12/01/2026
🙏 कृतज्ञता, सम्मान और स्मरण का भाव… 🇮🇳
नमस्कार मित्रों,
आज का यह लेख केवल एक व्यक्तिगत सम्मान की सूचना नहीं है, बल्कि हमारे इतिहास, बलिदान और आने वाली पीढ़ियों की जिम्मेदारी से जुड़ा एक आत्ममंथन है।
हाल ही में मुझे सीहोर में आयोजित एक अकादमिक व्याख्यान के लिए आमंत्रित किया गया, जहाँ लगभग 100 से अधिक चिकित्सकों के बीच गर्भवती महिलाओं में बढ़ती शुगर (Gestational Diabetes) की जाँच एवं उपचार पर अपने अनुभव साझा करने का सौभाग्य मिला।
इसी अवसर पर मुझे “कुंवर चेंग (चैन) सिंह ओरशन” से सम्मानित किया गया।
इस सम्मान को मैं पूर्ण विनम्रता के साथ अपनी पूरी टीम को समर्पित करता हूँ, जिन्होंने दिन-रात समर्पण के साथ माताओं की शुगर नियंत्रित की, ताकि वे स्वस्थ शिशु को जन्म दे सकें। यह सम्मान अकेले मेरा नहीं, हम सभी की सामूहिक मेहनत का परिणाम है। 🙏
लेकिन इस सम्मान के साथ ही एक प्रश्न मेरे मन में गहराई से उतर गया—
कुंवर चैन सिंह कौन थे?
और क्या आज की पीढ़ी उन्हें जानती है?
🔸 सन् 1824, सीहोर की पावन धरती पर
🔸 अंग्रेज़ी शासन के विरुद्ध
🔸 महाराज कुंवर सा. श्री चैन सिंह जी, नरसिंहगढ़ स्टेट
अपने साथियों— हिम्मत खान, बहादुर खान तथा सैकड़ों वीर योद्धाओं के साथ
स्वतंत्रता के लिए हँसते-हँसते वीरगति को प्राप्त हुए।
उन्होंने अंग्रेज़ों के विरुद्ध स्थानीय स्वशासन की स्थापना की।
इस संघर्ष में 200 से अधिक वीर योद्धा शहीद हुए, अनेक घायल हुए, और कई बंदियों को अंग्रेज़ों की कैद से मुक्त कराया गया।
दुखद सत्य यह है कि—
👉 हमारे बच्चे चैन सिंह जी जैसे महान बलिदानियों के नाम तक नहीं जानते।
👉 यह गौरवशाली इतिहास हमारी पाठ्यपुस्तकों और चर्चाओं से धीरे-धीरे ओझल होता जा रहा है।
यदि हमारी आने वाली पीढ़ियाँ अपने नायकों को नहीं पहचानेंगी,
तो वे अपने संस्कार, साहस और मूल्यों को कैसे समझेंगी?
आज यह सम्मान मेरे लिए एक पुरस्कार से कहीं अधिक, एक जिम्मेदारी बन गया है—
कि मैं और हम सब मिलकर इस इतिहास को आगे पहुँचाएँ,
इसे जीवित रखें और अगली पीढ़ी तक पहुँचाएँ।
🙏 नमन है महाराज कुंवर चैन सिंह जी को
🙏 नमन है उन सभी ज्ञात-अज्ञात वीरों को
🙏 जिन्होंने भारत माता के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर कर दिया
आइए, इस संदेश को आगे बढ़ाएँ।
इतिहास को ज़िंदा रखें, ताकि देश ज़िंदा रहे। 🇮🇳
—
डॉ. संदीप जुल्का
Senior Consultant Endocrinologist
इंदौर