12/11/2018
खतरनाक है खर्राटे वालीनींद
सोते वक्त खर्राटे लेने को आम तौर पर एक स्वाभाविक प्रक्रिया माना जाता है. लेकिनहकीकत इससे उलट है. यह श्वसन प्रक्रिया में अवरोध का परिणाम है. खर्राटा अपनेआप में तो खतरनाक है ही, साथ ही यह कई गंभीर बीमारियों व समस्याओं काकारण भी है. यह लाइलाज नहीं है. क्या आपको सोते वक्त जोर-जोर से खर्राटे आतेहैं? खर्राटे इतने तेज होते हैं कि आसपास के लोगों की नींद टूट जाती है? खर्राटे केदौरान आपका मुंह खुला होता है और मुंह से लार गिरती है? आप रात में बार-बारपेशाब करने उठते हैं? सुबह सो कर उठने के बाद सिर भारी-भारी लगता है अथवासिर में दर्द होता है? सुबह उठने पर ताजगी महसूस नहीं होती? दोबारा सोने कीइच्छा होती है? दिन भर सुस्ती छायी रहती है? दिन में ज्यादा नींद आती है? काम केदौरान, टेलीविजन देखते हुए अथवा वाहन चलाते हुए नींद आ जाती है? बीच-बीच मेंमन चिड़चिड़ा हो जाता है? याददाश्त में कमी महसूस हो रही है यानी कुछ छोटी-छोटी बातें भूल जा रहे हैं? अचानक ब्लड प्रेशर बढ़ जा रहा है? एकाग्रता में कमीमहसूस कर रहे हैं? डिप्रेशन व कमजोरी महसूस कर रहे हैं? यदि हां, तो फिर आपऑब्स्ट्रक्टिव स्लीप एप्निया (ओएसए) से पीड़ित हैं. ऑक्सीजन की कमी ओएसए कीसमस्या रात को नींद के दौरान होती है. ओएसए यानी आम भाषा में खर्राटे कीसमस्या. नींद के दौरान सांस में अवरोध की बीमारी. वैसे तो ओएसए एक आमबीमारी है, लेकिन इसके परिणाम बेहद खतरनाक, कई असाध्य रोगों को जन्मदेनेवाला और जानलेवा है. खास तौर से भारत में, जहां हम आम तौर पर खर्राटे कोकोई बीमारी नहीं मानते. खर्राटे को सोते वक्त एक स्वभाविक प्रक्रिया मानते हैं. सचतो यह है कि इसकी वजह से सोते समय व्यक्ति की सांस कुछ सेकेंड के लिए सैकड़ोंबार रुक जाती हैं. पुन: जब सांस आती है, तो आवाज काफी जोरदार होती है, जोआस-पास सो रहे व्यक्ति को डरा देती है. सांस रुकने की यह अवधि एक सेकेंड सेएक मिनट तक हो सकती है. श्वसन क्रि या में आने वाले इस अंतर यानी सांस के इसतरह रुकने और फिर वापस आने को एप्निया कहा जाता है. समय पर इसका इलाजनहीं करवाने की दशा में यह बीमारी और गंभीर होती जाती है यानी सांस रुकने कीअवधि बढ़ती जाती है और फिर एक वक्त ऐसा आता है, जब व्यक्ति की मौत तक होसकती है. इस बीमारी से मौत की गंभीर स्थिति को छोड़ दें, तो इससे रात को सोतेवक्त शरीर में ऑक्सीजन