11/01/2026
मुंहपका-खुरपका रोग (Foot and Mouth Disease - FMD) दुधारू पशुओं में होने वाला एक अत्यंत संक्रामक और खतरनाक वायरस जनित रोग है। यह गाय, भैंस, भेड़ और बकरी जैसे खुर वाले जानवरों को सबसे अधिक प्रभावित करता है।
यहाँ इस बीमारी के लक्षण, प्रभाव और बचाव की पूरी जानकारी दी गई है:
1. मुख्य लक्षण (Symptoms)
* तेज बुखार: पशु को अचानक 104-106°F तक बुखार आ जाता है।
* मुँह में छाले: जीभ, मसूड़ों और ओठों के अंदर छाले पड़ जाते हैं, जो बाद में फूटकर घाव बन जाते हैं।
* लार गिरना: मुँह से चिपचिपी और डोरीदार लार (Ropey saliva) अधिक मात्रा में गिरती है।
* खुरों में घाव: खुरों के बीच की जगह में घाव हो जाते हैं, जिससे पशु लंगड़ाकर चलने लगता है।
* दूध में कमी: दुधारू पशुओं का दूध उत्पादन अचानक बहुत कम हो जाता है।
2. दुधारू पशुओं पर प्रभाव
* दूध का सूखना: यदि समय पर इलाज न हो, तो थनैला रोग (Mastitis) होने का डर रहता है और दूध पूरी तरह सूख सकता है।
* बांझपन: संक्रमण के कारण पशुओं में गर्भपात या प्रजनन क्षमता में कमी आ सकती है।
* कमजोरी: पशु खाना-पीना छोड़ देता है जिससे वह बहुत कमजोर हो जाता है।
3. उपचार और देखभाल (Treatment & Care)
नोट: FMD का कोई निश्चित एंटी-वायरल इलाज नहीं है, केवल लक्षणों को कम किया जा सकता है।
* घावों की सफाई: मुँह के छालों को लाल दवा (Potassium Permanganate) के घोल या फिटकरी के पानी से धोएं।
* खुरों की देखभाल: खुरों के घावों को फिनाइल के पानी या कॉपर सल्फेट (नीला थोथा) के घोल से साफ करें ताकि कीड़े न पड़ें।
* नरम भोजन: पशु को चबाने में कठिनाई होती है, इसलिए उसे दलिया या नरम चारा दें।
* एंटीबायोटिक: सेकेंडरी इन्फेक्शन से बचाने के लिए डॉक्टर की सलाह पर एंटीबायोटिक इंजेक्शन लगवाएं।
4. बचाव के उपाय (Prevention)
* टीकाकरण (Vaccination): साल में दो बार (हर 6 महीने पर) पशुओं का FMD Vaccination जरूर करवाएं। यह सबसे प्रभावी बचाव है।
* स्वच्छता: बीमार पशु को स्वस्थ पशुओं से तुरंत अलग कर दें।
* बाहरी आवाजाही: नए खरीदे गए पशु को कम से कम 15 दिन अलग रखें।
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