Yogi Vikul Advanced Yoga From Patanjali

Yogi Vikul Advanced Yoga From Patanjali Yoga is a physical, mental, and spiritual practice or discipline which originated in ancient India.

29/04/2018

साइटिका पेन का सबसे अच्छा घरेलु इलाज, जरूर अपनाएँ और शेयर करे
date_rangeJanuary 04, 2018
सबसे आम समस्या जो लोगो में डॉक्टर्स को देखने को मिलती है वो है सियाटिका (sciatica).साइटिका (sciatica) नाडी, जिसका उपरी सिरा लगभग 1 इंच मोटा होता है, प्रत्येक नितंब के नीचे से शुरू होकर टाँग के पिछले भाग से गुजरती हुई पाँव की एडी पेर ख़त्म होती है| इस नाडी का नाम इंग्लीश में साइटिका नर्व है| इसी नाडी में जब सूजन ओर दर्द के कारण पीड़ा होती है तो इसे वात शूल अथवा साइटिका का दर्द कहते है| इस रोग का आरंभ अचानक ओर तेज दर्द के साथ होता है| 30 से 40 साल की उम्र के लोगो में ये समस्या आम होती है |
साइटिका का दर्द एक समय मे सिर्फ़ एक ही टाँग मे होता है| सर्दियों के दिनो में ये दर्द और भी बढ़ जाता है |रोगी को चलने मे कठिनाई होती है| रोगी जब सोता या बैठता है तो टाँग की पूरी नस खींच जाती है ओर बहुत तकलीफ़ होती है| सायटिका एक तरह का भयानक दर्द है जिसका मुख्य कारण सायटिक नर्व है। यह वो नर्व है जो रीढ़ के निम्न भाग से निकलकर घुटने के पीछे की ओर से पैर की तरफ जाती है। शरीर को अधिक समय तक एक ही स्थिति में रखने से यह दर्द बढ़ जाता है यह दर्द बहुत असहनीय होता है।

अक्सर यह समस्या उन लोगों में होती है जो बहुत समय तक बैठ कर काम करते हैं या बहुत अधिक चलते रहने से अत्यधिक साइकिल, मोटर साइकिल अथवा स्कूटर चलाने से सायटिका नर्व पर दबाव पड़ता है। कभी-कभी ऐसा भी होता है कि अचानक हड्डियों पर जोर पड़ जाने से भी इस प्रकार का दर्द होता है। इस प्रकार का दर्द अकसर 40 से 50 वर्ष की उम्र में होता है और यह बीमारी बरसात या ठंड के मौसम में ज्यादा तकलीफ देती है। अगर आप भी सायटिका दर्द से परेशान है तो आइए हम आपको बताते हैं कुछ ऐसे आयुर्वेदिक प्रयोग जिनसे सायटिका दर्द जल्द ही ठीक हो जाएगा।
इसके कई कारण हो सकते है :
जैसे सर्दी लगने(कोल्ड स्ट्रोक),
अधिक चलने से,
मलावरोध (शोच न होना),
स्त्रियॉं में गर्भ की अवस्था,
या गर्भाशय का अर्बुद (Tumour),
तथा मेरुदंड (spine) की विकृतियाँ, आदि से, किसी तंत्रिका या तंत्रिका मूलों (नर्व रूट) पर पड़ने वाले दबाव से उत्पन्न होता है। कभी-कभी यह नसों की सूजन (तंत्रिकाशोथ Neuritis) से भी होता है।
सियाटिका का इलाज : How to cure sciatica?
आवश्यक सामग्री :
4 लहसुन की कलियाँ
200 ml दूध
तैयार करने की विधि :
लहसुन को काट कर दूध में डाल दें | दूध को कुछ मिनट तक उबालें | उबालने के बाद इसे मीठा करने के लिए थोडा शहद मिला लें | इस दूध का रोजाना सेवन करें जब तक दर्द खत्म न हो जाये |
आयुर्वेदिक प्रयोग :
पहला प्रयोग : मीठी सुरंजन या सहजन 20 ग्राम + सनाय 20 ग्राम + सौंफ़ 20 ग्राम + शोधित गंधक 20 ग्राम + मेदा लकड़ी 20 ग्राम + छोटी हरड़ 20 ग्राम + सेंधा नमक 20 ग्राम इन सभी को लेकर मजबूत हाथों से घोंट लें व दिन में तीन बार तीन-तीन ग्राम गर्म जल से लीजिये।
दूसरा प्रयोग : लौहभस्म 20 ग्राम + रस सिंदूर 20 ग्राम + विषतिंदुक बटी 10 ग्राम + त्रिकटु चूर्ण 20 ग्राम इन सबको अदरक के रस के साथ घोंट कर 250 मिलीग्राम के वजन की गोलियां बना लीजिये और दो दो गोली दिन में तीन बार गर्म जल से लीजिये।
तीसरा प्रयोग : 50 पत्ते परिजात या हारसिंगार व 50 पत्ते निर्गुण्डी के पत्ते लाकर एक लीटर पानी में उबालें। जब यह पानी 750 मिली हो जाए तो इसमें एक ग्राम केसर मिलाकर उसे एक बोतल में भर लें। यह पानी सुबह शाम 3/4 कप मात्रा में दोनों टाइम पीएं। साथ ही दो-दो गोली वातविध्वंसक वटी की भी लें।
चौथा प्रयोग : साइटिका रोग में 20 ग्राम निर्गुण्डी के पत्तों को 375 मिलीलीटर पानी में मन्द आग पर पकायें तथा चौथाई पानी रह जाने पर छान लें। इस काढ़े को 2 सप्ताह तक पीने से रोगी को लाभ होता है।
इसका भी रखें ख्याल :
दर्द के समय गुनगुने पानी से नहायें ।आप सन बाथ भी ले सकते हैं, अपने आपको ठंड से बचाएं। सुबह व्यायाम करें या सैर पर जायें ।अधिक समय तक एक ही स्थिति में ना बैठें या खड़े हों। अगर आप आफिस में हैं तो बैठते समय अपने पैरों को हिलाते डुलाते रहें।

30/09/2016

💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐बेल पत्र के औषधीय प्रयोग ----

▶ बेल पत्र के सेवन से शरीर में आहार के पोषक तत्व अधिकाधिक रूप से अवशोषित होने लगते है |

▶ मन एकाग्र रहता है और ध्यान केन्द्रित करने में सहायता मिलती है |

▶इसके सेवन से शारीरिक वृद्धि होती है |

▶ इसके पत्तों का काढा पीने से ह्रदय मज़बूत होता है |

▶बारिश के दिनों में अक्सर आँख आ जाती है यानी कंजक्टिवाईटीस हो जाता है . बेल पत्रों का रस आँखों में डालने से ; लेप करने से लाभ होता है |

▶इसके पत्तों के १० ग्राम रस में १ ग्रा. काली मिर्च और १ ग्रा. सेंधा नमक मिला कर सुबह दोपहर और शाम में लेने से अजीर्ण में लाभ होता है |

▶बेल पत्र , धनिया और सौंफ सामान मात्रा में ले कर कूटकर चूर्ण बना ले , शाम को १० -२० ग्रा. चूर्ण को १०० ग्रा. पानी में भिगो कर रखे , सुबह छानकर पिए | सुबह भिगोकर शाम को ले, इससे प्रमेह और प्रदर में लाभ होता है | शरीर की अत्याधिक गर्मी दूर ।

▶बरसात के मौसम में होने वाले सर्दी , खांसी और बुखार के लिए बेल पत्र के रस में शहद मिलाकर ले |

▶ बेल के पत्तें पीसकर गुड मिलाकर गोलियां बनाकर रखे. इसे लेने से विषम ज्वर में लाभ होता है |

▶ दमा या अस्थमा के लिए बेल पत्तों का काढा लाभकारी है|

▶सूखे हुए बेल पत्र धुप के साथ जलाने से वातावरण शुद्ध होता है|

▶ पेट के कीड़ें नष्ट करने के लिए बेल पत्र का रस लें|

▶एक चम्मच रस पिलाने से बच्चों के दस्त तुरंत रुक जाते है |

▶संधिवात में बेल पत्र गर्म कर बाँधने से लाभ मिलता है |

▶महिलाओं में अधिक मासिक स्त्राव और श्वेत प्रदर के लिए और पुरुषों में धातुस्त्राव हो रोकने के लिए बेल पत्र और जीरा पीसकर दूध के साथ पीना चाहिए|. 💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐

30/09/2016

*🍃⚫स्वस्थ रहने के 10 मंत्र⚫🍃*.

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*⚫अगर आप अपनी दिनचर्या में ये 10 चीजें शामिल कर लें तो रोग आपको छू भी नहीं पायेगा. हृदय रोग, शुगर , जोड़ों के दर्द, कैंसर, किडनी, लीवर आदि के रोग आपसे कोसों दूर रहेंगे .
आइये जानते हैं इनके बारे में.*

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*🔶1. आंवला।*

♦किसी भी रूप में थोड़ा सा आंवला हर रोज़ खाते रहे, जीवन भर उच्च रक्तचाप और हार्ट फेल नहीं होगा, इसके साथ चेहरा तेजोमय बाल स्वस्थ और सौ बरस तक भी जवान महसूस करेंगे। 🍃

*🔶2. मेथी।*

♦मेथीदाना पीसकर रख ले।
एक चम्मच एक गिलास पानी में उबाल कर नित्य पिए। मीठा, नमक कुछ भी नहीं डाले इस पानी में। इस से आंव नहीं बनेगी, शुगर कंट्रोल रहेगी जोड़ो के दर्द नहीं होंगे और पेट ठीक रहेगा।
🍃

*🔶3. छाछ।*

♦तेज और ओज बढ़ने के लिए छाछ का निरंतर सेवन बहुत हितकर हैं।
सुबह और दोपहर के भोजन में नित्य छाछ का सेवन करे। भोजन में पानी के स्थान पर छाछ का उपयोग बहुत हितकर हैं
🍃

*🔶4.हरड़।*

♦हर रोज़ एक छोटी हरड़
भोजन के बाद दाँतो तले रखे
और इसका रस धीरे धीरे पेट
में जाने दे। जब काफी देर बाद
ये हरड़ बिलकुल नरम पड़ जाए तो चबा चबा कर निगल ले।
इस से आपके बाल कभी सफ़ेद नहीं होंगे, दांत 100 वर्ष तक निरोगी रहेंगे और पेट के रोग नहीं होंगे, कहते हैं एक सभी रोग पेट से ही जन्म लेते हैं तो पेट पूर्ण स्वस्थ रहेगा।
🍃

*🔶5. दालचीनी और शहद।*

♦सर्दियों में चुटकी भर दालचीनी की फंकी चाहे अकेले ही चाहे शहद के साथ दिन में दो बार लेने से अनेक रोगों से बचाव होता है। 🍃

*🔶6. नाक में तेल।*

♦रात को सोते समय नित्य सरसों का तेल नाक में लगाये। और 5 – 5 बूंदे बादाम रोगन की या सरसों के तेल की या गाय के देसी घी की हर रोज़ डालें.
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*🔶7. कानो में तेल।*

♦सर्दियों में हल्का गर्म और गर्मियों में ठंडा सरसों का तेल तीन बूँद दोनों कान में कभी कभी डालते रहे। इस से कान स्वस्थ रहेंगे।
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*🔶8. लहसुन की कली।*

♦दो कली लहसुन रात को भोजन के साथ लेने से यूरिक एसिड, हृदय रोग, जोड़ों के दर्द, कैंसर आदि भयंकर रोग दूर रहते हैं।
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*🔶9. तुलसी और काली मिर्च।*
♦प्रात: दस तुलसी के पत्ते और पांच काली मिर्च नित्य चबाये। सर्दी, बुखार, श्वांस रोग, अस्थमा नहीं होगा। नाक स्वस्थ रहेगी।
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*🔶10. सौंठ।*

♦सामान्य बुखार, फ्लू, जुकाम और कफ से बचने के लिए पीसी हुयी आधा चम्मच स

17/08/2016
16/08/2016

सूर्यनमस्कार के क्या लाभ हैं ?

सूर्यनमस्कार एक सरल और बहुउपयोगी योगासन हैं। सूर्यनमस्कार से होनेवाले विविध लाभ की जानकारी निचे दी गयी हैं :
सिर्फ एक सूर्यनमस्कार करने से ही 12 आसन करने का लाभ मिलता हैं।
सुबह सूर्योदय के समय खाली पेट सूर्यनमस्कार करने से हड्डियों को सूर्य की किरणों से Vitamin D भी मिलता है जिससे हड्डिया मजबूत बनती हैं।
शरीर शिथिलीकरण, अंतर्गत मालिश तथा जोड़ और स्नायु को सुगठित करने के लिए सूर्यनमस्कार उत्तम योग हैं।
सूर्यनमस्कार करने से शरीर को उर्जा देनेवाली पिंगला नाडी सुप्रवाहित होती हैं।
सूर्यनमस्कार करने से आँखों की रोशनी ठीक रहती हैं।
संपूर्ण शरीर लचीला बनता हैं।
वजन कम करने में सहायक हैं।
बालो का झड़ना और सफ़ेद होना कम होता हैं।
शरीर की सभी प्रणालिया जैसे की - पाचन, श्वसन, प्रजनन, तंत्रिका और अन्तःस्त्रावी ग्रंथि को संतुलित किया जाता हैं।
मस्तिष्क को प्राणयुक्त रक्त का प्रवाह प्रदान करता हैं।
प्रसूति के 40 दिन बाद पेट को कम करने के लिए सूर्यनमस्कार उपयोगी हैं।
मानसिक शांति और धैर्य प्रदान करता हैं।

सूर्यनमस्कार में क्या सावधानी बरतनी चाहिए ?

सूर्यनमस्कार में निम्लिखित सावधानी बरतनी चाहिए :
बुखार, जोड़ो में सुजन होने पर सूर्यनमस्कार नहीं करना चाहिए।
अनियंत्रित उच्च रक्तचाप, हर्निया, गंभीर ह्रदय रोग, चक्कर आना तथा मेरुदंड के गंभीर रोगी को सूर्यनमस्कार नहीं करना चाहिए।
मासिक धर्म के समय तथा गर्भावस्था के 4 महीने के बाद सूर्यनमस्कार नहीं करना चाहिए।
आज कई नामी हस्तिया भी खुद को फिट रखने हेतु सूर्यनमस्कार का नियमित अभ्यास करते हैं। सूर्यनमस्कार से सभी अंगो को लाभ मिलता है इसलिए इसे 'सर्वांग व्यायाम' भी कहते हैं। शारीरिक और मानसिक लाभ के लिए इसका अभ्यास नियमित करना चाहिए।

12/07/2016

सेहत से जुड़े ये टिप्स करें रामबाण का काम
मानसून जहां हमें तपती गर्मी से राहत दिलाता है वहीं यह अपने साथ कई बीमारियां भी लेकर अाता है। अगर मानसून में थोड़ी भी लापरवाही हो जाए तो ढेर सारी बीमारियां हमे अपने लगे लगा लेती है । एेसे में अग्रेजी दवाइयां लेने से भी ज्यादा फर्क नहीं पड़ता है लेकिन अब इससे परेशान होने की जरूरत नहीं क्योंकि अाप घर के कुछ आसान नुस्खे अपनाकर इन परेशानियों से छुटकारा पा सकते है।



1. नीम की पत्तियां

वायरल इंफेक्शन को ठीक करने में नीम की पत्तियां बहुत सहायक है। 10-12 पत्तियों उबली पत्तियों को छानकर दिन में 2-3 बार पीए। इससे आपका इम्यून सिस्टम मजबूत रहेगा।

2. लहसुन

लहसुन में एंटीबैक्टीरियल गुण होते हैं। ठंड अौर बुखान को गायब करने के लिए 3-4 लहसुन को क्रश करके कच्चा ही चबा लें।

3. अदरक

एक छोटा टुकड़ा अदरक का पानी में उबालिये और उसमें नींबू तथा शहद मिला कर चाय की तरह पी जाइए। इससे गले की खराश अौर बुखार ठीक होता है।

4. शहद

शहद सेहत के लिए फायदेमंद होता है। 1 चम्मच शहद को नींबू के रस और गुनगुने पानी में डाल कर पीने से कफ और गले के दर्द से तुरंत छुटकारा मिलेगा।

5. चमेली के फूल की पत्ती

चमेली में मौजूद एंटीबैक्टीरियल और एंटीवायरल गुण सर्दी और जुखाम से राहत दिलाते है। चमेली के फूल का एक चम्मच रस अौर शहद मिला कर सेवन करें।

6. तुलसी

इसमें एंटीबैक्टीरियल और एंटीफंगल गुण होते हैं, जो गले की खराश, बुखार और मलेरिया के लिये लाभकारी होते है। इसलिए 10-15 तुलसी की पत्तियों को 1 कप पानी में घोल कर पीने से जल्द ही राहत मिलती है।

7.कैमोमाइल चाय

यह चाय बैक्टीरिया और वायरस से लड़ने में सहायक होती है। आपको इसकी चाय फूड मार्केट में आसानी से मिल जाएगी।

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