03/08/2022
एक ताजा सर्वे में भारतीयों ने माना कि मोबाइल फोन के ज्यादा इस्तेमाल से उनकी नींद पर बुरा असर पड़ रहा है। पिछले 5 सालों में 2 लाख लोगों ने अपनी सोने की आदतों के बारे में बताया। इस साल 30,000 लोगों ने इस बारे में बताया। ग्रेट इंडियन स्लीप स्कोरकार्ड 2022 सर्वे मार्च 2021 से फरवरी 2022 के बीच किया गया था।
इस सर्वे के अनुसार हर 4 में से 1 भारतीय को लगता है कि उसे नींद न आने की बीमारी हो चुकी है। भारत के 59 प्रतिशत लोग रात 11 बजे के बाद सोने के लिए जाते हैं। सोशल मीडिया इसकी एक बड़ी वजह है। 36 प्रतिशत लोगों का मानना है कि डिजिटल मीडिया की वजह से उनकी नींद पर असर पड़ा है। 88 प्रतिशत लोग सोने से ठीक पहले फोन जरूर चैक करतेे हैं। हालांकि पिछले वर्ष के सर्वे में 92 प्रतिशत लोग ऐसा कर रहे थे।
हर 4 में से 1 भारतीय को लगता है कि उसे इन्सोमनिया यानी नींद न आने की बीमारी हो चुकी है। कोरोना से पहले के मुकाबले देर रात सोशल मीडिया पर रहने की आदत में 57 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। 31 प्रतिशत महिलाओं और 23 प्रतिशत पुरुषों को लगता है कि उनकी नींद गायब हो चुकी है। 38 प्रतिशत महिलाओं और 31 प्रतिशत पुरुषों को लगता है कि सोशल मीडिया की वजह से वे देर तक जागते रहते हैं। 18 वर्ष से कम के 50 प्रतिशत किशोरों को भी यह लगता है कि उन्हें इन्सोमनिया हो चुका है। हाइब्रिड वर्क कल्चर, यानी वर्क फ्रॉम होम के आने के बाद से अब लोगों को काम के दौरान सोया-सोया रहने की या महसूस करने की लत घट गई है। 2020 के सर्वे में जहां 83 प्रतिशत लोगों को काम के दौरान नींद आती थी, वह अब 2022 में घट कर 48 प्रतिशत रह गया है।
कड़वा सच है कि हम सभी मोबाइल फोन के इतने आदी हो गए हैं कि अपने फोन के बिना एक घंटा भी नहीं बिता सकते। यह हमें मानसिक रूप से कमजोर बना रहा है। दिन भर लोग स्मार्टफोन पर स्क्रॉल करते रहते हैं। मोबाइल फोन की लत के कारण आपको मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं, टूटे हुए रिश्तों और पारिवारिक परेशानी का सामना करना पड़ता है। यह हमारी सोच और रचनात्मक क्षमता को कम करता है। मोबाइल फोन या स्मार्टफोन का आविष्कार चीजों को सुलभ बनाने और संचार को बेहतर बनाने के लिए किया गया था, जबकि यह कई मानसिक समस्याओं का कारण बन रहा है।
Source: Punjab keshri