Consultancy Astrology,Numerology DR; Palmistry

Consultancy Astrology,Numerology DR;  Palmistry Consultancy Astrology,Numerology,Palmistry Astrology is a very old branch of human knowledge but it still has no its clear definition.

People usually have different opinions on what astrology is. Indeed, if we had subject of astrology defined and well understood we could find the role of astrology in the human world easily.

22/02/2023

सत्ती के जलने के बाद उनके चारों ओर राख ही राख फैली हुई थी सबकुछ भस्म हो गया था लेकिन वो गुलाब अब भी ज्यों का त्यों था जिसे शिव ने प्रमोद के दौरान उनके बालों में लगाया था गुलाब को देखकर शिव ने उससे कहा "तुम नहीं जले?"
गुलाब रोता हुआ बोला "हे शिव! मैं प्रेम हूँ...और प्रेम की यही सद्गति होती है कि देह के जलने के बाद भी उसे जीवित रहना पड़ता है महादेव ने उस गुलाब को उठाकर अपनी जटाओं में लगा लिया। उस विराट दुःख में भी उस गुलाब को अपनी जटाओं में लगाना श्रृंगार नहीं था बल्कि प्रेम का सम्मान था..
❤️🌹

22/02/2023

विवाह रेखा

ये रेखा छोटी उंगली के नीचे समानांतर पाई जाती है. ये रेखा जितनी साफ होगी, वैवाहिक जीवन उतना ही उत्तम होगा. अगर ये रेखा ऊपर या नीचे की तरफ जाए तो उत्तम नहीं होता है, इससे विवाह समस्या का कारण बनता है. इस रेखा का टूटा होना विवाह विच्छेद का कारण बनता है.

2. प्रेम रेखा

चंद्रमा या शुक्र पर्वत पर छोटी रेखाओं का होना प्रेम की सूचना देता है. ये विशेष रूप से गुलाबी हो तो प्रेम संबंध की शुरुआत होती है. शुक्र जब अत्यंत उभरा हुआ हो तो प्रेम विवाह के योग बनते हैं. अगर दोनों पर्वतों पर जाल हो तो प्रेम विवाह में सफलता नहीं मिलती है

21/09/2021

गरूड़ पुराण =
के अनुसार कोई मनुष्य तन धारि जीव जब अपना वह पंचतत्व के शरीर का त्याग करता है तब मृत्यु के पश्चात मृतक व्यक्ति की आत्मा प्रेत रूप में यमलोक की यात्रा शुरू करती है। इस यात्रा के समय उस मृतक की आत्मा को उसके संतान द्वारा प्रदान किये गये पिण्डों से प्रेत योनि वाले उस आत्मा को बल मिलता है।
पितृ पक्ष या पितरपख, १६ दिन की वह अवधि (पक्ष/पख) है जिसमें हिन्दू लोग अपने पितरों को श्रद्धापूर्वक स्मरण करते हैं और उनके लिये पिण्डदान करते हैं। इसे 'सोलह श्राद्ध', 'महालय पक्ष', 'अपर पक्ष' आदि नामों से भी जाना जाता है।
=गीता जी के अध्याय ९ श्लोक २५ के अनुसार पितर पूजने वाले पितरों को, देेव पूजने वाले देवताओं को और परमात्मा को पूजने वाले परमात्मा को प्राप्त होते हैं।
अर्थात् मनुष्य को उसी की पूजा करने के लिए कहा है जिसे पाना चाहता है अर्थात समझदार इशारा समझ सकता है कि परमात्मा को पाना हीपितृपक्ष में तीन पीढ़ियों तक के पिता पक्ष के तथा तीन पीढ़ियों तक के माता पक्ष के पूर्वजों के लिए तर्पण किया जाता हैं। इन्हीं को पितर कहते हैं। दिव्य पितृ तर्पण, देव तर्पण, ऋषि तर्पण और दिव्य मनुष्य तर्पण के पश्चात् ही स्व-पितृ तर्पण किया जाता है।

21/06/2021

Ramayan Katha in Hindi: पिता दशरथ का वचन पूरा करने के लिए श्रीराम 14 वर्ष के वनवास के लिए घर से निकले तो अनुज लक्ष्मण और अर्धांगिनी सीता भी साथ गईं. इस दौरान छोटे भाई भरत और शत्रुघ्न अपनी ननिहाल में थे, लेकिन जब वे लौटे तो भाई के वियोग में उन्होंने भी राजमहल छोड़ दिया. भरत भाई की चरणपादुका रखकर नंदीग्राम के जंगल में कुटिया बनाकर तपस्वी के भेष में रहते हुए राजपाट देख रहे थे. वह यहां जमीन पर सोते थे और नदी पोखरे का पानी पीते, कंदमूल फल खाते.

इधर, तीनों भाइयों के राजमहल छोड़कर जंगल में रहने से आहत चौथे भाई शत्रुघ्न ने भी अयोध्या छोड़ने का फैसला कर लिया. बिना किसी को बताए वह नंदीग्राम में ही जाकर भाई भरत की कुटिया के बाहर तपस्वी की तरह रहने लगे. बताया जाता है कि पूरे 13 साल तक पूरी अयोध्या तो क्या खुद मां कौशल्या को भी इसकी खबर नहीं थी.

एक दिन रात के समय राजमहल की छत पर कौशल्या ने शत्रुघ्न की पत्नी श्रुतकीर्ति को अकेले टहलते देखा तो चौंक उठीं. उन्होंने तत्काल पहरेदारों के जरिए उन्हें बुलवाया. श्रुतकीर्ति के आने पर कौशल्या ने उनसे पूछा, तुम अकेले छत पर क्यों टहल रही हो, शत्रुघ्न कहां है, तो श्रुतकीर्ति ने कहा, मुझे नहीं पता माता, वह तो मुझे 13 वर्षों से कहीं नहीं दिखे हैं. यह सुनकर कौशल्या बहुत दुखी हो गईं और खुद आधी रात ही सैनिकों के साथ शत्रुघ्न को खोजने निकल पड़ीं कई जगह पूछने पर पता चला कि वह नंदीग्राम में हैं. कठिन रास्तों से होते हुए मां कौशल्या नंदीग्राम पहुंची तो वहां भरतजी कुटिया बनाकर तपस्वी के भेष में दिखे, जबकि कुटिया के बाहर बड़ी चट्टान पर अपनी बांह का तकिया बनाए शत्रुघ्नजी गहरी नींद में सोए मिले. बेटे को ऐसी हालत में देखकर मां कौशल्या द्रवित हो उठीं.

उन्होंने शत्रुघ्न को छूकर आवाज लगाई तो वो चौंक कर उठे. शत्रुघ्न ने हैरानी से पूछा, मां यहां कहां, आपने आने का कष्ट क्यों किया, मुझे ही बुला लेती. मां कौशल्या उन्हें दुलारते हुए बोलीं, क्या अपने बेटे से मिलने नहीं आ सकती, लेकिन तुम यहां क्यों सोए हो, अयोध्या में क्यों नहीं. तभी शत्रुघ्न भावुक हो उठे, उन्होंने कहा, मां बड़े भैया राम पिता का आदेश मानते हुए वन चले गए, साथ भैया लक्ष्मण और भाभी सीता भी गए अब भैया भरत भी नंदीग्राम में कुटिया बनाकर रह रहे हैं तो क्या राजमहल का ठाट बाट मेरे लिए ही था? इस पर मां कौशल्या कोई जवाब न दे सकीं।

शत्रुघ्न ने भाइयों को वन में रहते हुए खुद भी पत्नी और भोग विलासिता से दूरी बना ली थी, मगर माता कौशल्या के आदेश पर उन्हें मथुरा का राजा बनाया गया और पत्नी श्रुतकीर्ति के साथ वहां रहने का आदेश दिया गया. श्रुतकीर्ति सीता की चचेरी बहन और दशरथ के छोटे भाई राजा कुलध्वज की पुत्री थीं. इस तरह 13 वर्ष का वनवास काटकर शत्रुघ्न मथुरा के राजा बने तो शत्रुघ्न जंगल से राजकाज चलाते हुए राम के वनवास पूरे होने के बाद अयोध्या लौटे

12/12/2020

🌹श्री हरि कहते है🌹
नकारात्मक विचारों को अपने मन में प्रवेश करने की अनुमति ना दें क्योंकि ये वो झंखाड़ होती हैं जो आत्म-विश्वास कम कर देती हैं।
🌹जय श्री हरि🌹

03/12/2020

*_" इंसानियत "_*
*_बहुत बड़ा खजाना है,_*
*_उसे लिबास में नहीं_*
*_इंसान में तलाश करें.._*

*_जय श्री राधे_*
✍️

03/12/2020

🙏🏻
*कृतज्ञता कोई प्रवृति*
*या रवैया नहीं है।*

*आपको जो प्राप्त हुआ है*

*उसके एहसास से जब*
*आप अभिभूत हो जाते हैं,*

*तब आपके अन्दर से*
*जो फूट पड़ता है,*

*उसे कृतज्ञता कहते हैं।*

*🙏🏻🙏🏻*

10/11/2020

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