Royal Ayurvedic

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19/09/2022

विश्व में मुख्यतः चार प्रकार के वनस्पति तेलों का उपयोग होता है: पाम ऑइल, सूरजमुखी, सोयाबीन और कनोला तेल।

इन चारों में से पाम ऑइल की खपत विश्व में सबसे अधिक है और इसकी 90% आपूर्ति केवल दो देशों के भरोसे है - इंडोनेशिया 60% और मलेशिया 30%। ये पाम ऑइल का निर्यात करने वाले सबसे बड़े देश हैं।

आप शायद सोचेंगे कि इससे हमें क्या? हम तो पाम ऑइल का उपयोग करते नहीं!

तो जान लीजिए कि पूरी दुनिया में भारत ही पाम ऑइल खरीदने वाला सबसे बड़ा देश है।

हम जितना वनस्पति तेल अन्य देशों से खरीदते हैं, उसमें से 60% हिस्सा केवल पाम ऑइल का ही है। उसके बाद सोयाबीन का हिस्सा 25 प्रतिशत और फिर सूरजमुखी का 12 प्रतिशत है।

लेकिन भारत में अधिकांश लोगों की रसोई में तो पाम ऑइल से भोजन नहीं पकाया जाता। तो फिर इतने सारे पाम ऑइल की भारत को जरूरत क्या है?

आप अपने दैनिक जीवन में जिन वस्तुओं का उपयोग करते होंगे, उनमें से अधिकतर वस्तुओं में पाम ऑइल का उपयोग होता है। बिस्किट, चॉकलेट, केक, साबुन, शैंपू, प्रोसेस्ड फूड, नूडल्स जैसी ढेरों चीजों में पाम ऑइल है।

अब तक इस पूरी कहानी में रूस या यूक्रेन का मैंने कोई उल्लेख नहीं किया है। लेकिन अगर मैं कहूं कि रूस और यूक्रेन के युद्ध के कारण इंडोनेशिया ने पाम ऑइल के निर्यात पर प्रतिबंध लगा दिया था, तो क्या आपको यह बात तार्किक लगेगी?

रूस और यूक्रेन की लड़ाई का इंडोनेशिया से क्या संबंध है? इसे समझने के लिए हमें अन्य तीन वनस्पति तेलों के बाजार को भी समझना पड़ेगा।

सूरजमुखी के तेल का सबसे बड़ा निर्यातक देश यूक्रेन है और दूसरा बड़ा निर्यातक रूस है। विश्व में सूरजमुखी के तेल का लगभग 70% हिस्सा इन दो देशों से ही आता है।

जब रूस ने यूक्रेन के खिलाफ युद्ध छेड़ दिया, तो यूक्रेन की सरकार ने देश में आपातकाल की घोषणा कर दी और वहां से होने वाला तेल का निर्यात भी बंद हो गया। दूसरी ओर अमरीका व कुछ अन्य देशों ने रूस पर आर्थिक प्रतिबंध लगा दिए, इसलिए वहां से होने वाली बिक्री में भी कमी आई।

अगला तेल है सोयाबीन, जिसका सबसे बड़ा उत्पादक अर्जेंटीना है। वहां खराब मौसम के कारण सोयाबीन की फसल बिगड़ गई, जिससे उत्पादन में गिरावट आई। उसी प्रकार कनोला ऑइल के सबसे बड़े उत्पादक देश कनाडा में पिछले वर्ष सूखा पड़ा, जिससे इसका उत्पादन भी प्रभावित हुआ।

इसका सीधा अर्थ यह था कि पूरी दुनिया में पाम ऑइल की मांग बढ़ गई और उतनी आपूर्ति नहीं हो पा रही थी। मलेशिया में इसका उत्पादन भी कम हो गया था क्योंकि वहां जिन श्रमिकों के भरोसे यह काम चलता है, उनमें बहुत बड़ी संख्या भारत, पाकिस्तान और बांग्लादेश से गए मजदूरों की थी, जो कोविड काल में अपने देश वापस चले गए थे और 2022 तक भी मलेशिया वापस नहीं लौटे थे।

इन सब बातों के कारण पूरे विश्व में पाम ऑइल की आपूर्ति करने का सारा बोझ इंडोनेशिया पर आ गया। वहां से निर्यात में भारी वृद्धि हुई और वहां का लगभग पूरा पाम ऑइल विदेश जाने लगा।

इसका परिणाम यह हुआ कि इंडोनेशिया के लोगों को अपने उपयोग के लिए ही पाम ऑइल मिलना कठिन होने लगा और उसकी कीमत बढ़ने लगी। इंडोनेशिया में पाम ऑइल घर-घर में उपयोग किया जाता है, इसलिए वहां के करोड़ों लोगों पर इसका सीधा प्रभाव पड़ा। इस स्थिति से निपटने के लिए अप्रैल 2022 में इंडोनेशिया सरकार ने पाम ऑइल के निर्यात पर प्रतिबंध लगा दिया।

इसका सबसे ज्यादा झटका भारत को लगा क्योंकि वनस्पति तेलों की हमारी कुल खपत का 60% हिस्सा पाम ऑइल ही है। इंडोनेशिया से निर्यात बंद होने की खबर आते ही भारत में ब्रिटानिया, हिंदुस्तान लीवर जैसी कई बड़ी कंपनियों के शेयर तेजी से गिरे क्योंकि इन कंपनियों के अधिकांश उत्पादों में पाम ऑइल का उपयोग होता है। अब स्वाभाविक है कि अगर कंपनी को कच्चा माल महंगी कीमत पर मिलेगा, तो आपके लिए भी तेल, साबुन, शैंपू, बिस्किट, चॉकलेट जैसी चीजों की महंगाई भी बढ़ेगी।

फिर लगभग एक माह बाद घरेलू आपूर्ति ठीक हो जाने पर इंडोनेशिया ने निर्यात का प्रतिबंध हटा दिया। यद्यपि यह भी सच है कि वहां के किसानों और निर्यातकों ने भी इसके लिए सरकार पर दबाव बनाया था क्योंकि इससे उनका नुकसान हो रहा था।

यह पूरा उदाहरण मैंने इतने विस्तार में इसलिए बताया क्योंकि आज भी भारत में कई लोग गर्व से बताते हैं कि उन्हें राजनीति से या दुनिया भर की घटनाओं से कोई सरोकार नहीं है और वे ऐसी बेकार बातों से बिलकुल दूर रहते हैं। बहुत पढ़े लिखे या धनवान लोग केवल अपने परिवार और आमोद प्रमोद तक सीमित रहते हैं और गरीबी में जीने वाले लोग केवल अपनी दाल रोटी के बारे में सोचते हैं या महंगाई के लिए किसी न किसी को कोसते हैं। यह भी संभव है कि आप भी उनमें से एक हों!

लेकिन ऐसे लोग इस बात को नहीं समझते कि अब पूरी दुनिया हर प्रकार से एक दूसरे से पूरी तरह जुड़ चुकी है। इसलिए दुनिया के सुदूर कोने में होने वाली एक छोटी सी घटना भी आपके घर में आने वाले बिस्किट, चॉकलेट, तेल, साबुन, शैंपू जैसी ढेरों वस्तुओं की महंगाई बढ़ा सकती है।

यह ठीक है कि आप इस प्रकार की वैश्विक घटनाओं को रोक नहीं सकते,पर आपको ऐसी घटनाओं की जानकारी तो रखनी ही चाहिए, ताकि आप इनसे बचाव के लिए कुछ तैयारी कर सकें या कम से कम ऐसी घटनाओं का सही कारण ही समझ सकें।

आज इंटरनेट और मोबाइल फोन के युग में विश्व के किसी भी विषय की कोई भी जानकारी पलक झपकते ही घर बैठे बैठे प्राप्त की जा सकती है। इसके बावजूद भी यदि कोई कुएं का मेंढक बनकर बैठा रहे और बिना कुछ जाने सिर्फ दूसरों को दोष देता रहे, तो यह केवल उस व्यक्ति की मूर्खता है। आपको वैसी गलती नहीं करनी चाहिए। देश दुनिया में जो भी होता है, उसके बारे में जागरूक रहिए और हर मुद्दे की सही जानकारी रखिए ताकि अपने फायदे के लिए कोई आपको भटकाकर नुकसान में न धकेल सके। सादर!

(स्रोत: यूट्यूब व इंटरनेट)

14/09/2022

बेरोजगार युवक एक बात गांठ बांध लें...

6 महीने में आप बाइक के मैकेनिक बन सकते हो ।
6 महीने में आप कार के मैकेनिक बन सकते हो ।
6 महीने में आप साइकिल के मकैनिक बन सकते हो ।
6 महीने में आप मधुमक्खी पालन सीख सकते हो ।
6 महीने में आप दर्जी का काम सिख सकते हो ।
6 महीने में आप डेयरी फार्मिंग सीख सकते हो ।
6 महीने में आप हलवाई का काम सीख सकते हो ।
6 महीने में आप घर की इलेक्ट्रिक वायरिंग सीख सकते हो ।
6 महीने में आप घर का प्लंबर का कार्य सीख सकते हो ।
6 महीने में आप मोबाइल रिपेयरिंग सीख सकते हो ।
6 महीने में आप दरवाजे बनाना सीख सकते हो ।
6 महीने में आप वेल्डिंग का काम सीख सकते हो ।
6 महीने में आप मिट्टी के बर्तन बनाना सीख सकते हो ।
6 महीने में आप योगासन सीख सकते हो ।
6 महीने में आप मशरूम की खेती का काम सीख सकते हो ।
6 महीने में आप बाल काटना सीख सकते हो ।

मात्र 6 माह में
आप ऐसे ही बहुत से
"स्वरोजगार कुशलतापूर्वक सीख सकते हो"
जो आपके परिवार को
भूखा नहीं सोने देगा ।

आज भारत में सबसे अधिक दुखी
वे लोग हैं
जो बहुत अधिक पढ़ लिखकर बेरोजगार हैं ।
उच्च शिक्षा पाकर भी
अगर आप रोजगार के रूप में
केवल नौकरी पाने की राह में बैठे हैं
तो शिक्षित होने का कोई अर्थ नहीं ।

रोजगार के लिए
आपका अधिक पढ़ा लिखा होना
कोई मायने नही रखता
यह आपकी इच्छाशक्ति पर निर्भर करता है
कि आप किसी के नौकर बनना पसन्द करते हैं
या स्वयं के कारोबार के स्वतन्त्र मालिक।

भारत में 90% रोजगार
वे लोग कर रहे हैं
जो ज्यादा पढ़े लिखे नहीं हैं ।

10% रोजगार के रूप में
केवल नौकरी की चाहत में
पढ़े लिखे लोगों के बीच मारामारी है।

एक लाख लोग चपरासी की नौकरी के लिए अप्लाई कर रहे हैं उसमें कितना नाम है भाई?
जिसके पास हुनर है और कोई एक ज्ञान है उसी से वह करोड़ों रुपए कमा लेता है... और
कितने लोग इसी ज्ञान को लेकर बैठे हैं ..,नौकरी करते रह जाते हैं पूरी जिंदगी नौकरी कर कर के थक जाते हैं..
और ₹1 भी बचा नहीं पाते हैं अंत समय में।

बेरोजगार साथी स्वयं ही विचार करें।

21/05/2022

Hi

28/02/2022

hi

 #चूना जो पान में लगा के खाया जाता है , उसकी एक डिब्बी ला कर घर में रखे .- यह सत्तर प्रकार की बीमारियों को ठीक कर देता ह...
02/10/2021

#चूना जो पान में लगा के खाया जाता है , उसकी एक डिब्बी ला कर घर में रखे .
- यह सत्तर प्रकार की बीमारियों को ठीक कर देता है . गेहूँ के दाने के बराबर चूना गन्ने के रस में मिलाकर पिलाने से बहुत जल्दी #पीलिया ठीक हो जाता है .
- चूना #नपुंसकता की सबसे अच्छी दवा है - अगर किसी के शुक्राणु नही बनता उसको अगर गन्ने के रस के साथ चूना पिलाया जाये तो साल डेढ़ साल में भरपूर शुक्राणु बनने लगेंगे . जिन माताओं के शरीर में अन्डे नही बनते उन्हें भी इस चूने का सेवन करना चाहिए .
- #शुगर रोज़ सुबह ख़ाली पेट एक गिलास पानी में एक छोटे चने के बराबर चुना मिलकर पीने से शुगर जड़ से ख़त्म हो जाती हैं ( समय समय पर जाँच करवाते रहे.. वरना शुगर का लेवल माइनस भी हो सकता हैं )
- विद्यार्थीओ के लिए चूना बहुत अच्छा है जो #लम्बाई बढाता है - गेहूँ के दाने के बराबर चूना रोज दही में मिला के खाना चाहिए, दही नही है तो दाल में मिला के या पानी में मिला के लिया जा सकता है - इससे लम्बाई बढने के साथ साथ स्मरण शक्ति भी बहुत अच्छी होती है । जिन बच्चों की बुद्धि कम है ऐसे मतिमंद बच्चों के लिए सबसे अच्छी दवा है चूना . जो बच्चे बुद्धि से कम है, दिमाग देर में काम करता है, देर में सोचते है हर चीज उनकी स्लो है उन सभी बच्चे को चूना खिलाने से अच्छे हो जायेंगे ।
- बहनों को अपने #मासिक_धर्म के समय अगर कुछ भी तकलीफ होती हो तो उसका सबसे अच्छी दवा है चूना । मेनोपौज़ की सभी समस्याओं के लिए गेहूँ के दाने के बराबर चूना हर दिन खाना दाल में, लस्सी में, नही तो पानी में घोल के पीना चाहिए . इससे ओस्टीओपोरोसिस होने की संभावना भी नहीं रहती .
- जब कोई माँ #गर्भावस्था में है तो चूना रोज खाना चाहिए क्योंकि गर्भवती माँ को सबसे ज्यादा केल्शियम की जरुरत होती है और चूना केल्शियम का सबसे बड़ा भंडार है . गर्भवती माँ को चूना खिलाना चाहिए अनार के रस में - अनार का रस एक कप और चूना गेहूँ के दाने के बराबर ये मिलाके रोज पिलाइए नौ महीने तक लगातार दीजिये तो चार फायदे होंगे - पहला फायदा होगा के माँ को बच्चे के जनम के समय कोई तकलीफ नही होगी और नॉर्मल डीलिवरी होगी , दूसरा बच्चा जो पैदा होगा वो बहुत हृष्ट पुष्ट और तंदुरुस्त होगा , तीसरा फ़ायदा वो बच्चा जिन्दगी में जल्दी बीमार नही पड़ता जिसकी माँ ने चूना खाया , और चौथा सबसे बड़ा लाभ है वो बच्चा बहुत होशियार होता है बहुत Intelligent और Brilliant होता है उसका IQ बहुत अच्छा होता है .
- चूना #घुटने_क_दर्द ठीक करता है , कमर का दर्द ठीक करता है , कंधे का दर्द ठीक करता है, एक खतरनाक बीमारी है Spondylitis वो चुने से ठीक होता है . कई बार हमारे रीढ़ की हड्डी में जो मनके होते है उसमे दूरी बढ़ जाती है Gap आ जाता है जिसे ये चूना ही ठीक करता है . रीढ़ की हड्डी की सब बीमारिया चूने से ठीक होती है . अगर हड्डी टूट जाये तो टूटी हुई हड्डी को जोड़ने की ताकत सबसे ज्यादा चूने में है . इसके लिए चूने का सेवन सुबह खाली पेट करे .
- अगर मुंह में ठंडा गरम पानी लगता है तो चूना खाने से बिलकुल ठीक हो जाता है , मुंह में अगर छाले हो गए है तो चूने का पानी पिने से तुरन्त ठीक हो जाता है । शरीर में जब खून कम हो जाये तो चूना जरुर लेना चाहिए , एनीमिया है खून की कमी है उसकी सबसे अच्छी दवा है ये चूना . गन्ने के रस में , या संतरे के रस में , नही तो सबसे अच्छा है अनार के रस में डाल कर चूना ले . अनार के रस में चूना पिने से खून बहुत बढता है , बहुत जल्दी खून बनता है - एक कप अनार का रस गेहूँ के दाने के बराबर चूना सुबह खाली पेट ले .
- भारत के जो लोग चूने से पान खाते है, बहुत होशियार है और वे महर्षि वाग्भट के अनुयायी है . पर पान बिना तम्बाखू , सुपारी और कत्थे के ले . तम्बाखू ज़हर है और चूना अमृत है . कत्था केन्सर करता है, पान में सौंठ , इलायची , लौंग , केसर , सौंफ , गुलकंद , चूना , कसा हुआ नारियल आदि डाल के खाए .
- अगर घुटने में घिसाव आ गया हो और डॉक्टर कहे के घुटना बदल दो तो भी जरुरत नही चूना खाते रहिये और हरसिंगार ( पारिजातक या प्राजक्ता ) के पत्ते का काढ़ा पीजिये , घुटने बहुत अच्छे काम करेंगे ।
चूना खाइए पर चूना लगाइए मत .
ये चूना लगाने के लिए नही है खाने के लिए है.

10 लाख का दहेज़5 लाख का खानाघड़ी पहनायीअंगूठी पहनाईमंडे का खानाफिर सब सुसरालियो को कपड़े देना ।बारात को खिलाना फिर बारात...
17/08/2021

10 लाख का दहेज़
5 लाख का खाना
घड़ी पहनायी
अंगूठी पहनाई
मंडे का खाना
फिर सब सुसरालियो को कपड़े देना ।
बारात को खिलाना फिर बारात को जाते हुए भी साथ में खाना भेजना
बेटी हो गई कोई सज़ा हो गई।
और यह सब जब से शुरू होता है जबसे बातचीत यानी रिश्ता लगता है
फिर कभी नन्द आ रही है, जेठानी आ रही है
कभी चाची सास आ रही है मामी सास आ रही है टोलीया बना
बना के आते हैं और बेटी की मां चेहरे पे हलकी सी मुस्कराहट लिए सब
को आला से आला खाना पेश करती है सबका अच्छी तरह से वेलकम
करती है फिर जाते टाइम सब लोगो को 500-500 रूपे भी दिए जाते
है फिर मंगनी हो रही है बियाह ठहर रहा है फिर बारात के आदमी तय
हो रहे है 500 लाए या 800
बाप का एक एक बाल कर्ज में डूब जाता है और बाप जब घर आता है
शाम को तो बेटी सर दबाने बैठ जाती है कि मेरे बाप का बाल बाल मेरी
वजह से कर्ज में डूबा है
भगवान के वास्ते इन गंदे रस्म रिवाजों को खत्म कर दो ताकि हर बाप
अपनी बेटी को इज़्ज़त से विदा कर सके।

उन्नत खेतीऐसे करें काजू की खेती , एक पेड़ से एक बार में होगी 18000 रु की फसलकाजू का नाम सुनते ही मुंह में पानी आ जाता है ...
05/02/2018

उन्नत खेती

ऐसे करें काजू की खेती , एक पेड़ से एक बार में होगी 18000 रु की फसल

काजू का नाम सुनते ही मुंह में पानी आ जाता है ।काजू को ड्राई फ्रूट्स का राजा कहा जाए तो गलत नहीं होगा ।काजू बहुत तेजी से बढ़ने वाला पेड़ है इसमे पौधारोपन के तीन साल बाद फूल आने लगते हैं और उसके दो महीने के भीतर पककर तैयार हो जाता है। काजू की उत्पत्ति ब्राजील से हुआ है। हालांकि आजकल इसकी खेती दुनिया के अधिकाश देशों में की जाती है। सामान्य तौर पर काजू का पेड़ 13 से 14 मीटर तक बढ़ता है। हालांकि काजू की बौना कल्टीवर प्रजाति जो 6 मीटर की ऊंचाई तक बढ़ता है, जल्दी तैयार होने और ज्यादा उपज देने की वजह से बहुत फायदेमंद व्यावसायिक उत्पादकों के लिए साबित हो सकती है ।

काजू कुछ मशहूर किस्में-

काजू की कई उन्नत और हाइब्रिड या वर्णसंकर किस्मे उपलब्ध हैं। अपने क्षेत्र के स्थानीय कृषि, बागबानी या वन विभाग से काजू की उपयुक्त किस्मों का चुनाव करें।

Kaju4वेनगुर्ला- 1 एम वेनगुर्ला- 2, वेनगुर्ला-3, वेनगुर्ला-4, वेनगुर्ला-5, वृर्धाचलम-1, वृर्धाचलम-2, चिंतामणि-1,एनआरसीसी-1, एनआरसीसी-2, उलाल-1, उलाल-2, उलाल-3, उलाल-4, यूएन-50, वृद्धाचलम-3, वीआआई(सीडब्लू) एचवन, बीपीपी-1, अक्षय(एच-7-6),अमृता(एच-1597), अन्घा(एच-8-1), अनाक्कयाम-1 (बीएलए-139), धना(एच 1608), धाराश्री(एच-3-17), बीपीपी-2, बीपीपी-3, बीपीपीपी-4, बीपीपीपी-5, बीपीपीपी-6,बीपीपीपी-8,(एच2/16).

काजू की खेती के लिए आवश्यक जलवायु-

काजू मुख्यत: उष्णकटिबंधीय फसल है और उच्च तापमान में भी अच्छी तरह बढ़ता है। इसका नया या छोटा पौधा तेज ठंड या पाला के सामने बेहद संवेदनशील होता है। समुद्र तल से 750 मीटर की ऊंचाई तक काजू की खेती जा सकती है। काजू की खेती के लिए आदर्श तापमान 20 से 35 डिग्री के बीच होता है। इसकी वृद्धि के लिए सालाना 1000 से 2000 मिमी की बारिश आदर्श मानी जाती है। अच्छी पैदावार के लिए काजू को तीन से चार महीने तक पूरी तरह शुष्क मौसम चाहिए। फूल आने और फल के विकसित होने के दौरान अगर तापमान 36 डिग्री सेंटीग्रेड के उपर रहा तो इससे पैदावार प्रभावित होती है।

मिट्टी की किस्में-

काजू की खेती कई तरह की मिट्टी में हो सकती है क्योंकि यह अलग-अलग प्रकार की मिट्टी में खुद को समायोजित कर लेती है और वो भी बिना पैदावार को प्रभावित किये। हालांकि काजू की खेती के लिए लाल बलुई दोमट (चिकनी बलुई मिट्टी) मिट्टी सबसे अच्छी मानी जाती है। मैदानी इलाके के साथ-साथ600 से 750 मीटर ऊंचाई वाले ढलवां पहाड़ी इलाके भी इसकी खेती के लिए अनुकूल है।

काजू की खेती के लिए कार्बनिक पदार्थ से भरपूर गहरी और अच्छी सूखी हुई मिट्टी चाहिए। व्यावसायिक उत्पादकों को काजू की खेती के लिए उर्वरता का पता लगाने के लिए मिट्टी की जांच करानी चाहिए। मिट्टी में किसी पोषक अथवा सूक्ष्म पोषक तत्वों की कमी दूर की जानी चाहिए। 5.0 से 6.5 तक के पीएच वाली बलुई मिट्टी काजू की खेती के लिए उपयुक्त मानी जाती है।

काजू के पौधारोपन का मौसम-

जून से दिसंबर तक दक्षिण एशियाई क्षेत्र में इसकी खेती सबसे ज्यादा होती है। हालांकि, अच्छी सिंचाई की व्यवस्था होने पर इसकी खेती पूरे साल भर की जा सकती है।

जमीन की तैयारी और पौधारोपन-

जमीन की अच्छी तरह जुताई कर उसे बराबर कर देना चाहिए और समान ऊंचाई में क्यारियां खोदनी चाहिए। मृत पेड़, घास-फूस और सूखी टहनियों को हटा दें। सामान्य पौधारोपन पद्धति में प्रति हेक्टेयर 200 पौधे और सघन घनत्व में प्रति हेक्टेयर 500 पौधे (5मीटर गुना 4 मीटर की दूरी) लगाए जाने चाहिए। एक ही क्षेत्र में उच्च घनत्व पौधारोपन में ज्यादा पौधे की वजह से ज्यादा पैदावार होती है।

खेत की तैयारी और पौधों के बीच दूरी क्या हो ?

सबसे पहले 45 सेमी गुना 45 सेमी गुना 45 सेमी की ऊंचाई, लंबाई और गहराई वाले गड्ढे खोदें और इन गड्ढों को 8 से 10 किलो के अपघटित (अच्छी तरह से घुला हुआ) फार्म यार्ड खाद और एक किलो नीम केक से मिली मिट्टी के मिश्रण से भर दें। यहां 7 से 8 मीटर की दूरी भी अपनाई जाती है।

काजू खेती के लिए सिंचाई के तरीके-

आमतौर पर काजू की फसल वर्षा आधारित मजबूत फसल है। हालांकि, किसी भी फसल में वक्त पर सिंचाई से अच्छा उत्पादन होता है। पौधारोपन के शुरुआती एक दो साल में मिट्टी में अच्छी तरह से जड़ जमाने तक सिंचाई की जरूरत पड़ती है। फल के गिरने को रोकने के लिए सिंचाई का अगला चरण पल्लवन और फल लगने के दौरान चलाया जाता है।

काजू की खेती में अंतर फसल-

Sorting cashew fruit
काजू की खेती में अंतर फसल के द्वारा किसान अतिरिक्त कमाई कर सकते हैं। अंतर फसल मिट्टी की ऊर्वरता को भी बढ़ाता है। ऐसा शुरुआती सालों में ही संभव है जब तक कि काजू के पौधे का छत्र कोने तक न पहुंच जाए और पूरी तरह छा न जाए। बरसात के मौसम में अंदर की जगह की अच्छी तरह जुताई कर देनी चाहिए और मूंगफली, दाल या फलियां या जौ-बाजरा या सामान्य रक्ताम्र (कोकुम) जैसी अंतर फसलों को लगाना चाहिए।

प्रशिक्षण और कटाई-छंटाई-

काजू के पेड़ को अच्छी तरह से लगाने या स्थापित करने के लिए लिए ट्रेनिंग के साथ-साथ पेड़ की कटाई-छंटाई की जरूरत होती है। पेड़ के तने को एक मीटर तक विकसित करने के लिए नीचे वाली शाखाओं या टहनियों को हटा दें। जरूरत के हिसाब से सूखी और मृत टहनियों और शाखाओं को हटा देना चाहिए।

जंगली घास-फूस पर निंयत्रण का तरीका-

काजू के पौधे की अच्छी बढ़त और अच्छी फसल के लिए घास-फूस पर नियंत्रण करना बागबानी प्रबंधन के कार्य का ही एक हिस्सा है। ऊर्वरक और खाद की पहली मात्रा डालने से पहले घास-फूस को निकालने की पहली प्रक्रिया जरूर पूरी कर लें। घास-फूस निकालने की दूसरी प्रक्रिया मॉनसून के मौसम के बाद की जानी चाहिए। दूसरे तृणनाशक तरीकों में मल्चिंग यानी पलवार घास-फूस पर नियंत्रण करने का अगला तरीका है।

काजू उत्पादन की मात्रा

फसल की पैदावार कई तत्वों, जैसे कि बीज के प्रकार, पेड़ की उम्र, बागबानी प्रबंध के तौर-तरीके, पौधारोपन के तरीके, मिट्टी के प्रकार और जलवायु की स्थिति पर निर्भर करता है। हालांकि कोई भी एक पेड़ से औसतन 8 से 10 किलो काजू के पैदावार की उम्मीद कर सकता है। हाइब्रिड या संकर और उच्च घनत्व वाले पौधारोपन की स्थिति में और भी ज्यादा पैदावार की संभावना होती है।एक पौधे से 10 किल्लो की फसल होती है तो 1800 रु किल्लो के हिसाब से एक पौधे से एक बार में 18000 रुपये की फसल होगी ।
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*बथुवा*बथुवा अंग्रेजी में Lamb's Quarters, वैज्ञानिक नाम Chenopodium album.साग और रायता बणा कर बथुवा अनादि काल से खाया ज...
14/01/2018

*बथुवा*

बथुवा अंग्रेजी में Lamb's Quarters, वैज्ञानिक नाम Chenopodium album.

साग और रायता बणा कर बथुवा अनादि काल से खाया जाता रहा है लेकिन क्या आपको पता है कि विश्व की सबसे पुरानी महल बनाने की पुस्तक शिल्प शास्त्र में लिखा है कि *हमारे बुजुर्ग अपने घरों को हरा रंग करने के लिए प्लस्तर में बथुवा मिलाते थे* और हमारी बुढ़ियां *सिर से ढेरे व फांस (डैंड्रफ) साफ करने के लिए बथुवै के पाणी से बाल धोया करती।* बथुवा गुणों की खान है और *भारत में ऐसी ऐसी जड़ी बूटियां हैं तभी तो मेरा भारत महान है।*

बथुवै में क्या क्या है?? मतलब कौन कौन से विटामिन और मिनरल्स??

तो सुणो, बथुवे में क्या नहीं है?? *बथुवा विटामिन B1, B2, B3, B5, B6, B9 और विटामिन C से भरपूर है तथा बथुवे में कैल्शियम, लोहा, मैग्नीशियम, मैगनीज, फास्फोरस, पोटाशियम, सोडियम व जिंक आदि मिनरल्स हैं। 100 ग्राम कच्चे बथुवे यानि पत्तों में 7.3 ग्राम कार्बोहाइड्रेट, 4.2 ग्राम प्रोटीन व 4 ग्राम पोषक रेशे होते हैं। कुल मिलाकर 43 Kcal होती है।*

जब बथुवा शीत (मट्ठा, लस्सी) या दही में मिला दिया जाता है तो *यह किसी भी मांसाहार से ज्यादा प्रोटीन वाला व किसी भी अन्य खाद्य पदार्थ से ज्यादा सुपाच्य व पौष्टिक आहार बण जाता है* और साथ में बाजरे या मक्का की रोटी, मक्खन व गुड़ की डळी हो तो इस खाणे के लिए देवता भी तरसते हैं।

जब हम बीमार होते हैं तो आजकल डॉक्टर सबसे पहले विटामिन की गोली ही खाणे की सलाह देते हैं ना??? गर्भवती महिला को खासतौर पर विटामिन बी, सी व लोहे की गोली बताई जाती है और बथुवे में वो सबकुछ है ही, कहणे का मतलब है कि *बथुवा पहलवानो से लेकर गर्भवती महिलाओं तक, बच्चों से लेकर बूढों तक, सबके लिए अमृत समान है।*

यह साग प्रतिदिन खाने से गुर्दों में पथरी नहीं होती। बथुआ आमाशय को बलवान बनाता है, गर्मी से बढ़े हुए यकृत को ठीक करता है। बथुए के साग का सही मात्रा में सेवन किया जाए तो निरोग रहने के लिए सबसे उत्तम औषधि है। बथुए का सेवन कम से कम मसाले डालकर करें। नमक न मिलाएँ तो अच्छा है, यदि स्वाद के लिए मिलाना पड़े तो काला नमक मिलाएँ और देशी गाय के घी से छौंक लगाएँ। बथुए का उबाला हुआ पानी अच्छा लगता है तथा दही में बनाया हुआ रायता स्वादिष्ट होता है। किसी भी तरह बथुआ नित्य सेवन करें। *बथुवै में जिंक होता है जो कि शुक्राणुवर्धक है मतलब किसै भाई कै जिस्मानी कमजोरी हो तै उसनै बी दूर कर सै बथुवा।*

बथुवा कब्ज दूर करता है और अगर *पेट साफ रहेगा तो कोए भी बीमारी के शरीर में लगेगी ही नहीं, गात म्हं ताकतऔर स्फूर्ति बनी रवैगी।*

कहने का मतलब है कि जब तक इस मौसम में बथुए का साग मिलता रहे, नित्य इसकी सब्जी खाएँ। बथुए का रस, उबाला हुआ पानी पीएँ और तो और *यह खराब लीवर को बी ठीक कर देता है।*

*पथरी हो तो एक गिलास कच्चे बथुए के रस में शकर मिलाकर नित्य पिएँ तो पथरी टूटकर बाहर निकल आएगी।*

मासिक धर्म रुका हुआ हो तो दो चम्मच बथुए के बीज एक गिलास पानी में उबालें । आधा रहने पर छानकर पी जाएँ। मासिक धर्म खुलकर साफ आएगा। आँखों में सूजन, लाली हो तो प्रतिदिन बथुए की सब्जी खाएँ।

पेशाब के रोगी बथुआ आधा किलो, पानी तीन गिलास, दोनों को उबालें और फिर पानी छान लें । बथुए को निचोड़कर पानी निकालकर यह भी छाने हुए पानी में मिला लें। स्वाद के लिए नींबू जीरा, जरा सी काली मिर्च और काला नमक लें और पी जाएँ।

*आप ने अपने दादा दादी से ये कहते जरूर सुणा होगा कि हमने तो सारी उम्र अंग्रेजी दवा की एक गोली भी नहीं ली। उनके स्वास्थ्य व ताकत का राज यही बथुवा ही है।*

मकान को रंगने से लेकर खाने व दवाई तक बथुवा काम आता है और हाँ सिर के बाल ...... के करेगा शम्पू इसकै आगै।

लेकिन अफशोस, *हम किसान ये बातें भूलते जा रहे हैं और इस दिव्य पौधे को नष्ट करने के लिए अपने अपने खेतों में जहर डालते हैं।* म्हारै तै बावळा कुण होवैगा???

*तथाकथित कृषि वैज्ञानिकों (अंग्रेज व काळे अंग्रेज) ने बथुवै को भी कोंधरा, चौळाई, सांठी, भाँखड़ी आदि सैकड़ों आयुर्वेदिक औषधियों को खरपतवार की श्रेणी में डाल दिया और हम भारतीय चूं भी ना कर पाये।*

अब कटाक्ष --
और पढ़ ल्यो अंग्रेजी और बण ल्यो अंग्रेज, सुणो जै ना सुधरे नै तै *एक दिन इस जहर तैं कैंसर बरगी बीमारी आपा नै सबनै मारैगी* क्योंकि आपां ए इस स्वर्ग बरगी जमीन नै जहर गेर कै नरक बणाण लाग रे सां।

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