Dr R K MEHTA

Dr R K  MEHTA Dr R K MEHTA (B.H.M.S.) Homoeopathic consultant
(Chronic disease specialist)
Mind method technique. Computerized analysis. Psychological treatment.

Psychodynamic analysis. German new medicine. Heal your body mind and soul. Fast and parmanent solution.

दिल का दौरा (Heart Attack) / BlockageGNM Theory, Psychology & Psychodynamic दृष्टिकोणGNM (German New Medicine) और Psycho...
17/05/2026

दिल का दौरा (Heart Attack) / Blockage

GNM Theory, Psychology & Psychodynamic दृष्टिकोण

GNM (German New Medicine) और Psychodynamic Psychology के अनुसार हृदय से जुड़ी समस्याएं केवल शारीरिक कारणों से ही नहीं, बल्कि गहरे मानसिक संघर्ष, भावनात्मक सदमे और लगातार चल रहे तनाव से भी जुड़ी हो सकती हैं।

जब व्यक्ति को ऐसा महसूस होने लगे कि उसका साम्राज्य, अधिकार, घर, संबंध, नौकरी, बिजनेस, जमा पूंजी या जीवन की सुरक्षा छिन रही है, तब मन के अंदर एक गहरा भय और संघर्ष शुरू होता है।

यह संघर्ष कई बार बाहर से दिखाई नहीं देता, लेकिन अंदर ही अंदर व्यक्ति लगातार “Survival Stress” में जी रहा होता है।

हर समय डर बना रहना

भविष्य को लेकर असुरक्षा

अपमान या हार का एहसास

अपने नियंत्रण क्षेत्र के टूटने का डर

परिवार या रिश्तों के बिखरने की चिंता

आर्थिक नुकसान या पार्टनर खोने का भय

Psychodynamic दृष्टिकोण से देखें तो व्यक्ति अपने दर्द, गुस्से, असुरक्षा और भय को दबाता रहता है।
धीरे-धीरे यह दबाव शरीर पर असर डालने लगता है।

GNM Theory के अनुसार अक्सर जब संघर्ष का समाधान होने लगता है या व्यक्ति थोड़ी राहत महसूस करता है, तब शरीर “Healing Phase” में प्रवेश करता है। इसी समय कई लोगों में हार्ट से संबंधित लक्षण, भारीपन, बेचैनी या अटैक जैसी स्थिति देखने को मिल सकती है।

ऐसे में होमियोपैथी ही क्यों?

होमियोपैथी केवल बीमारी के नाम पर काम नहीं करती, बल्कि व्यक्ति के Mind + Body + Emotion तीनों स्तर पर कार्य करती है।

होमियोपैथी के प्रमुख लाभ:

✔ रोगी के अंदर छिपे भय, तनाव और बेचैनी को कम करने में सहायता
✔ शरीर की Natural Healing Power को सक्रिय करना
✔ Stress और Emotional Conflict को संतुलित करने का प्रयास
✔ व्यक्ति को मानसिक शांति और भावनात्मक स्थिरता देना
✔ Holistic तरीके से सम्पूर्ण स्वास्थ्य पर कार्य करना
✔ लंबे समय तक सुरक्षित एवं प्राकृतिक चिकित्सा का विकल्प

होमियोपैथी का उद्देश्य केवल blockage पर ध्यान देना नहीं, बल्कि उस मानसिक और भावनात्मक कारण को समझना भी है जिसने शरीर को लगातार तनाव की स्थिति में रखा।

संदेश

डरिए मत…
अपने मन की भावनाओं को पहचानिए, स्वीकार कीजिए और सही मार्गदर्शन लीजिए।
शरीर केवल संकेत देता है कि अब मन को भी उपचार की आवश्यकता है।

होमियोपैथी — शरीर, मन और भावनाओं के संतुलन की चिकित्सा।

IBS (Irritable Bowel Syndrome) / अपच को कुछ वैकल्पिक मनोदैहिक मॉडल जैसे GNM (German New Medicine) में शरीर और मन के संघर...
15/05/2026

IBS (Irritable Bowel Syndrome) / अपच को कुछ वैकल्पिक मनोदैहिक मॉडल जैसे GNM (German New Medicine) में शरीर और मन के संघर्ष से जोड़कर देखा जाता है।
GNM के अनुसार पेट और आँतें “किसी बात को पचाने” से प्रतीकात्मक रूप से जुड़ी होती हैं।
जब व्यक्ति जीवन में ऐसी परिस्थितियों से गुजरता है जिसे वह मानसिक रूप से स्वीकार, सहन या “Digest” नहीं कर पाता, तब शरीर पाचन तंत्र के माध्यम से प्रतिक्रिया देने लगता है।

संभावित Emotional Conflicts

अपमान या बेइज्जती

धोखा या विश्वास टूटना

परिवार या रिश्तों में तनाव

अंदर ही अंदर गुस्सा दबाना

बार-बार चिंता और ओवरथिंकिंग

किसी घटना को भूल न पाना

स्वयं को असुरक्षित महसूस करना

“मेरे साथ गलत हुआ” जैसी भावना

भावनात्मक बोझ जिसे व्यक्ति व्यक्त नहीं कर पाता

Psychology अनुसार IBS / अपच

आधुनिक मनोविज्ञान में भी Gut-Brain Connection को महत्वपूर्ण माना जाता है।
तनाव, चिंता और भावनात्मक दबाव पाचन तंत्र को प्रभावित कर सकते हैं।

Psychological Pattern

Anxiety (चिंता)

Fear of rejection

Perfectionism

Emotional suppression

Low self-esteem

लगातार मानसिक दबाव

हर बात दिल पर लेना

भविष्य की असुरक्षा

ऐसे लोगों में अक्सर देखा जाता है:

पेट फूलना

गैस

बार-बार टॉयलेट जाना

कब्ज और दस्त का बदलना

खाना खाने के बाद भारीपन

भूख कम लगना

पेट में मरोड़

Psychodynamic कारण

Psychodynamic दृष्टिकोण के अनुसार IBS कई बार उन भावनाओं से जुड़ा हो सकता है जिन्हें व्यक्ति वर्षों से दबाकर रखता है।

Common Psychodynamic Themes

बचपन में भावनात्मक असुरक्षा

कठोर आलोचना

प्यार या स्वीकार्यता की कमी

अंदर का दबा हुआ गुस्सा

खुद की भावनाओं को व्यक्त न कर पाना

“सब सहना है” वाला स्वभाव

दूसरों को खुश रखने की आदत

Emotional dependency

ऐसे लोग बाहर से सामान्य दिखते हैं लेकिन अंदर लगातार तनाव और भावनात्मक संघर्ष में रहते हैं।

होमियोपैथिक दृष्टिकोण

होमियोपैथी में केवल पेट की समस्या नहीं बल्कि व्यक्ति की:

मानसिक स्थिति

भावनात्मक संघर्ष

व्यवहार

तनाव का तरीका

भोजन की आदत

पूरी व्यक्तित्व संरचना

को देखकर दवा चयन किया जाता है।

उचित परामर्श, जीवनशैली सुधार और भावनात्मक सपोर्ट के साथ IBS / अपच में काफी राहत संभव है।

Dr R K MEHTA BHMS Homeopathic consultant
Chronic disease specialist
Japla palamu jharkhand
WhatsApp only 070505 85656

#अपच

Acne (मुंहासे) – GNM Theory, Psychology & Psychodynamic कारणचेहरे पर Acne (मुंहासे) केवल त्वचा की समस्या नहीं, बल्कि कई ...
14/05/2026

Acne (मुंहासे) – GNM Theory, Psychology & Psychodynamic कारण

चेहरे पर Acne (मुंहासे) केवल त्वचा की समस्या नहीं, बल्कि कई बार मन की गहरी भावनाओं का भी प्रतिबिंब होते हैं।
GNM (German New Medicine) एवं Psychodynamic दृष्टिकोण के अनुसार जब व्यक्ति स्वयं को असुंदर, अस्वीकार्य, अपमानित या emotionally unsafe महसूस करता है, तब शरीर त्वचा के माध्यम से उस आंतरिक तनाव को व्यक्त कर सकता है।

विशेषकर किशोरावस्था और युवावस्था में —
• अपने रूप-रंग को लेकर असुरक्षा
• किसी का bad touch या unwanted attention
• अपमानित करने वाली टिप्पणी
• rejection, insult या comparison
• खुद को “गंदा” या कमतर महसूस करना
• आत्मविश्वास की कमी और self-image conflict

ये सभी मानसिक संघर्ष त्वचा पर Acne के रूप में प्रकट हो सकते हैं।

Psychology के अनुसार त्वचा हमारी “identity” और “self-confidence” से जुड़ी होती है। जब व्यक्ति भीतर से emotional pressure, shame, fear या insecurity महसूस करता है, तब शरीर hormonal imbalance, inflammation और skin reaction के माध्यम से प्रतिक्रिया दे सकता है।

होमियोपैथी केवल Acne को दबाने का कार्य नहीं करती, बल्कि व्यक्ति के emotional pattern, मानसिक तनाव और शरीर की आंतरिक healing capacity पर कार्य करके आत्मविश्वास लौटाने का प्रयास करती है।
सही होमियोपैथिक उपचार से त्वचा के साथ-साथ मानसिक संतुलन और आत्मविश्वास में भी सुधार संभव है।

✨ स्वस्थ त्वचा सिर्फ क्रीम से नहीं,
बल्कि मन और शरीर के संतुलन से मिलती है।


#मुंहासे


















Tinnitus (कान बजना) और बहरापन (Hearing Loss) को समझने के लिए GNM (German New Medicine) और मनोविज्ञान (Psychology) एक अलग...
13/05/2026

Tinnitus (कान बजना) और बहरापन (Hearing Loss) को समझने के लिए GNM (German New Medicine) और मनोविज्ञान (Psychology) एक अलग नजरिया पेश करते हैं। साधारण मेडिकल साइंस जहाँ इसे शारीरिक क्षति मानता है, वहीं ये थ्योरी इसे मानसिक संघर्ष (Emotional Conflict) से जोड़ती हैं।
यहाँ इसका विस्तार से विश्लेषण दिया गया है:
# # # 1. GNM थ्योरी (German New Medicine) क्या है?
डॉ. रायके गीर्ड हेमर द्वारा विकसित GNM के अनुसार, हर बीमारी एक **"Biological Conflict" (जैविक संघर्ष)** का परिणाम है। यह थ्योरी मानती है कि जब हम किसी अचानक लगे सदमे को झेलते हैं, तो हमारा मस्तिष्क शरीर के किसी खास अंग को प्रभावित करता है।
* **Tinnitus के पीछे का संघर्ष:** GNM के अनुसार, टिनिटस का मुख्य कारण **"Auditory Conflict"** है। यह तब होता है जब व्यक्ति कुछ ऐसा सुनता है जिसे वह "विश्वास नहीं कर सकता" या जिसे सुनकर उसे गहरा सदमा लगता है (जैसे- "मुझे अपने कानों पर यकीन नहीं हो रहा")।
* **बहरापन (Hearing Loss):** इसे "I don't want to hear it" (मैं यह नहीं सुनना चाहता) का परिणाम माना जाता है। जब कोई व्यक्ति किसी अप्रिय शोर, निरंतर आलोचना, या किसी की कड़वी बातों से खुद को बचाना चाहता है, तो मस्तिष्क जैविक रूप से सुनने की क्षमता कम कर देता है।
**GNM के अनुसार प्रक्रिया:**
1. **Conflict Active Phase:** जब संघर्ष चल रहा होता है, तो सुनने की क्षमता कम हो सकती है।
2. **Healing Phase:** जब व्यक्ति उस मानसिक तनाव से बाहर आता है, तो कान में सीटी बजना (Tinnitus) शुरू होती है। GNM इसे शरीर का "रिपेयर मोड" मानता है।
# # # 2. मनोवैज्ञानिक दृष्टिकोण (Psychological Perspective)
मनोविज्ञान में टिनिटस और बहरापन अक्सर तनाव, चिंता (Anxiety) और हमारे अवचेतन मन की सुरक्षा प्रणाली से जुड़े होते हैं।
* **Psychosomatic (मनोदैहिक) लक्षण:** कभी-कभी मानसिक तनाव शरीर में शारीरिक लक्षणों के रूप में प्रकट होता है। इसे 'कनवर्जन डिसऑर्डर' भी कहा जा सकता है जहाँ मानसिक दुख शारीरिक बहरेपन का रूप ले लेता है।
* **फोकस और एंग्जायटी:** टिनिटस में व्यक्ति जितना ज्यादा उस आवाज पर ध्यान देता है, दिमाग उसे उतना ही बढ़ाकर सुनाता है। यह एक "Vicious Cycle" (दुष्चक्र) बन जाता है—तनाव से आवाज बढ़ती है, और आवाज से तनाव बढ़ता है।
* **सुरक्षा तंत्र (Defense Mechanism):** अवचेतन मन कभी-कभी बाहरी दुनिया के शोर से बचने के लिए सुनने की क्षमता को "ब्लॉक" कर देता है ताकि भावनात्मक आघात से बचा जा सके।
# # # 3. मुख्य अंतर: मेडिकल बनाम GNM/Psychology
| विशेषता | आधुनिक चिकित्सा (Medical) | GNM/मनोविज्ञान |
|---|---|---|
| **कारण** | नस की क्षति, तेज शोर, इन्फेक्शन। | भावनात्मक सदमा, सुनने का डर। |
| **दृष्टिकोण** | शारीरिक अंगों का इलाज। | मन और मस्तिष्क के तालमेल पर ध्यान। |
| **समाधान** | दवाई, हियरिंग एड, थेरेपी। | तनाव कम करना, संघर्ष को सुलझाना।
धन्यवाद!

होमियोपैथिक ड्रग्स एनर्जी ट्रांसमिशनहोमियोपैथी केवल दवा नहीं, बल्कि सूक्ष्म ऊर्जा (Vital Energy) पर आधारित चिकित्सा पद्ध...
12/05/2026

होमियोपैथिक ड्रग्स एनर्जी ट्रांसमिशन

होमियोपैथी केवल दवा नहीं, बल्कि सूक्ष्म ऊर्जा (Vital Energy) पर आधारित चिकित्सा पद्धति मानी जाती है।
इस सिद्धांत के अनुसार होमियोपैथिक दवाओं में मौजूद ऊर्जा रोगी के शरीर तक पहुंचकर शरीर की प्राकृतिक उपचार शक्ति को सक्रिय करती है।

यह ऊर्जा केवल दवा खाने से ही नहीं, बल्कि रोगी के शरीर से जुड़े माध्यम जैसे बाल, नाखून, त्वचा आदि के द्वारा भी प्रसारित की जा सकती है।
रोगी का शरीर इस ऊर्जा को “रिसीवर” की तरह ग्रहण करता है और शरीर की आंतरिक संतुलन प्रक्रिया को जागृत करता है।

इसी सिद्धांत को “Drug Energy Transmission” कहा जाता है — जहां दवा की सूक्ष्म शक्ति रोगी तक पहुंचाई जाती है, चाहे रोगी दूर कहीं परदेश में हो, दवा लेने में असमर्थ हो, या बेहोशी की अवस्था में हो।

यह पद्धति विशेष रूप से उन लोगों के लिए उपयोगी मानी जाती है:

जो दवा नहीं खा पाते

जो दूर स्थान पर रहते हैं

छोटे बच्चे या बुजुर्ग

बेहोशी या गंभीर कमजोरी की अवस्था वाले रोगी

होमियोपैथी का उद्देश्य केवल बीमारी दबाना नहीं, बल्कि शरीर की प्राकृतिक ऊर्जा को संतुलित कर स्वास्थ्य को पुनः स्थापित करना है।

यदि आप घर से बाहर रहते हैं। दवा मंगाना मुश्किल है। तुरंत राहत कि आवश्यकता है। दवा खाना पसंद नहीं है। दवा खाना नहीं चाहते। चुपके से किसी को दवा खिलाना चाहते हैं। छोटा बच्चा है। कोई रोगी बेहोश है। या बार बार दवा खाना में झंझट लगता है तो इस सुविधा का लाभ ले सकते है।
बस रोगी के शरीर का कोई भी पार्ट डॉक्टर पास रहना चाहिए। जैसे - बाल, नाखून, स्किन, या उनका वॉइस रिकॉर्डिंग।
Grug energy transmission से दावा का प्रभाव शरीर पर उतना ही होता है जितना दवा खाने से होता है। बस थोड़ा सा फर्क केवल विश्वाश का हो सकता है।
दुनिया भर में हजारों डॉक्टर हैं जो इस सिद्धांत का उपयोग सफलता पूर्वक कर रहे है और कामयाब भी हो रहे है। यह सिद्धांत केवल मनुष्य पर ही नहीं बल्कि दूसरे जीव पर भी उतना ही उपयोगी है।
इस सुविधा का लाभ लेने के लिए डॉक्टर से सीधे बात करें और उनका जो भी महीने का फीस होगा पेमेंट करते रहिए लाभ मिलता रहेगा।
धन्यवाद:-

Dr R K MEHTA BHMS
Homoeopathic Consultant
Chronic Disease Specialist
Japla, Jharkhand
Whatsapp Only: 7050585656

Address

822116, Hussainabad
Husainabad
822116

Alerts

Be the first to know and let us send you an email when Dr R K MEHTA posts news and promotions. Your email address will not be used for any other purpose, and you can unsubscribe at any time.

Contact The Practice

Send a message to Dr R K MEHTA:

Share

Category