पहले आप :
वर्तमान मे जिन हालात मेँ हम रह रहे हैँ,जिस पाश्चात्य जीवन शैली को अधिकांशतः हम अपना रहे हैँ,उसके दुष्परिणामों के चलते आए दिन कोई न कोई शारीरिक,मानसिक कष्ट होने की सम्भावना स्वाभाविक है।ऐसे मे अधिकांश चिकित्सकों की अति व्यवसायिक व अवसरवादी सोच के कारण मध्यम,निम्न मध्यभ व निम्न वर्ग का एक बड़ा तबका,आर्थिक अभावों के कारण,अपने इलाज के प्रति लापरवाह हो जाता है। इन परिस्थितियोँ मेँ होम्योपैथी,
बायोकैमिक, बैच फ्लावर औषधियां जो कि अपेक्षाकृत सस्ती है, फ़ायदेमन्द है,खाने मे सहज हैँ व सबसे बड़ी एवम् महत्तपूर्ण बात यह है कि इनके कोई दुष्परिणाम नहीँ है।इनके बारे मेँ थोड़ी सी जानकारी लेकर भी आप सबसे पहले अपने आप अपना व अपनों का कम से कम प्राथमिक उपचार तो कर ही सकते हैँ। विशेषकर उस समय तक जब तक कि आप किसी चिकित्सक के पास नहीँ जा पा रहे हैँ।
यद्यपि इन चिकित्सा पद्धतियोँ मे एक ही नुस्खा हर किसी पर लागू हो यह ज़रूरी नहीँ है किन्तु फ़िर भी कई बीमारियोँ मे कुछ लक्षण तमाम लोगों मेँ एक जैसे ही होते हैँ अतः एक ही नुस्खा अलग अलग लोगों के रोगों मेँ काम कर भी जाता है।और फ़िर दवा का चयन सही सही न होने पर भी फ़ायदा भले ही न हो किन्तु नुकसान नहीँ होता।
अपने लगभग 35 वर्षोँ के अनुभव के आधार पर मैँ यहाँ दैनिक जीवन मेँ आमतौर पर होने वाले रोगों की प्रारम्भिक अवस्था की औषधियों का उल्लेख कर रहा हूँ। प्रारम्भिक अवस्था मेँ इनसे लाभ न होने की स्थिति मे बेहतर होगा कि समय व्यर्थ गँवाने व अनावश्यक कष्ट भोगने के बजाए विधिवत् परामर्श ले कर आगे उपचार करेँ।