19/09/2021
कौन है सबसे शक्तिशाली भगवान, जरूर जानिए | Pandit Vishnu Dutt Saras Ji || भागवत प्रवक्ता एवं ज्योतिषी...https://youtu.be/j3A21p3lFSk
जब से सृष्टि का आरंभ हुआ है, तब से यह सवाल हुआ है कि ब्रह्मा, विष्णु और महेश में से सबसे बड़ा कौन है, इस संदर्भ में दो कथाएं मिलती है, एक कथा महा शिव पुराण में है और दूसरी भागवत में, महा शिव पुराण के अनुसार एक बार ब्रह्मा और विष्णु में विवाद हो गया। कि दोनों में से कौन बड़ा है, यह विवाद इतना बढ़ गया कि उन दोनों में युद्ध की नौबत आ गई। तब उन दोनों के मध्य एक बड़ा सा अग्नि स्तंभ प्रकट हो गया, अब उन दोनों ने यह निश्चय किया कि जो भी स्तंभ के अंत तक जाएगा वही श्रेष्ठ है।
भगवान विष्णु स्तंभ के अंत तक जाने के लिए नीचे की और गए। और ब्रह्मा जी ऊपर कि और दोनों में से कोई भी इस अग्नि स्तंभ के अंत को पाने में सफल ना हो सका, भगवान विष्णु ने तो अपनी हार स्वीकार कर ली परंतु ब्रह्मा जी ने झूठ कह दिया कि उन्होंने अंत पा लिया है। ब्रह्मा जी के मुख से असत्य सुनकर उस स्तंभ से भगवान शिव प्रकट हुए और उन्होंने ब्रह्मा जी के पांच मुख मे से जिस मुख ने झूठ बोला था, उस मूर्ख को काट दिया। और उन्हें श्राप दिया कि संसार में उनकी कभी भी पूजा नहीं होगी। और भगवान विष्णु से प्रसन्न होकर उन्होंने यह वरदान दिया कि उनके ही समान उनको पूजा जाएगा।
इस कथा के अनुसार शिव जी बड़े हैं, भागवत कथा के अनुसार सप्त ऋषियों में यह चर्चा हो रही थी। कि ब्रह्मा, विष्णु और महेश में से कौन बड़ा है, इसलिए उन्होंने तीनों देवों की परीक्षा लेने का मन बनाया और यह कार्य एक ऋषि को सौंपा गया। अपने इस कार्य से ऋषि ब्रह्मा जी के पास गए और उन्होंने उनका अपमान किया इस अपमान से ब्रह्मा जी क्रोधित हो गए। और उसके बाद ऋषि शिव जी के पास गए और उन्होंने शिवजी का भी अपमान किया। परंतु शिवजी ने कुछ नहीं कहा बस मुस्कुराते रहे और उसके बाद हुए भगवान विष्णु के पास गए।
भगवान विष्णु विश्राम कर रहे थे, ऋषि ने सीधे जाकर भगवान विष्णु के पेट पर लात मारी इस पर भगवान विष्णु ने उनकी लात पकड़ ली और पूछा ऋषि आपके पैरों में चोट तो नहीं लगी। भगवान विष्णु की यह विनम्रता देखकर ऋषि ने विष्णु जी से क्षमा मांगी और फिर सप्त ऋषियों ने यह स्वीकार कर लिया कि ब्रह्मा, विष्णु और महेश में से भगवान विष्णु ही श्रेष्ठ है।
भागवत मर्मज्ञ पंडित विष्णु दत्त मिश्र “पूज्य सरस जी” अपनी 18 पीढ़ियों के ज्योतिष एवं आध्यात्म के ज्ञान को संजोये हुए हैं।
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