23/01/2026
🌷🌷🌷श्री चतुष्षष्टिरूप सरस्वती स्तोत्रम 🌷🌷🌷
(हिन्दी अर्थ सहित)
श्री चतुष्षष्टिरूप सरस्वती स्तोत्रम ६४ विशिष्ट सरस्वती रूपों की स्तुति है, । इसमें वाग्देवी के विविध तान्त्रिक एवं वैदिक स्वरूपों का स्वरूप स्तुति समाहित है।
🍁१. वाग्देवी सरस्वती
वाग्देवीं वीणापाणिं पुस्तककरपाणिम्।
श्वेतवस्त्रां चतुर्भुजां हंसारूढां शुभाननाम्॥
वाग्देवीं वन्दे वाक्सिद्धिं काव्यसौष्ठवकारिणीम्।
सर्वलोकप्रशाध्यन्तीं शब्दब्रह्ममयीं शुभाम्॥
अर्थ: वीणा एवं पुस्तक धारण करने वाली, श्वेत वस्त्रधारी चतुर्भुजा वाग्देवी को नमस्कार। वे वाक्सिद्धि एवं काव्य कौशल प्रदान करती हैं, शब्दब्रह्म स्वरूपा हैं।
🍁२. वेदजननी सरस्वती
वेदजननीं वेदगणपरिवृतां वीणानादप्रियाम्।
पुस्तोद्धृतकरां सरसिजनयनां हंसयानां शुभाम्॥
वेदजननीं वन्दे वेदार्थप्रकाशिनीम्।
विद्यावृद्धिं प्रदात्रीं मोहहरिं शुभप्रदाम्॥
अर्थ: वेदों की जननी, वेदगण से घिरी, वीणा नाद प्रिया। वे वेदार्थ प्रकाशित करती हैं, विद्या वृद्धि एवं मोह नाश देती हैं।
🍁३. शारदा सरस्वती
शारदां शङ्खकमलधृतिनेत्रां श्वेतकमलासनाम्।
पीतवस्त्रां चतुर्भुजां ज्ञानपीठस्थितां शुभाम्॥
शारदां वन्दे शास्त्रार्थसर्वज्ञताप्रदायिनीम्।
विद्वद्वर्यपरितुष्टिं शुभदायिनीम्॥
अर्थ: शङ्ख-कमल नेत्रा, पीतवस्त्रा शारदा को नमस्कार। वे शास्त्रज्ञान प्रदान करती हैं, विद्वानों को संतुष्टि देती हैं।
🍁४. भारती सरस्वती
भारतीं वीणावादनपरां काव्यालापिनीं पराम्।
श्वेतकमलासनस्थां पद्महस्तां शुभाननाम्॥
भारतीं वन्दे वाक्प्रवाहकाव्यकारिणीम्।
काव्यसिद्धिप्रदात्रीं भक्तानां हृदि संनिधाम्॥
अर्थ: वीणा वादनरत, काव्यालापिनी भारती को नमस्कार। वे वाक्प्रवाह एवं काव्यसिद्धि देती हैं, भक्त हृदय में विराजमान।
🍁५. महासरस्वती
महासरस्वतीं त्रिगुणातीतां महाशक्तिम्।
सर्वदेवमयीं शान्तिं विमलां विश्वतोमुखीम्॥
महासरस्वतीं वन्दे सर्वविद्याप्रदायिनीम्।
महापापहरिं शुद्धिं मोक्षदात्रीं शुभप्रदाम्॥
अर्थ: त्रिगुणातीत महाशक्ति महासरस्वती को नमस्कार। वे सर्वविद्या, पापहरण एवं मोक्ष प्रदान करती हैं।
🍁६ . ब्रह्माणी सरस्वती
ब्रह्माणीं ब्रह्मवाणिरूपिणीं कमण्डलुधरीम्।
श्वेतकमलासनस्थां चतुर्भुजां शुभाननाम्॥
ब्रह्माणीं वन्दे वंशसंततिं च ब्रह्मविद्यासिद्धिकरीम्।
सृष्टिस्थितिस्वरूपिणीं भक्तेभ्यः शुभदायिनीम्॥
अर्थ:
ब्रह्मवाणी स्वरूपा, कमण्डलु धारिणी, श्वेत कमल पर आसीन, चार भुजाओं वाली शुभमुखी देवी ब्रह्माणी को नमन।
वे ब्रह्मविद्या की सिद्धि, वंश-संतति की वृद्धि तथा सृष्टि-स्थिति का कल्याण प्रदान करने वाली हैं।
🍁७. हंसवाहिनी सरस्वती
हंसवाहिनीं हंसयुक्तवाहनां विवेकस्वरूपिणीम्।
नीरक्षीरविवेचित्रां श्वेतवर्णां शुभाननाम्॥
हंसवाहिनीं वन्दे विवेकप्रदायिनीम्।
भक्तानां मोहरहितिं ज्ञानदात्रीं शुभप्रदाम्॥
अर्थ: हंस पर आरूढ़ विवेकरूपा हंसवाहिनी को नमस्कार। वे विवेक, ज्ञान एवं मोह नाश प्रदान करती हैं।
🍁८. महाश्वेता सरस्वती
महाश्वेतां शुद्धसत्त्वमयीं विमलां शुभप्रदाम्।
पद्मासनस्थितां ध्याये सर्वदोषविनाशिनीम्॥
महाश्वेतां वन्दे शुद्धिसर्वकारणकारिणीम्।
सत्त्वगुणप्रदात्रीं भक्तानां हृदि संनिधाम्॥
अर्थ: शुद्ध सत्त्वमयी महाश्वेता को नमस्कार। वे दोष नाश, शुद्धि एवं सत्त्वगुण प्रदान करती हैं।
🍁९. मेधासरस्वती
मेधासरस्वतीं तेजोमयीं तीव्रबुद्धिदायिनीम्।
पुस्तकाङ्कुशहस्तां श्वेतकमलवासिनीम्॥
मेधासरस्वतीं वन्दे मेधासिद्धिप्रदायिनीम्।
विद्यारम्भे प्रशस्यां भक्तानां हृदि वासिनीम्॥
अर्थ: तेजस्वी मेधा प्रदात्री मेधासरस्वती को नमस्कार। वे मेधा सिद्धि एवं विद्यारम्भ में सहायक हैं।
🍁१०. प्रज्ञासरस्वती
प्रज्ञासरस्वतीं प्रज्ञाविवेकस्वरूपिणीम्।
पद्महस्तां विमलां ध्याये हंसारूढां शुभाननाम्॥
प्रज्ञासरस्वतीं वन्दे विवेकज्ञानकारिणीम्।
प्रज्ञाप्रदात्रीं शान्तिं भक्तेभ्यः शुभदायिनीम्॥
अर्थ: प्रज्ञा-विवेकरूपा प्रज्ञासरस्वती को नमस्कार। वे प्रज्ञा, शान्ति एवं ज्ञान प्रदान करती हैं।
🍁११. स्मृतिसरस्वती
स्मृतिसरस्वतीं स्मरणशक्तिप्रदायिनीम्।
अङ्कुशाङ्कुशधरिं श्वेतवस्त्रां शुभाननाम्॥
स्मृतिसरस्वतीं वन्दे स्मृतिसिद्धिप्रदायिनीम्।
शास्त्रार्थस्मरणोत्साहं भक्तेभ्यः प्रददाति सा॥
अर्थ: स्मृति प्रदात्री स्मृतिसरस्वती को नमस्कार। वे स्मृति सिद्धि एवं शास्त्र स्मरण उत्साह प्रदान करती हैं।
🍁१२. धीसारस्वती
धीसारस्वतीं निर्णयशक्तिस्वरूपिणीम्।
पुस्तकपद्महस्तां हंसयानां विमलां शुभाम्॥
धीसारस्वतीं वन्दे धैर्यधीसिद्धिदायिनीम्।
सर्वकार्यसुधीं नित्यं भक्तानां हृदि संनिधाम्॥
अर्थ: निर्णय शक्ति स्वरूपा धीसारस्वती को नमस्कार। वे धैर्य, बुद्धि एवं कार्य सिद्धि देती हैं।
🍁१३. धृतिसरस्वती
धृतिसरस्वतीं धैर्यस्थैर्यकारिणीम्।
श्वेतकमलधारिणीं पद्मासनस्थितां शुभाम्॥
धृतिसरस्वतीं वन्दे धृतिसिद्धिप्रदायिनीम्।
क्लान्तिहरिं शान्तिदं भक्तेभ्यः शुभदायिनीम्॥
अर्थ: धैर्य प्रदान करने वाली धृतिसरस्वती को नमस्कार। वे थकान हरन एवं शान्ति देती हैं।
🍁१४. प्रतिभासरस्वती
प्रतिभासरस्वतीं सृजनात्मकप्रतिभास्वरूपिणीम्।
वीणापाणिं काव्यालापपरां शुभाम्॥
प्रतिभासरस्वतीं वन्दे काव्यसिद्धिप्रदायिनीम्।
कलाप्रतिभायुक्तिं भक्तेभ्यः प्रददाति सा॥
अर्थ: सृजनात्मक प्रतिभा स्वरूपा प्रतिभासरस्वती को नमस्कार। वे काव्य सिद्धि एवं कला प्रदान करती हैं।
🍁१५. ज्ञानेश्वरी सरस्वती
ज्ञानेश्वरीं तत्वज्ञानस्वरूपिणीं विमलाम्।
पद्महस्तां ध्याये अहंकारविनाशिनीम्॥
ज्ञानेश्वरीं वन्दे तत्वविद्यास्वरूपिणीम्।
ज्ञानप्रकाशिनीं शुद्धिं भक्तानां हृदि वासिनीम्॥
अर्थ: तत्वज्ञान स्वरूपा ज्ञानेश्वरी को नमस्कार। वे अहंकार नाश एवं ज्ञान प्रकाशित करती हैं।
🍁१६. पारिजातेश्वरी सरस्वती
पारिजातेश्वरीं दिव्यवाक्सौरभप्रदा।
कुसुममालाधरां ध्याये पद्मासनस्थितां शुभाम्॥
पारिजातेश्वरीं वन्दे वाक्सौष्ठवप्रदायिनीम्।
काव्यालङ्कारसंपन्नां भक्तेभ्यः शुभदायिनीम्॥
अर्थ: दिव्य वाक् सुगंध प्रदात्री पारिजातेश्वरी को नमस्कार। वे वाक् कौशल एवं काव्य अलंकार देती हैं।
🍁१७. परा सरस्वती
परा वाचं परावाक्स्वरूपिणीं चिदाकृतिम्।
अव्यक्तस्वरूपिणीं ध्याये सर्वव्यापिनीं शुभाम्॥
परां वन्दे परावाक्प्रकाशकारिणीम्।
सूक्ष्मज्ञानप्रदात्रीं भक्तानां हृदि संनिधाम्॥
अर्थ: परावाक् स्वरूपा परा सरस्वती को नमस्कार। वे सूक्ष्म ज्ञान एवं परा वाक् प्रकाशित करती हैं।
🍁१८. पश्यन्ती सरस्वती
पश्यन्तीं अन्तर्दृष्टिस्वरूपिणीं धारिणीम्।
सूक्ष्माकाररूपिणीं पद्महस्तां विमलाम्॥
पश्यन्तीं वन्दे दृष्टिसिद्धिप्रदायिनीम्।
अन्तःसाक्षिणीं शान्तिं भक्तेभ्यः प्रददाति सा॥
अर्थ: अन्तर्दृष्टि स्वरूपा पश्यन्ती को नमस्कार। वे दृष्टि सिद्धि एवं अन्तः शान्ति प्रदान करती हैं।
🍁१९. मध्यमा सरस्वती
मध्यमां भाववाच्छक्तिस्वरूपिणीं शुभाम्।
स्पष्टाकाररूपिणीं वीणावादनपराम्॥
मध्यमां वन्दे भावोक्तिसिद्धिदायिनीम्।
हृदयवाङ्मयीं शुद्धिं भक्तानां हृदि वासिनीम्॥
अर्थ: भाव वाच् शक्ति स्वरूपा मध्यमा को नमस्कार। वे भावोक्ति सिद्धि एवं हृदय शुद्धि देती हैं।
🍁२०. वैखरी सरस्वती
वैखरीं प्रकटवाण्यधिष्ठात्रीं महेश्वरीम्।
घोषरूपिणीं ध्याये चतुर्भुजां शुभाननाम्॥
वैखरीं वन्दे वाक्सिद्धिप्रदायिनीम्।
सर्वलोकहितायुक्तिं भक्तेभ्यः शुभदायिनीम्॥
अर्थ: प्रकट वाणी स्वरूपा वैखरी को नमस्कार। वे वाक् सिद्धि एवं लोक हित प्रदान करती हैं।
🍁२१. त्रिपुरावागीश्वरी सरस्वती
त्रिपुरावागीश्वरीं श्रीविद्यास्वरूपिणीम्।
पञ्चमकरधरीं चतुर्भुजां शुभाननाम्॥
त्रिपुरां वन्दे त्रिपुरासिद्धिप्रदायिनीम्।
विद्यावृद्धिं प्रदात्रीं भक्तानां हृदि वासिनीम्॥
अर्थ: श्रीविद्या स्वरूपा त्रिपुरावागीश्वरी को नमस्कार। वे त्रिपुरा सिद्धि एवं विद्या वृद्धि देती हैं।
🍁२२. कुलजा सरस्वती
कुलजां कुलपरम्पराविद्यादायिनीं शुभाम्।
कपालमालाधरां ध्याये पद्मासनस्थितां पराम्॥
कुलजां वन्दे कुलविद्यासिद्धिकराम्।
परम्पराप्रसादेन भक्तेभ्यः शुभदायिनीम्॥
अर्थ: कुल परम्परा विद्या प्रदात्री कुलजा को नमस्कार। वे कुल सिद्धि प्रदान करती हैं।
🍁२३. मातृका सरस्वती
मातृकां वर्णबीजशक्तिस्वरूपिणीं महाम्।
षोडशाकाररूपिणीं श्वेतकमलवासिनीम्॥
मातृकां वन्दे वर्णसिद्धिप्रदायिनीम्।
बीजमन्त्रप्रकाशिनीं भक्तानां हृदि संनिधाम्॥
अर्थ: वर्णबीज शक्ति स्वरूपा मातृका को नमस्कार। वे वर्ण सिद्धि एवं बीज मन्त्र प्रकाशित करती हैं।
🍁२४. अग्निज्वाला सरस्वती
अग्निज्वालासरस्वतीं विवेकाग्निप्रदीप्तिकाम्।
मोहान्धकारदाहिन्यै ज्ञानतेजस्वरूपिणीम्॥
ज्वालामालावृतां देवीं प्रज्ञाशुद्धिकरां पराम्।
नमामि वागधिष्ठात्रीं तमोनाशप्रदायिनीम्॥
अर्थ:
अग्निज्वाला सरस्वती को नमस्कार, जो विवेकाग्नि से प्रदीप्त, मोह के अंधकार को भस्म करने वाली एवं ज्ञानतेजस्वरूपा हैं। ज्वालामाल से आच्छादित, प्रज्ञा शुद्धिकरिणी देवी हैं। वे वाणी की अधिष्ठात्री होकर तमोनाश प्रदान करती हैं।
🍁२५. महानीला सरस्वती
नीलसरस्वतीं तमोनाशिनीं महाविद्याम्।
खड्गमुद्राकरहस्तां कालरात्रिसमप्रभाम्॥
नीलसरस्वतीं वन्दे तमःप्रशमनकारिणीम्।
शत्रुनाशप्रदात्रीं भक्तानां हृदि वासिनीम्॥
अर्थ: तमोनाशिनी नीलसरस्वती को नमस्कार। वे तमः नाश एवं शत्रु नाश करती हैं।
🍁२६. श्यामला सरस्वती
श्यामलां सरस्वतीं वागीश्वरीं मातङ्गरूपिणीम्।
वीणापुस्तकहस्तां हरिद्वेषसुतां शुभाम्॥
श्यामलां वन्दे मन्त्रराजसिद्धिकराम्।
वाक्प्रभुत्वप्रदात्रीं भक्तानां हृदि वासिनीम्॥
अर्थ: मातंग रूपी वागीश्वरी श्यामला को नमस्कार। वे मन्त्रराज सिद्धि एवं वाक्प्रभुत्व देती हैं।
🍁२७. गजसरस्वती
गजसरस्वतीं हस्तिनयानाधिष्ठात्रीं शुभाम्।
पद्महस्तां ध्याये श्वेतवर्णां सर्वकारणकारिणीम्॥
गजसरस्वतीं वन्दे वाक्सिद्धिप्रदायिनीम्।
भक्तानां हृदि शुद्धिं ज्ञानप्रकाशिनीं स्थिताम्॥
अर्थ: हाथी पर आरूढ़ गजसरस्वती को नमस्कार। वे वाक्सिद्धि, शुद्धि एवं ज्ञान प्रदान करती हैं।
🍁२८. वृत्रघ्नी घोर सरस्वती
वृत्रघ्नीं हिरण्यरथस्थां घोरां वज्रहस्तां पराम्।
वृत्रासुरसंहारिणीं ध्याये शत्रुदर्पदलनाम्॥
वृत्रघ्नीं वन्दे वैदिकवीररूपिणीम्।
अविद्याविनाशिनीं भक्तेभ्यः शुभदायिनीम्॥
अर्थ: वज्रहस्ता वृत्रघ्नी को नमस्कार। वे शत्रुदर्प नाश एवं अविद्या हरन करती हैं।
🍁२९. किणी सरस्वती
किणीं मंत्रजिह्वासिद्धिदात्रीं तपस्विनीम्।
जिह्वास्पृष्टबीजधारिणीं पद्महस्तां विमलाम्॥
किणीं वन्दे मन्त्रसिद्धिप्रदायिनीम्।
जिह्वाशुद्धिकरीं वाक्सिद्धिं भक्तेभ्यः ददाति सा॥
अर्थ: मन्त्र जिह्वा सिद्धिदात्री किणी को नमस्कार। वे जिह्वा शुद्धि एवं मन्त्र सिद्धि प्रदान करती हैं।
🍁३०. घटसरस्वती
घटसरस्वतीं देहकुम्भविद्यास्वरूपिणीम्।
कुम्भासनस्थितां ध्याये अङ्कुशाङ्कुशधारिणीम्॥
घटसरस्वतीं वन्दे कायसिद्धिप्रदायिनीम्।
देहशुद्धिं प्रदात्रीं भक्तानां हृदि संनिधाम्॥
अर्थ: देहकुम्भ विद्या स्वरूपा घटसरस्वती को नमस्कार। वे कायसिद्धि एवं देह शुद्धि देती हैं।
🍁३१. अन्तरिक्ष सरस्वती
अन्तरिक्ष सरस्वतीं सूक्ष्मआकाशबुद्धिदाम्।
नभोनीलवर्णरूपां पद्मासनस्थितां शुभाम्॥
अन्तरिक्षां वन्दे सूक्ष्मज्ञानकारिणीम्।
चेतस्स्पष्टिकरीं शान्तिं भक्तेभ्यः शुभदायिनीम्॥
अर्थ: सूक्ष्म आकाश बुद्धि प्रदात्री अन्तरिक्ष सरस्वती को नमस्कार। वे चेतस् स्पष्टता एवं शान्ति देती हैं।
🍁३२. महामायावागीश्वरी
महामायावागीश्वरीं अविद्या आवरणभेदिनीम्।
मायाच्छेदिनीं ध्याये सर्वदेवमयीं पराम्॥
महामायां वन्दे मायाविच्छेदकारिणीम्।
ज्ञानप्रकाशिनीं शुद्धिं भक्तानां हृदि वासिनीम्॥
अर्थ: माया छेदिनी महामाया को नमस्कार। वे अविद्या भेदन एवं ज्ञान प्रकाशित करती हैं।
🍁३३. उग्र सरस्वती
उग्र सरस्वतीं खड्गत्रिशूलकरां रक्तनेत्राम्।
वज्रहस्तां घोररूपिणीं पद्मासनस्थिताम्॥
उग्रां वन्दे उग्रसिद्धिप्रदायिनीम्।
अविद्याशत्रुसंहारिणीं भक्तेभ्यः शुभदायिनीम्॥
अर्थ: घोररूपा उग्र सरस्वती को नमस्कार। वे उग्र सिद्धि प्रदा एवं अविद्या शत्रु नाश करती हैं।
🍁३४. सौभाग्य सरस्वती
सौभाग्य सरस्वतीं वैवाहिकगृहसुखदा।
मंगलकृतरूपिणीं पद्महस्तां विमलाम्॥
सौभाग्यं वन्दे गृहसौख्यप्रदायिनीम्।
कुलवृद्धिं प्रदात्रीं भक्तानां हृदि संनिधाम्॥
अर्थ: गृहसुख प्रदात्री सौभाग्य सरस्वती को नमस्कार। वे कुल वृद्धि एवं सौभाग्य देती हैं।
🍁३५.स्पर्शमणि सरस्वती
कायाकल्पप्रदां देवीं जर्जरत्वनिवारिणीम्।
नवजीवनप्रदां विद्यां स्पर्शमणिं सरस्वतीम्॥
अमृतस्वरूपिणीं शुद्धां सर्वविकारप्रशामनीम्।
देहचित्तप्रसादार्थां स्पर्शमणिं सरस्वतीम्॥
अर्थ
देवी जो कायाकल्प प्रदान करने वाली, जर्जरता निवारिणी, नई जीवन और विद्या दायिनी स्पर्शमणि सरस्वती हैं; अमृत स्वरूपिणी, शुद्ध, सभी विकारों को शांत करने वाली तथा शरीर-चित्त प्रसाद के लिए स्पर्शमणि सरस्वती का चिन्तन करें॥
🍁३६. त्रिलोक सरस्वती
त्रिलोक सरस्वतीं त्रैलोक्याधिष्ठात्रीं पराम्।
त्रिपुरसुन्दरीं ध्याये सर्वलोकहितायिनीम्॥
त्रिलोकां वन्दे लोकपालप्रदायिनीम्।
त्रिविधविद्यावृद्धिं भक्तानां हृदि वासिनीम्॥
अर्थ: त्रैलोक्याधिष्ठात्री त्रिलोक सरस्वती को नमस्कार। वे त्रिविध विद्या वृद्धि देती हैं।
🍁३७. सिद्ध सरस्वती
सिद्ध सरस्वतीं सिद्धिप्राप्तिकारीं महाम्।
अष्टसिद्धिधरीणं चतुर्भुजां शुभाननाम्॥
सिद्धां वन्दे अष्टसिद्धिप्रदायिनीम्।
साधनासिद्धिकरीं भक्तेभ्यः शुभदायिनीम्॥
अर्थ: अष्टसिद्धि प्रदात्री सिद्ध सरस्वती को नमस्कार। वे साधना सिद्धि प्रदान करती हैं।
🍁३८. श्रुति देवी
श्रुति देवीं वेदश्रुतिस्वरूपिणीं शुभाम्।
श्रुतिसागरसान्तिष्ठं पद्महस्तां विमलाम्॥
श्रुतिं वन्दे श्रुतिसिद्धिप्रदायिनीम्।
वेदार्थज्ञानदात्रीं भक्तानां हृदि संनिधाम्॥
अर्थ: वेदश्रुति स्वरूपा श्रुति देवी को नमस्कार। वे वेदार्थ ज्ञान प्रदान करती हैं।
🍁३९. कामराज सरस्वती
कामराज सरस्वतीं इच्छापूर्तिकरीं पराम्।
कामबीजावलम्बिनीं रसेन्द्रियप्रिया शुभाम्॥
कामराजं वन्दे कामसिद्धिप्रदायिनीम्।
मनोरथान् पूरयित्रीं भक्तेभ्यः शुभदायिनीम्॥
अर्थ: गृहस्थ की इच्छापूर्ति करिणी कामराज सरस्वती को नमस्कार। वे मनोरथ पूर्ण करती हैं।
🍁४०. त्रैलोक्यमोहन सरस्वती
त्रैलोक्यमोहनं मोहिनीशक्तिस्वरूपिणीम्।
विचित्रवस्त्रधारिणीं मन्मथसमकान्तिम्॥
त्रैलोक्यं वन्दे मोहनसिद्धिकराम्।
सर्वजनमोहिनीं भक्तानां हृदि वासिनीम्॥
अर्थ: मोहिनी शक्ति स्वरूपा त्रैलोक्यमोहन को नमस्कार। वे मोहन सिद्धि प्रदान करती हैं।
🍁४१. कामधेनु सरस्वती
कामधेनु सरस्वतीं समृद्धिधनप्रदायिनीम्।
दुग्धकलशधारिणीं गौरीवर्णां शुभाननाम्॥
कामधेनुं वन्दे धनसिद्धिप्रदायिनीम्।
कल्पवृक्षरूपिणीं भक्तेभ्यः शुभदायिनीम्॥
अर्थ: धन-समृद्धि प्रदात्री कामधेनु सरस्वती को नमस्कार। वे कल्पवृक्ष स्वरूपा धन सिद्धि देती हैं।
🍁४२. अक्षरा सरस्वती
अक्षरा सरस्वतीं अक्षरलेखनशक्तिदाम्।
लेखनीपुस्तकहस्तां पद्मासनस्थितां शुभाम्॥
अक्षरां वन्दे लेखनसिद्धिप्रदायिनीम्।
वाङ्मयसंपत्तिकरीं भक्तानां हृदि संनिधाम्॥
अर्थ: अक्षर लेखन शक्ति प्रदात्री अक्षरा को नमस्कार। वे लेखन सिद्धि एवं वाङ्मय सम्पदा देती हैं।
🍁४३. स्वरा सरस्वती
स्वरा सरस्वतीं स्वरसंगीताधिष्ठात्रीम्।
वीणावादनपरां ध्याये सुरसङ्गीतमोहिनीम्॥
स्वरां वन्दे संगीतसिद्धिप्रदायिनीम्।
सुरलयप्रदान् कर्त्रीं भक्तेभ्यः शुभदायिनीम्॥
अर्थ: स्वर-संगीत अधिष्ठात्री स्वरा को नमस्कार। वे संगीत सिद्धि एवं सुरलय प्रदान करती हैं।
🍁४४. महाविद्या सरस्वती
महाविद्या सरस्वतीं तांत्रिकविद्यास्वरूपिणीम्।
दशमहाविद्यरूपीणं खड्गकपालकरां शुभाम्॥
महाविद्यां वन्दे तन्त्रसिद्धिप्रदायिनीम्।
गूढज्ञानकारिणीं भक्तानां हृदि वासिनीम्॥
अर्थ: तांत्रिक विद्या स्वरूपा महाविद्या को नमस्कार। वे तंत्र सिद्धि एवं गूढ़ ज्ञान देती हैं।
🍁४५..कालोत्तमा सरस्वती
कालातीतां महादेवीं कालबन्धविवर्जिताम्।
क्षणनियन्त्रणकरीं कालोत्तमां सरस्वतीम्॥
नियतिं कालजां घोरां व्यवस्थित्य विनाशिनीम्।
कालोपरि स्थितां देवीं कालोत्तमां सरस्वतीम्॥
अर्थ :
जो देवी काल से परे हैं, समय के बन्धन से रहित हैं
और क्षण-क्षण का नियमन करने में समर्थ हैं;
जो कालजन्य कठोर नियति को व्यवस्थित कर भंग करती हैं
और स्वयं काल के ऊपर स्थित हैं —
उन कालोत्तमा सरस्वती का मैं ध्यान करता हूँ।
🍁४६. मुक्तिबोध सरस्वती
मुक्तिबोध सरस्वतीं विमलचित्तां शुभाङ्गिनीम्।
मोहमोहिनीं तमोनाशिनीं ज्ञानप्रदीप्तिकाम्॥
साधकानां हृदि वासिनीं भक्तानां सुरेन्द्रदायिनीम्।
वन्दे मुक्तिबोध देवीं परमशान्तिस्वरूपिणीम्॥
अर्थ:
विमल चित्त वाली शुभांगिनी मुक्तिबोध सरस्वती को नमस्कार। वे मोह मोहिनी, तमोनाशिनी एवं ज्ञानप्रदीप्ति स्वरूपा हैं। साधकों के हृदय में विराजमान, भक्तों को स्वर्गाधिपति पद एवं परम शान्ति प्रदान करने वाली हैं।
🍁४७. पाताल सरस्वती
पाताल सरस्वतीं गुप्तशास्त्रज्ञानदात्रीम्।
पातालसान्तिष्ठं रत्नहारपरिपूजिताम्॥
पाताल सरस्वतीं वन्दे गूढशास्त्रप्रकाशिनीम्।
रहस्यविद्यासिद्धिं भक्तेभ्यः शुभदायिनीम्॥
अर्थ: गूढ़ शास्त्र ज्ञान प्रदात्री पाताल सरस्वती को नमस्कार। वे रहस्य विद्या सिद्धि देती हैं।
🍁४८. चिंतामणि सरस्वती
चिंतामणिसरस्वतीं सर्वकार्यप्रसाधिनीम्।
खड्गशूलधरीं रक्तनेत्रां शुभाननाम्॥
चिंतामणिं वन्दे विघ्नदोषनिवारिणीम्।
भक्तरक्षाप्रदात्रीं भक्तानां हृदि वासिनीम्॥
अर्थ: सर्वकार्य साधक चिंतामणि को नमस्कार। वे विघ्न निवारण एवं भक्त रक्षा करती हैं।
🍁४९. वन सरस्वती
वनसरस्वतीं प्रकृतिवनजीवनशक्तिदाम्।
पर्णमालाधरां ध्याये वनवासीं शुभाननाम्॥
वनां वन्देऽन्नदां वनसिद्धिप्रदायिनीम्।
प्रकृतिप्रेमकारिणीं भक्तेभ्यः शुभदायिनीम्॥
अर्थ:
प्रकृति और वन-जीवन की शक्ति प्रदान करने वाली, पर्णमाला से सुशोभित, वनवासी शुभमुखी वन सरस्वती को नमन।
वे अन्न, धन-धान्य, प्रकृति-प्रेम तथा वन-संबंधी सिद्धियाँ प्रदान कर भक्तों का कल्याण करती हैं।
🍁५०. नागवल्लभ सरस्वती
नागवल्लभ सरस्वतीं नागशक्त्यधिष्ठात्रीम्।
नागराजयुक्तां ध्याये मणिभूषणभूषिताम्॥
नागवल्लभं वन्दे नागसिद्धिप्रदायिनीम्।
भुजङ्गमूर्च्छना कर्त्रीं भक्तानां हृदि संनिधाम्॥
अर्थ -नागशक्ति की अधिष्ठात्री, मणिभूषित नागवल्लभ सरस्वती को नमन।
वे नागसिद्धि तथा सर्पों को नियंत्रित करती है एवं भक्तों की
रक्षा करती हैं।
🍁५१. अमृतप्रदा सरस्वती
अमृतप्रदा सरस्वतीं अमरत्वदीर्घायुदा।
सुमनोजलधारिणीं पद्मासनस्थितां शुभाम्॥
अमृतप्रदा वन्दे आयुःसिद्धिप्रदायिनीम्।
रोगनाशप्रदात्रीं भक्तेभ्यः शुभदायिनीम्॥
अर्थ: दीर्घायु प्रदात्री अमृतप्रदा को नमस्कार। वे रोग नाश एवं अमरत्व प्रदान करती हैं।
🍁५२. सिंह सरस्वती
सिंह सरस्वतीं बल पराक्रम नेतृत्वशक्तिस्वरूपिणीम्।
सिंहासनस्थितां ध्याये सिंहकेसरीं पराम्॥
सिंहां वन्दे शौर्यसिद्धिप्रदायिनीम्।
नेतृत्वप्रदात्रीं भक्तानां हृदि वासिनीम्॥
अर्थ: साहस-नेतृत्व स्वरूपा सिंह सरस्वती को नमस्कार। वे शौर्य एवं नेतृत्व सिद्धि देती हैं।
🍁५३. ज्योतिष्मती सरस्वती
ज्योतिष्मतीं ग्रहनक्षत्रविद्यास्वरूपिणीम्।
गुरुशुक्रबुधयुक्तां ध्याये पद्मासनस्थिताम्॥
ज्योतिष्मतीं वन्दे ज्योतिषसिद्धिप्रदायिनीम्।
फलितज्ञानकारिणीं भक्तेभ्यः शुभदायिनीम्॥
अर्थ: ग्रह-नक्षत्र विद्या स्वरूपा ज्योतिष्मती को नमस्कार। वे ज्योतिष सिद्धि एवं फलित ज्ञान देती हैं।
🍁५४. आनन्दा सरस्वती
आनन्दां चिदानन्दरूपिणीं विमलां शुभाम्।
पुस्तकवीणाहस्तां हंसारूढां शुभाननाम्॥
आनन्दां वन्दे आनन्दसिद्धिप्रदायिनीम्।
हृदयानन्ददात्रीं भक्तानां हृदि वासिनीम्॥
अर्थ: चिदानन्द स्वरूपा आनन्दा को नमस्कार। वे हृदय आनन्द एवं सिद्धि प्रदान करती हैं।
🍁५५. आयुष्य सरस्वती
आयुष्यां दीर्घायुप्रदात्रीं अमृतकलशाम्।
श्वेतपद्मासनस्थां चतुर्भुजां शुभाननाम्॥
आयुष्यां वन्दे आयुःसिद्धिप्रदायिनीम्।
रोगहरिं शान्तिदं भक्तेभ्यः शुभदायिनीम्॥
अर्थ: दीर्घायु प्रदात्री आयुष्य सरस्वती को नमस्कार। वे रोग नाश एवं शान्ति देती हैं।
🍁५६. सौन्दर्य सरस्वती
सौन्दर्य सरस्वतीं काव्यालङ्कारमोहिनीम्।
कुसुममालाधरां ध्याये वीणावादनपराम्॥
सौन्दर्यं वन्दे काव्यसौन्दर्यकारिणीम्।
रसिकजनमोहिनीं भक्तानां हृदि संनिधाम्॥
अर्थ: काव्य अलंकार मोहिनी सौंदर्य सरस्वती को नमस्कार। वे काव्य सौंदर्य एवं रसिक मोहन प्रदान करती हैं।
🍁५७. त्रिकाल विद्या सरस्वती
त्रिकाल विद्यां भूतभविष्यत्ज्ञस्वरूपिणीम्।
त्रिनयनां ध्याये सर्वकालविजृम्भिणीम्॥
त्रिकालां वन्दे त्रिकालज्ञानप्रदायिनीम्।
कालातीतां शुभदं भक्तेभ्यः प्रददाति सा॥
अर्थ: त्रिकाल ज्ञान स्वरूपा त्रिकाल विद्या को नमस्कार। वे भूत-भविष्यत् ज्ञान एवं कालातीत शुभता देती हैं।
🍁५८. भाग्यविधात्री सरस्वती
भाग्यविधात्रीं भाग्यप्रदात्रीं शुभाननाम्।
चक्रासनस्थितां ध्याये अङ्कुशाङ्कुशधारिणीम्॥
भाग्यविधात्रीं वन्दे भाग्यसिद्धिप्रदायिनीम्।
कुलवृद्धिप्रदा शुभं भक्तानां हृदि वासिनीम्॥
अर्थ: भाग्य प्रदात्री भाग्यविधात्री को नमस्कार। वे भाग्य सिद्धि एवं कुल वृद्धि प्रदान करती हैं।
🍁५९. राजराजेश्वरी सरस्वती
राजाधिराजसंस्थां तां त्रिलोकाधिपतिं पराम्।
वागधिष्ठानकर्त्रीं च राजराजेश्वरीं सरस्वतीम्॥
शुद्धसत्त्वस्वरूपां तां न्यायक्रमप्रवर्तिनीम्।
राज्यबुद्धिप्रदां देवीं वाणीबलसमन्विताम्॥
अर्थ :
जो देवी राजाओं की भी अधिष्ठात्री हैं और तीनों लोकों की स्वामिनी हैं,
जो वाणी तथा निर्णय-क्रम की अधिपति हैं;
जो शुद्ध सत्त्वस्वरूप होकर
राज्य-बुद्धि, न्याय और वाणी-बल प्रदान करती हैं —
उन त्रिलोकस्वामिनी राजराजेश्वरी सरस्वती का मैं भजन करता हूँ।
🍁६०. गायत्री सरस्वती
गायत्रीं वेदमातरं पञ्चजन्यस्वरूपिणीम्।
सवित्रसुता ध्याये सूर्यमण्डलवासिनीम्॥
गायत्रीं वन्दे गायत्रीमन्त्रसिद्धिदाम्।
सर्वविद्याप्रदात्रीं भक्तानां हृदि संनिधाम्॥
अर्थ: वेदमाता गायत्री को नमस्कार। वे गायत्री मन्त्र सिद्धि एवं सर्वविद्या प्रदान करती हैं।
🍁६१. सावित्री सरस्वती
सावित्रीं सवित्रशक्तिस्वरूपिणीं शुभप्रदाम्।
पद्महस्तां विमलां हंसयानां शुभाननाम्॥
सावित्रीं वन्दे सावित्रविद्यास्वरूपिणीम्।
भर्गसिद्धिप्रदात्रीं भक्तेभ्यः शुभदायिनीम्॥
अर्थ: सवित्र शक्ति स्वरूपा सावित्री को नमस्कार। वे सावित्र विद्या एवं भर्ग सिद्धि देती हैं।
🍁६२.सूर्य सरस्वती
सूर्य सरस्वतीं सर्वग्रहपीडानाशिनीं ब्रह्मज्योतिस्वरूपिणीम्।
नवग्रहरिपुहरिणीं प्रभामण्डलवासिनीं शुभाम्॥
सूर्यकमलनयनां पद्महस्तां चतुर्भुजां ध्याये।
सूर्य सरस्वतीं वन्दे ग्रहशान्तिप्रदायिनीं तेजोमयीम्॥
अर्थ:
सूर्य सरस्वती को नमस्कार - सर्वग्रहपीड़ा नाशिनी, ब्रह्मज्योति स्वरूपा। वे नवग्रह दोष हरन, ग्रहशान्ति एवं तेजः प्रदान करती हैं।
🍁६३. धनाकर्षण सरस्वती
धनाकर्षणसरस्वतीं विद्या-वैभवदायिनीम्।
हिरण्यवर्णां नववत्रधारां अष्टभुजां पद्मशंखपाशधारिणीम्॥
वीणा धनकलशाभयं वरं प्रदायिनीं भक्तानां हृदि वासिनीम्॥
अर्थ: धन-विद्या प्रदात्री धनाकर्षण सरस्वती को नमस्कार। वे वैभव, धनागमन सिद्धि एवं भय निवारण करती हैं।
🍁६४. निरंजना सरस्वती
निरंजनां सर्वविद्यामयीं विश्वरूपिणीम्।
सर्वव्यापिनीं महादेवीं महाकारणकारिणीम्॥
सर्वसिद्धिप्रदां शुद्धां महामोक्षप्रदायिनीम्।
भक्तहृदयनिलयां सरस्वतीं नमाम्यहम्॥
अर्थ: सर्वविद्या स्वरूपा निरंजना को नमस्कार। वे सर्वसिद्धि, शुद्धि एवं महामोक्ष प्रदान करती हैं, भक्त हृदय में विराजमान।
फलश्रुति
या पठेत् भक्त्या चतुष्षष्टिरूपस्तोत्रं शुभावसरे।
सर्वविद्यासमृद्धिं च मोक्षं च लभते ध्रुवम्॥
अर्थ: भक्तिपूर्वक शुभ मुहूर्त में इस चतुष्षष्टि रूप स्तोत्र का पाठ करने से सर्वविद्या समृद्धि एवं मोक्ष निश्चयपूर्वक प्राप्त होता है।
॥ इति श्री चतुष्षष्टिरूप सरस्वती स्तोत्रं सम्पूर्णम् ॥
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