31/01/2019
स्वास्थ्य की दृष्टि से बिना पालिश किया हुआ चावल उत्तम है .
चावल जिसे संस्कृत में तंडुल या व्रीहि कहा जाता है , हमारे देश में सैकड़ो साल से उपयोग में लाया जाता है . वैसे विश्व की आधी से ज्यादा जनसँख्या चावल पर निर्भर है . चावल को सम्पन्नता का प्रतीक माना जाता है
आयुर्वेद में श्लोक है
रसे पाके स्वादु पवनकफपितप्रशमनों ज्वारे जीर्णे पथ्यः सकल जठर क्षोभहरं
शिशुनां वृद्धनाम नृपतिसुकुमारातीस्त्रिणाम
अयं सेव्यो रक्तो भवति ही महाशालीरमलः ।
चावल की प्रकृति मधुर , स्वाद में मीठा , वात पित्त को कम करने वाला तथा कफ को थोड़ा बढ़ने वाला होता है . यह बलवर्धक , पचने में हल्का , स्वादिष्ट होता है . न्यूट्रिशिएंट वैल्यू देखि जाये तो चावल में90% कार्ब , 8 % प्रोटीन , 2% फैट होता है साथ में थोड़ी मात्रा में magnesium, phosphorus, manganese, selenium, iron, folic acid, thiamine and niacin भी होता है .
वैसे बासमती चावल प्रिय होता है , लेकिन स्वास्थ्य की दृष्टि से बिना पोलिश किया हुआ चावल उत्तम है . आजकल ऐसा प्रचारित किया जाता है की चावल खाने से मोटापा बढ़ता है . जो लोग मोठे होते है ,उन्हें डाइटिंग में सबसे पहले चावल ही मना किया जाता है , डायबटीज के पेशेंट के लिए भी चावल का परहेज होता है
ये सही भी है , ग्लाइसेमिक इंडेक्स ज्यादा होता है , ज्यादा मात्रा में कार्ब होने से ये मोटापा को बढ़ाता है , लेकिन सोचिये ................................... जिस चीज को सकैडो सालो से खाया जा रहा है ,अचानक से उसमे इतना दोष कहाँ से आ गया ? क्या पहले लोग मोठे होते थे . क्या पहले डायबटीज नहीं होता था ?
दरसल अब दो बाते हो गयी है , एक जीवनशैली आलस्य पूर्ण हो गयी है , साथ में चावल बनाने का तरीका बदल गया है
चावल को आज कल प्रेशर कुकर में बनाया जाता है . प्रेशर कुकर में दबाव , सामान्य से 15 psi ज्यादा तथा तापमान121 डिग्री तक हो जाता है . इतने तापमान पर चावल बनाना जो खुद इतना हल्का होता है की 2 घंटे भिगो के रख दो तो कच्चा चबा लो ,
प्रेशर कुकर में चावल बनाना ठीक नहीं है , आयुर्वेदिक तरीके में चावल को बनाने से पहले कम से कम आधा घंटा भिगो ले , फिर चावल से कम से कम ३ गुना पानी खौलाएं , खौलते पानी में चावल को डाल के माध्यम आंच पर रखे फिर धीमी आंच पर , जब 1-2 दाना निकल के देख लीजिये की चावल हो गया है , तो उसे छान ले . छानने के बाद चावल को एक तरफ रख दे ,और उस पानी को जिसे मांड कहाँ जाता है
जिसमे बहुत अच्छी मात्रा में कार्ब होता है , उसे तरी वाली सब्जी में पानी की तरह उपयोग करे , सुप में उस पानी का प्रयोग करे , जिसे दस्त आ रही हो उसे पिने को दे , बच्चो को पीने को दे , क्यों की ये पानी बहुत पौष्टिक होता है . आप इससे बाल भी धो सकती है , ये नेचुरल कंडीशनर की तरह काम करता है
अब कुछ ख़ास बाते नोट कर ले , जिसे वात रोग है (गैस बनती है ), वो चावल बनांते समय पानी में थोड़ी कालीमिर्च , दालचीनी , मुलेठी और तेजपत्ता डाल दे , इन मसलो को डालने से चावल मेदोहर यानि की वजन नहीं बढ़ाता है स्वादिस्ट हो जाता है . कफ के मरीज ( नजला जुकाम बलगम हुआ हो ) वो भी इन मसलो के साथ बने चावल को दोपहर में जब सूर्य निकला हो , प्रयोग कर सकते है
डायबटीज के मरीज ,जिनक शुगर दवाई से अच्छे से कंट्रोल है , वो भी इन मसलो के साथ थोड़ी मात्रा में चावल ले सकते है . हलाकि अपने डाक्टर से इस पर राय जरूर ले
इस विधि से बने चावल पर ऊपर से देशी घी डाल के खाने से स्वाद बढ़ता है , खाना जल्दी पचता है , IBS के रोगी के लिए अच्छा है , जिसे एसिडिटी होती है , हाजमा ख़राब रहता है , उनके लिए ये पथ्य है . कमजोर शरीर वाले इसी प्रकार पानी में गुड़ या खांड डाल के चावल बनाये तो ये वजन को सही रूप में बढ़ाता है
खीर बनाने का भी ये तरीका है , पहले इस विधि से चावल बनाये फिर खौलते दूध में डाले , इससे खीर हलकी और सुपाच्य होती है
जो लोग इंटेंस एक्सरसाइज करते है , जिम जाते है , उन्हें भी जिम के बाद थोड़ी मात्रा में चावल खाने की सलाह दी जाती है , क्यों की कार्ब हमारे शरीर को तुरंत ऊर्जा प्रदान करता है .
अब ये बात भी आती है ,कि चावल कि कितनी मात्रा खायी जाए . इसका जवाब ये है कि हर व्यक्ति कि अपनी जरुरत होती है , लाइफ स्टाइल होती है , अपने हिसाब से देख ले , या फिर डायटीशियन से अपना डाइट प्लान बना ले . वैसे एक नार्मल साइज कि कटोरी भर चावल पर्याप्त होता है
चावल को जब दाल के साथ मिला के खिचड़ी बनायीं जाती है , उसे भी इसी विधि से बनाये , साबुत , छिलका सहित दाल को आठ गुने पानी में उबाले जब दाल पाक जाये तू उसमे भीगा चावल डाले . ये पौष्टिक खिचड़ी बनती है .
मै प्रेशर कुकर के विरुद्ध नहीं हूँ , बस जो चीजे ज्यादा समय लेती है , जैसे दाल , छोले ,चने , राजमा आदि कुकर में पकाना ठीक है , चावल तो बहुत आसानी से पक जाता है . अगर वजन नहीं बढ़ाना है और चावल भी खाना है फिर तो यही तरीका अच्छा है . वैसे दाल के साथ या तो रोटी खाइये या फिर चावल , दोनों को एक साथ खाना से भी वजन बढ़ता है , क्यों कि दोनों ही चीजों में ग्लाइसेमिक इंडेक्स ज्यादा होता है
मुझे सादी दाल , चावल ,घी , दही बहुत पसंद है
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