Adiwasi Tau: Online-Herbalist, Homeopath & Counselor

Adiwasi Tau: Online-Herbalist, Homeopath & Counselor A revolution in Health Care Products & Services. Treatment and care by Tribal herbs and Homeopathic Medicines.

यौन कमजोरी में होम्यापैथी की अद्भुत दवाईSelenium-सेलेनियम:यौवनावस्था में स्त्री-सहवास या हस्त-मैथुनादि कुकर्मों द्वारा व...
27/03/2026

यौन कमजोरी में होम्यापैथी की अद्भुत दवाई

Selenium-सेलेनियम:
यौवनावस्था में स्त्री-सहवास या हस्त-मैथुनादि कुकर्मों द्वारा वीर्यक्षय से उत्पन्न कमजोरी आदि हालातों में जननांगों पर इस औषधि का विशेष प्रभाव है और होम्योपैथी में अति-विहार/सेक्स, अति स्त्री-सहवास तथा अति हस्त-मैथुन आदि कुकर्मों से उत्पन्न होने वाले दोषों में इसका प्रयोग किया जाता है। इस औषधि का प्रमुख लक्षण असामान्य-दुर्बलता है।

रोगी वीर्य-क्षय तथा सेक्स-संबंधी कुकर्मों आदि से इतना कमजोर हो जाता है कि कुछ काम नहीं कर सकता। शारीरिक-दृष्टि से ही वह दुर्बल नहीं हो जाता, मानसिक-कार्य भी वह नहीं कर सकता।

स्टैनम नामक हौयोपैथिक दवाई में भी कमजोरी पायी जाती है, परन्तु वह कमजोरी छाती तक सीमित रहती है, रोगी को छाती में कमजोरी अनुभव होती है।

शारीरिक-कमजोरी सबसे अधिक आर्सेनिक में पायी जाती है, उसमें मानसिक-उत्तेजना बनी रहती है; सेलेनियम के रोगी में तो रोगी शक्तिहीन, नि:सत्व, जीवन-शून्य हो जाता है।

अत्यधिक वीर्य-नाश, अप्राकृतिक या अति-मैथुन आदि से कमजोरी में इससे निश्चय ही लाभ होता है। इन अवस्थाओं में रोगी नपुंसक सा हो जाता है। बैठे-बैठे या पखाने में जोर लगाने पर प्रोस्टेट-ग्लैंड का स्राव/धात निकल पड़ता है।

यह जानकारी जन जागरूकता हेतु है। किसी अनुभवी होम्योपैथ से परामर्श करके ही दवाई का सेवन करना चाहिए।

Adiwasi Tau (27.03.2026)
Online Herbalist, Homeopath, Counselor & Writer
फ्री परामर्श हेतु अपनी समस्या WhatsApp No.: 8561955619 पर लिखें।
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गुप्तांगों के आसपास बार बार दाद और खुजली की समस्यासमस्या का सरल समाधान (Simple Solution):स्वास्थ्य जागरूकता हेतु मैं स्व...
19/03/2026

गुप्तांगों के आसपास बार बार दाद और खुजली की समस्या

समस्या का सरल समाधान (Simple Solution):
स्वास्थ्य जागरूकता हेतु मैं स्वास्थ्य समस्याओं के बारे में जनजागरूकता के लिए लेखन के माध्यम से सार्वजनिक रूप से जानकारी प्रदान करता रहता हूं। इसी क्रम में मुझे एक मरीज ने निम्न समस्या लिखकर भेजी है।

मुझे गुप्तांगों के आसपास बार बार दाद हो जाते हैं। वहां बहुत खुजली होती है। कई बार इतनी खुजली होती है कि हाथ रोकना मुश्किल हो जाता है। खुजाते खुजाते खून तक निकल आता है। अब तो यह आदत सी बन गई है और काम करते समय भी कई बार हाथ चला जाता है, जिससे शर्मिंदगी होती है और लोग टोक भी देते हैं। अंग्रेजी गोली, ट्यूब और मरहम बहुत बार उपयोग कर चुका हूं। जब तक उपयोग करता हूं तब तक आराम रहता है, लेकिन बंद करते ही तकलीफ फिर शुरू हो जाती है। पेट भी ठीक नहीं रहता और मन में टेंशन भी बहुत रहती है।

मरीज की पहचान गोपनीय रखते हुए उसकी स्वास्थ्य समस्याओं को ध्यान में रखकर समाधान निम्नानुसार प्रस्तुत है।

परिचय (Introduction): गुप्तांगों के आसपास बार बार दाद और खुजली होना अधिकतर फंगल संक्रमण, ज्यादा पसीना, जगह पर नमी बने रहना, तंग कपड़े पहनना, बार बार खुजलाना, पेट की गड़बड़ी और तनाव जैसे कारणों से जुड़ा हो सकता है। कई बार बाजार की क्रीमों में Steroid यानी सूजन दबाने वाली दवा मिली होती है, जिससे थोड़े समय आराम मिलता है, लेकिन बाद में समस्या और जिद्दी होकर लौट आती है। बार बार खुजलाने से त्वचा छिल जाती है, खून निकल आता है और संक्रमण बढ़ सकता है।

जीवनशैली सुधार (Lifestyle Support): सबसे पहले प्रभावित जगह को साफ और पूरी तरह सूखा रखना बहुत जरूरी है। नहाने के बाद, पसीना आने के बाद और शौच आदि के बाद उस जगह को हल्के हाथ से साफ करके अच्छी तरह सुखाएं। सूती और ढीला अंडरवियर पहनें। बहुत तंग, गीले या सिंथेटिक कपड़े न पहनें। नाखून से खुजलाने की आदत रोकना जरूरी है, क्योंकि इससे त्वचा और खराब होती है। मीठा, बहुत मसालेदार, बहुत तला हुआ और जंक फूड कम करें। तनाव भी खुजली बढ़ा सकता है, क्योंकि Cortisol यानी तनाव हार्मोन, Stress Hormone बढ़ने पर शरीर की सूजन और खुजली की प्रवृत्ति बढ़ सकती है।

प्रमुख हर्ब्स और उनकी भूमिका (Key Herbs and Their Role):
(1) नीम, Azadirachta indica: Azadirachta indica में ऐसे घटक पाए जाते हैं जो Antifungal यानी फंगस को नियंत्रित करने वाले और Antimicrobial यानी संक्रमण कम करने वाले गुण रखते हैं। बार बार होने वाली दाद, खुजली और दूषित त्वचा स्थिति में यह उपयोगी दिशा दे सकता है।
(2) हल्दी, Curcuma longa: Curcuma longa में Curcumin पाया जाता है, जो Anti inflammatory यानी सूजन कम करने वाला और त्वचा को शांत करने वाला माना जाता है। खुजलाने से बनी लालिमा, जलन और छिली त्वचा में यह सहायक हो सकती है।
(3) गिलोय, Tinospora cordifolia: Tinospora cordifolia शरीर की प्रतिक्रिया प्रणाली को संतुलित करने और बार बार लौटने वाली तकलीफों में सहायक मानी जाती है। जिन लोगों में शरीर जल्दी बिगड़ता और बार बार त्वचा समस्या लौटती है, उनमें यह उपयोगी हो सकती है।
(4) मंजिष्ठा, Rubia cordifolia: Rubia cordifolia त्वचा संबंधी पुरानी समस्याओं में पारंपरिक रूप से उपयोग की जाती है। यह त्वचा की सूजन, खुजली और बार बार बिगड़ने वाली प्रवृत्ति में सहायक मानी जाती है।

देसी जड़ी बूटी समाधान (Herbal Support): आपकी तकलीफ को देखते हुए सामान्य समझ के स्तर पर नीम के पत्तों के पानी से प्रभावित जगह को धोना उपयोगी हो सकता है, लेकिन उसके बाद जगह को पूरा सुखाना बहुत जरूरी है। नीम, गिलोय, हल्दी और मंजिष्ठा जैसी जड़ी बूटियां अंदरूनी और बाहरी दोनों स्तर पर सहायक दिशा दे सकती हैं, पर सही मात्रा, सही रूप और सही अवधि आपकी प्रकृति और तकलीफ की तीव्रता देखकर ही तय होनी चाहिए। गुप्तांगों के पास कोई भी तेज लेप, तेल या गाढ़ा घरेलू मिश्रण बिना समझ के नहीं लगाना चाहिए, क्योंकि वहां की त्वचा बहुत संवेदनशील होती है।

सेवन एवं उपयोग विधि (Intake and Usage Method): लेकिन हर व्यक्ति का शरीर, रोग प्रतिरोधक क्षमता, प्रतिक्रिया प्रणाली, खानपान, जीवनशैली और वंशानुगत इतिहास भिन्न होते हैं। इसलिए उसके लिए खुराक, डोज, शक्ति, सेवन अवधि आदि का निर्धारण करने के लिए उसकी केस हिस्ट्री की जानकारी होना नितांत जरूरी होता है। अत: आप इसके लिए किसी अनुभवी उपचारक से सम्पर्क करें।

कब विशेषज्ञ को दिखाना जरूरी है (When Specialist Consultation Is Necessary): यदि दाद तेजी से फैल रही हो, जगह पर पानी, पस, तेज जलन या बहुत अधिक दर्द हो, बार बार खून निकलता हो, त्वचा काली या मोटी होती जा रही हो, या मरहम छोड़ते ही तकलीफ तुरंत लौट आती हो, तो Dermatologist यानी त्वचा रोग विशेषज्ञ, Skin Specialist को दिखाना जरूरी है। यदि पेट की गड़बड़ी, तनाव और खुजलाने की आदत भी साथ में ज्यादा हो, तो अनुभवी उपचारक और काउंसलर दोनों की सलाह लेना अधिक अच्छा रहेगा।

आपको सुझाई गई दवाइयों का सेवन करने से पहले यह बेहतर होगा कि आप व्यक्तिगत रूप से किसी अनुभवी उपचारक या काउंसलर की सलाह अवश्य लें। मैं आपको इतना विश्वास दिलाना चाहता हूँ कि आप जिन हालातों और तकलीफों से परेशान हैं, इन जैसी ही, बल्कि इनसे भी गंभीर परिस्थितियों में जूझने वाले अनेकों मरीजों को मैंने स्वस्थ होकर सामान्य जीवन जीते हुए देखा है। हाँ आपको अपना आत्मविश्वास बनाए रखने के साथ अपनी जीवनशैली एवं चिंतनशैली में बदलाव लाकर अनुशासित तरीके से औषधियों का सेवन करने के साथ उपचारक और काउंसलर की सलाह का अनुसरण करने की जरूरत होगी।
fans
Adiwasi Tau (19.03.2026, गुरुवार)
Online Herbalist, Homeopath, Counselor and Writer, WhatsApp No.: 85 619 55 619
नोट: उक्त जानकारी या सलाह उपयोगी लगी हो तो जनहित में this जानकारी को अधिकतम लोगों तक साझा किया जाए।

आप मात्र 1010 रु. में डाक खर्चा सहित 2 महीना की दवाई कैसे उपलब्ध करवा देते हैं?    fans
13/03/2026

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अतिबला (Abutilon indicum) औषधीय पौधे की परिचयात्मक जानकारीलेखक: डॉ. पुरुषोत्तम लाल मीणाअतिबला (Abutilon indicum) भारतीय ...
08/03/2026

अतिबला (Abutilon indicum) औषधीय पौधे की परिचयात्मक जानकारी

लेखक: डॉ. पुरुषोत्तम लाल मीणा
अतिबला (Abutilon indicum) भारतीय उपमहाद्वीप में पाई जाने वाली एक प्राचीन औषधीय वनस्पति है, जिसका उल्लेख आयुर्वेद, लोक-चिकित्सा और विभिन्न आदिवासी परंपराओं में लंबे समय से मिलता रहा है। यह पौधा सामान्यतः खेतों के किनारे, खाली भूमि, जंगलों के आसपास तथा ग्रामीण क्षेत्रों में सहज रूप से उगता हुआ दिखाई देता है। जिसका यहां चित्र दिया गया है। अपने कोमल पत्तों, पीले फूलों और औषधीय गुणों के कारण यह पारंपरिक चिकित्सा में एक महत्वपूर्ण स्थान रखता है। आयुर्वेद में इसे मुख्यतः बलवर्धक, शीतल, मूत्रल, सूजन-रोधी और ऊतक-शामक गुणों वाली औषधीय वनस्पति माना गया है।
अतिबला का हिंदी में सबसे प्रचलित नाम अतिबला ही है। कुछ क्षेत्रों में इसे कंघी, पेटारी, पीली झाड़ी, पोटारी या पेटरी जैसे नामों से भी जाना जाता है। पूर्वी राजस्थान में इसे ढेंढसण नाम से भी जाना जाता है। अंग्रेजी में इसे सामान्यतः Indian Mallow (इंडियन मैलो) या Country Mallow (कंट्री मैलो) कहा जाता है।

इस पौधे का वैज्ञानिक या बोटैनीकल नाम Abutilon indicum (एब्यूटिलोन इंडिकम) है और यह Malvaceae (मैल्वेसी) यानी खरैंटी (बला) कुल से संबंधित है, वही कुल जिसमें भिंडी और कपास जैसे पौधे भी आते हैं। यह लगभग 1 से 2 मीटर तक ऊँची झाड़ी के रूप में विकसित होती है। इसके पत्ते मुलायम, हल्के रोएँदार और दिल के आकार के होते हैं, जबकि इसके छोटे पीले फूल इसे आसानी से पहचानने योग्य बनाते हैं।

औषधीय दृष्टि से इस पौधे का लगभग हर भाग उपयोगी माना जाता है, जैसे पत्ते, जड़, बीज, फूल और कभी-कभी पूरा पंचांग भी। इन भागों में विभिन्न प्रकार के जैव सक्रिय तत्व पाए जाते हैं, जिनमें फ्लैवोनॉयड्स, फिनोलिक यौगिक, म्यूसिलेज, अल्कलॉइड्स और कुछ वसायुक्त तत्व शामिल हैं। यही घटक इस पौधे को सूजन-रोधी, दर्द-शामक, श्लेष्मा-संरक्षक और ऊतक-शामक प्रभाव प्रदान करते हैं।

अब यदि उन प्रमुख बीमारियों या स्वास्थ्य समस्याओं की चर्चा करें जिनमें अतिबला का उपयोग पारंपरिक और अनुभवजन्य रूप से लाभकारी माना गया है, तो सबसे पहले सूजन और शोथ का उल्लेख किया जा सकता है। शरीर के किसी भी भाग में सूजन, लालिमा या दर्द होने पर अतिबला के पत्तों का लेप या काढ़ा पारंपरिक रूप से उपयोग किया जाता रहा है। माना जाता है कि इसके सूजन-रोधी गुण प्रभावित ऊतकों को शांत करने और दर्द कम करने में सहायता करते हैं।

दर्द और संधिशूल में भी अतिबला का उपयोग उल्लेखनीय माना गया है। विशेष रूप से मांसपेशियों के दर्द, जोड़ों की जकड़न या वातजन्य पीड़ा में इसके पत्तों या जड़ से तैयार किए गए पारंपरिक औषधीय मिश्रण उपयोग में लाए जाते रहे हैं। लोक-चिकित्सा में इसे दर्द को शांत करने और शरीर की जकड़न को कम करने वाली औषधि माना जाता है।

घाव, फोड़े और त्वचा संबंधी चोटों में भी इस पौधे का उपयोग किया जाता रहा है। पत्तों का लेप घाव वाले स्थान पर लगाने से सूजन कम होने और ऊतकों के भरने में सहायता मिलने का उल्लेख मिलता है। पारंपरिक उपचार में छोटे घावों, फोड़े और त्वचा की हल्की सूजन में इसे सहायक माना जाता है।

मूत्र संबंधी समस्याओं, विशेषकर पेशाब में जलन या मूत्रकृच्छ्र जैसी स्थितियों में भी अतिबला का उपयोग किया जाता रहा है। जड़ या बीज से तैयार काढ़ा मूत्रमार्ग को शीतलता देने और जलन कम करने में सहायक माना जाता है। कई आदिवासी उपचार पद्धतियों में इसे मूत्रल अर्थात पेशाब की मात्रा को सामान्य बनाने वाली वनस्पति माना गया है।

खांसी और श्वसन संबंधी समस्याओं में भी इसका उपयोग मिलता है। पारंपरिक उपचार में अतिबला के बीज या जड़ का उपयोग खांसी, गले की खराश और हल्के ब्रोंकाइटिस जैसी स्थितियों में किया जाता रहा है। यह श्वसन-पथ की जलन को शांत करने और कफ को ढीला करने में सहायक माना जाता है।

बवासीर जैसी समस्या में भी अतिबला का उल्लेख मिलता है। पारंपरिक रूप से इसके पत्तों या बीज का उपयोग कब्ज को कम करने और गुदा-क्षेत्र की सूजन व जलन को शांत करने के लिए किया जाता रहा है। इससे मल त्याग के दौरान होने वाली असुविधा में कुछ राहत मिल सकती है।

कब्ज में इसके बीजों का उपयोग विशेष रूप से उल्लेखनीय माना जाता है। बीजों में मौजूद म्यूसिलेज नामक श्लेष्मीय तत्व मल को मुलायम बनाने और आंतों को चिकनाई प्रदान करने में सहायक माना जाता है। इस कारण हल्की कब्ज की स्थिति में इसे सहायक औषधि के रूप में देखा जाता है।

अल्सर और श्लेष्मा-जलन जैसी स्थितियों में भी अतिबला का उपयोग किया गया है। इसकी श्लेष्मीय प्रकृति आंतरिक ऊतकों को कुछ हद तक संरक्षण देने में सहायक मानी जाती है। पारंपरिक रूप से पेट की जलन, हल्के अल्सर या श्लेष्मीय उत्तेजना में इसका उपयोग किया जाता रहा है।

दस्त और आंत्र संबंधी गड़बड़ियों में भी इस पौधे के पत्तों या अन्य भागों का उपयोग बताया गया है। माना जाता है कि यह आंतों की जलन को शांत करने और पाचन तंत्र को स्थिर करने में कुछ सहायक भूमिका निभा सकता है।
सामान्य कमजोरी और रोग के बाद की दुर्बलता में भी अतिबला का उपयोग किया जाता रहा है। आयुर्वेदिक परंपरा में इसे बल्य अर्थात शरीर को ताकत देने वाली वनस्पति माना गया है। जड़ या बीज के उपयोग से शरीर की थकान और कमजोरी में कुछ सुधार का उल्लेख मिलता है।

कुछ पारंपरिक स्रोतों में मधुमेह, यकृत-विकार, ज्वर और मूत्र में जलन जैसी स्थितियों में भी इसके उपयोग का उल्लेख मिलता है, हालांकि इन स्थितियों में इसका उपयोग प्रायः सहायक स्तर पर माना जाता है, मुख्य उपचार के रूप में नहीं।

दुष्प्रभावों की दृष्टि से उपलब्ध जानकारी के अनुसार सामान्य औषधीय मात्रा में अतिबला अपेक्षाकृत सुरक्षित मानी जाती है। फिर भी किसी भी वनस्पति की तरह अत्यधिक मात्रा में सेवन करने पर कुछ लोगों में हल्की पाचन गड़बड़ी, पेट फूलना या ढीलापन जैसी समस्याएँ हो सकती हैं। बाहरी उपयोग के समय संवेदनशील त्वचा वाले व्यक्तियों में हल्की खुजली या लालिमा भी संभव है।

सावधानियों के रूप में यह ध्यान रखना आवश्यक है कि गर्भावस्था या स्तनपान की अवस्था में इसके नियमित सेवन के बारे में पर्याप्त वैज्ञानिक अध्ययन उपलब्ध नहीं हैं, इसलिए बिना विशेषज्ञ सलाह के इसका प्रयोग उचित नहीं माना जाता। इसी प्रकार यदि किसी व्यक्ति को गंभीर बीमारी, तीव्र संक्रमण, लगातार बुखार, या लंबे समय से चल रही जटिल स्वास्थ्य समस्या हो तो केवल इस वनस्पति पर निर्भर रहना उचित नहीं है। ऐसे मामलों में उचित चिकित्सकीय सलाह आवश्यक होती है।

समग्र रूप से देखा जाए तो अतिबला एक बहुउपयोगी पारंपरिक औषधीय वनस्पति है, जिसका उपयोग मुख्यतः सूजन, दर्द, घाव, मूत्र समस्याओं, खांसी, कब्ज और हल्की पाचन गड़बड़ियों जैसी स्थितियों में सहायक रूप से किया जाता रहा है। इसके कई उपयोग लोक-परंपराओं और आयुर्वेदिक ग्रंथों में वर्णित हैं, जबकि आधुनिक वैज्ञानिक अध्ययन भी इसके कुछ गुणों जैसे सूजन-रोधी, प्रतिऑक्सीकारक और घाव-भराव प्रभावों की पुष्टि की दिशा में संकेत देते हैं।

Adiwasi Tau (08.03.2026)
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08/03/2026

मेरे एक पेशेंट की हेल्थ रिपोर्ट, उसकी निजता को उजागर किए बिना पेश है।

केस हिस्ट्री लेते समय मेरी ओर से बताई गई सभी समस्याओं की सूची में हुए सुधार की जानकारी % में निम्न प्रकार बिंदुवार पेश है।
Note: निम्न में से हर एक बिंदु के सामने % फायदा/सुधार लिखना अनिवार्य है। यदि कोई फायदा न हुआ हो तो बेशक 0 लिख सकते हो और निम्न बिन्दुओं की भाषा में कोई बदलाव नहीं करें।
1. मुझे पिछले लगभग 15 वर्षों से कब्ज ( Chronic Constipation (क्रॉनिक कांस्टीपेशन) यानी लंबे समय से मल का सूखा व कठोर होकर ठीक से न निकलना ) की समस्या है।... 80% फायदा है।
2. मुझे पिछले 15 वर्षों से मलत्याग के बाद भी पेट पूरा साफ न होने की अनुभूति ( Incomplete Evacuation (इनकम्प्लीट इवैक्यूएशन) यानी मल पूरी तरह न निकलने का अहसास ) रहती है।... 100% फायदा है।
3. मुझे पिछले 15 वर्षों से बदबूदार गैस ( Flatulence (फ्लैचुलेंस) यानी दुर्गंधयुक्त गैस का निकलना ) की समस्या है।... 100% फायदा है।
4. मुझे पिछले 5 वर्षों से बदहजमी ( Indigestion (इंडाइजेशन) यानी भोजन का ठीक से न पचना ) रहती है।...80% फायदा है।
5. मुझे पिछले 5 वर्षों से गैस की समस्या ( Gastric Gas (गैस्ट्रिक गैस) यानी पेट में गैस भरना ) रहती है।...50% फायदा है।
6. मुझे पिछले 5 वर्षों से कभी-कभी एसिडिटी ( Acidity (एसिडिटी) यानी पेट में अम्ल अधिक बनना ) होती है।...100 % फायदा है।
7. मुझे पिछले 4 वर्षों से भूख कम लगती है ( Loss of Appetite (लॉस ऑफ एपेटाइट) यानी खाने की इच्छा में कमी )।... 90% फायदा है।
8. मुझे पिछले 4 वर्षों से आलस और काम करने की इच्छा में कमी ( Lethargy (लेथार्जी) यानी शारीरिक-मानसिक सुस्ती ) रहती है।...100 % फायदा है।
9. मुझे पिछले 7 वर्षों से समय से पहले बाल सफेद होने ( Premature Greying (प्रीमेच्योर ग्रेइंग) यानी कम उम्र में बालों का सफेद होना ) की समस्या है।...0 % फायदा है।
10. मुझे पिछले 5 वर्षों से चेहरे पर झाईं/छाया ( Facial Hyperpigmentation (फेशियल हाइपरपिगमेंटेशन) यानी त्वचा पर गहरे धब्बे ) की समस्या है।... 30% फायदा है।
11. मेरी पिछले लगभग 10 वर्षों से गतिहीन जीवनशैली ( Sedentary Lifestyle (सेडेंटरी लाइफस्टाइल) यानी शारीरिक गतिविधि का अभाव ) रही है।...80 % बदलाव किया है।
12. मुझे भावनात्मक स्तर पर लंबे समय से पछतावा ( Regret (रिग्रेट) यानी मन में असंतोष/अधूरापन ) और भावनाएँ भीतर दबाने की प्रवृत्ति ( Emotional Internalization (इमोशनल इंटरनलाइजेशन) यानी भावनाओं को व्यक्त न करना ) है।...80 % फायदा है।

यदि प्रॉपर उपचार लेने वाले सभी पेशेंट हर 15 दिन में उक्त रीति से अपनी हेल्थ रिपोर्ट सही समय पर, नियमित रूप से भेजते रहें तो मुझे उनकी सेवा करने में आसानी होती है और उपचार के परिणाम दूरगामी एवं स्थिर होते हैं। जोहार!

Adiwasi Tau (08.03.2026)
Online Herbalist, Homeopath, Counselor & Writer
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ग्रहण: धर्म ग्रंथों का ज्ञानऔर विज्ञान!
03/03/2026

ग्रहण: धर्म ग्रंथों का ज्ञानऔर विज्ञान!

सभी प्रकार के सफेद पानी (Leucorrhoea) में Care Kit No. 4 से सुधार संभव है या नहीं?मरीज के सवाल का सारांश:  मरीज जानना चा...
03/03/2026

सभी प्रकार के सफेद पानी (Leucorrhoea) में Care Kit No. 4 से सुधार संभव है या नहीं?

मरीज के सवाल का सारांश:
मरीज जानना चाहता है कि Leucorrhoea Care Kit No. 4 से नए या पुराने, अविवाहित या विवाहित सभी प्रकार के सफेद पानी में सुधार संभव है या नहीं।

मेरी ओर से प्राथमिक सलाह:
Leucorrhoea Care Kit No. 4 सामान्यतः सफेद पानी (Leucorrhoea यानी योनि स्राव) के अधिकांश नए या पुराने, अविवाहित या विवाहित सभी प्रकार के मामलों में सहायक सिद्ध होती रही है, क्योंकि लंबे अनुभव के आधार पर इसमें अनुभवसिद्ध हर्ब्स और होम्योपैथिक दवाइयां शामिल की गई हैं, जिनके परिणाम अत्यंत उत्साहवर्धक रहे हैं। इस किट में पारंपरिक भापक यंत्र से निकाले गए देसी जड़ी बूटियों के अर्क भी सम्मिलित हैं, जो अंदरूनी संतुलन सुधारने में सहायक होते हैं। किट में आंतरिक अंगों की सफाई एवं पाचन में सहायक संयोजन भी हैं। फिर भी परिणाम पीड़िता की समस्या के कारण, अवधि और शरीर की प्रकृति पर निर्भर करते हैं। शीघ्र, बेहतर और स्थिर परिणाम हेतु नियमित साफ सफाई, सूती वस्त्र, मीठा-खट्टा कम करें और पर्याप्त विश्राम लें। नियमित दिनचर्या, संतुलित शाकाहारी भोजन, समय पर नाश्ता और रोज आधा घंटा पैदल चलना सहायक होता है।

कृपया पूरक प्रश्न नहीं पूछें, क्योंकि पूरक सवालों के जवाब लिखना व्यावहारिक रूप से संभव नहीं है।

यह समस्या यदि बार बार हो रही है या लंबे समय से बनी हुई है, तो सही कारण जानने और सुरक्षित इलाज के लिए अनुभवी उपचारक से परामर्श आवश्यक है, क्योंकि सही मार्गदर्शन और नियमित देखभाल से इस ही तकलीफ में सुधार और स्थिर राहत संभव है। यदि आप Online Sewa में विश्वास रखते हैं, वाट्सएप पर अपनी समस्या सही से एवं व्यवस्थित रूप से लिखने तथा उत्तर देने में सक्षम हैं और साथ ही वेटिंग लिस्ट क्लीयर होने तक धैर्यपूर्वक प्रतीक्षा कर सकते हैं, तो मुझ से निम्न वाट्सएप पर सम्पर्क किया जा सकता है।

Adiwasi Tau, Contact For Online Sewa, WA No.: 85-619-55-619 (03.03.2026) fans

धूल और मौसम बदलने से होने वाली लगातार छींक और पुरानी एलर्जी पर प्राथमिक सलाहप्रश्न का सार: क्या Allergy Care Combo के से...
02/03/2026

धूल और मौसम बदलने से होने वाली लगातार छींक और पुरानी एलर्जी पर प्राथमिक सलाह

प्रश्न का सार: क्या Allergy Care Combo के सेवन से धूल यानी डस्ट तथा मौसम बदलने पर बार बार छींकें आना, नाक बहना और पुरानी जुकाम जैसी समस्या में सुधार हो सकता है।

उत्तर: ऐसे लक्षण अधिकतर एलर्जी यानी शरीर की जरूरत से अधिक संवेदनशील प्रतिक्रिया के कारण होते हैं, जिसमें धूल, ठंडी हवा या मौसम परिवर्तन पर शरीर तुरंत प्रतिक्रिया देता है और छींक आना, नाक बहना तथा बंद नाक जैसी समस्याएं शुरू हो जाती हैं।

Allergy Care Combo में लंबे समय से परीक्षित अनेकों अनुभवसिद्ध देसी जड़ी बूटियों का पाउडर और परंपरागत भापक यंत्र से निकाला गया अर्क शामिल होने के साथ अनुभवसिद्ध होम्योपैथिक दवाइयां भी सम्मिलित हैं। इस संयुक्त नुस्खे का उद्देश्य शरीर की प्रतिरोधक क्षमता यानी रोगों से लड़ने की शक्ति को संतुलित करना, एलर्जी प्रतिक्रिया को नियंत्रित करना और श्वसन मार्ग यानी सांस की नली को साफ और स्थिर रखना होता है। इसलिए इसे सही तरीके से और नियमित लेने पर धूल या मौसम बदलने से होने वाली बार बार छींकें आना, नाक बहना और पुरानी जुकाम एलर्जी में धीरे धीरे स्थिर और दूरगामी सुधार देखा जा सकता है।

तात्कालिक राहत हेतु: धूल, धुआं और ठंडी हवा से बचकर रहें। सुबह शाम नाक और गले को साफ रखें। गुनगुना पानी पिएं और ठंडी, बासी व तली हुई चीजों से परहेज करें। घर और सोने की जगह को साफ व धूल मुक्त रखें।

जीवनशैली सुधार: नियमित 6–7 घंटे की पर्याप्त और गहरी नींद लें, संतुलित शाकाहारी भोजन करें और हल्की दिनचर्या अपनाएं। इससे शरीर की प्रतिरोधक क्षमता मजबूत होती है और एलर्जी की बार बार होने वाली समस्या कम होती है।

कृपया पूरक प्रश्न नहीं पूछें, क्योंकि पूरक सवालों के जवाब लिखना व्यावहारिक रूप से संभव नहीं है।

यह समस्या यदि बार बार हो रही है या लंबे समय से बनी हुई है, तो सही कारण जानने और सुरक्षित इलाज के लिए अनुभवी उपचारक से परामर्श आवश्यक है, क्योंकि सही मार्गदर्शन और नियमित देखभाल से इस ही तकलीफ में सुधार और स्थिर राहत संभव है। यदि आप Online Sewa में विश्वास रखते हैं, वाट्सएप पर अपनी समस्या सही से एवं व्यवस्थित रूप से लिखने तथा उत्तर देने में सक्षम हैं और साथ ही वेटिंग लिस्ट क्लीयर होने तक धैर्यपूर्वक प्रतीक्षा कर सकते हैं, तो मुझ से निम्न वाट्सएप पर सम्पर्क किया जा सकता है।
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*हाई ब्लड प्रेशर (उच्च रक्तचाप) के कारण, निवारण और हर्बल-होम्योपैथिक मार्गदर्शन**सवाल:* ताऊजी मेरी उम्र 36 वर्ष है। मेरा...
01/03/2026

*हाई ब्लड प्रेशर (उच्च रक्तचाप) के कारण, निवारण और हर्बल-होम्योपैथिक मार्गदर्शन*

*सवाल:* ताऊजी मेरी उम्र 36 वर्ष है। मेरा बीपी हाई रहता है, 98/145 तक, इसका क्या कारण हो सकता है? कारणों के निवारण और हर्बल एवं होम्योपैथिक इलाज का मार्गदर्शन करें।

*मरीज के सवाल का सारांश:*
36 वर्ष की उम्र में बीपी 145/98 तक रहता है। मरीज इसके कारण, कारणों के निवारण और हर्बल व होम्योपैथिक इलाज का मार्गदर्शन चाहता है।

*मेरी ओर से प्राथमिक सलाह:*
उच्च रक्तचाप (यानी नसों में खून का दबाव बढ़ना) के आम कारण तनाव, अधिक नमक, वजन बढ़ना, कम चलना, नींद की कमी और तंबाकू हो सकते हैं। निवारण हेतु नमक और अचार पापड़ कम करें, रोज 30 मिनट तेज चाल से चलें, रात का भोजन हल्का रखें और 7–8 घंटे नींद लें। हर्बल में अर्जुन (यानी हृदय को सहारा देने वाली छाल) और आंवला (यानी विटामिन सी युक्त फल) सहायक माने जाते हैं। होम्योपैथी (यानी शरीर की प्रकृति के अनुसार दी जाने वाली सूक्ष्म औषधि पद्धति) में दवा लक्षण देखकर ही लें।

*कृपया पूरक प्रश्न नहीं पूछें, क्योंकि पूरक सवालों के जवाब लिखना व्यावहारिक रूप से संभव नहीं है।*
यह समस्या यदि बार बार हो रही है या लंबे समय से बनी हुई है, तो सही कारण जानने और सुरक्षित इलाज के लिए अनुभवी उपचारक से परामर्श आवश्यक है, क्योंकि सही मार्गदर्शन और नियमित देखभाल से इस ही तकलीफ में सुधार और स्थिर राहत संभव है। यदि आप Online Sewa में विश्वास रखते हैं, वाट्सएप पर अपनी समस्या सही से एवं व्यवस्थित रूप से लिखने तथा उत्तर देने में सक्षम हैं और साथ ही वेटिंग लिस्ट क्लीयर होने तक धैर्यपूर्वक प्रतीक्षा कर सकते हैं, तो मुझ से निम्न वाट्सएप पर सम्पर्क किया जा सकता है।
*Adiwasi Tau, Contact For Online Sewa, WA No.: 85-619-55-619 (01.03.2026)*

सवाल: क्या Super S*x Power & Stamina Combo के सेवन से असफल होने के डर, लिंग में कमजोर तनाव और शीघ्रपतन की समस्या में सुध...
01/03/2026

सवाल: क्या Super S*x Power & Stamina Combo के सेवन से असफल होने के डर, लिंग में कमजोर तनाव और शीघ्रपतन की समस्या में सुधार होगा?

आपके प्रश्न का सार: क्या Super S*x Power & Stamina Combo के सेवन से सेक्स में असफल होने का डर, लिंग में कमजोर कड़ापन यानी पर्याप्त तनाव न बन पाना और शीघ्रपतन यानी जल्दी वीर्य निकल जाने की समस्या में सुधार हो सकता है।

उत्तर: सबसे पहले यह समझना होगा कि ऐसे लक्षण आमतौर पर दो कारणों से जुड़े होते हैं—एक मानसिक कारण जैसे डर, घबराहट, प्रदर्शन का दबाव, और दूसरा शारीरिक कारण जैसे शरीर की कमजोरी, रक्त संचार यानी खून का सही प्रवाह कम होना और नसों व मांसपेशियों की कमजोरी। जब ये दोनों कारण साथ होते हैं, तब समस्या ज्यादा महसूस होती है।

Super S*x Power & Stamina Combo जैसे संयुक्त नुस्खे का उद्देश्य शरीर को ताकत देना, रक्त संचार को बेहतर करना और मन की घबराहट को कम करना होता है, इसलिए नियमित और सही तरीके से Super S*x Power & Stamina Combo का सेवन करने पर असफलता का डर धीरे धीरे कम हो सकता है, लिंग में कड़ापन यानी पर्याप्त तनाव बनने में सहायता मिल सकती है और शीघ्रपतन की प्रवृत्ति में भी सुधार देखा जा सकता है।

तात्कालिक रूप से आपको यह ध्यान रखना चाहिए कि जल्दबाजी, डर या बार बार खुद को जांचना यानी ओवर थिंकिंग यानी अधिक सोचने की आदत समस्या को बढ़ाती है, इसलिए शांत मन से, बिना दबाव के और पर्याप्त विश्राम के साथ संबंध बनाना अधिक सहायक रहता है।

जीवनशैली में सुधार जैसे पर्याप्त नींद, संतुलित शाकाहारी भोजन, हल्की नियमित शारीरिक गतिविधि और नशे से दूर रहना भी बहुत जरूरी है, क्योंकि यही शरीर और मन दोनों को स्थिर करते हैं।

यह समस्या यदि बार बार हो रही है या लंबे समय से बनी हुई है, तो सही कारण जानने और सुरक्षित इलाज के लिए अनुभवी उपचारक से परामर्श आवश्यक है, क्योंकि सही मार्गदर्शन, काउंसलिंग और नियमित देखभाल से इस ही तकलीफ में सुधार और स्थिर राहत संभव है। यदि आप Online Sewa में विश्वास रखते हैं, वाट्सएप पर अपनी समस्या सही से एवं व्यवस्थित रूप से लिखने तथा उत्तर देने में सक्षम हैं और साथ ही वेटिंग लिस्ट क्लीयर होने तक धैर्यपूर्वक प्रतीक्षा कर सकते हैं, तो मुझ से निम्न वाट्सएप पर सम्पर्क किया जा सकता है।
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दाद (त्वचा पर फंगल संक्रमण) के कारण और प्राथमिक देसी देखभालमरीज के सवाल का सारांश:मरीज जानना चाहता है कि दाद क्यों होते ...
28/02/2026

दाद (त्वचा पर फंगल संक्रमण) के कारण और प्राथमिक देसी देखभाल

मरीज के सवाल का सारांश:
मरीज जानना चाहता है कि दाद क्यों होते हैं और इसका देसी इलाज क्या है।

मेरी ओर से प्राथमिक सलाह:
दाद प्रायः फंगल संक्रमण (यानी त्वचा पर फफूंद का फैलना) से होते हैं, जो अधिक पसीना, नमी, गंदे कपड़े और शरीर की कमजोर रोग प्रतिरोधक क्षमता (यानी शरीर की बीमारी से लड़ने की ताकत कम होना) से बढ़ते हैं। प्रभावित जगह को सूखा रखें, ढीले सूती कपड़े पहनें, नीम पानी से धोना लाभकारी हो सकता है। खुजली में खुजलाने से बचें और तौलिया कपड़े अलग रखें।

कृपया पूरक प्रश्न नहीं पूछें, क्योंकि पूरक सवालों के जवाब लिखना व्यावहारिक रूप से संभव नहीं है।

यह समस्या यदि बार बार हो रही है या लंबे समय से बनी हुई है, तो सही कारण जानने और सुरक्षित इलाज के लिए अनुभवी उपचारक से परामर्श आवश्यक है, क्योंकि सही मार्गदर्शन और नियमित देखभाल से इस ही तकलीफ में सुधार और स्थिर राहत संभव है। यदि you Online Sewa में विश्वास रखते हैं, वाट्सएप पर अपनी समस्या सही से एवं व्यवस्थित रूप से लिखने तथा उत्तर देने में सक्षम हैं और साथ ही वेटिंग लिस्ट क्लीयर होने तक धैर्यपूर्वक प्रतीक्षा कर सकते हैं, तो मुझ से निम्न वाट्सएप पर सम्पर्क किया जा सकता है।
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बवासीर-Hemorrhoids-Piles-शर्म-संकोच के कारण समय पर उपचार न लेने से खतरा बढ़ सकता है!    fans  Health Care Friend Adiwasi...
28/02/2026

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