16/04/2019
स्वस्थ नवजात शिशु की देखरेख
नवजात शिशु का आगमन एक हर्ष का विषय होता है. काफ़ी लंबे इंतजार के बाद जब नवजात शिशु हाथ में आता है तो उसके साथ आती है बहुत सारी खुशी, बहुत सारी ज़िम्मेदारी और बहुत सारी anxiety. आख़िर बच्चा कुछ बोल तो सकता नही है
मैं हूँ Dr मयंक रावत, बाल रोग विशेषज्ञ और आज हम कुछ ख़ास चीज़ों पर बात करेंगे जिनका हमको नवजात शिशु की देखरेख में ध्यान रखना चाहिए
सबसे पहले यह समझना ज़रूरी है की नवजात शिशु का शरीर कमजोर होता है. इसलिए उसको बहुत ध्यान से पकड़ना होता है. उसके सिर को सपोर्ट कर के पकड़ना चहिये.बच्चे को हवा में उछालना नहीं चाहिए. खेल खेल मैं या गुस्से में बच्चे को ज़ोर ज़ोर से हिलना नही चाहिए.
सफाई का बहुत ध्यान रखना चाहिए. बच्चे को लेने से पहले हाथ धो कर साफ करने चाहिए. Hand Sanitiser का भी प्रयोग कर सकते हैं. पर ध्यान रखें की हाथ धोना ज़्यादा अच्छा विकल्प है. बच्चे को दूसरे बच्चों के हाथ में न दें. बच्चे को सब लोग बार बार हाथ न लगाएँ. जो बच्चे या बड़े खुद बीमार हैं उनको नवजात शिशु से दूर रखने का प्रयास करें.
बच्चे को सिर्फ़ माँ का दूध पिलाना है. इस चिंता में नहीं रहना चाहिए की दूध कम तो नहीं हो रहा. बच्चे सामान्यतः दूध पी कर दो से तीन घंटे सोते है व प्रतिदिन 6 से 8 बार पेशाब करते हैं. जन्म के बाद अस्पताल में ही दूध पिलाना शुरू कर देना चाहिए. कोई समस्या हो तो डॉक्टर या नर्स से सहायता लें. साधारण सर्दी जुकाम में माँ का दूध नही रोकना चाहिए. माँ को बिना डॉक्टर की सलाह के खुद से दवाई न दें. माँ के डॉक्टर को यह अवश्य बतायें की वह बच्चे को दूध पिला रही है
पानी, घुट्टी, शहद, चाय, चीनी का पानी आदि न दें. नाभि की नाल पर कुछ भी लगाने की ज़रूरत नहीं है. शुरू में शिशु को नहलाने की आवश्यकता नहीं है. गीले कपड़े से साफ करें. नाभि की नाल सोख के गिर जाने के बाद बच्चे को साफ गुनगुने पानी से नहला कर साफ कपड़े सो पोंछ सकते हैं. काजल न लगाएँ.
शिशु को सामान्य तापमान पर रखना है, न बहुत ज़्यादा गर्म न ज़्यादा ठंडा. गर्मी में बच्चे को ऐसी जगह रखना चाहिए जहाँ तापमान कम गर्म हो. ज़्यादा सर्दी की तरह ज़्यादा गर्मी भी शिशु को नुकसान पहुँचा सकती है. सर्दी में बच्चे को गर्म जगह पर रखना चाहिए और उसको गर्म कपड़े पहनाने चाहिए. मोटे कपड़े की जगह बच्चे को कई पतले पतले कपड़े पहनना ज़्यादा फ़ायदा करता है क्यूंकी उसके कई layers बन जाती हैं.
अस्पताल से जाते वक्त शिशु को विटामिन D की खुराक दी जाती है. उसको नियमित रूप से देना चाहिए. Discharge के 2-3 दिन बाद शिशु को उनके डॉक्टर के पास check up के लिए ले जाना चाहिए. अगर वहाँ नही जा सकते तो नज़दीकी डॉक्टर की दिखा लेना चाहिए. बच्चे को सभी टीके समय से लगवाने चाहिए
ये लक्षण किसी समस्या का संकेत हो सकते हैं.
a. दूध ठीक से न पीना
b. शिशु का सुस्त होना
c. तेज तेज साँस लेना
d. पेट फूलना
e. पसली चलना
f. शिशु का गर्म या ठंडा महसूस होना
g. शिशु का पीला या नीला दिखना
h. नाभि में सूजन या पानी आना
i. दौरे पड़ना
j. कोई और असामान्य व्यवहार या लक्षण
आवश्यकता होने पर अपने डॉक्टर को संपर्क करें व नज़दीकी क्लिनिक या अस्पताल में दिखाएँ
एक आख़िरी और बहुत ज़रूरी चीज़ है caregiver support यानी बच्ची की देखरेख करने वालों की देखरेख. छोटा बच्चा निरंतर आपकी attention माँगता है. वो किसी की थकान, मजबूरी, झुंझलाहट नहीं समझता. वो कोई सहानुभूति नही दिखता और किसी को कोई ब्रेक नही देता. यह ज़रूरी है की पूरा परिवार बच्चे के लालन पालन में सहयोग करे और बच्चे के बचपन खुशी खुशी बीते.