Adarsh Medicare Center Homeopathic And Maternity Hospital

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14/04/2024
10/04/2024
28/12/2021

अतिथि देवो भव।
पर डेल्टा और अब ओमिक्रोनन जी जैसे अथियो से तो तौबा इनसे तो भगवान भी नही बचा पा रहे हैं।
Jokes apart पर ये वाकई मे चिंताजनक है अभी हाल की न्यूयॉर्क के एक न्यूज ने बताया कि वहाँ 5 साल से नीचे के बच्चे ज्यादा hospitalised हो रहे हैं जो कि हमारे इंडिया के लिए और भी चिंता जनक है।
क्योकि जिस स्पीड से केस बढ़ रहे हैं एक मंथ बाद कहानी कुछ और ही होगी।अभी तक संतोष यही है कि इसके सिम्पटम्स ज्यादा गंभीर नही है पर कब डेल्टा की तरह ये लाखो को अनाथ कर जाए God knows🙏
Well हम डॉ है डराना काम हमारा नही पर समय से पहले चेताना हमारा ही काम है।रिपोर्टिंग उच्च दर्जे की ना पहले अप्रैल मई मे हुई ना ही अब होगी।अगर आज 500 केस हैं तो आप उन्हें 5000 मानकर चलिए।
thats d bitter truth।😖😖😖
सर्तक होने का समय अब ही है खासकर एनसीआर ऒर महानगरों मे रहने बाले लोगो का।बच्चो को अब घऱ पर रखिये।स्कूल कम से कम भेजे।अगर कुछ टाइम नही स्कूल जा पाया तो कलेक्टर बनने से नही रुक जाएगा आपका बच्चा।भीड़भाड़ से बचें और ना ही करें क्योंकि हम as a carrier किसी और परिवार के लिए मुसीबत खड़ी कर सकते हैं।बिना किसी जरूरी काम के मार्केट्स मे भीड़ ना लगाए या अभी भी समय जो भी future के लिए सामान है अभी लेकर रखे क्योकि एक एक दिन इस साल की फरबरी की तरह केसेस की संख्या बढ़ा ही रहा है।अप्रैल मई के समय को याद कर समय को समझे।एक जिम्मेदार नागरिक की तरह हम खुद अपने 25 dec को मथुरा मे होने वाले मजदूर संघ के सम्मेलन को टाल चुके हैं।बाहर ना जाते हुए घर पर परिवार के साथ ही नया साल के स्वागत को तैयार हैं, बेटे को स्कूल पहले से ही सिर्फ दो दिन भेज रही थी अब शायद वो भी जल्दी ही बंद कर दु।क्योकि ये सही हैं अब तो हम भी सही हैं।
🙏और पहले की तरह हम और मजदूर संघ आपके साथ है कोई भी परेशानी मे लास्ट ईयर की तरह कभी भी संपर्क करे🙏
आदर्श मेडिकेयर सेंटर
डॉ सचिन चौहान
डॉ स्वाति राजपूत
मंडल अध्यक्ष (भारतीय जनता मजदूर संघ

Again repost with d patient's data of april,may(back to d work😄)महिलायों मे आज की बहुत ही कॉमन प्रॉब्लम है पीरियड रेगुलर...
12/06/2021

Again repost with d patient's data of april,may(back to d work😄)
महिलायों मे आज की बहुत ही कॉमन प्रॉब्लम है पीरियड रेगुलर ना होना।जिसकी बजह हार्मोन्स मे चेंज होना होता है।हार्मोनल चेंजेस आज की भाग दौड़ वाली जिंदगी ,खानपान ,और स्ट्रेस वाली लाइफ की बजह से होना है।
ऐसे मे ओवेरियन सिस्ट या रसोली हर तीसरी महिला के रिपोर्ट्स मे दिखने को मिल रहा है।हालांकि ये अधिकतर खुद ही डिसॉल्वे हो जाती है पर कुछ मरीजो को ये परेसान भी करती हैं जिसमे पीरियड्स के इररेगुलर होना पहला सिम्पटम होता है।जब ये नार्मल ना होकर मरीज को परेसान करती है ओर साइज मे भी बड़ी होती हैं तो एलोपैथिक मे सर्जरी के अलावा कोई ऑप्शन नही होता है।
इसके अलावा कपल्स जब संतान ना होने की समस्या लेकर आते हैं तो उनमें से अधिकतर को अंडेदानी मे पॉली सिस्टिक सिंड्रोम मिलता है।जिसमे मोस्टली दोनो साइड की अंडेदानी एफक्टेड रहती हैं।इसे ठीक करना रसोली से थोड़ा भारी होता है क्योकि ये सिंड्रोम है और काफी सिस्टम को इफ़ेक्ट करता है जैसे कि फेस पर एक्ने ओर हेयर का बढ़ जाना मोटापा आ जाना जल्दी थकान और कमजोरी महसूस होना दोनो साइड्स मे दर्द और सबसे ज्यादा कंसीव करने मे परेसानी का होना।पर होमियोपैथी है तो सब संभव है।🙏🙏🙏डॉ स्वाति👇👇👇👇👇👇👇👇👇👇👇

काफी समय लगा वापस आने मे।महिलायों मे आज की बहुत ही कॉमन प्रॉब्लम है पीरियड रेगुलर ना होना।जिसकी बजह हार्मोन्स मे चेंज हो...
21/02/2021

काफी समय लगा वापस आने मे।
महिलायों मे आज की बहुत ही कॉमन प्रॉब्लम है पीरियड रेगुलर ना होना।जिसकी बजह हार्मोन्स मे चेंज होना होता है।हार्मोनल चेंजेस आज की भाग दौड़ वाली जिंदगी ,खानपान ,और स्ट्रेस वाली लाइफ की बजह से होना है।
ऐसे मे ओवेरियन सिस्ट या रसोली हर तीसरी महिला के रिपोर्ट्स मे दिखने को मिल रहा है।हालांकि ये अधिकतर खुद ही डिसॉल्वे हो जाती है पर कुछ मरीजो को ये परेसान भी करती हैं जिसमे पीरियड्स के इररेगुलर होना पहला सिम्पटम होता है।जब ये नार्मल ना होकर मरीज को परेसान करती है ओर साइज मे भी बड़ी होती हैं तो एलोपैथिक मे सर्जरी के अलावा कोई ऑप्शन नही होता है।
पर होमियोपैथी बड़े ही आराम से कुछ समय मे ही इनको रिमूव करती है और हार्मोनल बैलेंस करती है।
अभी का एक 8.3 cm की लेफ्ट साइड की ओवेरियन सिस्ट का केस को बिना शेयर किए बिना रह नही पायी।क्योकि इतने कम समय की मुझे उम्मीद नही थी।पर होमियोपैथी है ही मैजिकल पैथी।
डॉ स्वाति🙏🙏🙏

09/07/2020

अभी कुछ दिन पहले मेरी अपने एरिया के कोरोना के मरीजो से बात हुई।बात अपने एरिया में कोरोना के सिम्पटम्स की जानकारी के लिए हुई।बातो से पता चला की उनमे से 6 लोग तो ऐसे थे जिन्हें पता ही नहीं चला की उन्हें कोरोना जैसा कुछ है भी।
पर कुछ को पूछने पर पता चला की हल्का सी 2 दिन के लिए नाक बंद हुई और सूंघने की शक्ति कम हो गयी।एक को लगा की ये वार वार सनिटाइज करने की बजह से उसको ऐसा हुआ।उसको पता ही नहीं की सूंघने की शक्ति का कम हो जाना भी एक कोरोना का असामान्य सिम्पटम्स है।
और ये उसको क्या अपने आस पास के बहुत से कम पढ़े या कम जागरूक लोगो को भी कोरोना के असामान्य सिम्पटम्स का पता ही नहीं।उन्हें बस पता है की सर्दी झुकाम बुखार शरीर में दर्द और साँस लेने मे तकलीफ ही इसके लक्षण है।क्योकि जगह जगह वही लिखा और बताया जा रहा है।
सभी वायरस की तरह ये भी दिनों दिन अपना रूप बदल रहा है और नए नए लक्षणों के साथ सामने आ रहा है।
सूंघने की शक्ति का कम होना,टेस्ट करनी की शक्ति का कम होना ,आँख का लाल होना,उबकाई उल्टी दस्त, सिर से लेकर पैर तक स्किन रशेस (जैसे की लाल रंग के निशान या छोटी छोटी पित्तियो जैसे निशान या पर्पल कलर के स्पॉट्स या छाले जैसे एरूपशन्स इसके अलावा पैर की उंगिलो के बिच मे छोटे छोटे गुलाबी पर्पल कलर के दानेे या रशेस जिसे कोविद टो भी कहते हैं) हो रहे हैं जिनके वारे में बहुत कम लोग जागरूक है और उन्हें पता ही नहीं चलता की वो कोरोना से इन्फेक्टेड हो चुके हैं।जोकि और लोगो के लिए अच्छा नहीं।
सो आज डॉक्टर'स डे पर सभी के लिए पोस्ट ,की आपके आस पास के जो लोग इन सिम्पटम्स के लिए जागरूक नहीं उन्हें आप बताये समझाए की सिर्फ सर्दी झुकाम ही नहीं, ये सब लक्षण भी कोरोना पॉजिटिव के लक्षण हैं।क्योकि ये जिम्मेदारी हमारी और आपकी सभी की है।सभी को डॉक्टर्स डे के शुभ कामनाये।🙏स्वाति

अभी एक जगह पढ़ रही थी कि प्रोलैप्स पेल्विक अंगों की एक ऐसी बीमारी है जो मानव-जाति के शुरुआत से चली आ रही है | जबसे मनुष्य...
20/09/2019

अभी एक जगह पढ़ रही थी कि प्रोलैप्स पेल्विक अंगों की एक ऐसी बीमारी है जो मानव-जाति के शुरुआत से चली आ रही है | जबसे मनुष्य ने सीधा चलना सीखा है तबसे ग्रैविटी के कारण महिलाओं में प्रोलैप्स पाया गया है | यहाँ तक की प्रोलैप्स का ज़िक्र प्राचीन काल के मेडिकल साहित्य में भी किया गया है जिनमें से सबसे पुरानी है मिस्र रचना |इसी को आगे बढ़ाते हुए बताती हूँ
कि प्रोलैप्स अधिक उम्र की औरतो में बहुत कॉमन होता जा रहा है बल्कि अब तो कम उम्र की लेडीज़ भी आती है हमारे पास इस समस्या को लेकर।

प्रोलैप्स को साधा भाषा में हमारे ऑर्गन का अपनी जगह से बाहर निकलना कहते हैं।इसे uterine प्रोलैप्स,rectocele और cystocele में बांटा गया है।
महिलाओं के पेल्विक ऑर्गन यानि ge***al ऑर्गन के आस पास के सारे अंग मसल्स और लिगामेंट्स से घिरे या बंधे होते है।ये सब मिलकर पेल्विक फ्लोर बनाते हैं जोकि एक तरह इन ऑर्गन को बांधे रखते हैं पर कुछ कंडीशन्स में ये जोड़ ढीला या मसल्स कमजोर पड़ जाती है जिससे पेल्विक ऑर्गन जैसे uterus, bladder, re**um etc योनि यानि va**na से बाहर आने लगते हैं।
पेल्विक फ्लोर के कमजोर होने के कई कारन हो सकते हैं जैसे अधिक उम्र की महिलाओं में ये कॉमन है।क्योकि मेनोपॉज़ या बुढ़ापे में एस्ट्रोजन हार्मोन का लेवल कम हो जाता है जोकि पेल्विक फ्लोर को मजबूती देने में हेल्प करता है।या जिन महिलाओं को डिलिवरी में इंजरी का सामना करना पड़ा हो।कब्ज़, मोटापा,बार बार वेट लिफ्फ्टिंग,पाइल्स की प्रॉब्लम,ब्रोंकाइटिस या वॉर वार खांसी भी इसका कारन हो सकती हैं।
Mild cases में मरीज को कोई प्रॉब्लम नहीं होती पर बीमारी के अधिक बढ़ जाने पर मरीज को असा लगता है जैसे की कुछ बाहर आ रहा है जिससे चलने फिरने में प्रॉब्लम होती है।uterus के बाहर आने की बजह से इन्फेक्शन और uterine ulcer की चांसेस बढ़ जाती हैं।इंटरकोर्स में भी प्रॉब्लम आने लगती हैं।बार बार यूरिन आना या खाँसने और वेट उठाने पर यूरिन का निकल जाना,कमर के निचले हिस्से में दर्द रहना,या va**nal डिस्चार्ज का बढ़ जाना इसके सिम्पटम्स है।
अपनी रोजमर्रा की दिनचर्या में सुधार कर हम इससे बच सकते हैं।पर ज्यादा प्रॉब्लम बढ़ने पर डॉ को दिखाना अनिवार्य हो जाता है।
पेल्विक फ्लोर मसल्स व्यायाम या kegel exercise से हम अपनी मसल्स को मज़बूत कर सकते है।
ये एक बहुत ही आसान व्यायाम है जिससे हम कही भी और कभी भी कर सकते हैं।इसके लिए अपने पेल्विक ऑर्गन पर 5 सेकंड के ऎसे प्रेशर लगाना होता ह जैसे हम अपने यूरिन को रोक रहे हैं। फिर 5 सेकंड का ब्रेक लेकर 3 बार रिपीट करें और असा दिन में 10 बार तक कर सकते है।ये exercise बेबी birth के बाद बहुत फायेदमंद है।इससे पेल्विक फ्लोर को मजबूती मिलती है।
इसके अलावा पेसरी जोकि सिलिकॉन का एक छल्ला टाइप का होता है इसका भी यूज़ किया जाता है सामान्य रूप से।पर इसको जल्दी बदलना बहुत जरूरी है क्योकि इससे इन्फेक्शन की चांसेस बढ़ सकती हैं।मैं 3 मंथ इसको बदल देती हूँ।पर ये इससे हम मरीज को टेम्परेरी आराम मिल सकता है।परमानेन्ट इलाज़ के लिए होम्योपैथी एक बहुत अच्छा सुझाव है जो बिना आपके शरीर को नुकसान दिए आपको प्रोलैप्स से निजात दिलाता है।और होम्योपैथी आपको surgury से भी आपको यहाँ बचाती है।
fraxinous Americana
Sepia
Murex
Rhus tox
Helonias
Lillium tig
Lappa ac.
Cal Phos etc होम्योपैथिक दवाई हैं जो बहुत अधिक यूज़ होती हैं।इसके अलावा pt के सिम्पटम्स को मैच कर हम मेडिसिन प्रेस्क्रिब करते हैं...डॉ स्वाति

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