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15/01/2026
09/01/2026

बच्चों में दिल की बीमारी के दौरान सावधानियाँ

डॉक्टर की सलाह का पालन करें: दवाइयां और इलाज डॉक्टर के निर्देशानुसार ही लें, खुद से बदलाव न करें।

अत्यधिक शारीरिक श्रम से बचाएं: बच्चे को ज़्यादा थकाने वाले खेल या काम करने से रोकें।

संतुलित आहार दें: जंक फूड, तैलीय और अधिक नमक वाला खाना न दें।

नियमित जांच कराएं: समय-समय पर डॉक्टर के पास जाकर स्वास्थ्य की जांच कराते रहें।

संक्रमण से बचाव: बच्चे को सर्दी, खांसी या अन्य संक्रमण से बचाएं क्योंकि ये दिल की बीमारी को बढ़ा सकते हैं।

तनाव कम करें: बच्चे को मानसिक तनाव या अकेलापन महसूस न होने दें।

धूम्रपान और प्रदूषण से दूर रखें: बच्चे को धुएं वाले वातावरण से बचाएं।

इमरजेंसी स्थिति में तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें: अगर बच्चे को सांस लेने में ज्यादा दिक्कत, तेज बुखार या नीला पड़ना हो तो तुरंत मेडिकल मदद लें।

इन सावधानियों से बच्चे की सेहत बेहतर बनी रहती है और दिल की बीमारी नियंत्रित रहती है।

09/01/2026

बच्चों में दिल की बीमारी का इलाज

बच्चों की दिल की बीमारियों का इलाज उनकी बीमारी के प्रकार और गंभीरता पर निर्भर करता है। कुछ मुख्य इलाज के तरीके इस प्रकार हैं:

दवाइयाँ: डॉक्टर दिल की धड़कन नियंत्रित करने, ब्लड प्रेशर कम करने या अन्य समस्याओं के लिए दवाइयां दे सकते हैं।

योग और व्यायाम: हल्का-फुल्का व्यायाम और योग बच्चों के दिल को मजबूत करने में मदद करते हैं।

सर्जरी: कुछ मामलों में हार्ट सर्जरी की जरूरत पड़ सकती है, खासकर जब जन्मजात दोष हों।

डाइट और जीवनशैली: संतुलित आहार, पर्याप्त नींद और तनाव मुक्त जीवन दिल की बीमारी के इलाज का हिस्सा होते हैं।

नियमित जांच: बीमारी की निगरानी के लिए डॉक्टर के पास नियमित चेकअप जरूरी हैं।

समय पर सही इलाज और देखभाल से बच्चे स्वस्थ और खुशहाल जीवन जी सकते हैं।

09/01/2026

बच्चों में दिल की बीमारी के लक्षण

बच्चों में दिल की बीमारी के कुछ आम लक्षण होते हैं जिन्हें पहचानना जरूरी है:

सांस लेने में कठिनाई: बच्चे को चलने-फिरने या खेलते समय जल्दी सांस फूलना।

नीला या धूसर रंग: होंठ, उंगलियों या त्वचा का नीला या धूसर होना (नीलापन)।

जल्दी थकान: सामान्य गतिविधियों में भी बच्चे का जल्दी थक जाना।

भोजन कम करना: बच्चे का खाना खाने में मन न लगना या जल्दी भूख खत्म होना।

हृदय की अनियमित धड़कन: दिल की धड़कन का तेज, धीमा या अनियमित होना।

सूजन: हाथ, पैर या पेट में सूजन आना।

वजन न बढ़ना: बच्चे का वजन ठीक से न बढ़ना या कम होना।

अगर ये लक्षण दिखें तो तुरंत डॉक्टर से जांच कराना जरूरी है ताकि सही इलाज शुरू किया जा सके।

08/01/2026

छोटे बच्चों को दिल की बीमारी से बचाने के उपाय

संतुलित और पौष्टिक आहार: छोटे बच्चों को ताजे फल, सब्जियां, दूध, दालें और हल्का खाना दें। जंक फूड और ज्यादा तैलीय खाने से बचाएं।

खेल-कूद और सक्रियता: बच्चों को रोज थोड़ा-बहुत खेलना चाहिए जैसे दौड़ना, कूदना, चलना। इससे उनका दिल और शरीर दोनों मजबूत होते हैं।

तनाव मुक्त माहौल: बच्चों को प्यार और ध्यान दें ताकि वे खुश रहें और तनाव न लें।

स्वच्छता और स्वास्थ्य जांच: बच्चों को साफ-सुथरा रखें और समय-समय पर डॉक्टर से जांच करवाएं।

धूम्रपान से बचाव: बच्चों को धूम्रपान या प्रदूषित हवा से दूर रखें।

नींद पूरी करें: छोटे बच्चों को पर्याप्त और आरामदायक नींद जरूर मिले।

इन आदतों से छोटे बच्चों का दिल स्वस्थ रहेगा और वे बीमारियों से दूर रहेंगे।

08/01/2026

अकेलापन और बच्चों में दिल की बीमारी

अकेलापन या अकेलेपन का अनुभव बच्चों के मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य पर असर डाल सकता है। जब बच्चे अकेलापन महसूस करते हैं, तो उनमें तनाव, उदासी और चिंता बढ़ सकती है। ये मानसिक परेशानियां दिल की सेहत पर भी बुरा प्रभाव डाल सकती हैं।

तनाव और अकेलापन हृदय गति बढ़ा सकते हैं और ब्लड प्रेशर को असंतुलित कर सकते हैं, जिससे दिल की बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। इसलिए बच्चों के लिए जरूरी है कि वे परिवार और दोस्तों के साथ जुड़ाव महसूस करें, प्यार और समर्थन पाएं।

अच्छा परिवारिक माहौल, प्यार, और योग-ध्यान बच्चों के दिल को स्वस्थ रखने में मदद करते हैं और अकेलेपन से होने वाले नकारात्मक असर को कम करते हैं।

08/01/2026

बच्चों, दिल की बीमारी और फास्ट फूड

फास्ट फूड में अधिक तला-भुना, मसालेदार और तेल वाला खाना होता है, जो बच्चों के दिल के लिए हानिकारक हो सकता है। अगर बच्चे ज्यादा फास्ट फूड खाते हैं तो उनके शरीर में खराब कोलेस्ट्रॉल बढ़ता है, जिससे दिल की धमनियां ब्लॉक हो सकती हैं और दिल की बीमारी का खतरा बढ़ जाता है।

फास्ट फूड से वजन भी बढ़ता है, जिससे दिल पर दबाव पड़ता है और बच्चों में हाई ब्लड प्रेशर जैसी समस्याएं हो सकती हैं। इसलिए दिल की बीमारी से बचाव के लिए बच्चों को फास्ट फूड कम देना चाहिए और ताजा, पौष्टिक भोजन देना चाहिए। स्वस्थ खाना और योग-व्यायाम से बच्चों का दिल मजबूत रहता है।

08/01/2026

बच्चों की दिल की बीमारी में आहार

दिल की बीमारी वाले बच्चों के लिए सही आहार बहुत जरूरी होता है। ऐसे बच्चों को तैलीय, जंक फूड और ज्यादा मीठा खाने से बचाना चाहिए। उन्हें फल, सब्जियां, साबुत अनाज, और प्रोटीन युक्त भोजन जैसे दाल, दूध, और अंडे देना चाहिए।

नमक का सेवन कम करना चाहिए ताकि ब्लड प्रेशर नियंत्रित रहे। ताजे फलों का जूस और पर्याप्त पानी देना भी जरूरी है। सही आहार से बच्चों का दिल मजबूत रहता है और उनकी सेहत अच्छी बनी रहती है। साथ ही, डॉक्टर या न्यूट्रीशनिस्ट की सलाह लेकर डाइट प्लान बनाना बेहतर होता है।

08/01/2026

बच्चों के दिल की बीमारी में योग के लाभ

योग बच्चों के दिल को स्वस्थ रखने में बहुत मददगार होता है। दिल की बीमारियों से बचाव और इलाज में योग का अभ्यास फायदेमंद होता है क्योंकि यह बच्चे के शरीर और मन दोनों को मजबूत करता है। योग से बच्चों का दिल बेहतर ढंग से काम करता है, उनका रक्त संचार सुधरता है, और शरीर में ऑक्सीजन की आपूर्ति बढ़ती है।

प्राणायाम और ध्यान से बच्चों का तनाव कम होता है, जिससे दिल पर दबाव नहीं पड़ता। हल्के योगासन बच्चों की मांसपेशियों को मजबूत करते हैं और दिल की धड़कन को नियमित रखते हैं। इसके अलावा, योग बच्चों की रोग-प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाकर दिल से जुड़ी कई समस्याओं को दूर रखता है।

इसलिए, बच्चों के दिल की सेहत के लिए योग एक सरल और प्राकृतिक तरीका है जो उन्हें मजबूत और स्वस्थ बनाता है।

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