Swasthyam Wellness center

Swasthyam Wellness center Providing Specialist Ayurveda services in multiple cities, Telemedicine for remote areas of India

01/12/2025
01/12/2025

बवासीर शर्म का कारण नहीं है। यह किसी भी आयु के महिला पुरुष को हो सकता है। जांच कराएं और सही इलाज पाएं।
काल करें 074091 59309

02/11/2025

धुएं युक्त कोहरे (स्मॉग) से बचाव करें।

01/11/2025

गंभीर रोगों से बचाव बहुत आसान है। गंभीर रोगों का इलाज बहुत मुश्किल। फैसला आपका कि आपको क्या चाहिए!

25/08/2025

🌿 हर सिरदर्द = माइग्रेन नहीं 🌿

❌ आम धारणा:
“सिरदर्द है तो ज़रूर माइग्रेन है, और माइग्रेन तो असाध्य है।”
✔️ सच्चाई यह है कि माइग्रेन सिरदर्द का सिर्फ एक प्रकार है।

👉 इंटरनेट और आम जानकारी के चलते माइग्रेन को भाग्य का खेल मान लिया जाता है।
👉 बहुत से डॉक्टर भी समय की कमी से सिरदर्द के हर पुराने रोगी को माइग्रेन कहकर शांत कर देते हैं।
👉 इससे मरीज वर्षों तक दवा लेते रहते हैं, जबकि उनका सिरदर्द वास्तव में किसी और कारण से होता है और सही इलाज से पूरी तरह ठीक हो सकता है।
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🧠 सिरदर्द के संभावित कारण (माइग्रेन से अलग)

1️⃣ नेत्र संबंधी कारण
•आँखों की कमजोरी (चश्मे की ज़रूरत)
•लगातार मोबाइल / लैपटॉप स्क्रीन का उपयोग
•तेज़ रोशनी या कम रोशनी में काम
2️⃣ पाचन व जठराग्नि विकार
•अम्लपित्त (Acidity, GERD)
•कब्ज़ या पाचन खराब होना
•अधिक खट्टा, मसालेदार, फास्टफूड का सेवन
3️⃣ मानसिक कारण
•तनाव, चिंता, डिप्रेशन
•नींद पूरी न होना
•अत्यधिक मानसिक कार्य / परीक्षा का दबाव
4️⃣ साइनस और श्वसन कारण
•साइनसाइटिस (नाक और माथे की साइनस गुफ़ाओं में सूजन)
•बार-बार जुकाम / एलर्जी
•धूल, धुआँ, प्रदूषण का प्रभाव
5️⃣ रक्तचाप और हृदय संबंधी कारण
•हाई BP या लो BP
•अचानक रक्त प्रवाह में बदलाव
6️⃣ हार्मोनल और महिलाओं से जुड़े कारण
•मासिक धर्म से पहले या बाद का हार्मोनल असंतुलन
•थायरॉइड समस्याएँ
•गर्भावस्था / रजोनिवृत्ति काल
7️⃣ गर्दन और रीढ़ में समस्या होना
•Cervical Spondylosis
•लंबे समय तक कंप्यूटर पर बैठना
•गलत मुद्रा (Posture)
8️⃣ जीवनशैली संबंधी कारण
•देर रात तक जागना
•अनियमित खानपान, भोजन छोड़ना
•अधिक चाय, कॉफी, शराब या धूम्रपान
9️⃣ अन्य कारण
•दाँत, कान या गले के रोग
•मौसम परिवर्तन (गर्मी से ठंड या ठंड से गर्मी)
•अधिक देर तक भूखे रहने से

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🌿 आयुर्वेदिक दृष्टिकोण

आयुर्वेद के अनुसार सिरदर्द कई प्रकार का होता है:

•वातज शिरःशूल – तनाव, कब्ज़, थकान से उत्पन्न
•पित्तज शिरःशूल – तेज़ धूप, गुस्सा, खट्टा-तीक्ष्ण आहार से
•कफज शिरःशूल – सर्दी-जुकाम, भारीपन, सर्द मौसम से
•अर्धावभेदी शिरःशूल (माइग्रेन जैसा) – एक तरफ़ का दर्द, जी मिचलाना, प्रकाश असहनीय

👉 प्रत्येक सिरदर्द का निदान दोष के आधार पर करना आवश्यक है।
👉 उचित परहेज़ (पथ्य-अपथ्य), जीवनशैली सुधार और आयुर्वेदिक औषधियों से स्थायी राहत संभव है।
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✅ मरीज के लिए सुझाव
•हर सिरदर्द को माइग्रेन न मानें
•आँखों और BP की जाँच कराएँ
•नींद और भोजन की दिनचर्या सुधारें
•तनाव को कम करने के उपाय अपनाएँ
•तुरंत दर्दनिवारक दवाओं पर निर्भर न रहें, कारण जानें
•आयुर्वेदिक चिकित्सक से दोष-धातु-मल-अग्नि की जाँच करवाएँ
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📌 निष्कर्ष
•हर सिरदर्द माइग्रेन नहीं है।
•सही कारण की पहचान और उचित चिकित्सा से सिरदर्द का स्थायी समाधान संभव है।
•अज्ञान और नाम के भ्रम से वर्षों तक पीड़ा सहना पड़ सकता है।
#सिरदर्द #माइग्रेन #आयुर्वेद #सहीजानकारी

14/08/2025

चाहे कैंसर हो या सामान्य पेट दर्द – खराब भोजन शैली ही सबसे बड़ा कारण
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🧬 नवीनतम शोध चौंकाने वाला है!
30–40 वर्ष की उम्र के युवाओं में अपेंडिक्स कैंसर और गंभीर पाचन रोगों के मामले चार गुना तक बढ़ चुके हैं। आधुनिक जीवनशैली में प्रोसेस्ड फूड, तैलीय-मीठे स्नैक्स, परिष्कृत आटा, और कोल्ड ड्रिंक्स रोज़मर्रा का हिस्सा बन गए हैं।

🔍 वैज्ञानिक दृष्टिकोण से कारण:
•प्रोसेस्ड फूड में मौजूद नाइट्रेट्स, प्रिज़र्वेटिव्स आंतों की कोशिकाओं में डीएनए क्षति कर सकते हैं।
•कम फाइबर वाला भोजन आंतों की गतिशीलता (motility) घटाता है, जिससे अपेंडिक्स और कोलन में सूजन की संभावना बढ़ती है।
•अत्यधिक शुगर और ट्रांस-फैट सूजन (inflammation) को ट्रिगर कर दीर्घकालिक रोगों का आधार बनाते हैं।
•बार-बार अनहाइजीनिक स्ट्रीट फूड और देर रात भोजन, आंतों की माइक्रोबायोटा को असंतुलित करते हैं।

⚠️ समस्या यह है कि शुरुआती स्टेज में लक्षण साधारण लगते हैं – हल्का पेट दर्द, गैस, या एसिडिटी – परंतु देर होने पर यह जानलेवा रूप ले सकता है।

🌿 आयुर्वेद की दृष्टि से:

•अतिशय गुरु, तैलीय, अपक्व एवं विरुद्ध आहार आम का निर्माण कर अग्नि को मंद कर देता है।
•आम आंतों में रुककर वात-पित्त-कफ विकृति उत्पन्न करता है, जो धीरे-धीरे विद्रधि (सूजन/गांठ) या कैंसर में परिवर्तित हो सकता है।
•ऋतु और प्रकृति अनुसार भोजन, समय पर भोजन, और पथ्य-अपथ्य का पालन ही स्थायी बचाव है।

✅ बचाव के उपाय:
•ताज़ा, घर का बना, ऋतु अनुसार भोजन लें।
•रोज़ाना कम से कम 30–40 मिनट पैदल चलें या व्यायाम करें।
•जंक फूड, पैकेट स्नैक्स, कोल्ड ड्रिंक्स, और बार-बार तला भोजन से दूरी रखें।
•हर 6–12 माह में पाचन स्वास्थ्य की जांच करवाएं।
•पेट दर्द, लगातार गैस, या भूख में बदलाव को नज़रअंदाज़ न करें।
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📢 संदेश:
आपका पेट सिर्फ खाना पचाने का काम नहीं करता, बल्कि आपकी संपूर्ण सेहत की नींव है। भोजन बदलें, जीवन बदल जाएगा!
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#अपेंडिक्सकैंसर #पेटकीसेहत #पाचनतंत्र

08/08/2025

🌿 कब्ज की दवाइयां बार-बार लेना पड़ रहा है?

❌ दवा लेने के बाद भी पेट साफ नहीं होता?
❌ कब्ज के साथ-साथ अब गैस, जलन, थकावट, सिरदर्द भी बढ़ रहे हैं?
❌ तेज दवाईयां भी नाकाम हो रही है?

👉 यह कब्ज नहीं, शरीर की स्वाभाविक प्रणाली की चेतावनी है।
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🚫 सच जानिए:
बार-बार पेट साफ करने की दवाइयां (चूर्ण, कैप्सूल, सिरप) चाहे देसी/ आयुर्वेदिक हो या एलोपैथिक, लेने से...

🔸 पाचन शक्ति नष्ट होती है
🔸 आंतें अपनी गति खो देती हैं
🔸 शरीर दवाओं पर निर्भर हो जाता है
🔸 वात, पित्त और आम दोष बढ़कर नए रोग पैदा करते हैं
शरीर में थकान, कमजोरी, वजन घटना, चिड़चिड़ापन, बिना खास परेशानी के भी बहुत रोगी अनुभव करना
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✅ इसका समाधान है:
"कब्ज दवाओं से नहीं, अग्नि और जीवनशैली को संतुलित करने से ठीक होती है।"

तत्काल राहत मत ढूंढिए, अन्यथा कोई दवाई/ चिकित्सक आपकी सहायता नहीं कर पाएगा।
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📕📓📗 आयुर्वेद की किसी संहिता में नहीं लिखा कि
"त्रिफला / हरड़ या कोई दवाई का नियमित सेवन करना चाहिए"

• आयुर्वेद सीधे तौर पर कहता है कि स्वास्थ्य रक्षा के लिए दिनचर्या (Daily schedules) ऋतुचर्या (Seasonal (Diet and life style changes) का उपयोग करना चाहिए।

• अगर तब भी कोई समस्या हो जाए तो ही दवाई लेवें।

ध्यान रखे- " आहार दवाई का काम कर सकता है
परन्तु दवाई , आहार का काम नहीं कर सकती"
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🧠 कब्ज का इलाज मल निकालना नहीं,
शरीर की मल निकालने की स्वाभाविक शक्ति लौटाना है।

🌱 जागरूक बनें, दूसरों को भी जागरूक करें।
🌿 आयुर्वेद से सहज, सुरक्षित समाधान पाएं।

#कब्ज #आयुर्वेद #आयुर्वेदिकजीवनशैली #स्वस्थभारत

06/08/2025

🛌 खर्राटे: एक नजरअंदाज की जाने वाली गंभीर समस्या, जिसे आयुर्वेद में है स्थायी समाधान 🌿

अक्सर लोग खर्राटों को एक सामान्य आदत मानकर अनदेखा कर देते हैं, जबकि यह एक गंभीर स्वास्थ्य समस्या का संकेत हो सकता है। खर्राटे लेना केवल आसपास के लोगों की नींद में खलल नहीं डालता, बल्कि स्वयं खर्राटे लेने वाले व्यक्ति के शरीर और मस्तिष्क पर भी गंभीर असर डालता है।

🔍 खर्राटे का कारण क्या है?
खर्राटे का मूल कारण वायुपथ में अवरोध है, जो सामान्यतः निम्न कारणों से होता है:

•मोटापा: गले और गर्दन के चारों ओर चर्बी जमने से श्वसन मार्ग संकुचित हो जाता है।

•नाक या गले की संरचनात्मक विकृति: जैसे नाक में हड्डी का टेढ़ापन, गले की टॉन्सिल्स का बढ़ना।

•नींद की गोलियां और अत्यधिक शराब का सेवन: ये स्नायु प्रणाली को सुस्त कर देते हैं और वायुपथ की मांसपेशियां ढीली हो जाती हैं।

•धूम्रपान: यह श्वसन नलिकाओं में सूजन पैदा करता है।

⚠️ खर्राटे से जुड़ी बीमारियाँ
लगातार खर्राटे लेने वाले लोगों में ऑक्सीजन का स्तर गिर सकता है, जिससे –

•मस्तिष्क पर असर (याददाश्त कमजोर होना, •चिड़चिड़ापन)
•हाई ब्लड प्रेशर,
•डायबिटीज,
हृदय रोग और स्लीप एपनिया जैसी जानलेवा स्थिति हो सकती है।

🌿 आयुर्वेद में समाधान
आयुर्वेद के अनुसार खर्राटे का मूल कारण दोषों का असंतुलन (विशेषतः कफ और वात) और अग्नि का मन्द होना है। उपचार के लिए रोगी की प्रकृति (प्रकृति, विकृति), नाड़ी, नींद की आदतें और आहार-विहार को ध्यान में रखते हुए उपचार किया जाता है।
•नस्य, शिरोधारा, अभ्यंग,
•कफ शामक औषधियां,
•वजन कम करने वाले आयुर्वेदिक योग,
•नींद की गुणवत्ता बढ़ाने वाली चिकित्सा
इनसे खर्राटे की समस्या को जड़ से नियंत्रित किया जा सकता है।

📌 खर्राटों को नजरअंदाज न करें। यह केवल एक आदत नहीं, एक गंभीर स्वास्थ्य संकेत है। आयुर्वेद में इसके लिए संपूर्ण और प्रकृति अनुसार समाधान उपलब्ध है।

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#खर्राटे Dhanvantri Tyagi

05/08/2025

🌿 दही: लाभ भी, हानि भी – सही समय, सही तरीका जानिए! 🥣❌

दही कब खाएं और कब बिल्कुल नहीं?

✅ लाभकारी जब:

•दिन के समय, विशेषतः दोपहर को
•बिना नमक या मसाले के, मीठा या सादा
•गरमियों में घी/गुड़/काली मिर्च मिलाकर
•छाछ या मट्ठे के रूप में पतला करके

🚫 हानिकारक जब:

•रात के समय दही सेवन करने से कफ बढ़ता है
•गर्मियों में नियमित रूप से दही खाना फैटी लिवर, पाचन दोष बढ़ा सकता है
•नमक, मिर्च, मसाला मिलाकर दही खाने से त्वचा रोग, वजन बढ़ना, बुखार जैसी समस्याएं हो सकती हैं

🩺 इन रोगों में दही खाना मना है (जब तक रोग पूरी तरह ठीक न हो जाए):

•मोटापा (Obesity)
•एसिडिटी (Acidity)
•पाइल्स (Arsha/अर्श)
•सिरदर्द (Chronic Headache/Migraine)

⚠️ दही किन चीजों के साथ न खाएं:

मछली 🐟, प्याज़ 🧅, उड़द दाल, नमक, कटहल, मूली
गर्म तासीर की चीज़ों जैसे मीट, शराब, तीखे मसाले युक्त किसी भी पदार्थ के साथ दही का सेवन रोगकारक है।

🌸 दही किनके साथ खाएं:

सादा चावल 🍚 के साथ, दही में शक्कर या मिश्री मिलाकर ऐसे ही, त्रिकटु चूर्ण या काली मिर्च के साथ ऐसे ही।

🕉️ आयुर्वेद के अनुसार:
"रात्रौ दधि निषिद्धम्" – रात को दही वर्जित है।
"दधि दोषप्रदं तिक्तं, कफवर्धि गुरु स्मृतम्।"

❄️ वसंत ऋतु और शरद ऋतु में दही खाने से कफ दोष, त्वचा रोग और पित्त विकार बढ़ते हैं – इन ऋतुओं में दही का सेवन सीमित करें।
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🔎 स्वस्थ जीवन का मंत्र है सही भोजन का चयन। 👉 दही तभी लाभ देगा जब खाए सही मौसम, सही समय और सही संयोजन में।

📍Dhanvantri Ayurveda, Hapur
📞 +91 8859819975 | 🌐 www.dhanvantri.co.in
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04/08/2025

🛡️ "जब आयुर्वेद ने चीर-फाड़ नहीं, चमत्कार किया!" 🛡️ आयुर्वेदिक शल्य तंत्र: विज्ञान, विरासत और भविष्य का संगम

बहुत से लोग अब भी यह भ्रम पाले बैठे हैं कि "आयुर्वेद में सर्जरी नहीं होती!" लेकिन सत्य इसके बिल्कुल विपरीत है — आयुर्वेद विश्व की पहली चिकित्सा प्रणाली है, जिसमें सर्जरी (शल्य तंत्र) को शास्त्रबद्ध रूप से विकसित किया गया।

👉 आयुर्वेद में 300 से अधिक शल्य क्रियाएं और 120 से अधिक शल्य उपकरणों का उल्लेख है, जिनका उपयोग आज भी संशोधित रूप में किया जा रहा है।

🔬 आज आधुनिक विज्ञान फिर उन्हीं सिद्धांतों की ओर लौट रहा है। फिस्टुला (भगंदर), पाइल्स (अर्श), टॉन्सिल, नासिका विकृति, फोड़े-फुंसी, प्लास्टिक सर्जरी, बर्न इंजरी, नासूर, डायबिटिक घाव आदि में आयुर्वेद की क्षारसूत्र, अग्निकर्म, रक्तमोक्षण, जलौकावचारण जैसी विधियाँ आज की तकनीक को चुनौती दे रही हैं — कम दर्द, कम रक्तस्राव, कम पुनरावृत्ति और बेहतर रिकवरी के साथ।

💡 क्या आप जानते हैं?

> आयुर्वेदिक शल्य चिकित्सा में मरीज को कोई एलोपैथिक दवाईयों के प्रयोग के बिना भी ऑपरेशन के बाद शीघ्र आरोग्यता पाई जाती है।
"क्षारसूत्र चिकित्सा" — एक ऐसी अद्भुत विधि है, जिसे WHO तक ने स्वीकारा है और जिसे विश्वभर में a**l fistula के सर्वोत्तम इलाज के रूप में मान्यता मिल रही है।

🎯 आज आवश्यकता है — भ्रम से निकलकर भारत की परंपरा और चिकित्सा विज्ञान पर गर्व करने की!
जिस पद्धति ने दुनिया को सर्जरी का ज्ञान दिया, उसके अस्तित्व पर ही प्रश्न करना हमारी अज्ञानता है।

🔁 इस पोस्ट को ज़रूर शेयर करें — ताकि हर भारतीय को पता चले कि आयुर्वेदिक सर्जरी केवल विकल्प नहीं, अब सर्वोत्तम मार्ग है।

वैद्य धन्वंतरि त्यागी M.S general surgery आयुर्वेद

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