Best Ayurveda & Panchkarma Center

Best Ayurveda & Panchkarma Center Ayurveda Multispecialty Clinic In Ghaziabad

02/11/2025

धुएं युक्त कोहरे (स्मॉग) से बचाव करें।

01/11/2025

गंभीर रोगों से बचाव बहुत आसान है। गंभीर रोगों का इलाज बहुत मुश्किल। फैसला आपका कि आपको क्या चाहिए!

🌿✨ राष्ट्रीय आयुर्वेद दिवस विशेष ✨🌿📰 पर्यावरण का विनाश – स्वास्थ्य क्षेत्र के लिए संकटहम सभी जानते हैं कि –🌍 पर्यावरण का...
22/09/2025

🌿✨ राष्ट्रीय आयुर्वेद दिवस विशेष ✨🌿

📰 पर्यावरण का विनाश – स्वास्थ्य क्षेत्र के लिए संकट
हम सभी जानते हैं कि –
🌍 पर्यावरण का सीधा असर हमारे स्वास्थ्य पर पड़ता है।

🌱 औषधीय पौधों की गुणवत्ता घट रही है।

🍽️ भोजन में पोषण कम होता जा रहा है।

🤒 सामान्य रोग भी अब जटिल हो रहे हैं।

आयुर्वेद ने हमेशा प्रकृति को स्वास्थ्य का आधार माना है।
👉 ऋतुचर्या और दिनचर्या का पालन करके हम पर्यावरण और स्वास्थ्य दोनों को सुरक्षित रख सकते हैं।

📢 आज ज़रूरत है कि हम सब मिलकर पर्यावरण संरक्षण को स्वास्थ्य सुरक्षा आंदोलन के रूप में अपनाएँ।

💡 याद रखिए –
“पर्यावरण के विनाश में हम सब शामिल हैं, इसलिए समाधान में भी सबकी भागीदारी ज़रूरी है।”

#राष्ट्रीयआयुर्वेददिवस #पर्यावरण_और_स्वास्थ्य

🌅 देर से नाश्ता = बीमारी का न्योता  👉 ब्रिटेन के वैज्ञानिकों ने अध्ययन में पाया कि देर से नाश्ता करने वाले लोगों में बीम...
08/09/2025

🌅 देर से नाश्ता = बीमारी का न्योता

👉 ब्रिटेन के वैज्ञानिकों ने अध्ययन में पाया कि देर से नाश्ता करने वाले लोगों में बीमारियों और मृत्यु का खतरा बढ़ जाता है।
👉 सुबह 7 बजे के आसपास नाश्ता करना स्वास्थ्य के लिए सर्वोत्तम माना गया।
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🩺 आधुनिक विज्ञान की चेतावनी
- देर से भोजन करने से शरीर की प्राकृतिक लय (Biological Clock) बिगड़ती है।
- सुबह उठने के 1 घंटे के भीतर नाश्ता करना सबसे सुरक्षित है।
- समय से नाश्ता करने वाले लोगों की उम्र और स्वास्थ्य बेहतर पाया गया।
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🌿 आयुर्वेद का दृष्टिकोण
- आयुर्वेद में भोजन के तीन समय बताए गए हैं:
1️⃣ प्रातःकाल – *समय पर हल्का व सुपाच्य नाश्ता*
2️⃣ मध्यान्ह – *अग्नि प्रबल होने पर मुख्य भोजन*
3️⃣ सायं – *हल्का एवं शीघ्र पचने वाला आहार*

- *कालबद्ध आहार (Timely Eating)* को ही “पथ्य” कहा गया है।
- देर से भोजन करने पर *आम (टॉक्सिन्स)* बनते हैं, जो रोगों की जड़ हैं।
- समय पर भोजन करने से *अग्नि (Digestive Fire)* संतुलित रहता है और शरीर-मन प्रसन्न रहता है।
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✅ क्या करें?
- प्रातःकाल सूर्योदय के बाद स्नान/व्यायाम कर **सुबह 7–8 बजे तक नाश्ता करें।**
- नाश्ते में हल्का, सुपाच्य और सात्त्विक भोजन लें।
- देर से और भारी नाश्ते से बचें।
- दिनचर्या और ऋतुचर्या के अनुसार भोजन का समय तय करें।
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आधुनिक विज्ञान अब वही कह रहा है जो आयुर्वेद सदियों से सिखाता है –
**“समय पर किया गया भोजन ही अमृत है, देर से किया गया भोजन विष के समान है।”**
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27/08/2025

🌿 प्रीडायबिटीज़: टेस्ट, खतरे और इलाज

🔹 प्रीडायबिटीज़ क्या है?
शुगर रोग (डायबिटीज़) हुई नहीं है लेकिन होने वाली है।
👉 यानी वह स्थिति जिससे आप आसानी से शुगर जैसी गंभीर बीमारी से बच सकते हैं।
यह चेतावनी संकेत है कि जीवनशैली न सुधारी तो जल्द ही डायबिटीज़ हो जाएगी।
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🔹 प्रीडायबिटीज़ की जाँच (Tests)

🧪 आधुनिक चिकित्सा (Modern Tests):
1️⃣ HbA1c (Glycated Hemoglobin)

•सामान्य:

25/08/2025

🌿 हर सिरदर्द = माइग्रेन नहीं 🌿

❌ आम धारणा:
“सिरदर्द है तो ज़रूर माइग्रेन है, और माइग्रेन तो असाध्य है।”
✔️ सच्चाई यह है कि माइग्रेन सिरदर्द का सिर्फ एक प्रकार है।

👉 इंटरनेट और आम जानकारी के चलते माइग्रेन को भाग्य का खेल मान लिया जाता है।
👉 बहुत से डॉक्टर भी समय की कमी से सिरदर्द के हर पुराने रोगी को माइग्रेन कहकर शांत कर देते हैं।
👉 इससे मरीज वर्षों तक दवा लेते रहते हैं, जबकि उनका सिरदर्द वास्तव में किसी और कारण से होता है और सही इलाज से पूरी तरह ठीक हो सकता है।
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🧠 सिरदर्द के संभावित कारण (माइग्रेन से अलग)

1️⃣ नेत्र संबंधी कारण
•आँखों की कमजोरी (चश्मे की ज़रूरत)
•लगातार मोबाइल / लैपटॉप स्क्रीन का उपयोग
•तेज़ रोशनी या कम रोशनी में काम
2️⃣ पाचन व जठराग्नि विकार
•अम्लपित्त (Acidity, GERD)
•कब्ज़ या पाचन खराब होना
•अधिक खट्टा, मसालेदार, फास्टफूड का सेवन
3️⃣ मानसिक कारण
•तनाव, चिंता, डिप्रेशन
•नींद पूरी न होना
•अत्यधिक मानसिक कार्य / परीक्षा का दबाव
4️⃣ साइनस और श्वसन कारण
•साइनसाइटिस (नाक और माथे की साइनस गुफ़ाओं में सूजन)
•बार-बार जुकाम / एलर्जी
•धूल, धुआँ, प्रदूषण का प्रभाव
5️⃣ रक्तचाप और हृदय संबंधी कारण
•हाई BP या लो BP
•अचानक रक्त प्रवाह में बदलाव
6️⃣ हार्मोनल और महिलाओं से जुड़े कारण
•मासिक धर्म से पहले या बाद का हार्मोनल असंतुलन
•थायरॉइड समस्याएँ
•गर्भावस्था / रजोनिवृत्ति काल
7️⃣ गर्दन और रीढ़ में समस्या होना
•Cervical Spondylosis
•लंबे समय तक कंप्यूटर पर बैठना
•गलत मुद्रा (Posture)
8️⃣ जीवनशैली संबंधी कारण
•देर रात तक जागना
•अनियमित खानपान, भोजन छोड़ना
•अधिक चाय, कॉफी, शराब या धूम्रपान
9️⃣ अन्य कारण
•दाँत, कान या गले के रोग
•मौसम परिवर्तन (गर्मी से ठंड या ठंड से गर्मी)
•अधिक देर तक भूखे रहने से

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🌿 आयुर्वेदिक दृष्टिकोण

आयुर्वेद के अनुसार सिरदर्द कई प्रकार का होता है:

•वातज शिरःशूल – तनाव, कब्ज़, थकान से उत्पन्न
•पित्तज शिरःशूल – तेज़ धूप, गुस्सा, खट्टा-तीक्ष्ण आहार से
•कफज शिरःशूल – सर्दी-जुकाम, भारीपन, सर्द मौसम से
•अर्धावभेदी शिरःशूल (माइग्रेन जैसा) – एक तरफ़ का दर्द, जी मिचलाना, प्रकाश असहनीय

👉 प्रत्येक सिरदर्द का निदान दोष के आधार पर करना आवश्यक है।
👉 उचित परहेज़ (पथ्य-अपथ्य), जीवनशैली सुधार और आयुर्वेदिक औषधियों से स्थायी राहत संभव है।
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✅ मरीज के लिए सुझाव
•हर सिरदर्द को माइग्रेन न मानें
•आँखों और BP की जाँच कराएँ
•नींद और भोजन की दिनचर्या सुधारें
•तनाव को कम करने के उपाय अपनाएँ
•तुरंत दर्दनिवारक दवाओं पर निर्भर न रहें, कारण जानें
•आयुर्वेदिक चिकित्सक से दोष-धातु-मल-अग्नि की जाँच करवाएँ
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📌 निष्कर्ष
•हर सिरदर्द माइग्रेन नहीं है।
•सही कारण की पहचान और उचित चिकित्सा से सिरदर्द का स्थायी समाधान संभव है।
•अज्ञान और नाम के भ्रम से वर्षों तक पीड़ा सहना पड़ सकता है।
#सिरदर्द #माइग्रेन #आयुर्वेद #सहीजानकारी

14/08/2025

चाहे कैंसर हो या सामान्य पेट दर्द – खराब भोजन शैली ही सबसे बड़ा कारण
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🧬 नवीनतम शोध चौंकाने वाला है!
30–40 वर्ष की उम्र के युवाओं में अपेंडिक्स कैंसर और गंभीर पाचन रोगों के मामले चार गुना तक बढ़ चुके हैं। आधुनिक जीवनशैली में प्रोसेस्ड फूड, तैलीय-मीठे स्नैक्स, परिष्कृत आटा, और कोल्ड ड्रिंक्स रोज़मर्रा का हिस्सा बन गए हैं।

🔍 वैज्ञानिक दृष्टिकोण से कारण:
•प्रोसेस्ड फूड में मौजूद नाइट्रेट्स, प्रिज़र्वेटिव्स आंतों की कोशिकाओं में डीएनए क्षति कर सकते हैं।
•कम फाइबर वाला भोजन आंतों की गतिशीलता (motility) घटाता है, जिससे अपेंडिक्स और कोलन में सूजन की संभावना बढ़ती है।
•अत्यधिक शुगर और ट्रांस-फैट सूजन (inflammation) को ट्रिगर कर दीर्घकालिक रोगों का आधार बनाते हैं।
•बार-बार अनहाइजीनिक स्ट्रीट फूड और देर रात भोजन, आंतों की माइक्रोबायोटा को असंतुलित करते हैं।

⚠️ समस्या यह है कि शुरुआती स्टेज में लक्षण साधारण लगते हैं – हल्का पेट दर्द, गैस, या एसिडिटी – परंतु देर होने पर यह जानलेवा रूप ले सकता है।

🌿 आयुर्वेद की दृष्टि से:

•अतिशय गुरु, तैलीय, अपक्व एवं विरुद्ध आहार आम का निर्माण कर अग्नि को मंद कर देता है।
•आम आंतों में रुककर वात-पित्त-कफ विकृति उत्पन्न करता है, जो धीरे-धीरे विद्रधि (सूजन/गांठ) या कैंसर में परिवर्तित हो सकता है।
•ऋतु और प्रकृति अनुसार भोजन, समय पर भोजन, और पथ्य-अपथ्य का पालन ही स्थायी बचाव है।

✅ बचाव के उपाय:
•ताज़ा, घर का बना, ऋतु अनुसार भोजन लें।
•रोज़ाना कम से कम 30–40 मिनट पैदल चलें या व्यायाम करें।
•जंक फूड, पैकेट स्नैक्स, कोल्ड ड्रिंक्स, और बार-बार तला भोजन से दूरी रखें।
•हर 6–12 माह में पाचन स्वास्थ्य की जांच करवाएं।
•पेट दर्द, लगातार गैस, या भूख में बदलाव को नज़रअंदाज़ न करें।
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📢 संदेश:
आपका पेट सिर्फ खाना पचाने का काम नहीं करता, बल्कि आपकी संपूर्ण सेहत की नींव है। भोजन बदलें, जीवन बदल जाएगा!
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#अपेंडिक्सकैंसर #पेटकीसेहत #पाचनतंत्र

13/08/2025

🫴"युवा – ऊर्जा से बीमारी तक का सफर"

आज का भारतीय युवा प्रतिभा, मेहनत और नवाचार के दम पर विश्व में अपनी पहचान बना रहा है। विज्ञान, तकनीक, खेल, कला—हर क्षेत्र में हमारी युवा पीढ़ी लहरें पैदा कर रही है। लेकिन इस चमकदार तस्वीर के पीछे एक सच्चाई है जो उतनी ही गंभीर और चिंताजनक है—तेज़ रफ्तार जीवनशैली, अनियमित दिनचर्या, फास्टफूड और ऊर्जा के नाम पर बेवजह सप्लीमेंट्स का प्रयोग, नींद और व्यायाम की अनदेखी ने युवाओं को अकाल वृद्धावस्था की ओर धकेल दिया है।

मोटापा – बीमारियों का सबसे बड़ा दरवाज़ा*
भारत में 18 से 35 वर्ष की आयु के युवाओं में मोटापा अब ‘लाइफस्टाइल महामारी’ बन चुका है। जंकफूड, शुगर ड्रिंक्स, देर रात का खाना, और दिनभर स्क्रीन पर चिपके रहने की आदत ने न केवल शरीर का संतुलन बिगाड़ा है, बल्कि यह गंभीर बीमारियों का स्थायी निमंत्रण बन गया है। मोटापा, डायबिटीज, हाइपरटेंशन, दिल के रोग, फैटी लिवर और स्ट्रोक जैसी समस्याओं का सबसे बड़ा कारण बन चुका है।

*कम उम्र में बढ़ती ‘बुजुर्ग’ बीमारियां*
पहले जो रोग 50-60 की उम्र में होते थे, अब 25-30 की उम्र में आम हो गए हैं—उच्च रक्तचाप, कोलेस्ट्रॉल असंतुलन, थायरॉयड विकार, लिवर-किडनी की समस्याएं, यहां तक कि हृदयाघात भी। शरीर का यह समय, जब जोश और ताजगी का शिखर होना चाहिए, अब थकान, दवाइयों और जांच रिपोर्टों के बोझ से दब गया है।

*लड़कियों में बढ़ रहे हार्मोनल रोग और निसंतानता*
लड़कों के साथ साथ लड़कियों में मासिक चक्र की समस्या, गर्भाशय या अंडाशय में गांठ (PCOD), किसी विशेष कारण के बिना निसंतानता के मामले काफी बढ़ रहे हैं। जिसके मूल कारण में खराब भोजन और जीवन शैली है।

*इंश्योरेंस लिमिट बढ़ा रहे, लेकिन लाइफस्टाइल वैसी की वैसी*
स्वास्थ्य सुधारने की दिशा में कदम उठाने के बजाय युवा अब मेडिकल इंश्योरेंस की लिमिट बढ़ाने में ही राहत ढूंढ रहे हैं। यह मानसिकता बताती है कि हम बीमारी के इलाज के लिए तैयार हैं, लेकिन बीमारी से बचाव के लिए नहीं। बीमा की सीमा बढ़ाने से शायद खर्च कम हो जाए, लेकिन जीवन की गुणवत्ता कम होने से नहीं बचाई जा सकती।

*संघर्ष के बाद सुख की जगह अस्पताल के चक्कर*
हमारे युवा सालों तक पढ़ाई और करियर के लिए जी-जान लगाते हैं। सपनों की नौकरी, अपना घर, परिवार के साथ वक्त बिताने के दिन आने से पहले ही कई लोग अस्पतालों के चक्कर लगाने लगते हैं। 30 साल की उम्र से पहले ही ब्लड प्रेशर की दवाइयां, शुगर कंट्रोलर, कोलेस्ट्रॉल मैनेजर, और विटामिन सप्लीमेंट्स उनकी दिनचर्या का हिस्सा बन जाते हैं।

*बीमारी का असली कारण—जीवनशैली का असंतुलन*
*भोजन में गड़बड़ी:* घर के ताज़ा, संतुलित भोजन की जगह प्रोसेस्ड,पेकिंग वाले खाने और फास्टफूड का बढ़ता चलन।
*व्यायाम की कमी:* जिम के नाम पर सिर्फ फोटो पोस्ट, असल में कोई शारीरिक सक्रियता नहीं।
*नींद का त्याग:* देर रात तक जागना, मोबाइल और लैपटॉप पर समय बिताना।
*मानसिक दबाव:* सोशल मीडिया की तुलना, कॉर्पोरेट टार्गेट्स, और भविष्य की अनिश्चितता।
*सप्लीमेंट्स का अंधाधुंध प्रयोग:* बिना विशेषज्ञ सलाह के प्रोटीन, फैट बर्नर, और स्टेरॉयड का सेवन।






08/08/2025

🌿 कब्ज की दवाइयां बार-बार लेना पड़ रहा है?

❌ दवा लेने के बाद भी पेट साफ नहीं होता?
❌ कब्ज के साथ-साथ अब गैस, जलन, थकावट, सिरदर्द भी बढ़ रहे हैं?
❌ तेज दवाईयां भी नाकाम हो रही है?

👉 यह कब्ज नहीं, शरीर की स्वाभाविक प्रणाली की चेतावनी है।
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🚫 सच जानिए:
बार-बार पेट साफ करने की दवाइयां (चूर्ण, कैप्सूल, सिरप) चाहे देसी/ आयुर्वेदिक हो या एलोपैथिक, लेने से...

🔸 पाचन शक्ति नष्ट होती है
🔸 आंतें अपनी गति खो देती हैं
🔸 शरीर दवाओं पर निर्भर हो जाता है
🔸 वात, पित्त और आम दोष बढ़कर नए रोग पैदा करते हैं
शरीर में थकान, कमजोरी, वजन घटना, चिड़चिड़ापन, बिना खास परेशानी के भी बहुत रोगी अनुभव करना
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✅ इसका समाधान है:
"कब्ज दवाओं से नहीं, अग्नि और जीवनशैली को संतुलित करने से ठीक होती है।"

तत्काल राहत मत ढूंढिए, अन्यथा कोई दवाई/ चिकित्सक आपकी सहायता नहीं कर पाएगा।
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📕📓📗 आयुर्वेद की किसी संहिता में नहीं लिखा कि
"त्रिफला / हरड़ या कोई दवाई का नियमित सेवन करना चाहिए"

• आयुर्वेद सीधे तौर पर कहता है कि स्वास्थ्य रक्षा के लिए दिनचर्या (Daily schedules) ऋतुचर्या (Seasonal (Diet and life style changes) का उपयोग करना चाहिए।

• अगर तब भी कोई समस्या हो जाए तो ही दवाई लेवें।

ध्यान रखे- " आहार दवाई का काम कर सकता है
परन्तु दवाई , आहार का काम नहीं कर सकती"
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🧠 कब्ज का इलाज मल निकालना नहीं,
शरीर की मल निकालने की स्वाभाविक शक्ति लौटाना है।

🌱 जागरूक बनें, दूसरों को भी जागरूक करें।
🌿 आयुर्वेद से सहज, सुरक्षित समाधान पाएं।

#कब्ज #आयुर्वेद #आयुर्वेदिकजीवनशैली #स्वस्थभारत

06/08/2025

🛌 खर्राटे: एक नजरअंदाज की जाने वाली गंभीर समस्या, जिसे आयुर्वेद में है स्थायी समाधान 🌿

अक्सर लोग खर्राटों को एक सामान्य आदत मानकर अनदेखा कर देते हैं, जबकि यह एक गंभीर स्वास्थ्य समस्या का संकेत हो सकता है। खर्राटे लेना केवल आसपास के लोगों की नींद में खलल नहीं डालता, बल्कि स्वयं खर्राटे लेने वाले व्यक्ति के शरीर और मस्तिष्क पर भी गंभीर असर डालता है।

🔍 खर्राटे का कारण क्या है?
खर्राटे का मूल कारण वायुपथ में अवरोध है, जो सामान्यतः निम्न कारणों से होता है:

•मोटापा: गले और गर्दन के चारों ओर चर्बी जमने से श्वसन मार्ग संकुचित हो जाता है।

•नाक या गले की संरचनात्मक विकृति: जैसे नाक में हड्डी का टेढ़ापन, गले की टॉन्सिल्स का बढ़ना।

•नींद की गोलियां और अत्यधिक शराब का सेवन: ये स्नायु प्रणाली को सुस्त कर देते हैं और वायुपथ की मांसपेशियां ढीली हो जाती हैं।

•धूम्रपान: यह श्वसन नलिकाओं में सूजन पैदा करता है।

⚠️ खर्राटे से जुड़ी बीमारियाँ
लगातार खर्राटे लेने वाले लोगों में ऑक्सीजन का स्तर गिर सकता है, जिससे –

•मस्तिष्क पर असर (याददाश्त कमजोर होना, •चिड़चिड़ापन)
•हाई ब्लड प्रेशर,
•डायबिटीज,
हृदय रोग और स्लीप एपनिया जैसी जानलेवा स्थिति हो सकती है।

🌿 आयुर्वेद में समाधान
आयुर्वेद के अनुसार खर्राटे का मूल कारण दोषों का असंतुलन (विशेषतः कफ और वात) और अग्नि का मन्द होना है। उपचार के लिए रोगी की प्रकृति (प्रकृति, विकृति), नाड़ी, नींद की आदतें और आहार-विहार को ध्यान में रखते हुए उपचार किया जाता है।
•नस्य, शिरोधारा, अभ्यंग,
•कफ शामक औषधियां,
•वजन कम करने वाले आयुर्वेदिक योग,
•नींद की गुणवत्ता बढ़ाने वाली चिकित्सा
इनसे खर्राटे की समस्या को जड़ से नियंत्रित किया जा सकता है।

📌 खर्राटों को नजरअंदाज न करें। यह केवल एक आदत नहीं, एक गंभीर स्वास्थ्य संकेत है। आयुर्वेद में इसके लिए संपूर्ण और प्रकृति अनुसार समाधान उपलब्ध है।

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#खर्राटे Dhanvantri Tyagi

Address

C 841, Near Ambedkar Park, Block C, Nandgram, Ghukna
Ghaziabad
201003

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+919667102602

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