01/04/2026
क्या आधुनिक हृदय रोगों का समाधान आयुर्वेद में है? आकाशवाणी देहरादून पर मेरा विशेष साक्षात्कार।
हाल ही में मुझे आकाशवाणी देहरादून (100.5 FM) के माध्यम से आप सभी से जुड़ने और हृदय स्वास्थ्य के प्रति जागरूक करने का अवसर मिला। आज की भागदौड़ भरी जिंदगी और बिगड़ती जीवनशैली के बीच, क्या आयुर्वेद वास्तव में 'Evidence-based' (प्रमाण आधारित) समाधान दे सकता है, यह इस साक्षात्कार का मुख्य विषय था।
यहाँ मेरे साक्षात्कार के मुख्य अंश हैं:
आयुर्वेद अब केवल परंपरा नहीं, विज्ञान है
आज का आयुर्वेद केवल परंपरा नहीं, बल्कि evidence पर आधारित है। ICMR के शोधों ने यह सिद्ध किया है कि 'पुष्करमूल' जैसी औषधियाँ हृदय की मांसपेशियों की पंपिंग क्षमता को प्राकृतिक रूप से बढ़ाती हैं। वहीं 'गुग्गुल' हृदय की धमनियों में जमाव/Plaque को साफ करने में बहुत प्रभावी पाया गया है। आयुर्वेद में कई जटिल रोगों का सफल प्रबंधन संभव है, जैसे: High BP, Angina, Atrial fibrillation, Heart blockage इत्यादि।
2. इमरजेंसी में आयुर्वेद की गति
अक्सर लोग सोचते हैं कि आयुर्वेद धीरे काम करता है, लेकिन आयुर्वेद की 'रस औषधियाँ' जीभ के नीचे (Sublingual) रखने पर एक सेकंड के आठवें हिस्से से भी कम समय में अपना असर दिखाना शुरू कर देती हैं। हमने 'त्रिमर्म' 'त्रिमर्म' सिद्धांत के जरिए ऐसे कई हृदय रोगियों की चिकित्सा की है जहाँ अन्य चिकित्सा पद्धतियाँ संघर्ष कर रही थीं।
“कुछ समय पूर्व मेरे पास एक ऐसे रोगी आए जिनकी एक किडनी निकल जाने के कारण उनकी हृदय गति अनियमित और गिरकर मात्र 44 रह गई थी। आयुर्वेद के 'त्रिमर्म' सिद्धांत के अनुसार हृदय और मूत्र वह संस्थान आपस में गहराई से जुड़े हैं। हमने इसी सिद्धांत पर उनकी चिकित्सा की और परिणाम यह रहा कि जहाँ अन्य पद्धतियाँ कई महीनो से संघर्ष कर रही थीं, वहाँ आयुर्वेद से उनकी हृदय गति अब बिल्कुल सामान्य है।”
3. 'विरुद्ध आहार' और हार्ट अटैक का संबंध
अक्सर हार्ट अटैक आने से ठीक पहले के भोजन पर कोई ध्यान नहीं देता। हमारा पेट हृदय के ठीक नीचे स्थित है। गर्मी के मौसम में विशेषकर उत्तर भारतीय राज्यों में मछली का सेवन, इसके अलावा पनीर के साथ पालक का सेवन इत्यादि अनेक कॉम्बिनेशन है जो खाने के तुरंत बाद, पेट में सूजन पैदा कर सीधे हृदय पर दबाव डालते है जो की कुछ ही समय में हार्ट अटैक में परिवर्तित हो सकता है। आयुर्वेद में पेट के रोग “विदग्धाजीर्ण” के लक्षण हार्ट अटैक से बहुत मिलते-जुलते बताए गए हैं। इसलिए, आहार की उचित समझ आपको हृदय रोग से बचा सकती है।
4. Cooking oil और हृदय रोग का सम्बंध।
आपको शायद याद हो, एक बहुत प्रसिद्ध क्रिकेटर एक नामी गिरामी कम्पनी का हार्ट के लिए लाभदायक रेफ़ायंड ओईल का ऐड करता था। परिस्थितियाँ ऐसे बनी की उसी क्रिकेटर को खुद कुछ समय बाद हार्ट अटैक अगया जबकि उसकी उम्र भी बहुत ज़्यादा नहीं थी। यह दर्शाता है की मार्केटिंग के नाम पर भारतीय लोगों को कैसे बेवक़ूफ़ बनाया जाता है।
आधुनिकता के चलते लोग अब रिफाइंड तेल इत्यादि पर शिफ़्ट हो गए हैं। रिफाइंड तेल हृदय की धमनियों में रूखापन बढ़ाता है। शरीर में हृदय की नसों को लचीला बने रहने के लिए प्राकृतिक चिकनाई चाहिए। रिफाइंड तेल के अधिक प्रयोग से नसें सख्त और मोटी हो जाती हैं, जिसे 'आर्टेरियोस्क्लेरोसिस' कहते हैं। इससे हार्ट अटैक का खतरा बढ़ता है। इसके अलावा आज कल प्रयोग में लाए जाने वाले ऑलिव ओईल इत्यादि भी हीट स्टेबल ना होने के कारण हृदय के लिए लाभकारी नहीं होते। इसीलिए, भोजन में कच्ची घानी सरसों का तेल, मोमफलि का तेल, तिल का तेल और शुद्ध गाय का घी का प्रयोग ही सर्वश्रेष्ठ है।
5. जिम और वर्कआउट: अति सर्वत्र वर्जयेत
आयुर्वेद में व्यायाम का स्पष्ट नियम कहता है कि अपनी शक्ति से आधा किया व्यायाम ही लाभकारी है। गर्मी और बारिश के मौसम में, जब हमारा शरीर प्राकृतिक रूप से कमजोर और थका हुआ रहता है, तब भारी वर्कआउट या ओवर-एक्सरसाइज हृदय पर अत्यधिक दबाव डालती है। लोग अक्सर मौसम और अपनी शारीरिक क्षमता/बल को नजरअंदाज कर 'एग्जर्शन' (Exertion) करते हैं, जो हार्ट फेलियर का कारण बन सकता है। व्यायाम उतना ही करें जिससे शरीर में हल्कापन आए, न कि इतनी थकान कि हृदय की धड़कन अनियंत्रित हो जाए।
हृदय को सुरक्षित रखने के सुझाव:
च्यवनप्राश एक ऐसा रसायन है जो प्रसिद्ध तो केवल इम्यूनिटी के लिए है लेकिन इसके लाभों में हृदय रोग नाशक ऐसी टिप्पणी आइ है। इसके सेवन से हृदय की मांसपेशियों बलवान बनती है।
वेगों/natural urges को ना रोकें। आयुर्वेद में आंसू को रोकने से हृदय रोग होना ऐसा सीधा वर्णन मिलता है। यही कारण है की पुरुषों की अपेक्षा स्त्रियों में हार्ट अटैक कम देखने को मिलता है।
भोजन में खटाई या टमाटर की जगह अनारदाना और आँवले का चूर्ण का नियमित सेवन हृदय रोगों से बचाव कर सकता है।
हृदय स्वास्थ्य के प्रति जागरूक बनें, आयुर्वेद को अपनाएं।
— नाड़ि वैद्य राहुल गुप्ता
श्री विश्व प्रांगण आयुर्वेद एवं पंचकर्म क्लिनिक
Mob- 78953-72936