Dr.Dinesh Choudhary

Dr.Dinesh Choudhary Dr.Dinesh Khichar (MBBS,MD)
Medical jurist
+918890470120

07/05/2026

07/05/2026
05/05/2026

अभिमान कहता है कि किसी की जरूरत नहीं ,
अनुभव कहता है कि धूल की भी जरूरत पड़ेगी..

03/05/2026

शोर बनाम सच — एक मेडिकल केस की असली कहानी

आजकल एक खतरनाक ट्रेंड बढ़ रहा है—आधी जानकारी, पूरा गुस्सा।
और इसका सबसे बड़ा नुकसान उन लोगों को होता है जो सच में जान बचाने की कोशिश कर रहे होते हैं।

हाल ही में एक गंभीर केस सामने आया—
दो मरीज अस्पताल लाए गए, दोनों के सिर पर गंभीर चोट (severe head injury) थी। हालत इतनी नाजुक थी कि तुरंत ICU और न्यूरोसर्जरी टीम को एक्टिव किया गया।

🧠 क्या हुआ था मेडिकल तौर पर?
मरीजों को severe traumatic brain injury था—दिमाग में सूजन (brain swelling) तेजी से बढ़ रही थी। ऐसी स्थिति में जान बचाने के लिए एक इमरजेंसी सर्जरी की जाती है, जिसे कहते हैं:

👉 Decompressive Craniectomy

इस प्रक्रिया में:

- खोपड़ी (skull) का एक हिस्सा अस्थायी रूप से हटाया जाता है
- ताकि सूजे हुए दिमाग को फैलने की जगह मिले
- और दिमाग पर दबाव (intracranial pressure) कम हो सके

🫀 लेकिन हटाया हुआ हिस्सा जाता कहाँ है?
यहीं से सबसे बड़ी गलतफहमी शुरू होती है…

👉 उस हड्डी के टुकड़े को पेट की त्वचा के नीचे (abdominal wall) सुरक्षित रखा जाता है
ताकि:

- वह जीवित (viable) बना रहे
- संक्रमण से सुरक्षित रहे
- और बाद में दोबारा सिर में लगाया जा सके

⚠️ यह कोई चोरी या अंग निकालना नहीं है—
यह एक standard, life-saving neurosurgical practice है।

लेकिन…

❌ बिना समझे कुछ लोगों ने कहा—
“पेट क्यों खोला?”
“अंदर से कुछ निकाल लिया गया!”

और फिर…
शुरू हुआ अफवाहों का तूफान, भीड़ का गुस्सा, और सच्चाई पर हमला।

🏥 अस्पताल पर आरोप लगे
🚨 तोड़फोड़ हुई
📢 बिना सबूत के फैसले सुना दिए गए

सबसे दुखद बात—
कई पढ़े-लिखे लोग भी इस भीड़ का हिस्सा बन गए।

---

याद रखिए:

✔ हर सर्जरी दिखने में अजीब लग सकती है, पर उसके पीछे विज्ञान होता है
✔ हर अफवाह सच नहीं होती
✔ और हर शोर के पीछे सच्चाई नहीं होती

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सवाल आपसे है:
क्या हम पहले समझते हैं…
या सीधे भीड़ का हिस्सा बन जाते हैं?

✍️ Comment में बताइए — आप सच के साथ हैं या शोर के साथ?

25/04/2026

*अब खुद ही गिर जाओ तुम, टूट कर जमीं पर ।*
*पत्थर मारने वाला बचपन, मोबाइल मे व्यस्त है।।*

*अच्छी थी, पगडंडी अपनी।*
*सड़कों पर तो, जाम बहुत है।।*

*फुर्र हो गई फुर्सत, अब तो।*
*सबके पास, काम बहुत है।।*

*नहीं जरूरत, बूढ़ों की अब।*
*हर बच्चा, बुद्धिमान बहुत है।।*

*उजड़ गए, सब बाग बगीचे।*
*दो गमलों में, शान बहुत है।।*

*मट्ठा, दही, नहीं खाते हैं।*
*कहते हैं, ज़ुकाम बहुत है।।*

*पीते हैं, जब चाय, तब कहीं।*
*कहते हैं, आराम बहुत है।।*

*बंद हो गई, चिट्ठी, पत्री।*
*व्हाट्सएप पर, पैगाम बहुत है।।*

*आदी हैं, ए.सी. के इतने।*
*कहते बाहर, गर्मी बहुत है।।*

*झुके-झुके, स्कूली बच्चे।*
*बस्तों में, सामान बहुत है।।*

*नही बचे, कोई सम्बन्धी।*
*अकड़,ऐंठ,अहसान बहुत है।!*

*सुविधाओं का, ढेर लगा है।*
*पर इंसान, परेशान बहुत है।।*

कितने अजब रंग समेटे है,यह बेमौसम बारिश खुद में।शहर पकोड़े खाने की सोच रहा है, ओर किसान ??।
07/04/2026

कितने अजब रंग समेटे है,यह बेमौसम बारिश खुद में।
शहर पकोड़े खाने की सोच रहा है, ओर किसान ??।

🙏🙏
01/04/2026

🙏🙏

24/03/2026

जब आप डॉक्टर के पास जाते हैं तो अपनी बात इस तरह से रखेंगे तो आपका लाभ होगा । ✅
डॉक्टर को बात बेहतर समझ आयेगी, निदान और इलाज सटीक होगा ।

- सबसे पहले जाकर आराम से बैठें। जल्दी में घुसते ही खड़े खड़े ही अपनी दिक्कत बताना शुरू ना करें ।
- आपकी जो मुख्य तकलीफ़ है वो सबसे पहले बतायें । जिसके लिए आप डॉक्टर के पास आये हैं और उसका विवरण ठीक से दें ।
जैसे की सांस फूलती है ।
कब से फूलती है, बैठे बैठे फूलती है या चलने पर फूलती है। डॉक्टर अपने आप आगे के सवाल पूछेगा उसके बारे में वो जितना हो सके सही जवाब देने की कोशिश करें ।
कम ज़रूरी तकलीफ़ें जैसे नींद नहीं आती , लैट्रिन नहीं आती ये सब आख़िरी में बतायें , शुरुआत इससे ना करें ।

- दूसरा कदम है अपनी कोई पुरानी बीमारी है जैसे शुगर , बीपी , थाइरोइड , पुरानी कोई भी लंबी बीमारी या इलाज चला हो , वो बतायें।
- सबसे आखिरी कदम होता है ( जो की आप लोग घुसते ही सबसे पहले करते हैं , और वहीं सब गड़बड़ हो जाती है ) - अपनी रिपोर्ट्स दिखाना , पहले जिस भी डॉक्टर को दिखाया है अगर तो उनके पर्चे दिखाना , उन्होंने क्या बताया वो बताना ।

अगर आप इस क्रम में चलेंगे तो आप की बीमारी की diagnosis बेहतर और जल्दी होगी , कम जाँचों की ज़रूरत पड़ेगी , और इलाज भी बेहतर हो पाएगा।

जो लोग ऐसी बातें करते हैं उनका इलाज कभी भी ठीक से नहीं हो पता - जिनसे पूछो हांजी क्या तकलीफ़ है आपको ? और जवाब आता है ये पर्चे हैं, रिपोर्ट्स हैं देख लो क्या तकलीफ़ है ।

09/03/2026

फारवर्ड:
*डॉक्टर लोग इतने लापरवाह क्यों है भाई ...*

1. एक आदमी केवल 20 वर्षों तक तंबाकू खाता रहा। फिर उसे स्टेज 4 का कैंसर हो गया अस्पताल में भर्ती होने पर डॉक्टरों की लापरवाही से मर गया।

2. एक आदमी 30 वर्षों तक रोज शराब पीता रहा, फिर उसका लीवर व पेनक्रियाज खराब हो गए। लेकिन अस्पताल में भर्ती होने पर डॉक्टरों की लापरवाही से मर गया।

3. एक लड़का प्लेन की स्पीड से मोटरसाइकिल चला रहा था,नियंत्रण खत्म होने पर मोटरसाइकिल पेड़ से टकराई ।गंभीर हालत में उसे अस्पताल में भर्ती किया गया किंतु अस्पताल वालों की लापरवाही से वह भी मर गया।

4. एक आदमी को केवल पांच बीमारियां थी शुगर,ब्लड प्रेशर,ओबेसिटी,हाई कोलेस्ट्रॉल,कोरोनरी आर्टरी डिजीज, किंतु हार्ट अटैक आने पर उसे जब अस्पताल में भर्ती किया गया तो वह भी डॉक्टरों की लापरवाही से मर गया।

5. एक आदमी को 30 वर्षों से हाई ब्लड प्रेशर था। दवाई से थोड़ी नफरत सी थी उसे कभी खाता कभी नहीं। एक दिन उसे लकवा हो गया फिर अस्पताल में भर्ती करवाने पर वह भी डॉक्टर की लापरवाही से मर गया।

6. एक आदमी 6 करोड़ की गड्ढे वाली सड़क पर गिर गया उसे हेड इंजरी हो गई,फिर अस्पताल में भर्ती करने पर वह भी डॉक्टरों की लापरवाही से मर गया।

7. एक आदमी छठी मंजिल से नीचे गिर गया।बेचारा दारू पीकर डीजे पर डांस कर रहा था अस्पताल में भर्ती होने पर वह भी डॉक्टरों की लापरवाही से मर गया।

8. एक आदमी मोब लिंचिंग का शिकार होने पर अस्पताल में भर्ती हुआ वह भी डॉक्टरों की लापरवाही से मर गया।

9. एक आदमी जमीन विवाद में दूसरे पक्ष के द्वारा की गई गोलीबारी में गंभीर रूप से घायल हो गया।फिर वह भी अस्पताल में भर्ती करने पर डॉक्टरों की लापरवाही से मर गया।

10. जब एक आदमी जहर खाकर भी नहीं मरा तो उसे अस्पताल में भर्ती करवाना पड़ा और फिर वह भी डॉक्टरों की लापरवाही से मर गया।

चूंकि लाखों लोगों की मृत्यु डॉक्टरों की लापरवाही से हो रही है। ऐसी स्थिति में सरकार को चाहिए कि इलाज का कार्य डॉक्टर से ना करवाया जाए और तुरंत इलाज का जिम्मा नेताओं, जजों, आईएएस अधिकारियों, मीडिया कर्मियों को सौंप दिया जाए....😂🙏

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