Ayurved Help By Dr. Neeraj

Ayurved Help By Dr. Neeraj उन लोगों की सहायता का प्रयास जो कि अपन?

16/04/2026

*लू (हीटवेव) से बचाव: क्या करें और क्या न करें*

🌞 _गर्मी की चपेट में आने से पहले सावधानी बरतें_ ! लू लगना जानलेवा हो सकता है। सही जानकारी और छोटी-छोटी सावधानियों से हम खुद को और अपने परिवार को सुरक्षित रख सकते हैं।
🇳‌🇪‌🇪‌🇷‌🇦‌🇯‌
✅ *क्या करें (Do's)*

- *खूब पानी पिएं* – प्यास न लगने पर भी हर थोड़ी देर में पानी पिएं। यात्रा के समय पानी साथ रखें।
- *ORS, घरेलू पेय पिएं* – छाछ (लस्सी), निम्बू पानी, नारियल पानी, आम पन्ना, छाछ या तौरानी जैसे पेय लें।
- *हल्के, ढीले और हल्के रंग के सूती कपड़े पहनें*।
- *सिर ढककर निकलें* – टोपी, कपड़ा, छाता या गमछा इस्तेमाल करें। धूप का चश्मा और जूते/चप्पल पहनें।
- *दोपहर 12 बजे से 3 बजे तक घर के अंदर रहें* – खासकर बुजुर्गों, बच्चों और बीमार लोगों का ध्यान रखें।
- *घर को ठंडा रखें* – पर्दे बंद रखें, रात में खिड़कियां खोलें, पंखा/कूलर चलाएं।
- *बाहर काम करना हो तो* – नम कपड़ा सिर, गर्दन और चेहरे पर रखें।
🇳‌🇪‌🇪‌🇷‌🇦‌🇯‌
❌ *क्या न करें (Don'ts)*
- *दोपहर में धूप में बेवजह न निकलें* – खासकर 12 से 3 बजे के बीच।
- *भारी या तनावपूर्ण काम न करें* – दोपहर में व्यायाम, खेती या मेहनत से बचें।
- *शराब, चाय, कॉफी, कोल्ड ड्रिंक्स न पिएं* – ये शरीर से पानी सोख लेते हैं।
- *तला, मसालेदार, प्रोटीन युक्त या बासी खाना न खाएं*।
- *नंगे पैर बाहर न निकलें*।
- *बच्चों या पालतू जानवरों को बंद गाड़ी में अकेला न छोड़ें*।
- *बिना सिर ढके या उचित कपड़ों के बाहर न जाएं*।

*लू लगने के लक्षण*: चक्कर आना, उल्टी, तेज बुखार, पसीना न आना, बेहोशी।

*ऐसा हो तो*: तुरंत छायादार ठंडी जगह पर लिटाएं, ठंडे पानी से शरीर पोछें और तुरंत डॉक्टर/अस्पताल ले जाएं।

_गर्मी में सावधानी ही बचाव है। खुद सुरक्षित रहें, दूसरों की भी मदद करें_

*शेयर करें और जागरूकता फैलाएं!* ☀️💧

*

11/04/2026

पेट में गर्मी आज के समय की एक आम समस्या बन चुकी है, जिसे आयुर्वेद में मुख्य रूप से पित्त दोष की वृद्धि से जोड़ा जाता है। जब शरीर में पित्त असंतुलित हो जाता है, तो उसका प्रभाव सबसे पहले पेट और पाचन तंत्र पर दिखाई देता है। पेट की गर्मी केवल असहजता ही नहीं पैदा करती, बल्कि यह लंबे समय तक बनी रहे तो कई अन्य समस्याओं का कारण भी बन सकती है।

पेट में गर्मी के प्रमुख कारणों में सबसे पहला कारण है गलत खानपान। अत्यधिक मसालेदार, तला-भुना, खट्टा और गरम तासीर वाले खाद्य पदार्थ जैसे मिर्च, अचार, फास्ट फूड और ज्यादा चाय-कॉफी का सेवन पेट में गर्मी बढ़ाता है। इसके अलावा अनियमित भोजन, देर रात खाना और तुरंत सो जाना भी पाचन तंत्र को कमजोर करता है। शरीर में पानी की कमी भी एक बड़ा कारण है, जिससे शरीर की आंतरिक गर्मी संतुलित नहीं रह पाती। मानसिक तनाव, क्रोध और चिंता भी पित्त दोष को बढ़ाकर पेट में गर्मी उत्पन्न करते हैं। शराब, तंबाकू और धूम्रपान जैसी आदतें भी इस समस्या को और गंभीर बना देती हैं।

लक्षणों की बात करें तो पेट में जलन, सीने में जलन (एसिडिटी), खट्टी डकारें, मुंह में कड़वाहट, कब्ज या कभी-कभी दस्त, मुंह के छाले और शरीर में बेचैनी जैसे संकेत पेट में गर्मी की ओर इशारा करते हैं। कुछ लोगों को बार-बार प्यास लगना, पेशाब में जलन और त्वचा पर लाल चकत्ते भी दिखाई दे सकते हैं। अगर समय रहते इस पर ध्यान न दिया जाए, तो यह गैस, अल्सर और पाचन संबंधी गंभीर समस्याओं का रूप ले सकती है।

घरेलू उपायों की मदद से पेट की गर्मी को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है।
🇳‌🇪‌🇪‌🇷‌🇦‌🇯‌
सबसे सरल उपाय है पर्याप्त मात्रा में पानी पीना। दिन में कम से कम 8–10 गिलास पानी अवश्य पिएं। सुबह खाली पेट एक गिलास ठंडा दूध (लगभग 200–250 मि.ली.) पीने से पेट की जलन में राहत मिलती है। सौंफ का सेवन भी बेहद लाभकारी है; आप 1 चम्मच सौंफ को रात में पानी में भिगो दें और सुबह उस पानी को पी लें या भोजन के बाद 1 चम्मच सौंफ चबा सकते हैं।
🇳‌🇪‌🇪‌🇷‌🇦‌🇯‌
धनिया भी पेट की गर्मी कम करने में सहायक है। 1 चम्मच साबुत धनिया को एक गिलास पानी में उबालकर ठंडा कर लें और दिन में 1–2 बार पिएं। इसके अलावा नारियल पानी (1 गिलास रोज) शरीर को ठंडक देता है और पित्त को शांत करता है। एलोवेरा जूस भी एक अच्छा विकल्प है; 20–30 मि.ली. एलोवेरा जूस सुबह खाली पेट लेने से पाचन सुधरता है और गर्मी कम होती है।

आयुर्वेद में आंवला को बहुत प्रभावी माना गया है। आप 1–2 चम्मच आंवला पाउडर को पानी के साथ सुबह-शाम ले सकते हैं। छाछ (1 गिलास) में चुटकी भर जीरा पाउडर और काला नमक मिलाकर दोपहर के भोजन के बाद पीना भी पाचन को मजबूत करता है और पेट की गर्मी को कम करता है।
🇳‌🇪‌🇪‌🇷‌🇦‌🇯‌
इसके साथ ही जीवनशैली में सुधार भी जरूरी है। समय पर भोजन करें, देर रात तक जागने से बचें और रोजाना हल्का व्यायाम या योग करें। तनाव को कम करने के लिए ध्यान और प्राणायाम अपनाएं। ताजे फल और हरी सब्जियों को आहार में शामिल करें और मसालेदार व जंक फूड से दूरी बनाएं।

सही आहार, पर्याप्त पानी और घरेलू उपायों के नियमित पालन से पेट की गर्मी को आसानी से नियंत्रित किया जा सकता है और पाचन तंत्र को स्वस्थ रखा जा सकता है।

05/04/2026

क्या आपने कभी सोचा है कि आपका पेट दिन में कितनी बार साफ होता है?

अगर यह रोज सुबह एक बार ठीक से हो जाए, तो समझिए शरीर सही संकेत दे रहा है। लेकिन अगर बार-बार जाना पड़े, अधूरा महसूस हो या हर खाने के बाद तुरंत प्रेशर बने—तो यह सिर्फ आदत नहीं, बल्कि शरीर का एक संकेत है।

इसका सीधा मतलब है—डाइजेशन और रूटीन दोनों ही हेल्थ का बेस हैं।

बार-बार टॉयलेट जाने का क्या संकेत है?
अगर आपको:
🇳‌🇪‌🇪‌🇷‌🇦‌🇯‌
एक बार में पूरा पेट साफ नहीं होता
थोड़ी देर बाद फिर जाने की इच्छा होती है
खाने के तुरंत बाद प्रेशर बनता है

तो यह संकेत है कि आंतें (intestines) कमजोर हो रही हैं या डाइजेशन सही नहीं है।

स्टूल (मल) की क्वालिटी क्या बताती है?
आपका स्टूल आपकी हेल्थ का आईना है

ठीक से बंधा हुआ (well-formed) - डाइजेशन अच्छा
पोरोस/छिद्र जैसा - शरीर में गैस ज्यादा
ढीला या अनबाउंड - डाइजेशन कमजोर
म्यूकस (चिपचिपा पदार्थ) - आंतों में इरिटेशन या सूजन

अगर पेट साफ होने के बाद भी संतुष्टि नहीं मिलती, तो यह भी एक संकेत है कि अंदर कुछ ठीक नहीं है।

ये समस्या क्यों होती है?
इसके पीछे कई कारण हो सकते हैं:

गलत खानपान (मैदा, जंक फूड, प्रोसेस्ड चीजें)
जल्दी-जल्दी खाना, बिना चबाए
मील्स के बीच गैप ना रखना
ज्यादा स्ट्रेस
कमजोर पाचन शक्ति
🇳‌🇪‌🇪‌🇷‌🇦‌🇯‌
लंबे समय तक यही आदतें कोलाइटिस या IBS जैसी समस्याओं में बदल सकती हैं।

क्या दिन में 2 बार जाना गलत है?
जरूरी नहीं
अगर आप ज्यादा बार खाते हैं, या मील्स के बीच गैप कम है, तो 2 बार जाना सामान्य हो सकता है
लेकिन 3–4 बार या हर बार अधूरा महसूस होना—यह संकेत है कि सुधार की जरूरत है।

समझिए “खाने के बाद तुरंत प्रेशर” क्यों आता है
बहुत लोगों को लगता है कि जो अभी खाया, वही तुरंत बाहर आ गया
लेकिन ऐसा नहीं है

असल में:

नई खाई हुई चीज पुरानी जमा हुई गंदगी पर प्रेशर बनाती है
और वही बाहर निकलती है

इसका मतलब है कि आंतें कमजोर हैं और स्टूल को होल्ड नहीं कर पा रहीं।

खाने से जुड़ी जरूरी बातें
ढीले स्टूल या कोलाइटिस में छिलके वाली चीजें कम लें
🇳‌🇪‌🇪‌🇷‌🇦‌🇯‌

छोटी आदतें, बड़ा फर्क
खाना अच्छी तरह चबाएं
ओवरईटिंग से बचें
मील्स के बीच सही गैप रखें
स्ट्रेस कम करें

याद रखें—पेट की समस्या दवाओं से कम, आदतों से ज्यादा जुड़ी होती है।

असली बात
बार-बार टॉयलेट जाना कोई छोटी बात नहीं
यह शरीर का संकेत है कि कुछ अंदर बैलेंस से बाहर हो रहा है

अगर समय रहते ध्यान दिया जाए, तो बिना ज्यादा दवाओं के भी इसे ठीक किया जा सकता है

क्या आपका पेट रोज एक बार सही से साफ होता है?

06/03/2026

Ayurveda diet myths - मीडिया, इंटरनेट और इधर-उधर से मिली अधूरी जानकारी के कारण कई बार लोग अच्छी चीजों का भी गलत तरीके से सेवन करने लगते हैं। इसी वजह से फायदा होने के बजाय कई बार नुकसान भी हो जाता है।

खानपान की ज्यादातर चीजें अपने आप में लाभकारी होती हैं, लेकिन उन्हें किसे, कब और कैसे लेना चाहिए, यह समझना बहुत जरूरी है। आयुर्वेद के अनुसार हर व्यक्ति एक-दूसरे से अलग होता है। किसी की प्रकृति अलग होती है, किसी की पाचन शक्ति अलग होती है, किसी को पहले से कोई बीमारी होती है, और मौसम भी लगातार बदलता रहता है। इसलिए जो चीज एक व्यक्ति के लिए फायदेमंद है, वही दूसरे के लिए नुकसानदायक भी हो सकती है।
N⃠e⃠e⃠r⃠a⃠j⃠
इसीलिए किसी भी आहार को अंधाधुंध अपनाने से पहले यह समझना जरूरी है कि वह आपके शरीर के लिए उपयुक्त है या नहीं।

हर व्यक्ति को रोज रात में दूध पीना चाहिए ❓
सोशल मीडिया पर अक्सर यह सलाह दी जाती है कि हर किसी को सोने से पहले दूध जरूर पीना चाहिए। लेकिन आयुर्वेद इस बात को हर व्यक्ति के लिए सही नहीं मानता।

आयुर्वेद में विशेष रूप से देसी गाय के शुद्ध दूध को बहुत महत्व दिया गया है। दूध के गुणों की बात करें तो इसकी प्रकृति शीतल यानी ठंडी होती है। यह पचने में थोड़ा भारी होता है और शरीर में स्निग्धता यानी चिकनाई और लुब्रिकेशन बढ़ाता है।
🄽🄴🄴🅁🄰🄹

दूध का सेवन शरीर में वात और पित्त दोष को शांत करता है, लेकिन यह कफ को बढ़ा सकता है। इसके अलावा दूध शरीर की धातुओं को पोषण देता है और ताकत बढ़ाने में मदद करता है।

किन लोगों के लिए दूध फायदेमंद है
जिन लोगों की प्रकृति वात या पित्त प्रधान है, जिनका पाचन अच्छा है, जिन्हें दूध आसानी से पच जाता है और जिन्हें वजन बढ़ाने की जरूरत है, उनके लिए दूध बहुत अच्छा आहार माना जाता है।
🇳‌🇪‌🇪‌🇷‌🇦‌🇯‌
गर्मी के मौसम जैसे ग्रीष्म और शरद ऋतु में भी दूध का सेवन किया जा सकता है, क्योंकि इन ऋतुओं में शरीर में वात और पित्त बढ़ने की संभावना रहती है।

अगर आपने शाम को जल्दी भोजन कर लिया है, जैसे 6 या 6:30 बजे तक, और उसके दो-ढाई घंटे बाद दूध पीते हैं और वह आपको पच जाता है, तो रात में दूध लेना ठीक माना जा सकता है।

किन लोगों को दूध से बचना चाहिए
जिन लोगों की प्रकृति कफ प्रधान है, जिन्हें मोटापा है, शरीर में फैट ज्यादा जमा होता है या जिन्हें फैटी लिवर, गांठें या ब्लॉकेज जैसी समस्याएं हैं, उन्हें रात में दूध से बचना चाहिए।

इसके अलावा जिन लोगों को दूध पीने के बाद गैस, भारीपन या ब्लोटिंग महसूस होती है, उन्हें भी दूध नहीं लेना चाहिए।

जो लोग बहुत देर से रात का भोजन करते हैं, उन्हें भी सोने से पहले दूध नहीं पीना चाहिए।

बच्चों के मामले में भी एक खास बात ध्यान देने वाली है। बचपन की अवस्था कफ प्रधान मानी जाती है, इसलिए अगर बच्चों को बार-बार सर्दी-खांसी होती है तो उन्हें दूध देने से उनकी परेशानी बढ़ सकती है।

ऐसी स्थिति में बच्चों को दूध दिन के समय हल्दी या सोंठ डालकर थोड़ा पतला करके दिया जा सकता है।

वहीं वसंत ऋतु यानी मार्च और अप्रैल के महीनों में शरीर में कफ स्वाभाविक रूप से बढ़ा रहता है, इसलिए इस समय दूध पीना कम करना बेहतर माना जाता है।

27/02/2026

चाय पीने से बढ़ती है समस्या सही तरीका जानिए -
आज की लाइफस्टाइल में चाय सिर्फ एक ड्रिंक नहीं रही, बल्कि दिन की शुरुआत, काम के बीच ब्रेक और थकान मिटाने का सबसे आसान तरीका बन चुकी है।

बहुत से लोग नोटिस करते हैं कि चाय पीते ही पेट में जलन शुरू हो जाती है, एसिडिटी बढ़ती है, गले तक खट्टा पानी आने लगता है, गैस बनने लगती है या बेचैनी महसूस होती है। इसका कारण सीधा है - चाय शरीर मैं आयुर्वेद के अनुसार दोषों को बढ़ाने का काम करती है।

लेकिन सच यह भी है कि चाय छोड़ना हर किसी के लिए आसान नहीं होता। इसलिए सवाल यह नहीं है कि चाय पीनी है या नहीं, बल्कि यह है कि चाय को ऐसे कैसे पिया जाए कि उसका नुकसान कम से कम हो।

आयुर्वेद के अनुसार चाय समस्या क्यों बढ़ाती है
चाय की प्रकृति रूखी, तीखी और उत्तेजक मानी जाती है।
यह तीन स्तर पर असर डालती है

शरीर में सूखापन बढ़ाती है —
गर्मी और अम्लता बढ़ाती है —
पेट की परत को उत्तेजित करती है — जिससे एसिडिटी और जलन होती है

इसलिए जिन लोगों को पहले से गैस, एसिडिटी, सिर भारी रहना, चिड़चिड़ापन या पेट में जलन रहती है, उनमें चाय के बाद समस्या ज्यादा महसूस होती है।

पहला स्टेप चाय का नुकसान आधा कैसे करें
सबसे आसान और असरदार तरीका है चाय पत्ती की मात्रा कम करना।

अगर आप एक कप में 2 चम्मच चाय पत्ती डालते हैं, तो इसे धीरे-धीरे कम करें।
पहले 2 से घटाकर 1.5 चम्मच करें
कुछ दिनों बाद 1 चम्मच करें

आपको स्वाद में ज्यादा फर्क भी महसूस नहीं होगा, लेकिन शरीर पर पड़ने वाला असर लगभग 50% तक कम हो जाएगा।

दूसरा स्टेप चाय की फ्रीक्वेंसी कम करें
अगर आप दिन में दो या तीन बार चाय पीते हैं, तो कोशिश करें

एक बार चाय कम कर दें
या एक बार हल्की चाय लें
इससे कुल मिलाकर शरीर में जाने वाली चाय की मात्रा काफी कम हो जाती है
Neeraj
खाली पेट चाय सबसे बड़ी गलती
सुबह उठते ही चाय पीना सबसे नुकसानदायक आदतों में से एक है।

खाली पेट चाय पीने से

पेट का एसिड तेजी से बढ़ता है
गैस और जलन तुरंत शुरू होती है

इसलिए हमेशा चाय से पहले कुछ हल्का जरूर खाएं — जैसे भिगोए बादाम, फल या हल्का नाश्ता।

चाय बनाने का आयुर्वेदिक तरीका
अब सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा आता है — चाय को संतुलित बनाना।

पानी कम, दूध ज्यादा
जहां संभव हो, चाय-पानी की बजाय ज्यादा दूध में बनाएं।

🅝︎🅔︎🅔︎🅡︎🅐︎🅙︎
दूध वाली हल्की चाय शरीर पर कम आक्रामक होती है।

चीनी की जगह क्या लें
सफेद चीनी दोष को बढ़ाती है और एसिडिटी को ट्रिगर कर सकती है।

इसकी जगह

धागे वाली मिश्री का उपयोग करें
मिश्री शरीर को ठंडक देती है और वात-पित्त दोनों को संतुलित करने में मदद करती है।

चाय में कौन से मसाले सही हैं
अक्सर लोग चाय में अदरक और काली मिर्च डालते हैं।
लेकिन अगर आपको समस्या है, तो यह आदत परेशानी बढ़ा सकती है।

इसके बजाय चाय में डालें

छोटी हरी इलायची
सौंफ
थोड़ी सी मुलेठी

ये तीनों चीजें... 🅽︎🅴︎🅴︎🆁︎🅰︎🅹︎...
पेट को शांत करती हैं
अम्लता कम करती हैं
चाय के दुष्प्रभाव घटाती हैं

सही तरीके से पी गई चाय कितना नुकसान करती है
अगर आप ये बदलाव कर लेते हैं

चाय पत्ती कम
खाली पेट नहीं
दूध ज्यादा
चीनी की जगह मिश्री
सही मसाले

तो चाय से होने वाला नुकसान लगभग 70–75% तक कम किया जा सकता है।
और अगर मात्रा व समय भी नियंत्रित कर लिया जाए, तो इसका प्रभाव बहुत हल्का रह जाता है।

अंतिम बात
यह समझना जरूरी है कि चाय स्वास्थ्यवर्धक पेय नहीं है। लेकिन अगर आदत तुरंत छोड़ना संभव नहीं है, तो समझदारी यह है कि उसे शरीर के अनुकूल बनाया जाए।

छोटी-छोटी आदतों में बदलाव करके आप अपनी एसिडिटी, गैस और जलन जैसी समस्याओं को काफी हद तक नियंत्रित कर सकते हैं — बिना खुद को जबरदस्ती रोकने के।

उद्देश्य चाय को छुड़ाना नहीं, बल्कि आपकी तकलीफ कम करना और जीवन को आसान बनाना है

06/11/2025
03/02/2024

गर्म तासीर के ये मसाले आपके भोजन में स्वाद जोड़ने के साथ- साथ स्वास्थ्य को बनाये रखने में भी सहायक हैं। इन मसालों को अपने आहार में शामिल करें और क्यू आर कोड को स्कैन कर विभिन्न शोधों के माध्यम से जाने की मसाले किस तरह से स्वास्थ्य को बनाये रखने में सहायक हैं।

15/03/2023

जब मैं बाजार से निकलते समय वसंत ऋतु में ग्रीष्म ऋतु में लेने वाले आहार जैसे तरबूज खरीदते, आइसक्रीम खाते, गन्ने का जूस पीते देख रहा हूँ।
गर्मी शुरू भी नहीं हो पाई और हमने इतनी तेजी से गर्मियों के आहार विहार को अपनाना शुरू कर दिया जैसे ज्येष्ठ की तमतमाती धूप चढ़ने लगी हो ?..Neeraj. ....
अरे भाई इतनी क्या जल्दी है तरबूज खरबूज खाने की ? अभी कौन सी मई जून की गर्मी आ गई है ? क्या आपके शरीर मे अभी से पानी की कमी महसूस होने लगी ? क्या शरीर से पसीने की धार बह रही है ? अरे अभी चंद दिन ही हुए हैं शीत ऋतु को खत्म हुए, वसंत ने अभी अभी बचपन की दहलीज़ को लांघकर यौवन में प्रवेश किया है, पर लोगों ने तो वसंत को जैसे समाप्त ही मान लिया और सीधे ग्रीष्म ऋतु की ऋतु चर्या में छलांग लगा दी, जबकि वसंत में अपने शरीर मे जमा अतिरिक्त जलीयांश या कफ को निकलने भी नहीं दिया और आपने शीतल आहार जैसे खरबूज, आइसक्रीम, गन्ने का रस आदि लेना शुरू कर दिया। जब तेज ठंड थी तो हमारे शरीर ने ठंड से बचाने के लिए त्वचा के नीचे एक कफ रूपी जलीयांश का संचय किया था जैसे ठंडे प्रदेशों में रहने वाले पशुओं के रोम बड़े हो जाते हैं, वसा के जमाव से उनकी त्वचा मोटी हो जाती है ठीक वैसे ही हमारे शरीर मे भी कफ का संचय होता है यह एक तरह का अनुकूलन होता है परंतु हमने अपने शरीर को मौका ही नहीं दिया ऋतु अनुसार ढलने का। आने वाली गर्मियों में शरीर की गर्मी कम करने के लिए पसीना अधिक स्रावित करना होगा तो वसंत में शरीर में जमा अतिरिक्त कफ को बाहर करना ही होगा, पर हमें वसंत ऋतु का करना ही क्या है ? सीधे गर्मी का Routine follow करने लग जाते हैं।
मैं लोगों को बताना चाहूंगा कि जब भी एक ऋतु समाप्त हो रही होती है और दूसरी ऋतु आ रही है तो पिछली ऋतु का आहार विहार क्रमशः छोड़ते जाएं और आगामी ऋतु का आहार विहार क्रमशः अपनाते जाएं इसमें बहुत जल्दबाजी ठीक नहीं।
धन्यवाद

30/10/2022

Millets, Oats and Raagi are not good to consume every day even for healthy people and not at all healthy for people with metabolic errors.Neeraj...
By nature, these grains slow down metabolism and impair effective drainage mechanisms.

23/06/2022

*हितकर आहार* :इस ऋतु में जठराग्नि प्रदीप्त करनेवाले अदरक, लहसुन, नींबू, पुदीना, हरा धनिया, सोंठ, अजवायन, मेथी, जीरा, हींग, काली मिर्च, पीपरामूल का प्रयोग करें । जौ, खीरा, लौकी, गिल्की, पेठा, तोरई, जामुन, पपीता, सूरन, गाय का घी, तिल का तेल तथा द्राक्ष सेवनीय हैं । ताजी छाछ में काली मिर्च, सेंधा नमक, जीरा, धनिया, पुदीना डालकर दोपहर भोजन के बाद ले सकते हैं । उपवास और लघु भोजन हितकारी है । रात को देर से भोजन न करें ।..Neeraj. ..

*अहितकर आहार* : देर से पचनेवाले, भारी, तले, तीखे पदार्थ न लें । जलेबी, बिस्कुट, डबलरोटी आदि मैदे की चीजें, बेकरी की चीजें, उड़द, अंकुरित अनाज, ठंडे पेय पदार्थ व आइसक्रीम के सेवन से बचें । वर्षा ऋतु में दही पूर्णतः निषिद्ध है । श्रावण मास में दूध व हरी सब्जियाँ वर्जित हैं ।

*हितकर विहार* : उबटन से स्नान, तेल की मालिश, हलका व्यायाम, स्वच्छ व हलके वस्त्र पहनना हितकारी है । वातावरण में नमी और आद्र्रता के कारण उत्पन्न कीटाणुओं से सुरक्षा हेतु आश्रमनिर्मित धूप व हवन से वातावरण को शुद्ध तथा गौसेवा फिनायल या गोमूत्र से घर को स्वच्छ रखें । घर के आसपास पानी इकट्ठा न होने दें। मच्छरों से सुरक्षा के लिए घर में गेंदे के पौधों के गमले अथवा गेंदे के फूल रखें और नीम के पत्ते, गोबर के कंडे व गूगल आदि का धुआँ करें ।

*अपथ्य विहार*: दिन में शयन, रात्रि-जागरण, खुले में शयन, अति व्यायाम और परिश्रम, नदी में नहाना, बारिश में भीगना वर्जित है । कपड़े गीले हो गये हों तो तुरंत बदल दें ।

Address

Jaipur

Opening Hours

Monday 9am - 6pm
Tuesday 9am - 6pm
Wednesday 9am - 6pm
Thursday 9am - 6pm
Friday 9am - 6pm
Saturday 9am - 6pm

Website

Alerts

Be the first to know and let us send you an email when Ayurved Help By Dr. Neeraj posts news and promotions. Your email address will not be used for any other purpose, and you can unsubscribe at any time.

Contact The Practice

Send a message to Ayurved Help By Dr. Neeraj:

Share

Category