Maharishi Dayanand Social Welfare Foundation Jaipur

Maharishi Dayanand Social Welfare Foundation Jaipur Maharishi Dayanand Social Welfare Foundation is working Specially for people below poverty line.. We provide free medicine, Education, and other social a

घर में रहें, सुरक्षित रहें.. जीतेंगे हम और आप , सरकार व प्रशासन का सहयोग करें 🙏
16/05/2021

घर में रहें, सुरक्षित रहें..
जीतेंगे हम और आप , सरकार व प्रशासन का सहयोग करें 🙏

ll  #स्नेह_के_आँसू ll गली से गुजरते हुए सब्जी वाले ने तीसरी मंजिल  की घंटी  का बटन दबाया। ऊपर से बालकनी का दरवाजा खोलकर ...
15/05/2021

ll #स्नेह_के_आँसू ll

गली से गुजरते हुए सब्जी वाले ने तीसरी मंजिल की घंटी का बटन दबाया। ऊपर से बालकनी का दरवाजा खोलकर बाहर आई महिला ने नीचे देखा।

"बीबी जी! सब्जी ले लो। बताओ क्या- क्या तोलना है। कई दिनों से आपने सब्जी नहीं खरीदी मुझसे, कोई और देकर जा रहा है?"
सब्जी वाले ने चिल्लाकर कहा।

"रुको भैया! मैं नीचे आती हूँ।"

उसके बाद महिला घर से नीचे उतर कर आई और सब्जी वाले के पास आकर बोली -
"भैया! तुम हमारी घंटी मत बजाया करो। हमें सब्जी की जरूरत नहीं है।"

"कैसी बात कर रही हैं बीबी जी ! सब्जी खाना तो सेहत के लिए बहुत जरूरी होता है। किसी और से लेती हो क्या सब्जी ?"
सब्जीवाले ने कहा।

"नहीं भैया! उनके पास अब कोई काम नहीं है। और किसी तरह से हम लोग अपने आप को जिंदा रखे हुए हैं। जब सब ठीक होने लग जाएगा, घर में कुछ पैसे आएंगे, तो तुमसे ही सब्जी लिया करूंगी। मैं किसी और से सब्जी नहीं खरीदती हूँ। तुम घंटी बजाते हो तो उन्हें बहुत बुरा लगता है, उन्हें अपनी मजबूरी पर गुस्सा आने लगता है। इसलिए भैया अब तुम हमारी घंटी मत बजाया करो।"
महिला कहकर अपने घर में वापस जाने लगी।

"ओ बहन जी! तनिक रुक जाओ। हम इतने बरस से तुमको सब्जी दे रहे हैं। जब तुम्हारे अच्छे दिन थे, तब तुमने हमसे खूब सब्जी और फल लिए थे। अब अगर थोड़ी-सी परेशानी आ गई है, तो क्या हम तुमको ऐसे ही छोड़ देंगे? सब्जी वाले हैं, कोई नेता जी तो है नहीं कि वादा करके छोड़ दें। रुके रहो दो मिनिट।"

और सब्जी वाले ने एक थैली के अंदर टमाटर , आलू, प्याज, घीया, कद्दू और करेले डालने के बाद धनिया और मिर्च भी उसमें डाल दिया। महिला हैरान थी। उसने तुरंत कहा–

"भैया! तुम मुझे उधार सब्जी दे रहे हो, कम से कम तोल तो लेते, और मुझे पैसे भी बता दो। मैं तुम्हारा हिसाब लिख लूंगी। जब सब ठीक हो जाएगा तो तुम्हें तुम्हारे पैसे वापस कर दूंगी।" महिला ने कहा।

"वाह.... ये क्या बात हुई भला? तोला तो इसलिए नहीं है कि कोई मामा अपने भांजी-भाँजे से पैसे नहीं लेता है। और बहिन! मैं कोई अहसान भी नहीं कर रहा हूँ । ये सब तो यहीं से कमाया है, इसमें तुम्हारा हिस्सा भी है। गुड़िया के लिए ये आम रख रहा हूँ, और भाँजे के लिए मौसमी। बच्चों का खूब ख्याल रखना। ये बीमारी बहुत बुरी है। और आखिरी बात सुन लो .... घंटी तो मैं जब भी आऊँगा, जरूर बजाऊँगा।"
और सब्जी वाले ने मुस्कुराते हुए दोनों थैलियाँ महिला के हाथ में थमा दीं।

अब महिला की आँखें मजबूरी की जगह स्नेह के आंसुओं से भरी हुईं थीं।

(नि:शब्द )

15/05/2021

घर में रहें,सरकार का सहयोग करें 🙏

घर में रहें स्वस्थ रहें सुरक्षित रहें 🙏
15/05/2021

घर में रहें स्वस्थ रहें सुरक्षित रहें 🙏

हाथरस में हुई घटना बेहद निंदनीय है, उसकी जितनी निंदा की जाए उतनी कम है
01/10/2020

हाथरस में हुई घटना बेहद निंदनीय है, उसकी जितनी निंदा की जाए उतनी कम है

30/09/2020

#जीवन_को_कैसे_जिये?

#डिप्रेशन

एक सज्जन जब 50+ के हुए तो ओ डिप्रेशन हो गए ...
तो उनकी पत्नी ने एक काउंसलर का अपॉइंटमेंट लिया जो ज्योतिषी भी थे. कहा कि ये भयंकर डिप्रेशन में हैं, कुंडली भी देखिये इनकी... और बताया कि इन सब के कारण मैं भी ठीक नही हूँ.

ज्योतिषी जी ने कुंडली देखी सब सही पाया.

अब उन्होनें काउंसलिंग शुरू की. फिर कुछ पर्सनल बातें भी पूछीं और सज्जन की पत्नी को बाहर बैठने को कहा.
सज्जन बोलते गए...
बहुत परेशान हूँ...
चिंताओं से दब गया हूँ... नौकरी का प्रेशर...
बच्चों के एजूकेशन और जॉब की टेंशन...
घर का लोन...
कार का लोन...
कुछ मन नही करता...
दुनियाँ तोप समझती है... पर मेरे पास कारतूस जितना भी सामान नही.*
मैं डिप्रेशन में हूँ...
कहते हुये पूरे जीवन की किताब खोल दी.
तब विद्वान काउंसलर ने कुछ सोचा और पूछा.... दसवीं (Class-10) में किस स्कूल में पढ़ते थे?*
सज्जन ने उन्हे स्कूल का नाम बता दिया...
काउंसलर ने कहा आपको उस स्कूल में जाना होगा...
वहाँ से आपकी दसवीं क्लास के सारे रजिस्टर लेकर आना.
सज्जन स्कूल गए... रजिस्टर लाये. काउंसलर ने कहा कि अपने साथियों के नाम लिखो और उन्हें ढूंढो और उनके वर्तमान हालचाल की जानकारी लाने की कोशिश करो. सारी जानकारी को डायरी में लिखना और एक माह बाद मिलना.*
कुल 4 रजिस्टर...
जिसमें 200 नाम थे... और महीना भर दिन रात घूमे...
बमुश्किल अपने 120 सहपाठियों के बारे में जानकारी एकत्रित कर पाए.
आश्चर्य उसमें से 20% लोग मर चुके थे.
7% लड़कियाँ विधवा और 13 तलाकशुदा या सेपरेटेड थीं.
15% नशेडी निकले जो बात करने के भी लायक़ नहीं थे.
20% का पता ही नहीं चला कि अब वो कहाँ हैं.
5% इतने ग़रीब निकले की पूछो मत...
5% इतने अमीर निकले की पूछे नहीं.
कुछ केन्सर ग्रस्त, 6-7% लकवा, डायबिटीज़, अस्थमा या दिल के रोगी निकले, 3-4% का एक्सीडेंट्स में हाथ/पाँव या रीढ़ की हड्डी में चोट से बिस्तर पर थे*
2 से 3% के बच्चे पागल... वेगाबॉण्ड...
या निकम्मे निकले.
1 जेल में था...

और एक 50 की उम्र में सैटल हुआ था इसलिए अब शादी करना चाहता था...
1 अभी भी सैटल नहीं था पर दो तलाक़ के बावजूद तीसरी शादी की फ़िराक़ में था...
महीने भर में...
दसवीं कक्षा के सारे रजिस्टर भाग्य की व्यथा ख़ुद सुना रहे थे...काउंसलर ने पूछा कि अब बताओ डिप्रेशन कैसा है?
इन सज्जन को समझ आ गया कि उसे कोई बीमारी नहीं है... वो भूखा नहीं मर रहा, दिमाग एकदम सही है, कचहरी पुलिस-वकीलों से उसका पाला नही पड़ा... उसके बीवी-बच्चे बहुत अच्छे हैं, स्वस्थ हैं, वो भी स्वस्थ है. डाक्टर अस्पताल से पाला नहीं पड़ा.उन्होंने रियलाइज किया कि दुनियाँ में वाक़ई बहुत दुख: हैं... और मैं बहुत सुखी और भाग्यशाली हूँ...
दो बात तय हुईं आज कि... धीरूभाई अम्बानी बनें या न बनें न सही... और भूखा नहीं मरे... बीमार बिस्तर पर न गुजारें... जेल में दिन न गिनना पड़े तो इस सुंदर जीवन के लिए ऊपर वाले को धन्यवाद देना ही सर्वोत्तमः है.
क्या आपको भी लगता है कि आप डिप्रेशन में हैं ?

अगर जो आप को भी ऐसा लगता है तो आप भी अपने स्कूल जाकर दसवीं कक्षा का रजिस्टर ले आयें..! 😀😀

आप अपनी प्रतिक्रिया कॉमेंट में जरूर दे

03/05/2020
01/04/2020

घर में रहें, सुरक्षित रहें..
जीतेंगे हम और आप , सरकार व प्रशासन का सहयोग करें 🙏

31/03/2020

घर में रहें, सुरक्षित रहें, स्वस्थ रहें...

ये स्टेज क्या होती हैं? मैं *सवेरा टाक, अध्यक्षा महर्षि दयानन्द सोशियल वेलफेयर फाउंडेशन* आपसे निवेदन करती  हुँ, कि इसे प...
23/03/2020

ये स्टेज क्या होती हैं? मैं *सवेरा टाक, अध्यक्षा महर्षि दयानन्द सोशियल वेलफेयर फाउंडेशन*
आपसे निवेदन करती हुँ, कि इसे पूरा पढ़े।

👇🏻

#पहली स्टेज

विदेश से नवांकुर आया। एयरपोर्ट पर उसको बुखार नहीं था। उसको घर जाने दिया गया। पर उससे एयरपोर्ट पर एक शपथ पत्र भरवाया गया कि वह 14 दिन तक अपने घर में कैद रहेगा। और बुखार आदि आने पर इस नम्बर पर सम्पर्क करेगा।
घर जाकर उसने शपथ पत्र की शर्तों का पालन किया।
वह घर में कैद रहा।
यहां तक कि उसने घर के सदस्यों से भी दूरी बनाए रखी।

नवांकुर की मम्मी ने कहा कि अरे तुझे कुछ नहीं हुआ। अलग थलग मत रह। इतने दिन बाद घर का खाना मिलेगा तुझे, आजा किचिन में... मैं गरम गरम् परोस दूं।

नवांकुर ने मना कर दिया।

अगली सुबह मम्मी ने फिर वही बात कही। इस बार नवांकुर को गुस्सा आ गया। उसने मम्मी को चिल्ला दिया। मम्मी की आंख में आंसू झलक आये। मम्मी बुरा मान गयीं।

नवांकुर ने सबसे अलग थलग रहना चालू रखा।

6-7वें दिन नवांकुर को बुखार सर्दी खांसी जैसे लक्षण आने लगे। नवांकुर ने हेल्पलाइन पर फोन लगाया। कोरोना टेस्ट किया गया। वह पॉजिटिव निकला।
उसके घर वालों का भी टेस्ट किया गया। वह सभी नेगेटिव निकले।
पड़ोस की 1 किमी की परिधि में सबसे पूछताछ की गई। ऐसे सब लोगों का टेस्ट भी किया गया। सबने कहा कि नवांकुर को किसी ने घर से बाहर निकलते नही देखा।
चूंकि उसने अपने आप को अच्छे से आइसोलेट किया था इसीलिए उसने किसी और को कोरोना नहीं फैलाया।
नवांकुर जवान था। कोरोना के लक्षण बहुत मामूली थे। बस बुखार सर्दी खांसी बदन दर्द आदि हुआ। 7 दिन के ट्रीटमेंट के बाद वह बिल्कुल ठीक होकर अस्पताल से छुट्टी पाकर घर आ गया।

जो मम्मी कल बुरा मान गईं थीं, वो आज शुक्र मना रहीं हैं कि घर भर को कोरोना नहीं हुआ।

यह पहली स्टेज जहां सिर्फ विदेश से आये आदमी में कोरोना है। उसने किसी दूसरे को यह नहीं दिया।
*******************************

स्टेज 2- #राजू में कोरोना पॉजिटिव निकला।
उससे उसकी पिछले दिनों की सारी जानकारी पूछी गई। उस जानकारी से पता चला कि वह विदेश नहीं गया था। पर वह एक ऐसे व्यक्ति के सम्पर्क में आया है जो हाल ही में विदेश होकर आया है। वह परसों गहने खरीदने के लिए एक ज्वेलर्स पर गया था। वहां के सेठजी हाल ही में विदेश घूमकर लौटे थे।

सेठजी विदेश से घूमकर आये थे।उनको एयरपोर्ट पर बुखार नहीं था। इसी कारण उनको घर जाने दिया गया। पर उनसे शपथ पत्र भरवा लिया गया, कि वह अगले 14 दिन एकदम अकेले रहेंगे और घर से बाहर नहीं निकलेंगे। घर वालों से भी दूर रहेंगे।
विदेश से आये इस गंवार सेठ ने एयरपोर्ट पर भरे गए उस शपथ पत्र की धज्जियां उड़ाईं।
घर में वह सबसे मिला।
शाम को अपनी पसंदीदा सब्जी खाई।
और अगले दिन अपनी ज्वेलेरी दुकान पर जा बैठा। (पागल हो क्या! सीजन का टेम है, लाखों की बिक्री है, ज्वेलर साब अपनी दुकान बंद थोड़े न करेंगे)

6वें दिन ज्वेलर को बुखार आया। उसके घर वालों को भी बुखार आया। घर वालों में बूढ़ी मां भी थी।
सबकी जांच हुई। जांच में सब पॉजिटिव निकले।

यानि विदेश से आया आदमी खुद पॉजिटिव।
फिर उसने घर वालों को भी पॉजिटिव कर दिया।

इसके अलावा वह दुकान में 450 लोगों के सम्पर्क में आया। जैसे नौकर चाकर, ग्राहक आदि।
उनमें से एक ग्राहक राजू था।

सब 450 लोगों का चेकअप हो रहा है। अगर उनमें किसी में पॉजिटिव आया तो भी यह सेकंड स्टेज है।

डर यह है कि इन 450 में से हर आदमी न जाने कहाँ कहाँ गया होगा।

कुल मिलाकर स्टेज 2 यानी कि जिस आदमी में कोरोना पोजिटिव आया है, वह विदेश नहीं गया था। पर वह एक ऐसे व्यक्ति के सम्पर्क में आया है जो हाल ही में विदेश होकर आया है।
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स्टेज 3

#रामसिंग को सर्दी खांसी बुखार की वजह से अस्पताल में भर्ती किया, वहां उसका कोरोना पॉजिटिव आया।
पर रामसिंग न तो कभी विदेश गया था।
न ही वह किसी ऐसे व्यक्ति के सम्पर्क में आया है जो हाल ही में विदेश होकर आया है।

यानि हमें अब वह स्रोत नहीं पता कि रामसिंग को कोरोना आखिर लगा कहाँ से??

स्टेज 1 में आदमी खुद विदेश से आया था।

स्टेज 2 में पता था कि स्रोत सेठजी हैं। हमने सेठजी और उनके सम्पर्क में आये हर आदमी का टेस्ट किया और उनको 14 दिन के लिए अलग थलग कर दिया।

स्टेज 3 में #आपको #स्रोत ही नहीं पता।

स्रोत नहीं पता तो हम स्रोत को पकड़ नहीं सकते। उसको अलग थलग नहीं कर सकते।
वह स्रोत न जाने कहाँ होगा और अनजाने में ही कितने सारे लोगों को इन्फेक्ट कर देगा।

स्टेज 3 #बनेगी कैसे?

सेठजी जिन 450 लोगों के सम्पर्क में आये। जैसे ही सेठजी के पॉजिटिव होने की खबर फैली, तो उनके सभी ग्राहक,नौकर नौकरानी, घर के पड़ोसी, दुकान के पड़ोसी, दूध वाला, बर्तन वाली, चाय वाला....सब अस्पताल को दौड़े।
सब लोग कुल मिलाकर 440 थे।
10 लोग अभी भी नहीं मिले।
पुलिस व स्वास्थ्य विभाग की टीम उनको ढूंढ रही है।
उन 10 में से अगर कोई किसी मंदिर आदि में घुस गया तब तो यह वायरस खूब फैलेगा।
यही स्टेज 3 है जहां आपको स्रोत नहीं पता।

stage 3 का #उपाय
14 दिन का lockdown
कर्फ्यू लगा दो।
शहर को 14 दिन एकदम तालाबंदी कर दो।
किसी को बाहर न निकलने दो।

इस तालाबंदी से क्या होगा??

हर आदमी घर में बंद है।
जो आदमी किसी संक्रमित व्यक्ति के सम्पर्क में नहीं आया है तो वह सुरक्षित है।
जो अज्ञात स्रोत है, वह भी अपने घर में बंद है। जब वह बीमार पड़ेगा, तो वह अस्पताल में पहुंचेगा। और हमें पता चल जाएगा कि अज्ञात स्रोत यही है।

हो सकता है कि इस अज्ञात श्रोत ने अपने घर के 4 लोग और संक्रमित कर दिए हैं, पर बाकी का पूरा शहर बच गया।

अगर LOCKDOWN न होता। तो वह स्रोत पकड़ में नहीं आता। और वह ऐसे हजारों लोगों में कोरोना फैला देता। फिर यह हजार अज्ञात लोग लाखों में इसको फैला देते। इसीलिए lockdown से पूरा शहर बच गया और अज्ञात स्रोत पकड़ में आ गया।

#क्या करें कि स्टेज 2, स्टेज 3 में न बदले।
Early lockdown यानी स्टेज 3 आने से पहले ही तालाबन्दी कर दो।
यह lockdown 14 दिन से कम का होगा।

उदाहरण के लिए
सेठजी एयरपोर्ट से निकले
उनने धज्जियां उड़ाईं।
घर भर को कोरोना दे दिया।
सुबह उठकर दुकान खोलने गए।
(गजब आदमी हो यार! सीजन का टेम है, लाखों की बिक्री है, अपनी दुकान बंद कैसें कर लें)

पर चूंकि तालाबंदी है।
तो पुलिस वाले सेठजी की तरफ डंडा लेकर दौड़े।
डंडा देख सेठजी शटर लटकाकर भागे।

अब चूंकि मार्किट बन्द है।
तो 450 ग्राहक भी नहीं आये।
सभी बच गए।
राजू भी बच गया।
बस सेठजी के परिवार को कोरोना हुआ।
6वें 7वें दिन तक कोरोना के लक्षण आ जाते हैं। विदेश से लौटे लोगों में लक्षण आ जाये तो उनको अस्पताल पहुंचा दिया जायेगा। और नहीं आये तो इसका मतलब वो कोरोना नेगेटिव हैं।
*घर में रहें, सुरक्षित रहें*

*कोरोना वाइरस*-पतले mucous (बलगम) व acidic ph अम्लीयवातावरण में कोरोना वाइरस श्वसन तंत्र के चिपक नहीं पाता है व उस पर अस...
23/03/2020

*कोरोना वाइरस*
-पतले mucous (बलगम) व acidic ph अम्लीयवातावरण में कोरोना वाइरस श्वसन तंत्र के चिपक नहीं पाता है व उस पर असर डालने में कामयाब नहीं हो पाता।
-ठंडा वातावरण इसका सहायक है।
-गर्म वातावरण इसका विरोधी है
-विटामिन सी की प्रचुरता / बाहुल्य बलगम को पतला करती है।
**सलाह - गुनगुना पानी ,नींबू डाल कर हर बीस मिनट में थोड़ा थोड़ा लेते रहें।
-तरल पेय / सूप प्रचुर मात्रा में लें।
-ठंडे पेय आइसक्रीम नहीं लें।

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Kamal Apartment 2, Near Ram Mandir, Banipark Jaipur
Jaipur
302039

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