21/01/2020
🌷 यज्ञ🌷
प्रश्न :- यज्ञ क्या है? यज्ञ के क्या अर्थ है?
उत्तर :- संसार में जितने उपकार के कार्य है ये सब यज्ञ कहलाते हैं।
यज्ञ के तीन अर्थ है -
१ - देव पूजा -
२ - संगतिकरण
३ - दान
देव पूजा किसे कहते हैं?
उत्तर :- अग्नि - आदि पदार्थों का समुचित उपयोग तथा वृद्धों, देवों अर्थात विद्वानों, संन्यासियो का पारमार्थिक सुख सम्पादन के लिए आदर- सत्कार करना।
संगतिकरण किसे कहते हैं?
उत्तर :- १ - अग्नि आदि पदार्थों के साथ यथा योग्य संगति, जिससे अनेक विधि शिल्प कार्यों की सिद्धि होती है।
२ - विद्वान महात्मा पुरूषों का संग, परमात्मा से आत्मा का संयोग या प्राप्ति करना, संगतिकरण कहलाता है।
दान किसे कहते हैं?
उत्तर :- अपने सामर्थ्य के अनुसार निष्काम भाव से सुपात्र को उसकी आवश्यकतानुसार धन, वस्त्र या अन्य पदार्थ अथवा विद्या आदि प्रदान करना दान कहलाता है। संसार में जितने भी दान है उनमें वेद- विद्या का दान सबसे उत्तम है।
प्रश्न :- पंच महायज्ञ कौन- कौन से हैं?
उत्तर :- ब्रह्मयज्ञ, देवयज्ञ, पितृयज्ञ , अथितियज्ञ तथा बलिवैश्वदेवयज्ञ ये ये पांचों यज्ञ पंच महायज्ञ कहलाते है।
प्रश्न :- ब्रह्मयज्ञ किसे कहते हैं?
उत्तर :- वेदादि शास्त्रों का पठन-पाठन प्राणायाम और वैदिक सन्ध्या अर्थात् परमेश्वर की स्तुति उपासना आदि को ब्रह्मयज्ञ कहते है।
प्रश्न :- देवयज्ञ किसे कहते हैं?
उत्तर :- अग्नि होत्र से लेकर अश्वमेध पर्यन्त सब यज्ञों को देव यज्ञ कहते हैं।
प्रश्न :- पितृयज्ञ किसे कहते हैं?
उत्तर :- जीवित- माता- पिता, दादा- दादी, नाना-नानी, आचार्य तथा अन्य सब वृद्धों के सत्कार और सेवा को पितृयज्ञ कहते है।
प्रश्न :- अतिथि यज्ञ किसे कहते हैं?
उत्तर :- पूर्व सूचना के बिना कोई विद्वान, धार्मिक पुरुष, सन्यासी आदि अपने स्थान पर आवे तो उनकी सेवा सत्कार आदि करना तथा उनसे ज्ञान प्राप्त करने को अतिथि यज्ञ कहते हैं।
प्रश्न :- बलिवैश्वदेवयज्ञ किसे कहते हैं?
उत्तर :- पशु-पक्षियों, जानवरों, कौवे ,कबूतर ,कुत्ते ,कृमि आदि को जो भोजन कराया जाता है उसे बलिवैश्वदेवयज्ञ कहते है।
प्रश्न :- इन यज्ञों के करने के क्या लाभ है?
उत्तर :- इनके करने से मनुष्य धर्म, अर्थ, काम, मोक्ष ( जीवन के अन्तिम लक्ष्य ) तक पहुंचने के योग्य हो जाता है🙏🙏🙏🙏