23/11/2025
एक छोटी सी कहानी – ठंड में बुज़ुर्गों की सुरक्षा
(OPD में Dr. Anurag Shukla एक बुज़ुर्ग मरीज और उसके परिवार को समझाते हुए)
OPD में एक दिन 70 वर्षीय रामलाल जी आए। उनके साथ उनकी बेटी थी। रामलाल जी की नाक बह रही थी, हल्की खांसी थी और ठंड से पूरा शरीर कांप रहा था।
मैंने मुस्कुराकर कहा –
“रामलाल जी, आज मैं आपको एक कहानी सुनाता हूँ… और इसी में आपका इलाज भी छिपा है।”
कहानी – “ठंड का पहरा और दादी की समझदारी”
एक छोटे गाँव में शांता दादी रहती थीं – 75 साल की, लेकिन दिल से बहुत मजबूत। एक बार बहुत कड़ाके की ठंड पड़ी। गाँव में सब लोग परेशान थे।
दादी ने अपने पोते को बुलाकर कहा –
“ठंड ऐसी चीज़ है, जो दरवाज़े से नहीं, लापरवाही से घर में घुसती है।”
पोते ने पूछा – “दादी इसका क्या मतलब?”
दादी बोलीं –
“अगर हम गर्म कपड़े नहीं पहनेंगे, समय पर पानी नहीं पीएंगे, दवाई छूटेगी या शरीर को गर्म नहीं रखेंगे… तो ठंड हमारे शरीर पर हमला कर देती है—खांसी, जुकाम, सांस फूलना, BP बढ़ना सब शुरू।”
फिर दादी ने अपने लिए 5 नियम बनाए—और उसी से वह पूरी सर्दी बिल्कुल स्वस्थ रहीं:
दादी के 5 नियम – बुज़ुर्गों को ठंड में ऐसे बचना है
1. कपड़े परतों में पहनना (Layering)
गरम अंदरूनी बनियान
स्वेटर/कोट
मोज़े–टोपी–मफलर
“कान और पैर ठंड पकड़ते हैं—इन्हें हमेशा ढककर रखना।”
2. सुबह जल्दी बाहर न निकलना
दादी हमेशा धूप निकलने के बाद ही बाहर निकलती थीं।
“सुबह की ठिठुरन बुज़ुर्गों के लिए सबसे बड़ा दुश्मन।”
3. गुनगुना पानी पीना
ठंड में प्यास कम लगती है, पर शरीर को पानी चाहिए।
दादी हर 2–3 घंटे में एक कप हल्का गुनगुना पानी पीती थीं।
4. सांस–दिल की दवाई कभी नहीं छोड़नी
दादी कहती थीं:
“दर्द–सांस–शुगर–BP की दवाइयाँ ठंड में और भी जरूरी हैं।”
इन्हें छोड़ने से ही ज्यादातर लोग अस्पताल पहुँचते हैं।
5. कमरे को गरम रखना, लेकिन धुआँ नहीं
दादी अंगीठी नहीं जलाती थीं क्योंकि धुआँ फेफड़ों को खराब करता है।
बस खिड़की बंद करके कमरे को ड्राफ्ट-फ्री रखती थीं।
जहाँ गैस हीटर हों वहाँ वेंटिलेशन जरूरी है।
दादी की सीख
सर्दी की सबसे बड़ी दवा है –
गर्मी + पानी + नियमित दवाई + सावधानी।
अब वापस OPD में…
मैंने रामलाल जी से कहा—
“अगर आप भी दादी की तरह इन 5 नियमों को अपनाएँगे, तो ठंड चाहें कितनी भी बड़ी हो, आपका शरीर मजबूत रहेगा। मैं आपकी दवा लिख रहा हूँ—गर्म कपड़े, गर्म पानी और समय पर दवा… यही आपकी सबसे जरूरी थेरेपी है।”
रामलाल जी ने मुस्कुरा कर कहा—
“डॉक्टर साहब, ये कहानी तो घर जाकर सबको सुनाऊँगा।”