Dr.saurabh swarup

Dr.saurabh swarup consultant homoeopathic physician specialist for (joint pain and skin diseases) आयुष चिकित्सक..

adress Gorakhpur Uttar Pradesh
near Rachit hospital,khajanchi chouraha, medical Road Gorakhpur.

23/11/2025

पान मसाला, तंबाकू और गुटखा से मुँह नहीं खुल रहा है? जानिए वजह, लक्षण और होम्योपैथिक मदद

आजकल पान मसाला, तंबाकू और गुटखा सिर्फ आदत नहीं रहे ये धीरे-धीरे मुँह के अंदर ऐसे बदलाव करते हैं जो शुरू में दिखाई नहीं देते, लेकिन समय के साथ मुँह का कसाव, गालों में खिंचाव, और मुँह न खुलने जैसी गंभीर समस्या पैदा कर देते हैं। इसे मेडिकल भाषा में Oral Submucous Fibrosis (OSF) कहा जाता है। शुरुआती दिनों में लोग इसे “जलन हो रही है”, “कसाव लग रहा है” कहकर नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन बाद में यही समस्या बड़ी तकलीफ बन जाती है।

🔥 लक्षण – शरीर पहले से इशारा देता है

• मुँह खोलने में कठिनाई
• मसालेदार चीज़ों पर जलन बढ़ जाना
• गालों के अंदर खिंचाव
• गालों पर सफेद/पतली झिल्ली
• बार-बार छाले
• गला सुखना
• बोलने और चबाने में दिक्कत

ये संकेत हैं कि मुँह के अंदर फाइबर जमना शुरू हो चुका है।

⚠️ कारण – असली नुकसान कहाँ से शुरू होता है?

सुपारी (Areca Nut), तंबाकू और गुटखा मुँह के ऊतकों को सख्त बनाकर उनकी लचक कम कर देते हैं।
बार-बार चबाने से
➡️ फाइब्रस टिशू बढ़ता है
➡️ मुँह सिकुड़ने लगता है
➡️ और खाने-पीने में तकलीफ शुरू हो जाती है।

लंबे समय में इससे कैंसर का खतरा भी बढ़ जाता है। इसलिए इसे हल्के में लेना गलती है।

OSMF (मुँह न खुलने की बीमारी) में सहायक होम्योपैथिक दवाइयाँ
(केवल लक्षणों के आधार पर चयनित)

Mercurius Sol 30– मुँह में जलन, घाव, लार ज़्यादा आना, मसालेदार चीज़ें बर्दाश्त न होना
Calcarea Fluorica30 – गालों में सख्ती, फाइब्रोसिस, मुँह की लचक कम होना
Alumina30 – मुँह खोलने में बहुत कठिनाई, सूखापन और खिंचाव
Thuja30 – लंबे समय तक गुटखा/तंबाकू/सुपारी खाने से हुए टिशू डैमेज में
Hydrastis 30– लगातार जलन, लालिमा, म्यूकस मेम्ब्रेन की कमज़ोरी
Borax 30– मुँह में बहुत संवेदनशीलता, बार-बार छाले, मसाले से तेज़ जलन
Kali Muriaticum 30 – गालों के अंदर सफेद पतली परत या झिल्ली बनना
Natrum Mur 30– मुँह में सूखापन, जलन और कसावट
Phytolacca 30– गालों में रेशेदार (fibrous) बदलाव और कसाव
Graphites 30– मुँह के अंदर मोटी, सूखी त्वचा जैसी परत बनना
Carbo Veg 30– टिशू की कमज़ोरी और पुरानी जलन
Silicea 30– धीरे-धीरे बढ़ती हुई सख्ती और फाइब्रोसिस
सपोर्टिव मदर टिंचर (बाहरी/आंतरिक उपयोग)
Calendula Q → घाव भरने और जलन कम करने में
Hydrastis Q → म्यूकस मेम्ब्रेन को ताकत देने में
Berberis Aquifolium Q → टिशू की अंदरूनी सफाई में
⚠ कोई भी दवा बिना योग्य होम्योपैथिक चिकित्सक की सलाह के न लें।
सही पोटेंसी और दोहराव केवल डॉक्टर ही तय करेंगे।

सुरक्षित घरेलू उपाय

• तंबाकू, गुटखा, पान मसाला तुरंत बंद करें यही सबसे बड़ा इलाज है
• गुनगुने पानी से कुल्ला
• हल्की jaw-stretching एक्सरसाइज़ (बिना दर्द के)
• मसालेदार और बहुत गर्म खाना कम करें
• नींबू, आंवला, संतरा जैसे विटामिन-C युक्त फल लें

ये उपाय मुँह की लचक बढ़ाने और जलन कम करने में मदद करते हैं।

⭐ कब डॉक्टर से ज़रूर मिलें?

• मुँह दो उंगलियों से कम खुल रहा हो
• लगातार जलन या घाव
• खाना-बोलना मुश्किल हो
• लाल/सफेद पैच दिखें
• समस्या दिन-प्रतिदिन बढ़ रही हो

मेडिकल डिस्क्लेमर:
यह पोस्ट केवल सामान्य जानकारी के लिए है। किसी भी दवा का उपयोग करने से पहले योग्य चिकित्सक से सलाह अवश्य लें।

12/10/2025

**होम्योपैथिक औषधि – Iris Versicolor (आइरिस वर्सीकलर)

# # # 🔷 औषधीय उपयोग (Uses of Iris Versicolor)

# # # # 1️⃣ **अम्लता (Acidity) और गैस्ट्रिक समस्याएँ**

* अत्यधिक **खट्टी डकारें**, **मुंह में जलन**, और **पेट में गैस**।
* भोजन के बाद पेट और गले में **तेज जलन** महसूस होना।
* मुँह में **खट्टा पानी आना (Water brash)**।
* यह औषधि **हाइपरएसिडिटी** में अत्यंत उपयोगी है।

# # # # 2️⃣ **सिरदर्द और माइग्रेन (Headache & Migraine)**

* **पेट की गड़बड़ी या अम्लता से उत्पन्न सिरदर्द** Iris Versicolor की प्रमुख पहचान है।
* सिरदर्द के साथ **उल्टी (Vomiting)** और **धुंधलापन** महसूस होता है।
* सिरदर्द प्रायः सुबह के समय बढ़ता है और पेट साफ होने के बाद आराम मिलता है।

# # # # 3️⃣ **त्वचा विकार (Skin Diseases)**

* त्वचा पर **छालेदार फोड़े (Eruptions with burning)**, **खुजली**, और **जलन**।
* दाने निकलने के साथ **त्वचा में चुभन और गर्माहट** महसूस होना।

# # # # 4️⃣ **पित्त विकार (Bilious Complaints)**

* **पित्ताशय की अधिक क्रिया**, जिसके कारण मुँह में कड़वाहट, जीभ पर परत, और उल्टी।
* **पित्तजन्य उल्टी** (Bitter Vomiting) Iris Versicolor की मुख्य विशेषता है।

# # # # 5️⃣ **पाचन तंत्र संबंधी लक्षण**

* पेट में भारीपन और गैस के कारण बेचैनी।
* दस्त या कब्ज के साथ पेट में ऐंठन।
* मुँह में लार का अत्यधिक स्राव (Salivation)।

# # # 🔶 मानसिक लक्षण (Mind Symptoms)

* कार्यों में एकाग्रता की कमी।
* चिड़चिड़ापन और बेचैनी।
* किसी भी कार्य को अधूरा छोड़ देने की प्रवृत्ति।

# # # 🔶 जीभ और मुँह के लक्षण

* जीभ पर सफेद या पीली परत।
* मुँह में जलन और लार का बढ़ना।
* खट्टा स्वाद और मुँह से दुर्गंध।

# # # 🔶 विशेष पहचान (Keynote Symptoms)

* **Acidity से उत्पन्न सिरदर्द और उल्टी।**
* **खाने के बाद पेट और गले में जलन।**
* **मुंह में अत्यधिक लार।**
* **जलन के साथ पित्तजन्य उल्टी।**

# # # 🔶 औषधि का चयन (Modalities)

* **लक्षण बढ़ते हैं:** खाने के बाद, शाम को, मानसिक तनाव से।
* **लक्षण घटते हैं:** विश्राम करने से, पेट साफ होने पर।

# # # 🔶 शक्ति और मात्रा (Potency & Dosage)

* सामान्यतः **Iris Versicolor 30C** या **200C** शक्ति में उपयोग की जाती है।
* तीव्र अम्लता या गैस्ट्रिक समस्या में **2–3 बार प्रतिदिन 30C** दी जा सकती है।
* दीर्घकालिक रोगों में चिकित्सक की सलाह से उच्च शक्ति (200C या 1M) दी जा सकती है।

*(नोट: किसी भी होम्योपैथिक औषधि का उपयोग चिकित्सक की सलाह से ही करें।)*

# # # 🔶 समान औषधियाँ (Related Medicines)

* **Nux Vomica** – भोजन या शराब से उत्पन्न अम्लता के लिए।
* **Carbo Veg** – गैस और पेट में भारीपन के लिए।
* **Pulsatilla** – तैलीय भोजन से उत्पन्न अपच के लिए।

# # # 🔷 निष्कर्ष (Conclusion)

**Iris Versicolor** एक बहुप्रभावी होम्योपैथिक औषधि है, जो विशेष रूप से **पाचन तंत्र, अम्लता, माइग्रेन और त्वचा विकारों** में अत्यंत लाभदायक सिद्ध होती है। इसका सही प्रयोग रोगी के लक्षणों और प्रकृति के अनुसार करने पर शीघ्र लाभ मिलता है।

12/09/2025

Chelidonium Majus Q , लिवर और गॉलब्लैडर की समस्याओं के लिए जानी जाती है।

मुख्य उपयोग (Uses)

1. लिवर संबंधी रोग

फैटी लिवर

लिवर का बढ़ जाना (Hepatomegaly)

पीलिया (Jaundice)

लिवर में दर्द (दाहिने कंधे तक जाता है)

2. गॉलब्लैडर की समस्या

पित्त की कमी या ज्यादा होना

गॉलब्लैडर स्टोन

पित्त की गड़बड़ी से अपच

3. पाचन तंत्र (Digestion)

खट्टे डकार, जी मिचलाना

वसा (तेल, घी, मक्खन) खाने से तकलीफ

कब्ज के साथ मल कठोर व सूखा

4. सांस और फेफड़े

दाहिनी तरफ का फेफड़ों का रोग

दाहिनी तरफ छाती में दर्द

5. त्वचा

पीलिया की वजह से त्वचा पीली हो जाना

खुजली

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विशेष लक्षण (Keynotes)

दर्द हमेशा दाहिने कंधे के नीचे तक फैलता है।

गर्म पेय पदार्थ (Hot drinks) लेने से आराम मिलता है।

रोगी बहुत थका हुआ और सुस्त महसूस करता है।

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सेवन विधि (Dosage)

सामान्यतः Chelidonium Majus Q की 10–15 बूंद आधा कप पानी में दिन में 2–3 बार दी जाती है।

मात्रा मरीज की उम्र, रोग की गंभीरता और डॉक्टर की सलाह पर निर्भर करती है।

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⚠️ सावधानी:

यह एक मदर टिंक्चर (Q) है, इसलिए लंबे समय तक बिना डॉक्टर की सलाह के लगातार सेवन न करें।

किसी भी गंभीर लिवर या गॉलब्लैडर की समस्या में डॉक्टर की देखरेख जरूरी है।

02/09/2025

Aletris Farinosa Q

होम्योपैथी की ये दवा महिलाओं के लिए वरदान है जी हां मैं बात करने वाला हूं " एलेटरिस फेरिनोसा Q" (मदर टिंचर) के बारे में,होम्योपैथिक की एक सीक्रेट दवा है जो महिलाओं के अनेक समस्याओं में है कारगर आये जानने का प्रयास करते हैं:-

* धात रोग/ल्यूकोरिया :- वैसे लड़की/महिलाएं जिन्हें खुन की कमी और एनिमियां कि वजह से ल्यूकोरिया होता है उन्हें ये होम्योपैथी दवा ठीक करने में सक्षम है ।

* जिन्हें मासिक धर्म में गड़बड़ी रहती है ।

*ये एक महत्वपूर्ण यूटेराईन टानिक है ।

*वैसे महिला जिन्हें बार - बार गर्भपात की समस्या होती है और बांझपन हो उन्हें भी ये होम्योपैथी दवा ठीक करने से सक्षम है।

*जिन्हें बहुत सारे बच्चे होने की वजह से गर्भाशय कमजोर हो जाती है उन्हें भी शक्ति प्रदान करता है ।

*समय से पहले मासिक धर्म का आना और साथ ही असहनीय दर्द होता है उनके लिए भी लाभदायक है ।

*यूटेराईन डिस्प्लेसमेंट और प्रोलेप्स होने के साथ दाहिनी ओर दर्द हो तो उनके लिए भी लाभदायक है ।

*महिलाओं में पेट संबंधी समस्या के साथ अगर गर्भाशय का विकार रहता है तो उसके लिए भी लाभदायक है ।

*गर्भावस्था के दौरान उल्टी और मिचली आता है इसके प्रयोग से कम किया जा सकता है ।

ये सिर्फ आपके जानकारी हेतु हमने साझा किया है अगर इस तरह के समस्या हो तो अपने नजदीक में होम्योपैथी चिकित्सक से संपर्क करें या आप हमसे भी जानकारी हेतु संपर्क कर सकते हैं 💓 🤗 👏

बहुत बहुत धन्यवाद
डॉ सौरभ स्वरुप

Mosquito bites..
30/08/2025

Mosquito bites..

ज़ैंथेलास्मा आमतौर पर निम्नलिखित कारणों से होता है :उच्च कोलेस्ट्रॉल स्तर : निम्न घनत्व वाले लिपोप्रोटीन (एलडीएल) कोलेस्...
09/05/2025

ज़ैंथेलास्मा आमतौर पर निम्नलिखित कारणों से होता है :
उच्च कोलेस्ट्रॉल स्तर : निम्न घनत्व वाले लिपोप्रोटीन (एलडीएल) कोलेस्ट्रॉल या कुल कोलेस्ट्रॉल के बढ़े हुए स्तर से त्वचा के नीचे वसा जमा हो सकती है।
हाइपरलिपिडिमिया : एक ऐसी स्थिति जिसमें रक्त में वसा या लिपिड की अधिकता होती है, जो जैंथेलास्मा के निर्माण में योगदान देती है।
आनुवंशिक कारक : पारिवारिक इतिहास एक भूमिका निभाता है, क्योंकि कुछ लोगों में उच्च कोलेस्ट्रॉल के स्तर के लिए आनुवंशिक प्रवृत्ति हो सकती है, भले ही वे स्वस्थ आहार और जीवन शैली बनाए रखते हों।
यकृत की शिथिलता : यकृत वसा और कोलेस्ट्रॉल का प्रसंस्करण करता है, और यकृत के चयापचय में किसी भी प्रकार की शिथिलता से रक्तप्रवाह में कोलेस्ट्रॉल बढ़ सकता है।
मधुमेह : मधुमेह से पीड़ित लोगों में लिपिड चयापचय संबंधी विकार होने की प्रवृत्ति के कारण जैंथेलास्मा विकसित होने की संभावना अधिक होती है।
Homoeopathy में इसका इलाज है.

09/05/2025

Knee pain

घुटने के दर्द को ऐसी स्थिति के रूप में संदर्भित किया जाता है जब घुटने के जोड़ (जो चलने, दौड़ने, बैठने और खड़े होने के साथ-साथ अधिकांश शारीरिक गतिविधियों के लिए शरीर का अधिकतम भार वहन करने के लिए जिम्मेदार होते हैं) में काफी सूजन आ जाती है, जिससे विशेष क्षेत्रों या पूरे घुटने के जोड़ में तेज दर्द होता है। घुटने के जोड़ के आसपास गंभीर अकड़न भी हो सकती है जिससे काम करना बहुत मुश्किल हो सकता है।

घुटने में दर्द मोटापे, वृद्धावस्था, गठिया के विभिन्न रूपों, घुटने या संबंधित स्नायुबंधन या हड्डियों में गंभीर चोट, घुटने की टोपी की अव्यवस्था, घुटने के जोड़ के अधिक उपयोग और घुटने के जोड़ के संक्रमण के कारण हो सकता है।

घुटने के दर्द के लिए होम्योपैथिक उपचार:

होम्योपैथी चिकित्सा की सबसे लोकप्रिय समग्र प्रणालियों में से एक है। उपचार का चयन समग्र दृष्टिकोण का उपयोग करके वैयक्तिकरण और लक्षण समानता के सिद्धांत पर आधारित है। यह एकमात्र तरीका है जिसके माध्यम से रोगी को पीड़ित सभी लक्षण और संकेतों को दूर करके पूर्ण स्वास्थ्य की स्थिति प्राप्त की जा सकती है। होम्योपैथी का उद्देश्य न केवल घुटने के दर्द के लक्षण को दूर करना है, बल्कि इसके अंतर्निहित कारण को ठीक करना है। जहाँ तक चिकित्सीय दवा का सवाल है, घुटने के दर्द के लिए कई अच्छी तरह से सिद्ध दवाएँ उपलब्ध हैं जिन्हें घुटने के दर्द के कारण, स्थान, सनसनी, तौर-तरीकों और विस्तार के आधार पर चुना जा सकता है। व्यक्तिगत उपचार के चयन और उपचार के लिए, रोगी को व्यक्तिगत रूप से एक योग्य होम्योपैथिक चिकित्सक से परामर्श करना चाहिए। घुटने के दर्द के लिए प्रभावी होम्योपैथिक उपचार इस प्रकार हैं:

ब्रायोनिया एल्बा – यह होम्योपैथिक दवा चलने के दौरान घुटने के जोड़ों में तेज दर्द के लक्षणों के साथ घुटने के दर्द को ठीक करने में कारगर है। जब आप चलना या हिलना बंद कर देते हैं तो दर्द बंद हो जाता है और आपके घुटने के जोड़ों में असामान्य वृद्धि भी हो सकती है। अगर घुटने का दर्द ऑस्टियोआर्थराइटिस के कारण होता है, तो ब्रायोनिया एल्बा भी एक उपयोगी उपाय साबित हो सकता है।

रुसटॉक्स - यदि घुटने के दर्द के साथ नम मौसम में गंभीर दर्द, प्रारंभिक गतिविधि के बाद तीव्र दर्द, जो निरंतर गतिविधि में बेहतर हो जाता है, के लक्षण हैं, तो रुसटॉक्स की निर्धारित खुराक दर्द को खत्म करने में मदद कर सकती है।

कोल्चियम - यह दवा घुटने के दर्द के इलाज में उपयोगी है जो आंदोलन के कारण खराब हो जाता है और बाद में गर्म मौसम में या उचित आराम करने के बाद ठीक हो जाता है।

सिलिसिया - यह दवा घुटने के दर्द को ठीक करने में उपयोगी है, जिसमें हर समय कसकर बंधे होने की अनुभूति बनी रहती है।

लैकेसिस – अगर घुटने का दर्द रूमेटाइड अर्थराइटिस के कारण होता है, तो लैकेसिस एक प्रभावी उपचार हो सकता है। अगर दर्द के साथ प्रभावित क्षेत्र के आसपास असामान्य वृद्धि भी हो, तो लैकेसिस भी निर्धारित किया जा सकता है।

ये सामान्य रूप से इस्तेमाल किए जाने वाले होम्योपैथिक उपचारों में से कुछ हैं और इनका उल्लेख केवल घुटने के दर्द के लिए होम्योपैथिक दवाओं की प्रभावशीलता के बारे में जागरूकता पैदा करने के लिए किया गया है। किसी भी बीमारी के लिए खुद से दवा लेना उचित नहीं है। यदि आप किसी विशिष्ट समस्या के बारे में चर्चा करना चाहते हैं, तो आप एक निःशुल्क प्रश्न पूछ सकते हैं।

29/03/2025
Rheumatism : BRYONIA, PULSATILLA, RHUS TOX, Bell, Causticum, Lyco, Merc, Phyto, SulphMental symptoms with : CimicifugaUr...
22/03/2025

Rheumatism :

BRYONIA, PULSATILLA, RHUS TOX, Bell, Causticum, Lyco, Merc, Phyto, Sulph

Mental symptoms with : Cimicifuga

Urinary symptoms with : Benzoic acid

Asthma with : Benzoic acid

Cold amel : Ledum, Puls

Hot weather, heat agg : Colchicum, Kali bi, Kali-s, Rhod

Inability to move limbs : Abrotanum

Recurrent : Nat sulph, Senecio

Tonsilitis after : Echinecea, Guai, Lach, Phyto

Kidney affections with : Radium brom, Terebinth

Diarrhoea with : Strontia carb

Dyspepsia with : Nat carb

Eruptions with : Dulcamara

Hives with : Urtica urens

Chronic , rigidity with : Oleum jac

शरीर में जिस स्थान पर दो हड्डियां आपस में मिलती हैं, उसे हड्डियों का जोड़ कहते हैं। जोड़ों में दर्द विभिन्न कारणों से हो...
21/03/2025

शरीर में जिस स्थान पर दो हड्डियां आपस में मिलती हैं, उसे हड्डियों का जोड़ कहते हैं। जोड़ों में दर्द विभिन्न कारणों से हो सकता है। इसमें हड्डी की चोट जैसे फ्रैक्चर हड्डियों को प्रभावित करने वाले रोग जैसे गठिया, ऑस्टियोआर्थराइटिस, गाउट, सेप्टिक आर्थराइटिस और टेंडिनाइटिस, हड्डियों को प्रभावित करने वाली ऑटोइम्यून स्थिति जैसे ल्यूपस व रूमेटाइड आर्थराइटिस शामिल हैं। इसके अलावा हड्डियों पर जरूरत से ज्यादा जोर पड़ने या फैलाव के कारण मोच और खिंचाव से भी जोड़ों में दर्द की समस्या हो सकती है।

यह दर्द एक या एक से अधिक जोड़ों में हो सकता है। अक्सर यह किसी सूजन, कमजोरी, जोड़ों में लालिमा और चलने के दौरान असुविधा के साथ जुड़ा होता है।

जोड़ों के दर्द के लिए प्रमाणित उपचारों में नॉन-स्टेरायडल एंटी इंफ्लेमटरी ड्रग्स और एंटीबायोटिक शामिल हैं। जोड़ों के दर्द से राहत पाने के लिए दवाओं के साथ फिजिकल थेरेपी की भी सलाह दी जाती है।

जोड़ों में दर्द के होम्योपैथिक उपचार का उद्देश्य सूजन और बेचैनी को कम करने के साथ स्थिति के अंतर्निहित कारणों का भी इलाज करना है। होम्योपैथिक डॉक्टर किसी उपाय को निर्धारित करने से पहले रोग के लक्षणों के साथ व्यक्ति की मानसिक, शारीरिक स्थिति और बीमारी की प्रवृत्ति पर भी विचार करते हैं। यही कारण है कि होम्योपैथिक उपचार एक जैसी बीमारी वाले व्यक्तियों में एक जैसा असर नहीं करता है।

यहां कुछ होम्योपैथिक उपचार के बारे में बताया जा रहा है, जो जोड़ों के दर्द के इलाज के लिए उपयोग में लाए जाते हैं - अर्निका मोंटाना, रस टॉक्सोडेन्ड्रॉन, ब्रायोनिया एल्बा, कैल्केरिया फॉस्फोरिका, लेडम पल्स्ट्रे, रूटा ग्रेवोलेंस, बेलाडोना, मर्क्यूरियस सॉलबिलिस और कोलकिकम औटुम्नाले।

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