14/03/2016
गुजरी महल
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गुजरी महल के बनने की कहानी की शुरुआत होती है एक राजा और गाँव की अल्हड़ और साहसी गुजरी युवती की प्रेम कहानी से !
हुआ कुछ यूं की ग्वालियर के राजा मान सिंह तोमर शिकार करने गए तो देखा एक गूजर युवती निन्नी हिरण के शावक को बचाने शेर से भिड़ गई । इसके बाद उसने गांव के एक बच्चे की तरफ बढ़ रहे एक जंगली भैंसे को भी सींगों से पकड़ कर रोक दिया। शिकार करने आये राजा मानसिंह इस पहली ही मुलाकात में खुद ही निन्नी के नयनों के शिकार हो बैठे । फिर क्या था राजा ने उसके बड़े भाई अटल के सामने उसकी बहन से विवाह का प्रस्ताव भिजवाया । राजा का प्रस्ताव निन्नी ने स्वीकार तो कर लिया, लेकिन अपनी एक इच्छा जाहिर कर दी । निन्नी की इच्छा थी कि वह जन्म से राई गांव की जिस सांक नदी का पानी पीती रही है, वह उसे रानी बनने के बाद भी मिलता रहे।
निन्नी की शर्त पूरा करने के लिए राजा मान सिंह के इंजीनियरों ने योजना बनाई तो समझ में आया किले के सबसे ऊपर बने राजा मान सिंह के महल मानमंदिर तक पानी प्राकृतिक रूप से पहुंचा पाना असंभव है। लिहाजा किले के नीचे के शहर की ओर खुलने वाले प्रवेश द्वार पर निन्नी के लिए महल बनाने का फैसला किया गया ! फिर क्या था 50 किलोमीटर दूर राई गांव की सांक नदी से महल तक पानी लाने के लिए पहाड़ों का सीना चीर नहर बनवा दी गयी और राजा मान सिंह ने निन्नी के लिए करीब 30 मीटर ऊंचे ग्वालियर दुर्ग तक पाइपलाइन बिछवा दी ! इस विवाह की शर्त को पूरा करने पर राजा मानसिंह और निन्नी का विवाह बड़े धूमधाम से हुआ और ‘निन्नी’ बन गई ‘मृगनयनी’ और मृगनयनी के लिये किले के प्रवेश द्वार पर बनवाया महल कहलाया “गूजरी महल” !
महाराजा मान सिंह को रानी मृगनयनी से अटूट प्रेम था वो जब भी किले से बाहर निकलते या किले में प्रवेश करते मृगनयनी से जरूर मिलते थे, मृगनयनी इन अवसरों पर उनका स्वागत करती थीं। इसलिए महाराजा मान सिंह तोमर के महल से एक सुरंग सीधे नीचे गूजरी महल तक बनाई गई थी। इसी सुरंग के जरिए महाराजा मान सिंह तोमर गूजरी रानी से मिलने आया करते थे।
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(ग्वालियर पर्यटन को बढ़वा देने हेतु जनहित में जारी)