Pitambara Scientific astrology, vaastu and Healing

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18/12/2018

*गायत्री साधना और ब्राह्मणत्व: -*

एक बार अकबर और बीरबल यमुना नदी के किनारे पर ठंडी हवा का आनंद लेते हुए टहल रहे थे । अचानक अकबर ने एक ब्राह्मण को देखा, बहुत दयनीय हालत में पास से गुजर रहे लोगों से भिक्षा माँग रहा था।

अकबर ऐसे क्षण का मजाक बनाने का मौका नहीं छोड़ता था। उसने बीरबल से कहा, *"बीरबल ओह, तो यह है आप के ब्राह्मण जिनको "ब्रह्म देवता" के रूप में जाना जाता है जो इस तरह से भीख माँग रहा है।"*

बीरबल ने उस समय कुछ भी नहीं कहा लेकिन जब अकबर किले में लौट गया, तब बीरबल वापस उसी जगह पर फिर से आया, जहाँ वो ब्राह्मण भिक्षा मांग रहा था।

बीरबल उससे बात की, उससे पूछा कि वह क्यों भिक्षायापन करता है?

गरीब ब्राह्मण ने कहा है कि उसके पास जो भी था, वह सब खो दिया है। कोई धन अथवा आभूषण नहीं है, कोई काम नहीं है, कोई भूमि और कोई भी जीवन यापन के संसाधन नहीं शेष रहे, इसलिए वह अपनी परिस्थितियों के अधीन होकर परिवार के भरण पोषण हेतु एक भिखारी होने के लिए मजबूर है!

बीरबल ने उस से पूछा कि कितना पैसा वह एक पूरे दिन में कमा लेता हैं । गरीब ब्राह्मण ने उत्तर दिया कि वह कुछ 6 से 8 "अशर्फियाँ" कमाता है (सोने के सिक्के उस समय अवधि की मुद्रा) एक दिन में.

बीरबल ने भीख माँगना रोकने के लिए उसके लिए काम देने की पेशकश की और पूछा की अगर आप को मेरे लिए काम करना पड़े तो क्या आप भिक्षायापन छोड़ देंगे???

ब्राह्मण ने प्रसन्नता पूर्वक पूछा है कि क्या मेरा काम होगा? मुझे क्या करना है?

बीरबल ने उस से कहा कि *आप को हर रोज ब्रह्ममुहूर्त में स्नान कर के, स्वच्छ वस्त्र धारण कर के प्रतिदिन इसी स्थान पर सुबह से शाम तक की अवधी में 101 माला गायत्री मंत्र का जाप करना है और हर शाम को आप के इस स्थान को छोड़ने से पहले, आप को 10 अशर्फियाँ पहुंचा दी जायेंगी। बस ये शर्त है कि आप किसी से भिक्षा नहीं मांगेगे।*

ब्राह्मण ने सहर्ष इस काम को स्वीकार कर लिया.

*अगले दिन से, वह ब्राह्मण एक अलग ही व्यक्ति था, वह उसी जगह पर था, उसी स्थान पर बैठने के लिए, लेकिन किसी से भी भिक्षा याचना नहीं की। वह दिन, किसी भी दिन से अलग था क्योंकि पूरा दिन उस ब्राह्मण ने दिन के अंत तक भिखारी के रूप में कोई अपमान की भावना नहीं झेली और गायत्री जाप के असर से भी उसका मन प्रफुल्लित रहा।*

*उस शाम को वह प्रसन्नचित्त हो करे 10 अशर्फीयां ले के (जो भिखारी के रूप में अपने दैनिक कमाई की तुलना में अधिक था) अपने परिवार में लौटा।*

दिन बीते तो बीरबल ने उस के दैनिक जाप की माला संख्या और अशर्फियों की संख्या - दोनों बढ़ा दीं।

*अब थोड़ा - थोड़ा करके, उसे गायत्री मंत्र के इस जाप में आनंद आना शुरू हो गया और उसके दिल को गायत्री मंत्र की शक्तियां दीन दुनिया के प्रवाह से दूर ले जा रहीं थीं।*

*अब वह जल्दी से घर लौटने अथवा अन्य इच्छाओं के लिए चिन्तित नहीं था। भूख प्यास इत्यादि शारीरिक व्याधायें उसे अब पहले की तरह नहीं सताती थीं।*

*धीरे धीरे गायत्री मंत्र के शक्तिशाली सतत जाप के कारण, उस के चेहरे पे तेज झलकने लगा।*

*उनका तेज इतना प्रबल हो गया की आने जाने वाले लोगो का ध्यान सहज ही उस ब्राह्मण की ओर आकर्षित होने लगा, वहां अधिक से अधिक लोग उनके दर्शन मात्र की इच्छा से आने लगे और स्वतः ही वहां पर मिठाई, फल, पैसे, कपड़े आदि की भेंट चढाने लगे।*

*कभी 6 से 8 अशर्फियां कमाने के लिए जो ब्राह्मण सारा दिन अपमानित जीवन जीता था, आज उसे ना तो अपमान झेलने की ज़रुरत हुईं, ना ही बीरबल से प्राप्त होने वाली अशर्फियाँ उसे याद रही, और ना ही श्रद्धापूर्वक चढ़ाई गई वस्तुओं का कोई आकर्षण रहा।*

*अब वो मन और आत्मा से सारा दिन गायत्री जाप में समाहित हो चुका था। जल्द ही यह खबर कि वहाँ एक महान योगी संत का आगमन हुआ है, सारे शहर में बहुत प्रसिद्ध हो गई, परन्तु उस ब्राह्मण को स्वयं इस प्रसिद्धी का पता नहीं था।*

*जो लोग वहां दर्शन के लिए आते थे, उन्होंने ही वहां पे उनके स्थान को परवर्तित कर के एक छोटे से मंदिर और आश्रम का स्वरूप दे दिया और दैनिक रूप से वहां पर मंदिर की दिनचर्या की ही तरह पूजा अर्चना भी होने लगीं।*

जल्दी ही यह खबर अकबर को भी पहुँची और उनको भी इस *"अज्ञात नए संत"* के बारे में उत्सुकता और दर्शनाभिलाषा हुई और उन्होंने भी उस *"संत"* की तपोभूमि पर दर्शनार्थ जाने का फैसला किया और वह बहुत से दरबारियों आदि और बेशुमार शाही तोहफे के साथ अच्छी तरह से अपनी राजसी शैली में बीरबल को भी अपने साथ लेकर उस संत से मिलने चल पड़ा।

*वहाँ पहुँच कर, सारे शाही भेंटे अर्पण कर के ब्राह्मण के पैर छुए। ऐसे तेजोमय संत के दर्शनों से गद-गद ह्रदय ले के बादशाह अकबर, बीरबल के साथ बाहर आ गया।*

*अकबर बहुत खुश और आश्चर्यचकित था इस "संत" ब्राह्मण के तेज को देखने से।*

*जब अकबर-बीरबल ने मंदिर से बाहर कदम रखा, तब अकबर से बीरबल ने पूछा कि आप इस संत को जानतें है?*

*अकबर ने इनकार कर दिया और फिर बीरबल ने उसे बताया कि वह वो ही भिखारी ब्राह्मण है जिस पर आप कुछ महीने पहले व्यंग कर के कह रहे थे की ये ही "ब्राह्मण देवता" होता है क्या? और आज आप - बादशाह अकबर - इन्हीं के पैरों में शीश नवा कर आयें हैं।*
*अकबर के आश्चर्य की सीमा नहीं रही और उसी आश्चर्य और असंख्य सवालों में डूबते-उतरते मन को सम्हाल कर बीरबल से पूछा कि यह इतना बड़ा बदलाव कैसे हुआ?*

*बीरबल ने कहा कि वह अपने मूल रूप में ब्राह्मण है, बस वह परिस्थितिवश अपने धर्म की सच्चाई, शक्तियों और विभिन्न उपायों से दूर था और वह केवल अपने धर्म के असीमित कोष से, केवलमात्र गायत्री मंत्र स्वरूप एक उपाय-रूप सन्मार्ग पुनः अपना लिया और देखें कि क्या इन ब्राह्मण की आज जगह है और कैसे बादशाह ने खुद को पाया इनके तेजोमय स्वरुप के सन्मुख !!!*

*यही गायत्री प्रभाव है !!!*

*तो यह हम सभी पर भी सामान रूप से अच्छी तरह लागू होता है, जो क्षण जीवन में हम हमारे "उपकरण" से दूर रह कर जी रहे हैं जब तक हम पीड़ित हैं आवश्यकता है की हम भी पुनः अपने धर्म से जुड़ें, अपने संस्कारों को जाने और उनको पूरी तरह माने । मूल ब्रह्म रूप में जो विलीन सो ही ब्राह्मण।*

*ब्राह्मण को सिर्फ शुद्ध ब्राह्मण होने की ज़रुरत है और फिर उसके कोई रास्ते नहीं रूकते।।*

18/03/2018

आप को एवं आप के परिवार को भारतीय नव वर्ष ,चैत्र शुक्ल प्रतिपदा,विक्रम सम्वत 2075 और चैत्र नवरात्र की बहुत बहुत बधाई हो...नव सम्वत आप सभी के लिए अच्छा स्वास्थ्य और खुशियाँ प्रदान करे और माता जी आप सभी को नव शक्ति प्रदान करें...

16/03/2018

💦💦जय माता दी जी💦💦

माता रानी के पावन नवरात्रे 18 मार्च से शुरू हो रहे है। नवरात्रों में माता रानी की सेवा कैसे करे। बड़ी सरल विधि।

18 मार्च 2018
शुभ दिन रविवार

*पहला नवरात्रा*
18 मार्च, रविवार
माँ शैलपुत्री जी का पूजन
सफेद चीजें, या गांय के घी से बनी वस्तुओं को भोग लगाए।

*दूसरा नवरात्रा*
19 मार्च,सोमवार
माँ ब्रम्ह्चारिणी जी का पूजन
मिश्री, चिनी, पँचामरित का भोग लगाएं।

*तीसरा नवरात्रा*
20 मार्च, मंगलवार
माँ चंद्रधणटा जी का पूजन
भोग (दूध और उससे बनी चीजें)

*चौथा नवरात्रा*
21 मार्च, बुधवार,
माँ कुष्मांडा जी का पूजन
भोग खीर और मालपुएँ का भोग

*पाचँवा नवरात्रा*
22 मार्च ,वीरवार,
माँ सकंदमाता जी का पूजन
भोग केले का भोग
पाँच भिखारीयों को केले दान करने से ,शरीर सवचछ होता है.

*छटा नवरात्रा*
23 मार्च ,शुक्रवार
माँ कातयायणी देवी का पूजन
भोग मघु (शहद) का भोग

*सातवां नवरात्र*
23 मार्च, शुक्रवार
माँ कालरात्रि जी का पूजन
भोग (गुड़ और चना)

*माँ भगवती की अष्टमी*
24 मार्च, शनिवार
महागौरी जी का पूजन
माता रानी की कंजक पूजन
भोग हलवा चना और नारियल

*नवमी*
25 मार्च ,रविवार

भगवती मां दुर्गाजी की प्रसन्नता के लिए जो अनुष्ठान किये जाते हैं उनमें दुर्गा सप्तशती का अनुष्ठान विशेष कल्याणकारी माना गया है। इस अनुष्ठान को ही शक्ति साधना भी कहा जाता है।
दुर्गा सप्तशती एक तांत्रिक पुस्तक होने का गौरव भी प्राप्त करती है। भगवती शक्ति एक होकर भी लोक कल्याण के लिए अनेक रूपों को धारण करती है। श्री दुर्गा सप्तशती नारायणावतार श्री व्यासजी द्वारा रचित महा पुराणों में मार्कण्डेयपुराण से ली गयी है। इसम सात सौ पद्यों का समावेश होने के कारण इसे सप्तशती का नाम दिया गया है। तंत्र शास्त्रों में इसका सर्वाधिक महत्व प्रतिपादित है और तांत्रिक प्रक्रियाओं का इसके पाठ में बहुधा उपयोग होता आया है। पूरे दुर्गा सप्तशती में 360 शक्तियों का वर्णन है। इस पुस्तक में तेरह अध्याय हैं। शास्त्रों के अनुसार शक्ति पूजन के साथ भैरव पूजन भी अनिवार्य माना गया है।

श्री दुर्गासप्तशती का अनुष्ठान कैसे करें।

1. कलश स्थापना : कलश स्थापना के लिए मिटटी\स्टील\ताम्बे का घड़ा जल से भरकर, उसमे 7 आम के पत्ते डाल कर उस पर छोटी चुन्नी में नारियल लपेट कर मंदिर में रखे
2. गौरी गणेश पूजन : सबसे पहले गौरी-गणेश जी का पूजन करे, उन्हें तिलक लगाए और अपने श्रद्धाअनुसार पूजन करे
3. कुल देवी का पूजन : उसके बाद अपनी कुल देवी और याद करे और उनका पूजन करे
4.मां दुर्गा जी का पूजन : अब माँ दुर्गा का पूजन करे, तिलक लगाए, चुन्नी पहनाये और ज्योत जगाये

अगर संभव हो सके तो घर में मंदिर में 9 दिन के लिए देसी घी की अखंड ज्योत प्रज्वलित करे! माता रानी की ज्योत घर में जगाने से घर में बरकत आती है और घर का वातावरण शुद्ध हो घर परिवार में सकरात्मक ऊर्जा (पोस्टिव एनर्जी )
आती है !

दुर्गासप्तशती के पाठ में ध्यान देने योग्य कुछ बातें:

1. दुर्गा सप्तशती के किसी भी चरित्र का आधा पाठ ना करें एवं न कोई वाक्य छोड़े।
2. पाठ को मन ही मन में करना निषेध माना गया है। अतः मंद स्वर में समान रूप से पाठ करें।
3. पाठ केवल पुस्तक से करें यदि कंठस्थ हो तो बिना पुस्तक के भी कर सकते हैं।
4. पुस्तक को चौकी पर रख कर पाठ करें। हाथ में ले कर पाठ करने से आधा फल प्राप्त होता है।

नवरात्र के दौरान नौ दिनों तक मॉस, मदिरा, लहसुन, प्याज और तम्बाकू का सेवन नहीं करना चाहिए!
कृपया अपनी व्यस्त जीवन से ९ दिन जरूर इस सेवा को करे ! अपने बचो को ऐसे संस्कार दे की वो आने वाले समय में इस सेवा को निरंतर करे !

सेवा सिर्फ श्रद्धा के साथ नहीं, क्षमता, श्रद्धा और विशवास के साथ करे! माता रानी सबका कल्याण करे!


नवरात्र सबके लिए मंगलमय हो!
जय माँ वैष्णो देवी 💞💞

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*Pitambara Scientific Vastu, Astrology and Healing*

Milind Mishra
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1.Scientific Vastu & Astrology (completely based on your home and cosmic energy)
2. Geopathic stress removal
3. DNA based stone suitability
4. Chakara therapy
5. Aura enhancement
6. Evil eye removal(Nazar dosh)
7. Negative energy removal(tona totka)
8. Evil spirit removal
9. DNA based marriage compatibility
10. Health analysis & distance analysis
11. Career analysis
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13/03/2018

We're going to solve your 1 problem, either it relates to your vastu or astrological problem, completely free.

From 15 March to 20 March, 2018

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A rainbow is a meteorological phenomenon that is caused by reflection, refraction and dispersion of light in water dropl...
25/02/2018

A rainbow is a meteorological phenomenon that is caused by reflection, refraction and dispersion of light in water droplets resulting in a spectrum of light appearing in the sky. Same as Rainbow our body also emits these colors from particular points of our body, these colors perform a specific role in our life, So just study which color emits form which point of our body, and do what effect on our life and personalty

By going upside down referencing image

1. Red color : Color radiated from the base of our spine connects to our senses of groundedness as well as instincts of survival. This Red Color of our body indicates Positive affirmations I AM, I am safe, I am secure, I am grounded, I belongs in this wold, I have all that I need, I am where I need to be, I am at peace with my surroundings, with the people and events that occur, I trust more and fear less.

When off balance it can make us fell low energy, alienated- from ourselfs and others- and easily angered.

2. Orange Color : Color radiated from reproductive area, connects to our feelings, emotions, sexuality & creativity. This Orange color indicates Positive affirmations I FEEL, I acknowledge my uniqueness, I am a sensual and creative being, I attract only whole & nurturing relationships into my life, My senses are alive & connected, I embrace life with passion & feel abundant joy, I am radiantly beautiful, healthy & strong.

When off balance we may feel jealousy, guilt, possessiveness, shame of our body/sexuality.

3. Yellow Color : Color radiated from our navel, connects to our ego, will, personal power and autonomy. This Yellow color indicates positive affirmations I DO, I do enough, I am more than enough, I accept myself and stand confidently in my power, I respect differences and express my identity without imposing my will upon others, I am in harmony with all I see, I live with integrity.

When off balance it can threaten our self confidence, cause depression and confusion.

4. Green Color : Color radiated from the region of the heart, connects us to our emotional self, bringing harmony, forgiveness, sincerity and love. This Green color indicates positive affirmations I LOVE, I love myself, i am being of compassion, I share this love to everyone, I live in balance with grace and gratitude, I release all fears, concerns and worries about giving and receiving love i know forgiveness, I am one.

When off balance it can lead to over-loving, jealousy, abandonment, anger, loneliness and bitterness.

5. Blue Color : Color radiated from the location in the throat region, connects us to our expressive self, reinforcing communication, speech and healing. This Blue color gives positive affirmations I SPEAK, I speak my thoughts clearly, with grace and integrity, i am aligned with my highest truth and communication this with love and honor, I acknowledge the power of my word to create my own reality, I express who I am.

When off balance there may be issues of self-expression, fear of no power or control.

6. Indigo Color : Color radiated from the eyebrows, connects to our cosmic insight. This Indigo Color gives positive affirmations I SEE, I see the truth in all situations, I trust my intuition and inner wisdom and follow them, My life is divinely guided and always taking me in the distraction best for me, I accept my path, I am healing body, mind and spirit.

When off balance there may be moodiness, day-dreaming and distrust.

7. Violet Color : Color Radiated from the top of the head connects us to our higher consciousness. This Violet Color gives positive affirmations I UNDERSTAND, I understand the impermanent nature of reality. I accept and honor the spirit within me and all living things, I embrace the unity of all beings and release all attachment, I invite sacred transformation, I am complete.

When off balance there may be depression, an inability to learn, rigid thoughts on religon, constant confusion and a fear of alienation.

These all Seven colors are emitted from the points which call Chakra(wheel of life) these chakras are also related with our medical issues whenever our chakra get weak or disturbs, emission of color and get off balance and leads to imbalance life and medical issues, we have many techniques to detects deformities of these chakras and heal them.

*There will be new article on Chakras, their medical issues on deformities and how to balance them.

If you want to know about your chakras positions please feel free to contact to us.

*Pitambara Scientific Vastu Astrology and Healing*

*Milind Mishra*

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24/02/2018

A rainbow is a meteorological phenomenon that is caused by reflection, refraction and dispersion of light in water droplets resulti...

"महाशिवरात्रि पर्व पर शिव पूजन का सामान्य का सरल विधान"(उन सभी के लिए जिन्हें confusion है)     "महाशिवरात्रि पर्व "प्रा...
13/02/2018

"महाशिवरात्रि पर्व पर शिव पूजन का सामान्य का सरल विधान"
(उन सभी के लिए जिन्हें confusion है)

"महाशिवरात्रि पर्व "
प्रातः काल स्नान आदि से निवृत हो शुद्ध वस्त्र धारण करें और भगवान शंकर के मंदिर में जा कर उनका जलाभिषेक करें व उनसे प्रार्थना करें कि हे प्रभु हम आपका यह महाशिवरात्रि व्रत करना चाहते हैं आप कृपा करना कि हम इसे ठीक उसी प्रकार कर सके जिससे आपकी प्रसन्नता हमें प्राप्त हो ।हे प्रभु इस व्रत में किसी भी प्रकार का विघ्न न आए ऐसी कृपा आप ही करना ,हे बाबा भोलेनाथ आप जगत के गुरु हो और हम जगत के सबसे अज्ञानी बालक ,हे परमात्मा हमारी अज्ञानता को दूर कर हमें वह ज्ञान प्रदान करना और वह सामर्थ्य प्रदान करना जिससे हम इस व्रत को सही विधि पूर्वक कर सकें🙏

*ओम नमः शिवाय ओम नमः शिवाय ओम नमः शिवाय* 🙏

इसके बाद वहां परिक्रमा लगा घर पर आएं और फिर चाय या दूध कुछ ग्रहण कर सकते हैं जो व्रत में लिया जा सके ऐसी खाद्य सामग्री भी ले सकते हैं। जय सियाराम

🙏चार पहर पूजन विधान(दिनांक 13/2/2018 से 14/2/2018)

🙏 रात्रि सावधानीपूर्वक जागरण करें पूजन

प्रथम पहर का पूजन शाम 7:00 बजे
द्वितीय पहर का पूजन रात 10:00 बजे
तृतीय बिहार का पूजन मध्य रात्रि 1:00 बजे और
चतुर्थ प्रातः 4:00 बजे से पहले पहले हमें करना है।

*" सरल पूजा विधि "*
एक बढ़िया आसन अपने लिए लगाएं और उसके सामने बाजोट पर सफेद वस्त्र लगाकर भगवान शंकर के पवित्रतम स्वरूप पारद शिवलिंग को स्थापित करें और वहां पर एक गंगा जल से भरा हुआ कलश तथा गाय के घी का दीपक स्थापित करें। सर्वप्रथम श्री गणेश जी महाराज से प्रार्थना करें कि वह हमें बुद्धि प्रदान करें और आप हमारे पूजन और व्रत को निर्विघ्नं समाप्त करें ।तदुपरांत भगवान शंकर को स्नान कराएं स्नान कराने हेतु पात्र इतना बड़ा रखें जिसमें स्नान-जल प्रयाप्त ढंग से इकट्ठा हो सके अर्थात नीचे नहीं गिरे। शिवलिंग को उत्तर की तरफ मुंह करके पात्र में स्थापित करें भगवान भोलेनाथ से प्रार्थना करें कि वह आपके अभिषेक को स्वीकार करें ।उसके बाद सर्वप्रथम गंगाजल से फिर दूध से भगवान शंकर को स्नान करवाए और नमः शिवाय मंत्र का जाप करते रहें तदुपरांत दधि से (दही से )भगवान को स्नान कराएं और फिर गंगाजल से शुद्ध स्नान करवाए और नमः शिवाय मंत्र का जाप करते रहें इसी प्रकार शहद फिर गंगाजल फिर शक्कर और फिर गंगाजल से स्नान करवा पंचामृत अर्थात दूध दही घी शहद शक्कर इन सबको मिलाकर स्नान करवाएं और लगातार नमः शिवाय मंत्र का जाप करते रहें उसके बाद भगवान भोले शंकर के इस पावन स्वरूप को अभिसिंचित जल से बाहर निकालकर शुद्ध जल से स्नान कराएं और फिर साफ कपड़े से पोंछकर बाबा भोलेनाथ को उसी आसन पर विराजित करें जहां पर आपने दीपक लगा रखा है। भगवान शंकर का चंदन से तिलक करें और फिर शिवजी को प्रिय वस्तु (जो भी आपके पास उपलब्ध हो जैसे बिल्वपत्र, भांग, धतूरा, प्रसाद .... सभी )अर्पित करें उसके बाद में (ओम जय शिव ओंकारा वाली) आरती करें तथा सबसे अंत में साष्टांग दंडवत करते हुए बाबा भोलेनाथ से प्रार्थना करें कि हे ईश्वर इस पूजन में किसी भी प्रकार की कोई गलती रहे हैं तो हमें अज्ञानी बालक जानकर क्षमा करना और दूसरे पूजन में वह गलती ना हो ऐसा ज्ञान हमें प्रदान करना ।ठीक इसी प्रकार हमें चारों पहर का पूजन करना है और क्षमा याचना भी करनी है 🙏

*🙏विशेष बात🙏*
पूजा होने के बाद अपने आसन के नीचे तीन बार इंद्र भगवान के नाम से जल छोड़ कर ही आसन छोड़े🙏
सारी रात जागरण करें (अगर कर सकते हैं तो)और भगवान भोलेनाथ का कीर्तन गायन करें *ॐ नमः शिवाय* मंत्र का यथायोग्य जाप करें और हो सके तो

श्रीरामचरितमानस के प्रारंभ
में जो भगवान भोलेनाथ के विवाह की कथा है वह पढ़े और अपने साथ बैठे सभी भक्तजनों को भी सुनाएं 🙏🙏🙏🙏🙏
14 फरवरी को प्रातः काल स्नान कर के शुद्ध वस्त्र धारण कर भगवान भोलेनाथ का पुनः जलाभिषेक करें और अपने व्रत का अंतिम पड़ाव अर्थात भोजन प्राप्त करें और प्रभु से प्रार्थना करें यह व्रत मैंने जिस भी विधि से किया प्रभु उसे आप स्वीकार करें मेरा भाव यही है कि आप हम पर प्रसन्न हों और मेरे और मेरे परिवार पर आप अपना कृपा स्वरूपी वरदहस्त हमेशा रखें

व्रत 14 फरवरी का उत्तम है🙏🏻

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ज्योतिष में नाम के पहले अक्षर का महत्व काफी अधिक है। व्यक्ति के जन्म के समय चंद्रमा जिस राशि में होता है, उसी राशि के अन...
09/02/2018

ज्योतिष में नाम के पहले अक्षर का महत्व काफी अधिक है। व्यक्ति के जन्म के समय चंद्रमा जिस राशि में होता है, उसी राशि के अनुसार नाम का पहला अक्षर तय होता है। सभी 12 राशियों के लिए अलग-अलग अक्षर बताए गए हैं। नाम के पहले अक्षर से राशि मालूम होती है और उस राशि के अनुसार व्यक्ति के स्वभाव और भविष्य से जुड़ी कई जानकारी प्राप्त की जा सकती है।
यहां जानिए किस राशि के अंतर्गत कौन-कौन से नाम अक्षर आते हैं, किस राशि के व्यक्ति का स्वभाव कैसा है और किस राशि के लोगों की क्या विशेषता है...

*मेष राशि:– चू , चे, चो, ला, ली, लू , ले, लो, अ, इन अक्षरों से आने वाले नाम मेष राशि में आते हैं।*

1. मेष राशि चक्र की सबसे प्रथम राशि मेष है। जिसके स्वामी मंगल है। धातु संज्ञक यह राशि चर (चलित) स्वभाव की होती है। राशि का प्रतीक मेढ़ा संघर्ष का परिचायक है।
2. मेष राशि वाले आकर्षक होते हैं। इनका स्वभाव कुछ रुखा हो सकता है। दिखने में सुंदर होते है। यह लोग किसी के दबाव में कार्य करना पसंद नहीं करते। इनका चरित्र साफ -सुथरा एवं आदर्शवादी होता है।
3. बहुमुखी प्रतिभा के स्वामी होते हैं। समाज में इनका वर्चस्व होता है एवं मान सम्मान की प्राप्ति होती है।
4. निर्णय लेने में जल्दबाजी करते है तथा जिस कार्य को हाथ में लिया है उसको पूरा किए बिना पीछे नहीं हटते।
5. स्वभाव कभी-कभी विरक्ति का भी रहता है। लालच करना इस राशि के लोगों के स्वभाव मे नहीं होता। दूसरों की मदद करना अच्छा लगता है।
6. कल्पना शक्ति की प्रबलता रहती है, सोचते बहुत ज्यादा हैं।
7. जैसा खुद का स्वभाव है, वैसी ही अपेक्षा दूसरों से करते हैं। इस कारण कई बार धोखा भी खाते हैं।
8. अग्रि तत्व होने के कारण क्रोध अतिशीघ्र आता है। किसी भी चुनौती को स्वीकार करने की प्रवृत्ति होती है।
9. अपमान जल्दी भूलते नहीं, मन में दबा के रखते हैं। मौका पडऩे पर प्रतिशोध लेने से नहीं चूकते।
10. अपनी जिद पर अड़े रहना, यह भी मेष राशि के स्वभाव में पाया जाता है। आपके भीतर एक कलाकार छिपा होता है।
जानिए शेष राशियों की खास बातें...

*वृष राशि:– ई, उ, ए, ओ, वा, वी, वू , वे, वो, इन अक्षरों से आने वाले नाम वृष राशि में आते हैं*

वृषभ राशि
1. इस राशि का चिह्न बैल है। बैल स्वभाव से ही अधिक पारिश्रमी और बहुत अधिक शक्तिशाली होता है, साधारणत: वह शांत रहता है, किन्तु क्रोध आने पर वह उग्र रूप धारण कर लेता है।
2. बैल के समान स्वभाव वृष राशि के जातक में भी पाया जाता है। वृष राशि का स्वामी शुक्र ग्रह है।
3. इसके अन्तर्गत कृत्तिका नक्षत्र के तीन चरण, रोहिणी के चारों चरण और मृगशिरा के प्रथम दो चरण आते हैं।
4. आपके जीवन में पिता-पुत्र का कलह रहता है, जातक का मन सरकारी कार्यों की ओर रहता है। सरकारी ठेकेदारी का कार्य करवाने की योग्यता रहती है।
5. पिता के पास जमीनी काम या जमीन के द्वारा जीविकोपार्जन का साधन होता है। जातक अधिकतर तामसी भोजन में अपनी रुचि दिखाता है।
6. गुरु का प्रभाव जातक में ज्ञान के प्रति अहम भाव को पैदा करने वाला होता है, वह जब भी कोई बात करता है तो स्वाभिमान की बात करता है।
7. सरकारी क्षेत्रों की शिक्षा और उनके काम जातक को अपनी ओर आकर्षित करते हैं।
8. किसी प्रकार से केतु का बल मिल जाता है तो जातक सरकार का मुख्य सचेतक बनने की योग्यता रखता है। मंगल के प्रभाव से जातक के अन्दर मानसिक गर्मी प्रदान करता है।
9. कल-कारखानों, स्वास्थ्य कार्यों और जनता के झगड़े सुलझाने का कार्य जातक कर सकता है, जातक की माता के जीवन में परेशानी ज्यादा होती है।
10. ये अधिक सौन्दर्य प्रेमी और कला प्रिय होते हैं। जातक कला के क्षेत्र में नाम करता है।

*मिथुन राशि:- का, की, कू घ, ड़ ,छ, के को, हा अक्षरों से आने वाले नाम मिथुन राशि मे आते है।*

मिथुन राशि
1. यह राशि चक्र की तीसरी राशि है। राशि का प्रतीक युवा दम्पति है, यह द्वि-स्वभाव वाली राशि है।
2. मृगसिरा नक्षत्र के तीसरे चरण के मालिक मंगल-शुक्र हैं। मंगल शक्ति और शुक्र माया है।
3. व्यक्ति के अन्दर माया के प्रति भावना पाई जाती है, जातक जीवनसाथी के प्रति हमेशा शक्ति बन कर प्रस्तुत होता है। साथ ही, घरेलू कारणों चलते कई बार आपस में तनाव रहता है।
4. मंगल और शुक्र की युति के कारण जातक में स्त्री रोगों को परखने की अद्भुत क्षमता होती है।
5. जातक वाहनों की अच्छी जानकारी रखता है। नए-नए वाहनों और सुख के साधनों के प्रति अत्यधिक आकर्षण होता है। इनका घरेलू साज-सज्जा के प्रति अधिक झुकाव होता है।
6. मंगल के कारण जातक वचनों का पक्का बन जाता है।
7. गुरु आसमान का राजा है तो राहु गुरु का शिष्य, दोनों मिलकर जातक में ईश्वरीय ताकतों को बढ़ाते हैं।
8. इस राशि के लोगों में ब्रह्माण्ड के बारे में पता करने की योग्यता जन्मजात होती है। वह वायुयान और सेटेलाइट के बारे में ज्ञान बढ़ाता है।
9. राहु-शनि के साथ मिलने से जातक के अन्दर शिक्षा और शक्ति उत्पादित होती है। जातक का कार्य शिक्षा स्थानों में या बिजली, पेट्रोल या वाहन वाले कामों की ओर होता है।
10. जातक एक दायरे में रह कर ही कार्य कर पाता है और पूरा जीवन कार्योपरान्त फलदायक रहता है। जातक के अन्दर एक मर्यादा होती है जो उसे धर्म में लीन करती है और जातक सामाजिक और धार्मिक कार्यों में अपने को रत रखता है।

*कर्क राशि:- ही, हू, हे, हो, डा, डी, डू, डे डो इन अक्षरों से आने वाले नाम कर्क राशि मे आते है।*

कर्क राशि
1. राशि चक्र की चौथी राशि कर्क है। इस राशि का चिह्न केकड़ा है। यह चर राशि है।
2. राशि स्वामी चन्द्रमा है। इसके अन्तर्गत पुनर्वसु नक्षत्र का अन्तिम चरण, पुष्य नक्षत्र के चारों चरण तथा अश्लेषा नक्षत्र के चारों चरण आते हैं।
3. कर्क राशि के लोग कल्पनाशील होते हैं। शनि-सूर्य जातक को मानसिक रूप से अस्थिर बनाते हैं और जातक में अहम की भावना बढ़ाते हैं।
4. जिस स्थान पर भी वह कार्य करने की इच्छा करता है, वहां परेशानी ही मिलती है।
5. शनि-बुध दोनों मिलकर जातक को होशियार बना देते हैं। शनि-शुक्र जातक को धन और जायदाद देते हैं।
6. शुक्र उसे सजाने संवारने की कला देता है और शनि अधिक आकर्षण देता है।
7. जातक उपदेशक बन सकता है। बुध गणित की समझ और शनि लिखने का प्रभाव देते हैं। कम्प्यूटर आदि का प्रोग्रामर बनने में जातक को सफलता मिलती है।
8. जातक श्रेष्ठ बुद्धि वाला, जल मार्ग से यात्रा पसंद करने वाला, कामुक, कृतज्ञ, ज्योतिषी, सुगंधित पदार्थों का सेवी और भोगी होता है। वह मातृभक्त होता है।
9. कर्क, केकड़ा जब किसी वस्तु या जीव को अपने पंजों को जकड़ लेता है तो उसे आसानी से नहीं छोड़ता है। उसी तरह जातकों में अपने लोगों तथा विचारों से चिपके रहने की प्रबल भावना होती है।
10. यह भावना उन्हें ग्रहणशील, एकाग्रता और धैर्य के गुण प्रदान करती है।

*सिंह राशि:- मा ,मी, मू ,मो, टा, टी, टू, टे इन अक्षरों से आने वाले नाम सिंह राशि मे आते है।*

सिंह राशि
1. सिंह राशि पूर्व दिशा की द्योतक है। इसका चिह्न शेर है। राशि का स्वामी सूर्य है और इस राशि का तत्व अग्नि है।
2. इसके अन्तर्गत मघा नक्षत्र के चारों चरण, पूर्वा फाल्गुनी के चारों चरण और उत्तराफाल्गुनी का पहला चरण आता है।
3. केतु-मंगल जातक में दिमागी रूप से आवेश पैदा करता है। केतु-शुक्र, जो जातक में सजावट और सुन्दरता के प्रति आकर्षण को बढ़ाता है।
4. केतु-बुध, कल्पना करने और हवाई किले बनाने के लिए सोच पैदा करता है। चंद्र-केतु जातक में कल्पना शक्ति का विकास करता है। शुक्र-सूर्य जातक को स्वाभाविक प्रवृत्तियों की तरफ बढ़ाता है।
5. जातक का सुन्दरता के प्रति मोह होता है और वे कामुकता की ओर भागता है। जातक में अपने प्रति स्वतंत्रता की भावना रहती है और किसी की बात नहीं मानता।
6. जातक, पित्त और वायु विकार से परेशान रहने वाले लोग, रसीली वस्तुओं को पसंद करने वाले होते हैं। कम भोजन करना और खूब घूमना, इनकी आदत होती है।
7. छाती बड़ी होने के कारण इनमें हिम्मत बहुत अधिक होती है और मौका आने पर यह लोग जान पर खेलने से भी नहीं चूकते।
8. जातक जीवन के पहले दौर में सुखी, दूसरे में दुखी और अंतिम अवस्था में पूर्ण सुखी होता है।
9. सिंह राशि वाले जातक हर कार्य शाही ढंग से करते हैं, जैसे सोचना शाही, करना शाही, खाना शाही और रहना शाही।
10. इस राशि वाले लोग जुबान के पक्के होते हैं। जातक जो खाता है वही खाएगा, अन्यथा भूखा रहना पसंद करेगा, वह आदेश देना जानता है, किसी का आदेश उसे सहन नहीं होता है, जिससे प्रेम करेगा, उस मरते दम तक निभाएगा, जीवनसाथी के प्रति अपने को पूर्ण रूप से समर्पित रखेगा, अपने व्यक्तिगत जीवन में किसी का आना इस राशि वाले को कतई पसंद नहीं है।

*कन्या राशि:-टो ,पा,पी, पू, ष, ण, ठ, पे, पो इन अक्षरों से आने वाले नाम कन्या राशि मे आते है।*

कन्या राशि
1. राशि चक्र की छठी कन्या राशि दक्षिण दिशा की द्योतक है। इस राशि का चिह्न हाथ में फूल लिए कन्या है। राशि का स्वामी बुध है। इसके अन्तर्गत उत्तराफाल्गुनी नक्षत्र के दूसरे, तीसरे और चौथे चरण, चित्रा के पहले दो चरण और हस्त नक्षत्र के चारों चरण आते हैं।
2. कन्या राशि के लोग बहुत ज्यादा महत्वाकांक्षी होते हैं। भावुक भी होते हैं और वह दिमाग की अपेक्षा दिल से ज्यादा काम लेते हैं।
3. इस राशि के लोग संकोची, शर्मीले और झिझकने वाले होते हैं।
4. मकान, जमीन और सेवाओं वाले क्षेत्र में इस राशि के जातक कार्य करते हैं।
5. स्वास्थ्य की दृष्टि से फेफड़ों में शीत, पाचनतंत्र एवं आंतों से संबंधी बीमारियां जातकों मे मिलती हैं। इन्हें पेट की बीमारी से प्राय: कष्ट होता है। पैर के रोगों से भी सचेत रहें।
6. बचपन से युवावस्था की अपेक्षा जातकों की वृद्धावस्था अधिक सुखी और ज्यादा स्थिर होता है।
7. इस राशि वाल पुरुषों का शरीर भी स्त्रियों की भांति कोमल होता है। ये नाजुक और ललित कलाओं से प्रेम करने वाले लोग होते हैं।
8. ये अपनी योग्यता के बल पर ही उच्च पद पर पहुंचते हैं। विपरीत परिस्थितियां भी इन्हें डिगा नहीं सकतीं और ये अपनी सूझबूझ, धैर्य, चातुर्य के कारण आगे बढ़ते रहते है।
9. बुध का प्रभाव इनके जीवन मे स्पष्ट झलकता है। अच्छे गुण, विचारपूर्ण जीवन, बुद्धिमत्ता, इस राशि वाले में अवश्य देखने को मिलती है।
10. शिक्षा और जीवन में सफलता के कारण लज्जा और संकोच तो कम हो जाते हैं, परंतु नम्रता तो इनका स्वाभाविक गुण है।

*तुला राशि:- रा , री, रे, रो ,ता, ती, तू, ते इन अक्षरों से आने वाले नाम तुला राशि में आते है।*

तुला राशि
1. तुला राशि का चिह्न तराजू है और यह राशि पश्चिम दिशा की द्योतक है, यह वायुतत्व की राशि है। शुक्र राशि का स्वामी है। इस राशि वालों को कफ की समस्या होती है।
2. इस राशि के पुरुष सुंदर, आकर्षक व्यक्तित्व वाले होते हैं। आंखों में चमक व चेहरे पर प्रसन्नता झलकती है। इनका स्वभाव सम होता है।
3. किसी भी परिस्थिति में विचलित नहीं होते, दूसरों को प्रोत्साहन देना, सहारा देना इनका स्वभाव होता है। ये व्यक्ति कलाकार, सौंदर्योपासक व स्नेहिल होते हैं।
4. ये लोग व्यावहारिक भी होते हैं व इनके मित्र इन्हें पसंद करते हैं।
5. तुला राशि की स्त्रियां मोहक व आकर्षक होती हैं। स्वभाव खुशमिजाज व हंसी खनखनाहट वाली होती हैं। बुद्धि वाले काम करने में अधिक रुचि होती है।
6. घर की साजसज्जा व स्वयं को सुंदर दिखाने का शौक रहता है। कला, गायन आदि गृह कार्य में दक्ष होती हैं। बच्चों से बेहद जुड़ाव रहता है।
7. तुला राशि के बच्चे सीधे, संस्कारी और आज्ञाकारी होते हैं। घर में रहना अधिक पसंद करते हैं। खेलकूद व कला के क्षेत्र में रुचि रखते हैं।
8. तुला राशि के जातक दुबले-पतले, लम्बे व आकर्षक व्यक्तिव वाले होते हैं। जीवन में आदर्शवाद व व्यवहारिकता में पर्याप्त संतुलन रखते हैं।
9. इनकी आवाज विशेष रूप से सौम्य होती हैं। चेहरे पर हमेशा एक मुस्कान छाई रहती है।
10. इन्हें ऐतिहासिक स्थलों की यात्रा करना बहुत भाता है। ये एक अच्छे साथी हैं, चाहें वह वैवाहिक जीवन हो या व्यावसायिक जीवन।

*वृश्चिक राशि:- तो, ना, नी ,नू , ने नो या यी , यु इन अक्षरों से आने वाले नाम वृश्चिक राशि मे आते है।*

वृश्चिक राशि
1. वृश्चिक राशि का चिह्न बिच्छू है और यह राशि उत्तर दिशा की द्योतक है। वृश्चिक राशि जलतत्व की राशि है। इसका स्वामी मंगल है। यह स्थिर राशि है, यह स्त्री राशि है।
2. इस राशि के व्यक्ति उठावदार कद-काठी के होते हैं। यह राशि गुप्त अंगों, उत्सर्जन, तंत्र व स्नायु तंत्र का प्रतिनिधित्व करती है। अत: मंगल की कमजोर स्थिति में इन अंगों के रोग जल्दी होते हैं। ये लोग एलर्जी से भी अक्सर पीडि़त रहते हैं। विशेषकर जब चंद्रमा कमजोर हो।
3. वृश्चिक राशि वालों में दूसरों को आकर्षित करने की अच्छी क्षमता होती है। इस राशि के लोग बहादुर, भावुक होने के साथ-साथ कामुक होते हैं।
4. शरीरिक गठन भी अच्छा होता है। ऐसे व्यक्तियों की शारीरिक संरचना अच्छी तरह से विकसित होती है। इनके कंधे चौड़े होते हैं। इनमें शारीरिक व मानसिक शक्ति प्रचूर मात्रा में होती है।
5. इन्हें बेवकूफ बनाना आसान नहीं होता है, इसलिए कोई इन्हें धोखा नहीं दे सकता। ये हमेशा साफ-सुथरी और सही सलाह देने में विश्वास रखते हैं। कभी-कभी साफगोई विरोध का कारण भी बन सकती है।
6. ये जातक दूसरों के विचारों का विरोध ज्यादा करते हैं, अपने विचारों के पक्ष में कम बोलते हैं और आसानी से सबके साथ घुलते-मिलते नहीं हैं।
7. यह जातक अक्सर विविधता की तलाश में रहते हैं। वृश्चिक राशि से प्रभावित लड़के बहुत कम बोलते होते हैं। ये आसानी से किसी को भी आकर्षित कर सकते हैं। इन्हें दुबली-पतली लड़कियां आकर्षित करती हैं।
8. वृश्चिक वाले एक जिम्मेदार गृहस्थ की भूमिका निभाते हैं। अति महत्वाकांक्षी और जिद्दी होते हैं। अपने रास्ते चलते हैं मगर किसी का हस्तक्षेप पसंद नहीं करते।
9. लोगों की गलतियों और बुरी बातों को खूब याद रखते हैं और समय आने पर उनका उत्तर भी देते हैं। इनकी वाणी कटु और गुस्सा तेज होता है मगर मन साफ होता है। दूसरों में दोष ढूंढने की आदत होती है। जोड़-तोड़ की राजनीति में चतुर होते हैं।
10. इस राशि की लड़कियां तीखे नयन-नक्ष वाली होती हैं। यह ज्यादा सुन्दर न हों तो भी इनमें एक अलग आकर्षण रहता है। इनका बातचीत करने का अपना विशेष अंदाज होता है।

*धनु राशि:– ये, यो, भा, भी, भू , धा, फा, ड़ा, भे, इन अक्षरों से आने वाले नाम धनु राशि में आते है।*

धनु राशि
1. धनु द्वि-स्वभाव वाली राशि है। इस राशि का चिह्न धनुषधारी है। यह राशि दक्षिण दिशा की द्योतक है।
2. धनु राशि वाले काफी खुले विचारों के होते हैं। जीवन के अर्थ को अच्छी तरह समझते हैं।
3. दूसरों के बारे में जानने की कोशिश में हमेशा करते रहते हैं।
4. धनु राशि वालों को रोमांच काफी पसंद होता है। ये निडर व आत्म विश्वासी होते हैं। ये अत्यधिक महत्वाकांक्षी और स्पष्टवादी होते हैं।
5. स्पष्टवादिता के कारण दूसरों की भावनाओं को ठेस पहुंचा देते हैं।
6. इनके अनुसार जो इनके द्वारा परखा हुआ है, वही सत्य है। अत: इनके मित्र कम होते हैं। ये धार्मिक विचारधारा से दूर होते हैं।
7. धनु राशि के लड़के मध्यम कद काठी के होते हैं। इनके बाल भूरे व आंखें बड़ी-बड़ी होती हैं। इनमें धैर्य की कमी होती है।
8. इन्हें मेकअप करने वाली लड़कियां पसंद हैं। इन्हें भूरा और पीला रंग प्रिय होता है।
9. अपनी पढ़ाई और करियर के कारण अपने जीवन साथी और विवाहित जीवन की उपेक्षा कर देते हैं। पत्नी को शिकायत का मौका नहीं देते और घरेलू जीवन का महत्व समझते हैं।
10. धनु राशि की लड़कियां लंबे कदमों से चलने वाली होती हैं। ये आसानी से किसी के साथ दोस्ती नहीं करती हैं।

*मकर राशिः– भो, जा, जी, खी, खू , खे, खो, गा, गी, इन अक्षरों से आने वाले नाम मकर राशि में आते हैं।

मकर राशि
1. मकर राशि का चिह्न मगरमच्छ है। मकर राशि के व्यक्ति अति महत्वाकांक्षी होते हैं। यह सम्मान और सफलता प्राप्त करने के लिए लगातार कार्य कर सकते हैं।
2. इनका शाही स्वभाव व गंभीर व्यक्तित्व होता है। आपको अपने उद्देश्यों की प्राप्ति के लिए बहुत कठिन परिश्रम करना पड़ता है।
3. इन्हें यात्रा करना पसंद है। गंभीर स्वभाव के कारण आसानी से किसी को मित्र नहीं बनाते हैं। इनके मित्र अधिकतर कार्यालय या व्यवसाय से ही संबंधित होते हैं।
4. सामान्यत: इनका मनपसंद रंग भूरा और नीला होता है। कम बोलने वाले, गंभीर और उच्च पदों पर आसीन व्यक्तियों को ज्यादा पसंद करते हैं।
5. ईश्वर व भाग्य में विश्वास करते हैं। दृढ़ पसंद-नापसंद के चलते इनका वैवाहिक जीवन लचीला नहीं होता और जीवनसाथी को आपसे परेशानी महसूस हो सकती है।
6. मकर राशि के लड़के कम बोलने वाले होते हैं। इनके हाथ की पकड़ काफी मजबूत होती है। देखने में सुस्त, लेकिन मानसिक रूप से बहुत चुस्त होते हैं।
7. प्रत्येक कार्य को बहुत योजनाबद्ध ढंग से करते हैं। गहरा नीला या श्वेत रंग प्रधान वस्त्र पहने हुए लड़कियां इन्हें बहुत पसंद आती हैं।
8. आपकी खामोशी आपके साथी को प्रिय होती है। अगर आपका जीवनसाथी आपके व्यवहार को अच्छी तरह समझ लेता है तो आपका जीवन सुखपूर्वक व्यतीत होता है।
9. आप जीवन साथी या मित्रों के सहयोग से उन्नति प्राप्त कर सकते हैं।
10. मकर राशि की लड़कियां लम्बी व दुबली-पतली होती हैं। यह व्यायाम आदि करना पसंद करती हैं। लम्बे कद के बाबजूद आप ऊंची हिल की सैंडिल पहनना पसंद करती हैं।

*कुंभ राशि:– गू , गे, गो, सा, सी, सू , से, सो, दा, इन अक्षरों से आने वाले नाम कुंभ राशि में आते हैं।*

कुंभ राशि
1. राशि चक्र की यह ग्यारहवीं राशि है। कुंभ राशि का चिह्न घड़ा लिए खड़ा हुआ व्यक्ति है। इस राशि का स्वामी भी शनि है। शनि मंद ग्रह है तथा इसका रंग नीला है। इसलिए इस राशि के लोग गंभीरता को पसंद करने वाले होते हैं एवं गंभीरता से ही कार्य करते हैं।
2. कुंभ राशि वाले लोग बुद्धिमान होने के साथ-साथ व्यवहारकुशल होते हैं। जीवन में स्वतंत्रता के पक्षधर होते हैं। प्रकृति से भी असीम प्रेम करते हैं।
3. शीघ्र ही किसी से भी मित्रता स्थपित कर सकते हैं। आप सामाजिक क्रियाकलापों में रुचि रखने वाले होते हैं। इसमें भी साहित्य, कला, संगीत व दान आपको बेहद पसंद होता हैं।
4. इस राशि के लोगों में साहित्य प्रेम भी उच्च कोटि का होता है।
5. आप केवल बुद्धिमान व्यक्तियों के साथ बातचीत पसंद करते हैं। कभी भी आप अपने मित्रों से असमानता का व्यवहार नहीं करते हैं।
6. आपका व्यवहार सभी को आपकी ओर आकर्षित कर लेता है।
7. कुंभ राशि के लड़के दुबले होते हैं। आपका व्यवहार स्नेहपूर्ण होता है। इनकी मुस्कान इन्हें आकर्षक व्यक्तित्व प्रदान करती है।
8. इनकी रुचि स्तरीय खान-पान व पहनावे की ओर रहती है। ये बोलने की अपेक्षा सुनना ज्यादा पसंद करते हैं। इन्हें लोगों से मिलना जुलना अच्छा लगता है।
9. अपने व्यवहार में बहुत ईमानदार रहते हैं, इसलिये अनेक लड़कियां आपकी प्रशंसक होती हैं। आपको कलात्मक अभिरुचि व सौम्य व्यक्तित्व वाली लड़कियां आकर्षित करती हैं।
10. अपनी इच्छाओं को दूसरों पर लादना पसंद नहीं करते हैं और अपने घर परिवार से स्नेह रखते हैं।

*मीन राशि:– दी, दू , थ, झ, ञ, दे, दो, चा, ची इन अक्षरों से आने वाले नाम मीन राशि में आते हैं।*

मीन राशि
1. मीन राशि का चिह्न मछली होता है। मीन राशि वाले मित्रपूर्ण व्यवहार के कारण अपने कार्यालय व आस पड़ोस में अच्छी तरह से जाने जाते हैं।
2. आप कभी अति मैत्रीपूर्ण व्यवहार नहीं करते हैं। बल्कि आपका व्यवहार बहुत नियंत्रित रहता है। ये आसानी से किसी के विचारों को पढ़ सकते हैं।
3. अपनी ओर से उदारतापूर्ण व संवेदनाशील होते हैं और व्यर्थ का दिखावा व चालाकी को बिल्कुल नापसंद करते हैं।
4. एक बार किसी पर भी भरोसा कर लें तो यह हमेशा के लिए होता है, इसीलिये आप आपने मित्रों से अच्छा भावानात्मक संबंध बना लेते हैं।
5. ये सौंदर्य और रोमांस की दुनिया में रहते हैं। कल्पनाशीलता बहुत प्रखर होती है। अधिकतर व्यक्ति लेखन और पाठन के शौकीन होते हैं। आपको नीला, सफेद और लाल रंग-रूप से आकर्षित करते हैं।
6. आपकी स्तरीय रुचि का प्रभाव आपके घर में देखने को मिलता है। आपका घर आपकी जिंदगी में बहुत महत्वपूर्ण स्थान रखता है।
7. अपने धन को बहुत देखभाल कर खर्च करते हैं। आपके अभिन्न मित्र मुश्किल से एक या दो ही होते हैं। जिनसे ये अपने दिल की सभी बातें कह सकते हैं। ये विश्वासघात के अलावा कुछ भी बर्दाश्त कर सकते हैं।
8. मीन राशि के लड़के भावुक हृदय व पनीली आंखों वाले होते हैं। अपनी बात कहने से पहले दो बार सोचते हैं। आप जिंदगी के प्रति काफी लचीला दृटिकोण रखते हैं।
9. अपने कार्य क्षेत्र में अपनी पहचान बनाने के लिये परिश्रम करते हैं। आपको बुद्धिमान और हंसमुख लोग पसंद हैं।
10. आप बहुत संकोचपूर्वक ही किसी से अपनी बाह पाते हैं। एक कोमल व भावुक स्वभाव के व्यक्ति हैं। आप पत्नी के रूप में गृहणी को ही पसंद करते है।

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