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Prakruti Ayurveda is an ayurvedic hospital keralian panchkarma and paralysis centre
situated at Islampur, in Sangli district Maharashtra.

02/11/2021
CIVID.19.DIET
03/05/2020

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दरवर्षी १९ एप्रिल हा दिन जागतिक यकृत दिन म्हणून साजरा केला जातो. मनुष्याच्या इंद्रियांपैकी लिव्हर / यकृत हे एकमेव इंद्रि...
20/04/2020

दरवर्षी १९ एप्रिल हा दिन जागतिक यकृत दिन म्हणून साजरा केला जातो. मनुष्याच्या इंद्रियांपैकी लिव्हर / यकृत हे एकमेव इंद्रिय असे आहे की ज्यामध्ये हानी किंवा रोगग्रस्त झालेल्या पेशींच्या जागी नवीन पेशी तयार होतात आणि यकृत पुन्हा कार्य करू शकते. शरीराला घातक असणारे विषारी घटक शरीराच्या बाहेर टाकून लिव्हर शरीराचे कोलेस्टेरॉल आणि शुगर नियंत्रित करण्यासाठी खूप मदत करते. लिव्हरला निरोगी ठेवण्यासाठी आरोग्यदायी जीवनशैली अवलंबणे हाच एकमेव उपाय आहे. तुमची प्रकृती उत्तम राहण्यासाठी लिव्हरच्या आरोग्याची काळजी घ्या आणि आरोग्यदायी राहा.

 #शतावरी   का नाम बहुत कम लोगों ने सुना होगा, इसलिए बहुत कम लोग ही शतावरी का प्रयोग करते होंगे। क्या आपको पता है कि शताव...
14/12/2019

#शतावरी का नाम बहुत कम लोगों ने सुना होगा, इसलिए बहुत कम लोग ही शतावरी का प्रयोग करते होंगे। क्या आपको पता है कि शतावरी क्या है, इसका इस्तेमाल कैसे किया जाता है, यह कहां मिलता है, और शतावरी के फायदे क्या-क्या हो सकते हैंं?

शतावरी क्या है?

शतावरी बेल या झाड़ के रूप वाली शतावरी एक जड़ी-बूटी है। इसकी लता फैलने वाली, और झाड़ीदार होती है। एक-एक बेल के नीचे कम से कम 100, इससे अधिक जड़ें होती हैं। ये जड़ें लगभग 30-100 सेमी लम्बी, एवं 1-2 सेमी मोटी होती हैं। जड़ों के दोनों सिरें नुकीली होती हैं।

इन जड़ों के ऊपर भूरे रंग का, पतला छिलका रहता है। इस छिलके को निकाल देने से अन्दर दूध के समान सफेद जड़ें निकलती हैं। इन जड़ों के बीच में कड़ा रेशा होता है, जो गीली एवं सूखी अवस्था में ही निकाला जा सकता है।

शतावरी दो प्रकार की होती हैं, जो ये हैंः-

1 विरलकन्द शतावर
इसके कन्द छोटे, मांसल, फूले हुए तथा गुच्छों में लगे हुए होते हैं। इसके कन्द का काढ़ा बनाकर सेवन किया जाता है।

2 कुन्तपत्रा शतावर
यह झाड़ीनुमा पौधा होता है। इसके कन्द छोटे, और मोटे होते हैं। इसके फूल सफेद रंग के होते हैं, और फल गोल होते हैं। कच्ची अवस्था में फल हरे रंग के, और पकने पर लाल रंग के हो जाते हैं। इसके कंद शतावर से छोटे होते हैं।

शतावरी के फायदे

बहुत सालों से शतावरी का भिन्न-भिन्न तरीके से इस्तेमाल होता आ रहा है। शतावरी के फायदे लेने के लिए आपको शतावरी के आयुर्वेदीय गुण-कर्म, उपयोग के तरीके, उपयोग की मात्रा, एवं विधियों की जानकारी होनी जरूरी है, जो ये हैंः-

हम पूरे सेवन की विधि नहीं बता सकते क्योंकि यह पोस्ट बहुत लंबी हो जाएगी जिसको भी अधिक जानकारी चाहिए कृपया वह मैसेज करें धन्यवाद।

1.गर्भवती महिलाओं के लिए फायदेमंद शतावरी का सेवन
2.स्तनों में दूध बढ़ाने के लिए शतावरी का सेवन
3.मूत्र विकार के इलाज के लिए शतावरी का सेवन
4.वीर्य दोष को ठीक करने के लिए शतावरी का सेवन
* शतावरी चूर्ण का प्रयोग कर स्वप्न दोष का इलाज
5.मर्दानगी ताकत को बढ़ाने के लिए शतावरी का सेवन
6.शारीरिक कमजोरी दूर करने के लिए शतावरी का प्रयोग
7.अनिद्रा रोग (नींद ना आने की परेशानी) में शतावरी का इस्तेमाल
8.सर्दी-जुकाम में शतावरी का उपयोग
9.गला बैठने (आवाज बैठना) पर शतावरी से फायदा
10.सूखी खांसी के उपचार के लिए शरातवरी का उपयोग
11.सांसों के रोग में शतावरी से लाभ
12.बवासीर में शतावरी से फायदा
13.पेचिश में फायदेमंद शतावरी का प्रयोग
14.अपच की समस्या में शतावरी के सेवन से फायदा I
15.गोनोरिया (सुजाक) में शतावरी से लाभ
16.पुरानी पथरी के रोग में शतावरी का इस्तेमाल

शतावरी के उपयोगी भाग
जड़
जड़ से तैयार काढ़ा
पत्ते
पेस्ट
चूर्ण

शतावरी का इस्तेमाल कैसे करें?
आप शतावरी का उपयोग इस तरह से कर सकते हैंः-

रस- 10-20 मिली
काढ़ा- 50-100 मिली
चूर्ण- 3-6 ग्र

Prakruti Ayurveda is happy to celebrate International Yoga day
21/06/2018

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