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04/08/2018
My case of herpes .....मेरा हर्पीज़ का केस .... some pics of patient .....before & after my Homoeopathic treatment ....
06/07/2018

My case of herpes .....मेरा हर्पीज़ का केस .... some pics of patient .....before & after my Homoeopathic treatment ....

Happy Doctors day....
30/06/2018

Happy Doctors day....

My case of psoriasis .....सोरियसिस जो कभी ठीक नहीं होता है उसे मेरी homoeopathy ने ठीक किया .....मेरे क्लीनिक में आए पेश...
13/06/2018

My case of psoriasis .....सोरियसिस जो कभी ठीक नहीं होता है उसे मेरी homoeopathy ने ठीक किया .....मेरे क्लीनिक में आए पेशंट की कुछ फ़ोटो .....before & after my treatment......

21/05/2018
26/04/2018

कुछ लोग आयुर्वेदिक होते हैं

मतलब बोल चाल में एकदम उम्दा लेकिन emergency में काम नहीं आते 😳

कुछ लोग allopathic होते हैं

मतलब emergency में काम यही आते हैं पर कब क्या side effect दिखा दें, भरोसा नहीं 🤪

कुछ लोग होम्योपैथिक होते हैं

मतलब वैसे तो शुरुआत मे समझ नहीं आते पर बाद मे जब कोई बात बिगाड़ जाए देना साथ मेरा तो अच्छा लगता है😛😇😃🤑

21/04/2018

श्वेत प्रदर और होम्योपैथी



ल्यूकोरिया(LEUCORRHOEA) या श्वेत प्रदर यानी महिलायों की योनी से निकलने

वाला सफ़ेद रंग का चिपचिपा स्त्राव। चूँकि यह अधिकतर सफ़ेद रंग का होता हैं, इसलिए

इसे श्वेत प्रदर या सफ़ेद पानी भी कहते है।इसे ल्यूकोरिया(LEUCORRHOEA) भी कहा

जाता हैं। स्वथ्य अवस्था में महिलायो कि योनी से को नम बनाये रखने के लिए म्यूकस-

ग्लैंड (mucus gland) से कुछ स्त्राव होता है, परन्तु जब यह स्त्राव बढ़ जाता है, तो इसे

प्रदर कहते है। यह स्त्राव सफ़ेद, क्रीम, हल्का पीला, काला, या लाल-भूरे रंग का हो सकता

है। यह पानी जैसा पतला या जैली जैसा भी हो सकता है। शुरू में यह कम होता हैं परन्तु

सही इलाज नहीं होने पर यह बढ़ जाता है। लगभग 90% महिलाये इससे पीडित रहती

हैं,लेकिन इसे साधारण समझ कर ईलाज नहीं कराती हैं। कई बार शर्म या झिझक के

कारण भी डॉ. की सलाह नहीं लेती है, और इस तकलीफ को भुगतती रहती हैं। जिसके

कारण वह कमजोर और दुर्बल होती जाती हैं। इसकी निकलने की मात्रा योनी में किसी

इन्फेक्शन आदि के कारण बढ़ जाती है। यह कोई रोग नहीं होता है, परन्तु दुसरे रोगों का

कारण हो सकता हैं। श्वेत प्रदर में योनि की दीवारों से या गर्भाशय ग्रीवा से

श्लेष्मा(mucus) का स्राव होता है, जिसकी मात्रा, स्थिति और समयावधि अलग-अलग

महिलायों में अलग-अलग होती हैं।



कारण ....

1) बच्चेदानी में किसी प्रकार का रोग होने पर जैसे गठान,पोलिप या सुजन आदि के कारण

2) बच्चेदानी का अपने स्थान से हट जाने के कारण

3) योनी में कोई इन्फेक्शन के कारण

4) बार-बार गर्भपात (abortion) के कारण

5) सेक्सुअल एक्साइटमेंट के कारण

6) किसी लम्बी बीमारी के कारण

7) गरिस्ट भोजन से

8) किसी दवा के साइड-इफ़ेक्ट के कारण



कब अधिक होता हैं .....

1) पीरियड्स के पहले या बाद में

2) योवनावस्था (during puberty) के आरम्भ में

3) सेक्स कि उत्तेजना में (sexual excitement)



किस उम्र में होता हैं ----

एक छोटी बच्ची से ले कर वृद्ध महिला तक को हो सकता हैं।



लक्षण----



1) योनी से श्वेत, चिपचिपा, बदबूदार स्त्राव होना

2) यह सफ़ेद, क्रीम, हल्का पीला, काला या लाल भूरे रंग का हो भी सकता हैं

3) योनी में खुजली ,जलन होना

4) कमर दर्द होना

5) कमजोरी महसूस होना

6) आँखों के आगे अंधेरा छाना

7) आँखों के चारो और काले घेरे होना

8) पेट के निचले हिस्से में दर्द या भारीपन रहना

9) भूख न लगना

10) चिड़चिड़ापन रहना

11) पिंडलियों में दर्द होना (pain in calf)





होम्योपैथिक दवाए ......

होम्योपैथिक दवायो से ल्यूकोरिया बिना किसी साइड इफ़ेक्ट के बहुत जल्दी ठीक हो जाता है.....


1) सीपिया (SEPIA)…..

पीले या हरे रंग का ल्यूकोरिया के साथ योनी में बहुत ज्यादा खुजली होना।

बच्चेदानी(uterus) और योनी बाहर की तरफ निकल आना। चेहरे पर भूरे-भूरे दाग हो

जाना। रोगी हमेशा पैर के ऊपर पैर(cross leg) रख कर बैठती हैं,ताकि उसका यूट्रस

(uterus) दबा रहे। पीरियड्स अनियमित होते है। योनी में दर्द होना। बार-बार

गर्भपात(aborsion)हो जाए।

2) क्रियोजोट(KREASOTE)....

योनी में बहुत ज्यादा खुजली होती है। स्त्राव हलके पीले रंग का होता है। कभी कभी योनी

में छाले भी हो जाते है। बदबूदार ल्यूकोरिया होता हैं। पीरियड्स समय से 8 दिन पहले आ

जाता है। जननांगो (ge***al organs) में सुजन आ जाती है। मासिक-धर्म (period) के

पहले या बाद में ल्यूकोरिया होना। मासिक-धर्म बंद होने के समय (menopause) के

समय की तकलीफ।

3) पल्सेटिला (PULSATILLA)......

इस दवा की रोगी बहुत ही नाजुक होती है। जरा-जरा सी बात पर रो देती हैं। पीरियड्स के

पहले ल्यूकोरिया होता है, जो कि क्रीम रंग का होता हैं। जिसमे जलन होती हैं। रोगी को

हमेशा थकान लगती हैं। कमर में दर्द होता रहता हैं। पीरियड्स अनियमित होते हैं, या

किसी कारण से रुक जाते हैं। रोगी को एनीमिया(खून की कमी) भी हो सकती है।


4) ग्रेफाइटिस(GRAPHITES).....

इस दवा के रोगी को पानी जैसा पतला ल्यूकोरिया होता हैं। जिसके कारण कमर में

कमजोरी महसूस होती हैं। हमेशा कब्ज की शिकायत रहती हैं। ब्रेस्ट(Breast) में भारीपन

और सुजन रहती हैं। योनी में खुजली और दाने होते हैं। इस दवा की रोगी को अक्सर चर्म-

रोग (skin disease) की शिकायत रहती हैं।

5) बोरेक्स (BORAX)......

रोगी को बहुत ज्यादा ल्यूकोरिया होता हैं, ऐसा लगता है मानो गर्म पानी बह रहा हो।

अत्याधिक जलन होती है। एकदम सफ़ेद रंग का ल्यूकोरिया होता हैं। रोगी को नीचे देखने

पर डर लगता है।योनी में और मुहँ में छाले हो जाते हैं।



6) कोक्युलस- इंडिका(COCCULUS-INDICA ) ....



दो पीरियड्स के बीच बहुत ज्यादा ल्यूकोरिया होता हैं।पेट के निचले हिस्से में बहुत दर्द

और भारीपन रहता है। माहवारी के समय दर्द होता है। बहुत ज्यादा कमजोरी लगती हैं,यहाँ

तक की रोगी को बोलने या खड़े होने तक में कमजोरी मालुम होती हैं। पीरियड्स के समय

अत्यधिक दर्द होता हैं।हाथ-पैर कांपते हैं।

7) एलुमिना (ALUMINA) ......



पारदर्शी जैली जैसा ल्यूकोरिया होता है।जिसमे बहुत ज्यादा जलन होती हैं। ल्यूकोरिया

सिर्फ दिन में या पीरियड्स के बाद होता हैं। रोगी को हर समय थकान रहती हैं।स्किन बहुत

ज्यादा रुखी रहती हैं।खून की कमी होती हैं।ल्यूकोरिया बहुत ज्यादा मात्रा में होता हैं। रोगी

को चाक-मिटटी खाना अच्छा लगता है।



नोट- होम्योपैथी में रोग के कारण को दूर करके रोगी को ठीक किया जाता है। प्रत्येक रोगी की दवा उसकी शारीरिक और मानसिक अवस्था के अनुसार अलग-अलग होती हैं। अतः बिना चिकित्सकीय परामर्श यहां दी हुई किसी भी दवा का उपयोग न करें। रोग और होम्योपैथी दवा के बारे में और अधिक जानकारी के लिए यहां लॉग इन कर सकते हैं। अथवा संपर्क कर सकते हैं-
neeti.shrivastava@gmail.com

21/04/2018

पीरियड्स रोकने के दुष्परिणाम

पिछले कुछ वर्षो से महिलायों और लडकियों में एक चलन शुरू हुआ है, जिसका दुष्परिणाम जाने बिना एक दुसरे से जानकारी ले कर उपयोग करती हैं...... जी हाँ वो चलन हैं पीरियड्स को आगे बढाने का, पीरियड्स को तय समय पर आने से रोकने का। आज कल महिलायों को कही जाना हो, पार्टी हो, कोई पूजा-पाठ हो, या कोई जरुरी काम हो और उस समय उनकी पीरियड्स की तारीख रहती हैं, तो बिना सोचे समझे, बिना डॉक्टर की सलाह के तुरंत मेडिकल स्टोर्स से दवाई खरीद कर खा लेती हैं, और पीरियड्स को कुछ समय के लिए आगे बढ़ा लेती हैं। भारत जैसे धार्मिक देश में जहाँ पूजापाठ ,छुआछुत ज्यादा मानी जाती हैं, वहाँ यह चलन बहुत तेजी से फेल रहा हैं। महिलाये स्वयं अपने शरीर की एक प्राकृतिक क्रिया को रोकती हैं। उस क्रिया को डिस्टर्ब करती है, बगैर ये जाने कि उसका आगे चल कर क्या दुष्परिणाम होगा। यहाँ तक कि छोटी बच्चियों तक को ये दवा देने में कोई परहेज नहीं करती हैं वो भी बिना डॉक्टर की सलाह के।

क्या महिलाये या कोई भी इंसान एक दिन के लिए भी अपने मल-मूत्र को दवाई खा कर रोक सकता हैं, या कोई भी इंसान दवाई खा कर अपने शरीर की प्राकृतिक क्रियायो को रोक कर स्वथ्य रह सकता हैं ???

नहीं ...क्योकि शरीर की प्राकृतिक क्रियायो में तनिक भी फेरबदल होने से उसका प्रभाव मनुष्य के तन और मन पर पडता हैं। जब हम एक दिन के लिए भी अपने मल-मूत्र को नहीं रोक सकते हैं, तो पीरियड्स को क्यों रोका जाता हैं ??? क्या पीरियड्स शरीर की प्राकृतिक क्रिया नहीं हैं???

चलिए जानने की कोशिश करते हैं कि आखिर वो कौन सी गोली या दवाई हैं, जिससे कुछ समय के लिए पीरियड्स को रोका जाता है, और उसके क्या दुष्परिणाम है।

यह नोररेजिस्त्रोंन (Norethisterone) इंसान द्वारा बनाया हुआ एक फीमेल हार्मोन होता हैं। यह महिलायों के शरीर से प्राकृतिक रूप से स्त्रावित होने वाला प्रोजेस्ट्रोन (Progesterone) हार्मोन के समान हैं। नोररेजिस्त्रोंन (Norethisterone) महिलायों के शरीर में प्रोजेस्ट्रोन (Progesterone) हार्मोन का लेवल बढ़ा देता हैं, जिस से पीरियड्स रुक जाता हैं।

साइड-इफ़ेक्ट ......

अधिकतर महिलाये बिना किसी डॉक्टर की सलाह के बिना सोचे समझे ये दवा खाती हैं। आईये देखते हैं कि इस दवा के और पीरियड्स रोकने के क्या-क्या साइड इफ़ेक्ट हैं ....

• पीरियड्स अनियमित हो जाते हैं।
• इसे खाने के बाद अगले महीने के पीरियड्स में बहुत ज्यादा ब्लीडिंग होना।
• दो पीरियड्स के बीच ब्लीडिंग हो सकती हैं।
• यूट्रस (Uterus) में फिब्रोइड, सिस्ट या गठान अथवा कैंसर हो सकता हैं।
• ब्रैस्ट में भारीपन, सूजन या गठान हो जाना
• ल्यूकोरिया(श्वेत-प्रदर) की शिकायत हो सकती हैं।
• थकान होना।
• चिडचिडाहट होना।
• शरीर में अनचाहे बालो की वृद्धि होना अर्थात चेहरे पर बाल आना।
• पिम्पलस (मुंहासे) या झाइयां(Pigmentaion) होना।
• लिवर की प्रॉब्लम होना।
• कब्ज या दस्त लगना।
• मुहं सूखना।
• सांस लेने में तकलीफ होती हैं।
• नींद डिस्टर्ब होना।
• चक्कर आना।
• हाथ-पैरो में सूजन आना।

शरीर की प्राकृतिक क्रियायो के साथ खिलवाड़ करके अपने स्वाथ्य को न बिगाड़े। इस लेख में यदि कोई कमी हैं तो कृपया अपनी सलाह अवश्य दे।

डॉ.नीति श्रीवास्तव

A small tumour on chin. Cured by my homoeopathic medicine. Photo ... before & after my treatment.दाढ़ी पर छोटा सा tumour...
19/04/2018

A small tumour on chin. Cured by my homoeopathic medicine. Photo ... before & after my treatment.

दाढ़ी पर छोटा सा tumour जो एक साल से था।Homoeopathic मेडिसिन से सिर्फ़ एक महीने में ठीक हो गया।

11/04/2018

लू से बचाए होम्योपैथी

गर्मी के दिन आते ही लू लगना एक आम बात होती हैं। लू को हीट स्ट्रोक (Heat Stroke,Sun Stroke, Thermic Fever,Siriasis) भी कहते है। धूप में जाने पर लू लगने का खतरा बना रहता हैं। इसे साधारण नहीं समझना चाहिए बल्कि तुरंत उपचार कराना चाहिए क्योकि ज्यादा होने पर व्यक्ति के प्राण भी जा सकते हैं। होमियोपैथी से ना सिर्फ लू से बचाव किया जा सकता हैं बल्कि धूप में जाने से पहले होम्योपैथिक दवाई खाने से लू नहीं लगती हैं।



लक्षण.......
· शरीर का तापमान बढ़ जाना।
· तेज सिरदर्द होना।
· उल्टी होना।
· बुखार होना।
· पैर के तलवे में जलन होना।
· पसीना कम आना।
· कमजोरी लगना।
· हाथ-पैर कांपना।
· साँस लेने में तकलीफ हो।
· भ्रम की अवस्था हो।
· कोमा।
· घबराहट होना।
· उल्टी होना

होम्योपैथिक उपचार .....

नेट्रम-म्यूर (Nat-Mur)....

धूप में जाने पर पसीना अधिक आने से शरीर में नमक और पानी की कमी हो जाती हैं। चूँकि यह दवा नमक से बनती हैं इसलिए इससे शरीर में नमक की पूर्ति हो जाती हैं। दिन में 10/11 बजे तकलीफ ज्यादा बढती हैं। सिरदर्द होता हैं। कमजोरी लगती हैं। आँखों में जलन होती हैं। प्यास अधिक लगती हैं। ब्लड-प्रेशर कम हो जाता हैं। इसे धूप में जाने से पहले खाने से लू नहीं लगती हैं।

ग्लोनाईन (Glonine)....

चक्कर आते हैं। धूप में जाने पर सिरदर्द होता हैं। बुखार और घबराहट होती हैं। सिर में गर्मी लगती हैं। शरीर का तापमान बहुत अधिक बढ़ जाता हैं। जी मचलाये। तेज गर्मी से होने वाली तकलीफ। तकिया पर सिर नहीं रख पाता हैं। धडकन बढ़ जाती हैं। सांस लेने में तकलीफ होती हैं। ब्लड-प्रेशर बढ़ जाता हैं।


बेलाडोना(Belladona)....

त्वचा गर्म सूखी और लाल होती है। बैचेनी रहती हैं। बहुत तेज सिरदर्द(माथे में) रहता हैं। प्यास बहुत लगती हैं। गाल बहुत गर्म और लाल होते हैं। चक्कर आते हैं। कान में तेज दर्द होता हैं। धड़कन बहुत तेज हो जाती हैं। हाई फीवर में मानसिक अवस्था बहुत आक्रामक हो जाती हैं।

जेलसीमियम(Gelsimium).....

चक्कर बहुत आते हैं। रोगी ऊंघता रहता हैं। हर समय नींद सी आती रहती हैं। सुस्ती छायी रहती हैं। पल्स बहुत धीमी हो जाती हैं। डिप्रेशन धूप में जाने बाद बढ़ जाता हैं। पलके इतनी भारी लगती है कि पेशेंट आँखे नहीं खोल पाता है। रोगी को प्यास नहीं लगती हैं। skin पर लाल रंग के दाने निकलते हैं। हमेशा थकान लगती हैं।

नोट- होम्योपैथी में रोग के कारण को दूर करके रोगी को ठीक किया जाता है। प्रत्येक रोगी की दवा उसकी शारीरिक और मानसिक अवस्था के अनुसार अलग-अलग होती है। अतः बिना चिकित्सकीय परामर्श यहां दी हुई किसी भी दवा का उपयोग न करें।

28/03/2018

गर्मियाँ शुरू होते ही धूप में जाने पर लू लगने का डर रहता है। बहुत ज़रूरी हो तो ही धूप में निकले और पानी पी कर निकले। गर्दन का पिछला भाग हमेशा ढाँक कर ही निकले।

धूप में जाने से पहले Homoeopathic मेडिसिन Natrum- Mur 30 की एक बूँद दवा लेने से लू नहीं लगती है। यह शरीर में नमक की कमी को दूर करती है।

Dr. Neeti Shrivastava

घमोरिया का घरेलू ईलाज ........गर्मियाँ शुरू होते ही बहुत से लोगों को घमोरिया की समस्या होने लगती है। तरह तरह के पाउडर और...
27/03/2018

घमोरिया का घरेलू ईलाज ........

गर्मियाँ शुरू होते ही बहुत से लोगों को घमोरिया की समस्या होने लगती है। तरह तरह के पाउडर और मेडिसिन का प्रयोग करते है लेकिन पूरी तरह से ठीक नहीं हो पाते है।

टेसु यानी पलाश के फूलो को उबाल कर उसके पानी को ठंडा कर ले, और उससे स्नान करने से घमोरिया की समस्या ठीक हो जाती हैं।

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452001

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