15/10/2025
एक मासूम बच्ची के साथ एक और कुकृत्य।समाज के लिए अखबार में छपने वाली एक और खबर है शायद,और जब तक मुद्दा मीडिया में उछलता रहेगा हम बातें भी करेंगे शायद।फिर सब भूल जाएंगे और एक नए दिन की तरह अपने रोजमर्रा के कामों में उलझ जाएंगे।पर हर क्षण,एक अजीब सी बेचैनी,एक अजीब सी घबराहट समाज के हर उस इंसान के अंदर बनी रहेगी,जिसकी बिटिया घर से बाहर कदम रखती है।
ऐसा समाज दे रहे हैं हम अपनी बेटियों को?
बेटियों को आत्मनिर्भर बना रहे हैं,पढ़ा रहे हैं,वो घर से लेकर बड़ी बड़ी कंपनी सम्भाल रही है,पर बेटों एक मूलभूत शिक्षा नहीं दे पा रहे हैं।हममें से कितने लोगों ने अपने बेटों को सामने बैठाकर कभी कभी बात करते हैं........कि बेटी किसी की भी हो......उसकी इज्जत करो,कोई अगर गलत हरकत करता दिखे तो बचाओ उसे।
आप कहेंगे क्या करें कलयुग है।
सतएक मासूम बच्ची के साथ एक और कुकृत्य।समाज के लिए अखबार में छपने वाली एक और खबर है शायद,और जब तक मुद्दा मीडिया में उछलता रहेगा हम बातें भी करेंगे शायद।फिर सब भूल जाएंगे और एक नए दिन की तरह अपने रोजमर्रा के कामों में उलझ जाएंगे।पर हर क्षण,एक अजीब सी बेचैनी,एक अजीब सी घबराहट समाज के हर उस इंसान के अंदर बनी रहेगी,जिसकी बिटिया घर से बाहर कदम रखती है।
ऐसा समाज दे रहे हैं हम अपनी बेटियों को?
बेटियों को आत्मनिर्भर बना रहे हैं,पढ़ा रहे हैं,वो घर से लेकर बड़ी बड़ी कंपनी सम्भाल रही है,पर बेटों एक मूलभूत शिक्षा नहीं दे पा रहे हैं।हममें से कितने लोगों ने अपने बेटों को सामने बैठाकर कभी कभी बात करते हैं........कि बेटी किसी की भी हो......उसकी इज्जत करो,कोई अगर गलत हरकत करता दिखे तो बचाओ उसे।
आप कहेंगे क्या करें कलयुग है।
सतयुग भी ऐसा ही था,इंसान कुकृत्य पहले राक्षशः के रूप में करते थे,अब राक्षशः खुद इंसान के अंदर से ही काम करता है।
देवी दुर्गा ने तो बुरी निगाह डालने वाले शुंभ को भस्म कर दिया था,पर हर लड़की दुर्गा नहीं हो सकती,एक छः महीने की बच्ची,एक स्कूल जाती कन्या,एक ६० साल की औरत दुर्गा नहीं हो सकती।
तो उसको समाज ऐसा दें,कि उसको इसकी जरूरत ही न पड़े।बेटा पढाएं,बेटी बचाएं।पहला कदम अपने घर से।
**पिछले साल आर जी कार मेडिकल कॉलेज कैसे पर एक कविता लिखी थी।पोस्ट कर रही हूं।युग भी ऐसा ही था,इंसान कुकृत्य पहले राक्षशः के रूप में करते थे,अब राक्षशः खुद इंसान के अंदर से ही काम करता है।
देवी दुर्गा ने तो बुरी निगाह डालने वाले शुंभ को भस्म कर दिया था,पर हर लड़की दुर्गा नहीं हो सकती,एक छः महीने की बच्ची,एक स्कूल जाती कन्या,एक ६० साल की औरत दुर्गा नहीं हो सकती।
तो उसको समाज ऐसा दें,कि उसको इसकी जरूरत ही न पड़े।बेटा पढाएं,बेटी बचाएं।पहला कदम अपने घर से।
**पिछले साल आर जी कार मेडिकल कॉलेज केस पर एक कविता लिखी थी।पोस्ट कर रही हूं।