मॉ वैष्णों ज्योतिष अनुसंधान केन्द्र

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Happy New Year To All Of You
01/01/2018

Happy New Year To All Of You

मैं मेडिकल फील्ड से हूँ और मैंने अभी एम् अस सी किया है । मेरे पास अब दो चॉइस है , मैं यदि टीचिंग करता हूँ तो मैं गवर्नमे...
24/12/2017

मैं मेडिकल फील्ड से हूँ और मैंने अभी एम् अस सी किया है । मेरे पास अब दो चॉइस है , मैं यदि टीचिंग करता हूँ तो मैं गवर्नमेंट जॉब के लिए तैयारी कर सकता हूँ या किसी हॉस्पिटल में काम कर सकता हूँ जहा मैं गवर्नमेंट जॉब की तैयारी नहीं कर सकता लेकिन कुछ टाइम बाद मेरी सैलरी अच्छी हो जाएगी जबकि टीचिंग में ऐसा नहीं है, वहा सैलरी नहीं बाद सकती केवल गवर्नमेंट जॉब की तैयारी कर सकता हूँ । आप बताने की कृपा करे कि मुझे कौनसी जॉब करनी चाहिए ?

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प्रश्न - मेरा फाइनेंस मतलब लोन दिलवाने का काम है, काफी दिनों से क्लाइंट्स नहीं आ रहे है और काम बिलकुल बंद सा पड़ा है । मु...
10/12/2017

प्रश्न - मेरा फाइनेंस मतलब लोन दिलवाने का काम है, काफी दिनों से क्लाइंट्स नहीं आ रहे है और काम बिलकुल बंद सा पड़ा है । मुझे लगता है कि किसी ने मेरे व्यापार पर कुछ करा दिया है जिससे क्लाइंट्स नहीं आ पा रहे है क्या करना चाहिए ? आप बताने की कृपा करे ।

उतर - किसी ने कुछ नहीं कराया है। १-२ महीनो में सब ठीक हो जायेगा थोडा दशा का फेर है बस ।

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19/11/2017

मैं परेशन हूँ, काफी दिनों से नोकरी तलाश कर रहा हूँ लेकिन कोई नौकरी नहीं लग रही है ? आप बताइए कि कब तक नौकरी लग जाएगी ? सरकारी या प्राइवेट ?
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मैं परेशन हूँ, मैं जनाना चाहता हूँ कि क्या मैं मांगलिक हूँ?क्या मैं मांगलिक दोष से पीड़ित हूँ ? क्या मांगलिक दोष का मेरे ...
19/11/2017

मैं परेशन हूँ, मैं जनाना चाहता हूँ कि क्या मैं मांगलिक हूँ?
क्या मैं मांगलिक दोष से पीड़ित हूँ ?
क्या मांगलिक दोष का मेरे वैवाहिक जीवन पर प्रभाव पड़ेगा ?
क्या मुझे किसी इसे व्यक्ति से ही विवाह करना चाहिए जो मांगलिक हो ?
मेरा परिवार मेरे विवाह के लिए बहुत कोशिश कर रहा है फिर भी मेरा विवाह क्यों नहीं हो रहा है ?

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11/11/2017

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राहु काल.... शुभ कार्यों में विशेष रुप से त्याज्यराहु-काल का महत्व... राहु-काल व्यक्ति को सावधान करता है कि यह समय अच्छा...
02/09/2017

राहु काल.... शुभ कार्यों में विशेष रुप से त्याज्य

राहु-काल का महत्व...

राहु-काल व्यक्ति को सावधान करता है कि यह समय अच्छा नहीं है, इस समय में किये गये कार्यो के निष्फल होने की संभावना है I इसलिये, इस समय में कोई भी शुभ काम नहीं किया जाना चाहिए I कुछ लोगों का तो यहां तक मानना है कि इसमें किये गये कार्य में अनिष्ट होने की संभावना रहती है I

यह सप्ताह के सातों दिन निश्चित समय पर लगभग डेढ़ घण्टे तक रहता है I इसे अशुभ समय के रुप मे देखा जाता है I इसी कारण राहु काल की अवधि में शुभ कर्मो को यथा संभव टालने की सलाह दी जाती है I राहु काल अलग-अलग स्थानों के लिये अलग-अलग होता है I इसका कारण यह है कि सूर्य के उदय होने का समय विभिन्न स्थानों के अनुसार अलग होता है I इसे सूर्य के उदय व अस्त के समय के बीच के समय अर्थात दिनमान को निश्चित आठ भागों में बांटने से ज्ञात किया जाता है I

सप्ताह के पहले दिन के पहले भाग में कोई राहु काल नहीं होता है I यह सोमवार को दूसरे भाग में, शनि को तीसरे, शुक्र को चौथे, बुध को पांचवे, गुरुवार को छठे, मंगल को सांतवे तथा रविवार को आंठवे भाग में होता है I यह प्रत्येक सप्ताह के लिये स्थिर है, राहु काल को राहु-कालम् नाम से भी जाना जाता है I

राहु काल के समय में किसी नये काम को शुरु नहीं किया जाता है परन्तु जो काम इस समय से पहले शुरु हो चुका है उसे राहु-काल के समय में बीच में नहीं छोडा जाता है I कोई व्यक्ति अगर किसी शुभ काम को इस समय में करता है तो यह माना जाता है कि उस व्यक्ति को किये गये काम का शुभ फल नहीं मिलता है I उस व्यक्ति की मनोकामना पूरी नहीं होगी I

।।। जय माता दी ।।।

31/08/2017

।। कुण्डली में व्यवसाय और धन की स्थिति ।।

जिन्दगी की गाड़ी को चलाने के लिए रोजगार की जरूरत सभी को होती है। रोजगार का चुनाव सही होता है तो व्यक्ति को कम परेशानी में जल्दी सफलता मिलती है। रोजगार की तलाश में ज्योतिष विज्ञान आपके लिए किस प्रकार सहायक हो सकता है आइये देखें।
व्यापार अथवा नौकरी
जब आप कैरियर के विषय में निर्णय लेते हैं , उस समय अक्सर मन में सवाल उठता है कि व्यापार करना चाहिए अथवा नौकरी। ज्योतिष विज्ञान के अनुसार अगर कुण्डली में द्वितीय, पंचम, नवम, दशम और एकादश भाव और उन में स्थित ग्रह कमजोर हैं तो आपको नौकरी करनी पड़ सकती है। इन भावों में अगर ग्रह मजबबूत हैं तो आप व्यापार सकते हें।
।।जय माता दी।।

29/08/2017

उदय+अस्त+वक्री ग्रह एवं
उनकी अवस्थायों का प्रभाव
===================================
कोई भी ग्रह कितने ही अंशों का क्यूँ
न हो लेकिन प्रत्येक ग्रहों के ३०-००-०० अंश होते हैं.और
इन्ही से ग्रहों की उदय-अस्त-
वक्री तथा अवस्थाओं का ज्ञान होता है.
अवस्थाओं में ३-९ अंशों के बीच ग्रह बालक
होता है.९-१५ के बीच अंशों के ग्रह कुमार
की श्रेणी में आते हैं. १५-२१ अंशों के
ग्रह युवा कहलाते हैं.२१-२७ के बीच में ग्रह
वृद्ध हो जाते हैं तथा २७-०३ के अंशों में ग्रह मृत्यु को प्राप्त
होते हैं.अगर इसे अस्त कहा जाए तो गलत न होगा.ऐसे
ग्रहों का प्रभाव बहुत ही सूक्ष्म
होता है.प्रत्येक ग्रह में अवस्थाओं के अनुसार फल करते
हैं.
सूर्य के पास के ग्रह अगर सूर्य के अंशों के बराबर हुए
तो ग्रह अस्त हो जाता है
उसकी सारी ताकत सूर्य में
समा जाती है.लेकिन सूर्य से ८ अंशों से आगे ग्रह
आधा अस्त माना जाता है.अगर ग्रह सूर्य से १५ अंशों से
अधिक है तो ग्रह उदय कहलाता है.
वक्री ग्रह सीधे चलते चलते
थोड़ा रास्ते से हटकर चलते हैं.जैसे कोई लक्ष्य पर घूमकर
आता है.लेकिन रुकता नहीं है.जबकि देखने में
लगता है मानों उल्टा चल रहा है हालांकि ऐसा है
नहीं।
कोई भी ग्रह अगर २९-०१ अंश का है तो वह
बहुत ही हानिकारक होता है, अगर लग्न
इसी अंश पर है तो शारीरिक कष्ट मिलते
हैं.इसी के साथ अगर लग्नेश कमजोर हुआ
या ६-८-१२ में चला गया तो मृत्यु या मृत्युतुल्य कष्ट होता है।

एक लोटा जल किस्मत में भारी बदलाव ला सकता है =======================================     यदि गंभीरता से केवल एक लोटे जल क...
27/08/2017

एक लोटा जल किस्मत में भारी बदलाव ला सकता है
=======================================
यदि गंभीरता से केवल एक लोटे जल के साथ कुछ क्रियाएं कर दी जाए ,तो व्यक्ति के जीवन की बहुत सी समस्याएं ,दुःख ,रोग-शोक-कष्ट ,ग्रह बाधा दूर हो सकती है ,सफलता बढ़ सकती है और सुख प्राप्ति के साथ आय के साधन बढ़ सकते हैं |इसके लिए केवल नियमित कुछ क्रियाएं भर कर दें ,बिना किसी अतिरिक्त खर्च और श्रम के जीवन में बहुत कुछ अच्छा होने लगेगा |
इसके लिए करें बस इतना ही कि सुबह सूर्योदय पूर्व उठें और नित्यकर्मों से निवृत्त हो स्नान कर ले ,शुद्ध वस्त्र धारण कर एक लोटा शुद्ध जल लें ,उसमे एक चुटकी रोली ,थोड़ा गुड और लाल फूल डालें ,अब उगते सूर्य को यह जल अर्पित करें अपने हाथों को सर की उंचाई तक रखते हुए ,यहाँ केवल इतना ध्यान दें की सूर्य उगता हुआ हो जिसे आप देख सकें अर्थात लालिमा युक्त निकलता सूर्य हो न की तपता हुआ सूर्य ,दूसरा यह की इस चढ़ते जल के छींटे आपके पैरों पर न पड़ें अर्थात किसी ऐसे स्थान पर गिरें जिससे आपके पैरों पर छींटे न आयें ,न ही यह किसी अशुद्ध स्थान पर गिरें ,इस समय सूर्य का या गायत्री मंत्र बोल सकें तो और अच्छा है |,यह क्रिया किसी भी शुक्ल पक्ष के रविवार से शुरू करें और लगातार करते रहें ,यदि किसी कारणवश रोज संभव नहीं है तो रविवार-रविवार जरुर करें | इसके साथ एक क्रिया और केवल रविवार -रविवार करें ,रात्री में सोते समय अपने सिरहाने एक लोटा जल में थोड़ा सा दूध डालकर रख लें ,ध्यान दें की यह गिरे -फैले नहीं ,सुबह[सोमवार ] उठाकर इसे किसी बबूल के वृक्ष को चढ़ा दें ,यहाँ यह ध्यान दें की कोई आपको टोके नहीं |
उपरोक्त एक लोटे जल की क्रियाओं से आपके ग्रह दोष ,बाधा दोष ,अशुभता ,रोग-शोक-कष्ट धीरे धीरे समाप्त होने लगेंगे ,जीवन में नवीन ऊर्जा और उमंग का संचार होने लगेगा ,दैनिक दिनचर्या व्यवस्थित-शुभ और मंगलमय हो जायेगी ,पित्र दोष में कमी आने लगेगी ,ईष्ट कृपा बढ़ जायेगी, स्वास्थय अच्छा होने लगेगा ,सफ़लता बढ़ जायेगी |.............................................................हर-हर महादेव

16/07/2017

राष्ट्रीय मिति आषाढ़ 25 शक संवत् 1939 श्रावण कृष्ण सप्तमी रविवार विक्रम संवत् 2074। सौर श्रावण मास प्रविष्टे 01 सव्वाल 21, हिजरी 1438 (मुस्लिम) तदनुसार अंग्रेजी तारीख 16 जुलाई सन् 2017 ई॰। दक्षिणायन उत्तर गोल, वर्षा ऋतु।

राहुकाल सायं 4 बजकर 30 मिनट से 6 बजे तक सप्तमी तिथि मध्याह्न 1 बजकर 37 मिनट तक उपरांत अष्टमी तिथि का आरंभ, रेवती नक्षत्र अर्धरात्रोत्तर 12 बजकर 20 मिनट तक उपरांत अश्वनी नक्षत्र का आरंभ।

अतिगण्ड योग प्रातः 7 बजकर 22 मिनट तक उपरांत धृति योग का आरंभ, बव करण मध्याह्नन 1 बजकर 37 मिनट तक उपरांत कौलव करण का आरंभ। चन्द्रमा अर्धरात्रोत्तर 12 बजकर 20 मिनट तक मीन उपरांत मेष राशि पर संचार करेगा।

आज ही कर्क संक्रान्ति मासिक, कालाष्टमी व्रत, पंचक समाप्त अर्धरात्रोत्तर 12 बजकर 20 मिनट, सूर्य कर्क में सायं 4 बजकर 25 मिनट पर आएंगे। मुहूर्त 30, पुण्यकाल दिनभर मनसा पूजा (बंगाल) मंगल पुष्य में सायं 6 बजकर 30 मिनट पर।

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1960 DHABHI JI KA KHURRA RAMGANJ BAZAR
Jaipura
302002

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