07/07/2019
🌹 योग शरणम 🌹
योग शरणम की विचारधारा सुधारवादी है I सुधार प्रक्रिया समय चाहती है I अतः योग शरणम विचारधारा बंधनकारी नहीं अपितु सहमति व स्वीकारोक्ति मय है I
योग शरणम तो मात्र मध्यस्थ है I व्यक्ति और योग के मध्य स्थित है I व्यक्ति को भी स्वीकार और योग को भी स्वीकार I गणित कितना सरल है l यह शास्त्रोक्त है योग में शक्ति है I योग व्यक्ति को शुभ से जोड़कर शुद्ध व बुद्ध कर देता है I योग को किसी से भी परहेज नहीं तो योग शरणम को किसी व्यक्ति या विचारधारा से मत भिन्नता की आवश्यकता क्यों I योग शरणम को जो जैसा है वह वैसा ही स्वीकार है I मध्य में योग , योग और सिर्फ योग है I
मन , वचन और कर्म में एकरूपता का नहीं होना अथवा स्वीकार अस्वीकार के असमंजस में बने रहना ही व्यक्ति को विद्रूप बना देता है I योग का सानिध्य धीरे धीरे व्यक्ति के मन , वचन और कर्म मैं एकरूपता स्थापित करता जाता है l एक बार व्यक्ति के मन , वचन और कर्म में एकरूपता स्थापित हुई तो व्यक्ति का रूप कभी विद्रूप नहीं होता I प्रक्रिया झीनी जरूर है l धीमी जरूर है I क्योंकि यम नियम , आसन , प्राणायाम , प्रत्याहार , धारणा , ध्यान व समाधि के चरणों से होकर गुजरती है I सानिध्य बस योग का बनाए रखना है चरण सिद्ध स्वयमेव ही होते जाते हैं I दिखता और लगता अत्यंत क्लिष्ट है किंतु भाव से अपनाओ तो सरल ,सहज , शाश्वत व सत्य है I बंधन कारी नहीं अपितु समझ से स्वीकार करने की है l
*शरणम शरणम योग शरणम*