पीला होता है।
2026 में भी, लोग इसके प्राकृतिक गुणों के कारण इसे हल्दी पाउडर की तुलना में अधिक पसंद कर रहे हैं।
कच्ची हल्दी के मुख्य लाभ:
रोग प्रतिरोधक क्षमता (Immunity): इसमें एंटी-बैक्टीरियल और एंटी-वायरल गुण होते हैं जो सर्दी, जुकाम और संक्रमण से लड़ने में मदद करते हैं।
सूजन कम करना: इसमें मौजूद 'curcumin' शरीर की आंतरिक सूजन और जोड़ों के दर्द में राहत देता है।
पाचन में सुधार: यह लिवर को साफ रखती है और पाचन तंत्र को दुरुस्त करती है।
त्वचा के लिए: इसका लेप चेहरे पर लगाने से कील-मुंहासे कम होते हैं और त्वचा में प्राकृतिक चमक आती है।
खून की सफाई: यह रक्त को शुद्ध करने और ब्लड सर्कुलेशन को बेहतर बनाने में सहायक है।
कच्ची हल्दी और हल्दी पाउडर में अंतर:
प्राकृतिक तेल: कच्ची हल्दी में प्राकृतिक तेल मौजूद होते हैं, जिससे शरीर इसके गुणों को बेहतर सोख पाता है। पाउडर बनाने की प्रक्रिया में ये तेल कम हो जाते हैं।
शुद्धता: पाउडर में मिलावट की संभावना रहती है, जबकि कच्ची हल्दी पूरी तरह शुद्ध रूप में होती है।
उपयोग: कच्ची हल्दी का उपयोग अचार, दूध (Haldi Doodh) और चाय में ज्यादा प्रभावी होता है।
उपयोग कैसे करें?
हल्दी वाला दूध: कच्ची हल्दी को कद्दूकस करके दूध में उबालें और छानकर पिएं।
अचार: इसे छोटे टुकड़ों में काटकर नींबू, नमक और राई के साथ स्वादिष्ट अचार बनाया जा सकता है।
सब्जी: कद्दूकस की हुई कच्ची हल्दी को घी में भूनकर 'हल्दी की सब्जी' (विशेषकर राजस्थान में प्रसिद्ध) बनाई जाती है।
For more information contact us :- 097838 65031

बथुआ (Lamb's quarters), जिसका वैज्ञानिक नाम Chenopodium album है, एक अत्यंत पौष्टिक और औषधीय गुणों से भरपूर पौधा है। भार...
23/01/2026

बथुआ (Lamb's quarters), जिसका वैज्ञानिक नाम Chenopodium album है, एक अत्यंत पौष्टिक और औषधीय गुणों से भरपूर पौधा है। भारत में इसे मुख्य रूप से सर्दियों के मौसम में साग के रूप में खाया जाता है।
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बथुआ को "सुपरफूड" माना जाता है क्योंकि इसमें पोषक तत्वों की मात्रा बहुत अधिक होती है:
विटामिन: यह विटामिन A, C और B-कॉम्प्लेक्स का बेहतरीन स्रोत है।
खनिज: इसमें कैल्शियम, लोहा (Iron), फास्फोरस और पोटेशियम प्रचुर मात्रा में पाया जाता है।
प्रोटीन: इसमें पालक की तुलना में अधिक प्रोटीन और फाइबर होता है।
बथुआ में ऑक्सालिक एसिड (Oxalic acid) होता है, इसलिए इसे कच्चा खाने के बजाय उबालकर या पकाकर खाना ज्यादा बेहतर होता है। जिन लोगों को गुर्दे की पथरी (Kidney stones) की समस्या हो, उन्हें इसका सेवन सीमित मात्रा में करना चाहिए।
खान-पान: भारत में इसका उपयोग बथुआ का साग, रायता, पराठे और कढ़ी बनाने में किया जाता है। इसके बीज भी खाए जा सकते हैं।
आयुर्वेद: आयुर्वेद में इसका उपयोग पाचन सुधारने, कब्ज दूर करने और रक्त को साफ करने के लिए किया जाता है। यह लिवर और तिल्ली (Spleen) के विकारों में भी लाभकारी माना जाता है।

22/01/2026

बथुआ (Lamb's quarters), जिसका वैज्ञानिक नाम Chenopodium album है, एक अत्यंत पौष्टिक और औषधीय गुणों से भरपूर पौधा है। भारत में इसे मुख्य रूप से सर्दियों के मौसम में साग के रूप में खाया जाता है।
बथुआ को "सुपरफूड" माना जाता है क्योंकि इसमें पोषक तत्वों की मात्रा बहुत अधिक होती है:
विटामिन: यह विटामिन A, C और B-कॉम्प्लेक्स का बेहतरीन स्रोत है।
खनिज: इसमें कैल्शियम, लोहा (Iron), फास्फोरस और पोटेशियम प्रचुर मात्रा में पाया जाता है।
प्रोटीन: इसमें पालक की तुलना में अधिक प्रोटीन और फाइबर होता है।
बथुआ में ऑक्सालिक एसिड (Oxalic acid) होता है, इसलिए इसे कच्चा खाने के बजाय उबालकर या पकाकर खाना ज्यादा बेहतर होता है। जिन लोगों को गुर्दे की पथरी (Kidney stones) की समस्या हो, उन्हें इसका सेवन सीमित मात्रा में करना चाहिए।
खान-पान: भारत में इसका उपयोग बथुआ का साग, रायता, पराठे और कढ़ी बनाने में किया जाता है। इसके बीज भी खाए जा सकते हैं।
आयुर्वेद: आयुर्वेद में इसका उपयोग पाचन सुधारने, कब्ज दूर करने और रक्त को साफ करने के लिए किया जाता है। यह लिवर और तिल्ली (Spleen) के विकारों में भी लाभकारी माना जाता है
हमारे चैनल पर आयुर्वेद की या घरेलू नुक्सा के बारे मे जानकारी मिलेगी
हम सात पीढ़ी से आयुर्वेद का काम करे रहे है खानदानी वैध है
वैध द्वारा नाड़ी देख कर इलाज किया जाता है और देसी जड़ी बूटी से इलाज किया जाता है
जैसे :- चर्म रोग - खाज खुजली, फोड़ा फुंसी, सोरायसिस, एग्जिमा, फफुन्स एलर्जी, बालों का झड़ना, डेंड्रफ,
* स्त्री रोग:- लिकोरिया या सफेद पानी, लालपानी, मासिक धर्म कामना, मासिक धर्म ज्यादा आना, बच्चेदानी में इन्फेक्शन, बच्चेदानी बाहर आना, रक्त प्रदर, पेशाब में जलन, पेडू में दर्द, निसंतान दंपति
★ वात रोग:- जोड़ों का दर्द, रिंगणबाय, संध्याबाय, कमर दर्द,L4,L5, सर्वाइकल दर्द, लकवा, पैरालाइज मोटापा, दुबला पतला,
★ पेट के रोग:- एसिडिटी या अम्लपित,गैस, सर दर्द, वायु मस्सा, खूनी मस्सा,कब्ज, अल्सर,आव पेचिस,
★ गुप्त रोग :- स्वपन दोष, शीघ्रपतन,सेक्स की कमजोरी, शुक्राणु शारीरिक कमजोरी, आदि का इलाज किया जाता है नीचे

✓ हमारे यहां सभी आयुर्वेदिक कंपनियां की दवाइयां मिलती है
जैसे:- डाबर, बैद्यनाथ, झंडू, मोहता, सांडू, कृष्ण गोपाल कालेड़ा, धुतपपेश्वर, दीनदयाल, महर्षि, पतंजलि, श्री श्री रविशंकर, हमदर्द, रैक्स, देलवी, यूनानी आदि कंपनियों की दवाई मिलती है
Shashi Kant

22/01/2026

बथुआ (Lamb's quarters), जिसका वैज्ञानिक नाम Chenopodium album है, एक अत्यंत पौष्टिक और औषधीय गुणों से भरपूर पौधा है। भारत में इसे मुख्य रूप से सर्दियों के मौसम में साग के रूप में खाया जाता है।
बथुआ को "सुपरफूड" माना जाता है क्योंकि इसमें पोषक तत्वों की मात्रा बहुत अधिक होती है:
विटामिन: यह विटामिन A, C और B-कॉम्प्लेक्स का बेहतरीन स्रोत है।
खनिज: इसमें कैल्शियम, लोहा (Iron), फास्फोरस और पोटेशियम प्रचुर मात्रा में पाया जाता है।
प्रोटीन: इसमें पालक की तुलना में अधिक प्रोटीन और फाइबर होता है।
बथुआ में ऑक्सालिक एसिड (Oxalic acid) होता है, इसलिए इसे कच्चा खाने के बजाय उबालकर या पकाकर खाना ज्यादा बेहतर होता है। जिन लोगों को गुर्दे की पथरी (Kidney stones) की समस्या हो, उन्हें इसका सेवन सीमित मात्रा में करना चाहिए।
खान-पान: भारत में इसका उपयोग बथुआ का साग, रायता, पराठे और कढ़ी बनाने में किया जाता है। इसके बीज भी खाए जा सकते हैं।
आयुर्वेद: आयुर्वेद में इसका उपयोग पाचन सुधारने, कब्ज दूर करने और रक्त को साफ करने के लिए किया जाता है। यह लिवर और तिल्ली (Spleen) के विकारों में भी लाभकारी माना जाता है।
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हम सात पीढ़ी से आयुर्वेद का काम करे रहे है खानदानी वैध है
वैध द्वारा नाड़ी देख कर इलाज किया जाता है और देसी जड़ी बूटी से इलाज किया जाता है
जैसे :- चर्म रोग - खाज खुजली, फोड़ा फुंसी, सोरायसिस, एग्जिमा, फफुन्स एलर्जी, बालों का झड़ना, डेंड्रफ,
* स्त्री रोग:- लिकोरिया या सफेद पानी, लालपानी, मासिक धर्म कामना, मासिक धर्म ज्यादा आना, बच्चेदानी में इन्फेक्शन, बच्चेदानी बाहर आना, रक्त प्रदर, पेशाब में जलन, पेडू में दर्द, निसंतान दंपति
★ वात रोग:- जोड़ों का दर्द, रिंगणबाय, संध्याबाय, कमर दर्द,L4,L5, सर्वाइकल दर्द, लकवा, पैरालाइज मोटापा, दुबला पतला,
★ पेट के रोग:- एसिडिटी या अम्लपित,गैस, सर दर्द, वायु मस्सा, खूनी मस्सा,कब्ज, अल्सर,आव पेचिस,
★ गुप्त रोग :- स्वपन दोष, शीघ्रपतन,सेक्स की कमजोरी, शुक्राणु शारीरिक कमजोरी, आदि का इलाज किया जाता है नीचे

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जैसे:- डाबर, बैद्यनाथ, झंडू, मोहता, सांडू, कृष्ण गोपाल कालेड़ा, धुतपपेश्वर, दीनदयाल, महर्षि, पतंजलि, श्री श्री रविशंकर, हमदर्द, रैक्स, देलवी, यूनानी आदि कंपनियों की दवाई मिलती है
Contact:-9783865031

पेट में गैस का रामबाण इलाज https://www.facebook.com/reel/902999002480079?sfnsn=wiwspwa&mibextid=6AJuK9पाचन समस्याएँ: कब्...
22/01/2026

पेट में गैस का रामबाण इलाज https://www.facebook.com/reel/902999002480079?sfnsn=wiwspwa&mibextid=6AJuK9
पाचन समस्याएँ: कब्ज, एसिडिटी, बदहजमी, लैक्टोज असहिष्णुता
पेट फूलना (Bloating) और सूजन (Swelling)।
बार-बार डकार (Belching) आना।
पेट में दर्द या ऐंठन (Pain or cramping)।
पेट में भारीपन (Heaviness in stomach)।
पेट में गैस पास होना (Flatulence)।
अगर गैस की समस्या लगातार बनी रहे या बहुत तेज दर्द हो।
छाती में तेज़ दर्द, सांस फूलना, पसीना आना या उल्टी जैसे लक्षण हों, क्योंकि यह हार्ट प्रॉब्लम भी हो सकती है।

21/01/2026

😮पेट में गैस का रामबाण इलाज😮 https://amzn.to/3Lq6fhz
पेट फूलना (Bloating) और सूजन (Swelling)।
बार-बार डकार (Belching) आना।
पेट में दर्द या ऐंठन (Pain or cramping)।
पेट में भारीपन (Heaviness in stomach)।
पेट में गैस पास होना (Flatulence)।

18/01/2026

यकृत संबंधी विकारों और भूख न लगने की समस्या में उपयोगी।
LIVOAID-DS:- https://amzn.to/4jEtEbr
✓निर्माता: सांवरिया फार्मा प्राइवेट लिमिटेड द्वारा उत्पादित। लिमिटेड
✓ फैटी लिवर में सहायक
✓लाभ: स्वस्थ यकृत कार्यप्रणाली में सहायक, यकृत कोशिकाओं को विषाक्त पदार्थों से बचाने में मदद करता है, और पाचन और चयापचय में सुधार करता है।
🙏 स्थान :- दधिमती आयुर्वेदिक स्टोर
Contact:-9783865031

17/01/2026

आपके यहां सभी आयुर्वेदिक कंपनियां की दवाइयां मिलती है
यहां वैध द्वारा नाड़ी देख कर वात पित कफ को समझ कर आप की शरीर मे कोनसी बीमारी है उसका पका इलाज किया जाता है
Shashi Kant

17/01/2026

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यहां वैध द्वारा नाड़ी देख कर वात पित कफ को समझ कर आप की शरीर मे कोनसी बीमारी है उसका पका इलाज किया जाता है
Shashi Kant

यकृत संबंधी विकारों और भूख न लगने की समस्या में उपयोगी।  LIVOAID-DS:- https://amzn.to/4jEtEbr ✓निर्माता: सांवरिया फार्मा...
15/01/2026

यकृत संबंधी विकारों और भूख न लगने की समस्या में उपयोगी।
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