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*****Jai Mata Di*****

07/10/2021

वन्देवांछितलाभ्य चंद्राधर्क्रतशेखरा।
वृषारूढ़ाम शूलधरा शैलपुत्री वशस्नीम।।
🚩शक्ति उपासना के
महापर्व शारदीय नवरात्रि की बहुत बहुत
बधाई एवं शुभकामनाएं🚩🙏जय माता की🙏

30/08/2021
जय श्री कृष्णा 🙏🙏
30/08/2021

जय श्री कृष्णा 🙏🙏

Jai shree shyam
05/10/2020

Jai shree shyam

सर्वपित्र अमावस्या -पितृ पक्ष के अंतिम दिन सर्वपितृ अमावस्या या महालया अमावस्या के रूप में जाना जाता है। महालया अमावस्या...
28/09/2019

सर्वपित्र अमावस्या -
पितृ पक्ष के अंतिम दिन सर्वपितृ अमावस्या या महालया अमावस्या के रूप में जाना जाता है। महालया अमावस्या पितृ पक्ष का सबसे महत्वपूर्ण दिन है। जिन व्यक्तियों को अपने पूर्वजों की पुण्यतिथि की सही तारीख / दिन नहीं पता होता, वे लोग इस दिन उन्हें श्रद्धांजलि और भोजन समर्पित करके याद करते हैं।
हमारे जो पूर्वज अपने शरीर को छोड़कर चले गए हैं चाहे वे किसी भी रूप में या किसी भी लोक में हों, उनकी तृप्ति और उन्नति के लिए श्रद्धा के साथ जो शुभ संकल्प और तर्पण किया जाता है, वह श्राद्ध है। पूराणों की ऐसी मान्‍यता है कि सावन मास की पूर्णिमा से ही पितृ मृत्यु लोक में आ जाते हैं और नई अंकुरित कुशा की नोकों पर विराजमान हो जाते हैं। शास्त्रानुसार वैसे तो प्रत्येक अमावस्या पितृ की पुण्य तिथि होती है परंतु आश्विन मास की अमावस्या पितृओं के लिए परम फलदायी कही गई है। इसे सर्व पितृ विसर्जनी अमावस्या अथवा महालया के नाम से जाना जाता है।
यह श्राद्ध के महीने में आखरी दिन होता हैं, जो कि आश्विन की आमवस्या का दिन होता हैं, इस दिन सभी तर्पण विधि पूरी करते हैं, इस दिन भूले एवम छूटे सभी श्राद्ध किये जाते हैं। इस दिन दान का महत्व होता हैं । इस दिन ब्राह्मणों एवम मान दान लोगो को भोजन कराया जाता हैं। पितृ पक्ष में पितृ मोक्ष अमावस्या का सबसे अधिक महत्व होता हैं ।
सूर्य की अनंत किरणों में सर्वाधिक प्रमुख किरण का नाम 'अमा' है। उस अमा नामक प्रधान किरण के तेज से ही सूर्यदेव तीनों लोको को प्रकाशित करते हैं। उसी अमा किरण में तिथि विशेष को चंद्रदेव निवास (वस्य) करते हैं, अतः इस तिथि का नाम अमावस्या है। अमावस्या प्रत्येक पितृ संबंधी कार्यों के लिए अक्षय फल देने वाली बताई गई है।
आज के समय में व्यस्त जीवन के कारण मनुष्य तिथिनुसार श्राद्ध विधि करना संभव नहीं होता ऐसे में इस दिन सभी पितरो का श्राद्ध किया जा सकता हैं । श्राद्ध में दान का बहुत अधिक महत्व होता हैं । इन दिनों ब्राह्मणों को दान दिया जाता हैं जिसमे अनाज, बर्तन, कपड़े आदि अपनी श्रद्धानुसार दान दिया जाता हैं । इन दिनों गरीबो को भोजन भी कराया जाता हैं । श्राद्ध तीन पीढ़ी तक किया जाना सही माना जाता हैं इसे बंद करने के लिए अंत में सभी पितरो के लिए गया (बिहार), बद्रीनाथ जाकर तर्पण विधि एवम पिंड दान किया जाता हैं । इससे जीवन में पितरो का आशीर्वाद बना रहा हैं एवम जीवन पितृ दोष से मुक्त होता हैं ।
'सर्वपितृ अमावस्या' के दिन सभी भूले-बिसरे पितरों का श्राद्ध कर उनसे आशीर्वाद की कामना की जाती है। 'सर्वपितृ अमावस्या' के साथ ही 15 दिन का श्राद्ध पक्ष खत्म हो जाता है। 'सर्वपितृ अमावस्या' पर हम अपने उन सभी प्रियजनों का श्राद्घ कर सकते हैं, जिनकी मृत्यु की तिथि का ज्ञान हमें नहीं है। वे लोग जो किसी दुर्घटना आदि में मृत्यु को प्राप्त होते हैं, या ऐसे लोग जो हमारे प्रिय होते हैं किंतु उनकी मृत्यु तिथि हमें ज्ञात नहीं होती तो ऐसे लोगों का भी श्राद्ध इस अमावस्या पर किया जा सकता है।
जो लोग किसी कारण वश तिथि विशेष को श्राद्ध करना भूल गए या जिनकी कुंडली में पितृ दोष है वे इसदिन पितरो को प्रसन्न कर अपनी जन्म कुंडली के गृह को ठीक कर सकते है क्योंकि पितृ दोष की वजह से अछे गृह भी अच्छा फल देने में असफल रह ते रहते है इस दिन आप खीर पुड़ी का ब्राह्मण को भोजन करावें , वस्त्र दक्ष्ना देवे, कौवों को खीर खिलावे, गायों को हरा चारा खिलावें, बहन बेटी भांजी को खुश करें ।
यदि कोई परिवार पितृदोष से कलह तथा दरिद्रता से गुजर रहा हो और पितृदोष शांति के लिए अपने पितरों की मृत्यु तिथि मालूम न हो तो उसे सर्वपितृ अमावस्या के दिन पितरों का श्राद्ध-तर्पणादि करना चाहिए, जिससे पितृगण विशेष प्रसन्न होते हैं और यदि पितृदोष हो तो उसके प्रभाव में भी कमी आती है।
पितृ गण हमारे पूर्वज हैं जिनका ऋण हमारे ऊपर है, क्योंकि उन्होंने कोई ना कोई उपकार हमारे जीवन के लिए किया है । मनुष्य लोक से ऊपर पितृ लोक है, पितृ लोक के ऊपर सूर्य लोक है एवं इस से भी ऊपर स्वर्ग लोक है। आत्मा जब अपने शरीर को त्याग कर सबसे पहले ऊपर उठती है तो वह पितृ लोक में जाती है, वहाँ हमारे पूर्वज मिलते हैं । अगर उस आत्मा के अच्छे पुण्य हैं तो ये हमारे पूर्वज भी उसको प्रणाम कर अपने को धन्य मानते हैं की इस अमुक आत्मा ने हमारे कुल में जन्म लेकर हमें धन्य किया ।इसके आगे आत्मा अपने पुण्य के आधार पर सूर्य लोक की तरफ बढती है ।वहाँ से आगे ,यदि और अधिक पुण्य हैं, तो आत्मा सूर्य लोक को बेध कर स्वर्ग लोक की तरफ चली जाती है, लेकिन करोड़ों में एक आध आत्मा ही ऐसी होती है ,जो परमात्मा में समाहित होती है ।जिसे दोबारा जन्म नहीं लेना पड़ता । मनुष्य लोक एवं पितृ लोक में बहुत सारी आत्माएं पुनः अपनी इच्छा वश ,मोह वश अपने कुल में जन्म लेती हैं।

श्राद्ध पक्ष विशेषक्या ध्यान रखे औरकिस तिथि को किसका श्राद्ध करेहमारे पौराणिक ग्रन्थ गरुड़ पुराण और कठोपनिषद में पारलौकि...
12/09/2019

श्राद्ध पक्ष विशेष
क्या ध्यान रखे और
किस तिथि को किसका श्राद्ध करे

हमारे पौराणिक ग्रन्थ गरुड़ पुराण और कठोपनिषद में पारलौकिक जीवन के बारे में विस्तार से बताया गया है। इन ग्रंथों में कहा गया है कि पितृपक्ष के 15 दिनों में पितृलोक में गए पितर यानी परिवार के वो सदस्य जो देह त्यागकर दुनिया से चले गए हैं अपने सूक्ष्म शरीर के साथ पृथ्वी पर अाते हैं और अपने परिजनों के बीच रहते हैं। पुराण के अनुसार इन दिनों जिन परिवारों में पितरों की पूजा नहीं होती है और उनके नाम से अन्न, जल और पिण्ड नहीं दिया जाता है। उन परिवारों के पितर नाराज हो जाते हैं। इससे कई तरह की परेशानियां आती हैं। पूर्णिमा से अमावस्या के ये 16 दिन पितरों को कहे जाते हैं। इन 16 दिनों में पितरों को याद किया जाता है और उनका तर्पण किया जाता है।

पितृ दोष से मुक्ति पाने का सबसे सही समय होता है पितृपक्ष। इस दौरान किए गए श्राद्ध कर्म और दान-तर्पण से पितृों को तृप्ति मिलती है। वे खुश होकर अपने वंशजों को सुखी और संपन्न जीवन का आशीर्वाद देते हैं। पितृपक्ष में श्राद्ध कर्म करने की परंपरा हमारी सांस्कृतिक विरासत है।
पितरों को खुश रहने के लिए श्राद्ध के दिनों में विशेष कार्य करना चाहिए वही इस दौरान कुछ बातों का ध्यान रखना भी जरूरी है -
1. श्राद्ध करने के लिए ब्रह्मवैवर्त पुराण जैसे शास्त्रों में बताया गया है कि दिवंगत पितरों के परिवार में या तो ज्येष्ठ पुत्र या कनिष्ठ पुत्र और अगर पुत्र न हो तो नाती, भतीजा, भांजा या शिष्य ही तिलांजलि और पिंडदान देने के पात्र होते हैं।
2. पितरों के निमित्त सारी क्रियाएं गले में दाये कंधे मे जनेउ डाल कर और दक्षिण की ओर मुख करके की जाती है।
3. कई ऐसे पितर भी होते है जिनके पुत्र संतान नहीं होती है या फिर जो संतान हीन होते हैं। ऐसे पितरों के प्रति आदर पूर्वक अगर उनके भाई भतीजे, भांजे या अन्य चाचा ताउ के परिवार के पुरूष सदस्य पितृपक्ष में श्रद्धापूर्वक व्रत रखकर पिंडदान, अन्नदान और वस्त्रदान करके ब्राह्मणों से विधिपूर्वक श्राद्ध कराते है तो पितर की आत्मा को मोक्ष मिलता है।
4. श्राद्ध के दिन लहसुन, प्याज रहित सात्विक भोजन ही घर की रसोई में बनना चाहिए। जिसमें उड़द की दाल, बडे, चावल, दूध, घी से बने पकवान, खीर, मौसमी सब्जी जैसे तोरई, लौकी, सीतफल, भिण्डी कच्चे केले की सब्जी ही भोजन में मान्य है। आलू, मूली, बैंगन, अरबी तथा जमीन के नीचे पैदा होने वाली सब्जियां पितरों को नहीं चढ़ती है।
5. श्राद्ध का समय हमेशा जब सूर्य की छाया पैरो पर पड़ने लग जाए यानी दोपहर के बाद ही शास्त्र सम्मत है। सुबह-सुबह अथवा 12 बजे से पहले किया गया श्राद्ध पितरों तक नहीं पहुंचता है।

श्राद्द करने के अपने नियम होते हैं। जिस तिथि में परिजन की मृत्य़ु होती है उसी तिथि में उनका श्राद्ध किया जाता है। पूर्णिमा से अमावस्या तक 15 दिन श्राद्ध किया जाता है।
* जिन लोगों की मृत्यु के दिन की सही जानकारी न हो उनका श्राद्ध अमावस्या तिथि को करना चाहिए। वहीं अकाल मृत्य़ु होने पर भी अमावस्या के दिन श्राद्ध किया जाता है।
* जिसने आत्महत्या की हो, या जिनकी हत्या हुई हो ऐसे लोगों का श्राद्ध चतुर्थी तिथि के किया जाता है।
* पति जीवित हो और पत्नी की मृत्यु हो गई हो, तो नवमी तिथि को श्राद्ध किया जाता है।
* वहीं एकादशी में उन लोगों का श्राद्ध किया जाता है जिन लोगों ने संन्यास लिया हो।

आज, जानें शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और व्रत के नियम  : आज हरियाली तीज है। श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया को श्रावणी तीज...
03/08/2019

आज, जानें शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और व्रत के नियम

: आज हरियाली तीज है। श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया को श्रावणी तीज या हरियाली तीज के नाम से जाना जाता है। यह त्यौहार व्रत के रूप में लगभग पूरे उत्तर भारत में मनाया जाता है जिसमें विवाहित महिलाएं भगवान शिव और मां पार्वती की पूजा करती हैं। इस व्रत को करवाचौथ के व्रत से भी ज्यादा कठिन माना जाता है क्योंकि इस व्रत को रखने वाली ज्यादातर महिलाएं पूरे दिन बिना पानी की एक बूंद पिए ही रहती हैं। माना जाता है कि इस व्रत को निर्जला ही रखते हैं इस दिन कुछ खाया पिया नहीं जाता। हरियाली तीज व्रत क्यों मनाया जाता है और इसका मुहूर्त क्या है? आगे जानें इससे जुड़ी कुछ खास बातें -

हरियाली तीज की तिथि और शुभ मुहूर्त
हरियाली तीज की तिथि: 03 अगस्‍त 2019
हरियाली तीज की तिथि आरंभ: 03 अगस्‍त 2019 की सुबह 07 बजकर 06 मिनट से.
हरियाली तीज की तिथि समाप्‍त: 04 अगस्‍त 2019 की सुबह 03 बजकर 36 मिनट तक.

जानें हरियाली तीज व्रत से जुड़ी 10 खास बातें-
1- हरियाली तीज व्रत करने के पीछे कथा है कि मां पार्वती ने भगवान शिव से विवाह करने के लिए बहुत ही कठिन तपस्या की थी। इस तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने आज ही के दिन यानी श्रावण मास शुक्ल पक्ष की तीज को मां पार्वती के सामने प्रकट हुए और उनसे शादी करने का वरदान दिया था।

2- मान्यता है कि हरियाली तीज के दिन महिलाएं पुत्र प्राप्ति की इच्छा के लिए व्रत करती हैं जबकि कन्या मनवांछित वर प्राप्त करने के लिए यह व्रत करती हैं।

3- इस दिन महिलाएं मिट्टी या बालू से मां पार्वती और शिवलिंग बनाकर उनकी पूजा करती हैं।

4- पूजा के बाद मिट्टियों की इन मूर्तियों को नदी या किसी पवित्र जलाशय में प्रवाहित करने की मान्यता है।

5- व्रत करने वाले भक्त सुबह स्नान कर और मां-पार्वती की विधिवत पूजा कर इस व्रत को शुरू करते हैं।

6- कुछ स्‍थानों पर मां पार्वती और शिवलिंग की पूजा के वक्त मां पार्वती को शंकर जी वर के रूप में कैसे प्राप्त हुए इसकी कथा भी सुनाई जाती है। इस कथा को हरियाली तीज कथा के नाम से भी जानते हैं।

7- मान्यता के इस व्रत के दौरान पूरे दिन मां पार्वती और भगवान शिव का ही ध्यान करना चाहिए।

8- व्रत खोलने से पहले भगवान को खीर पूरी या हलुआ और मालपुए से भोग लगाना चाहिए।

9-हरियाली तीज की पूजा सामग्री के रूप में गीली मिट्टी, पीले रंग का नया कपड़ा, बेल पत्र, कलावा, धूप-अगरबत्ती, कपूर, घी का दीपक, फूल-फल, नारियल और पंचामृत आदि इस्तेमाल कर सकते हैं।

16/05/2019

*ऊ भूर्भुव: स्व: तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो* ।

*देवस्य धीमहि धियो यो न: प्रचोदयात्* ।।

जालन्धर के समय अनुसार
*16 05 2019 गुरूवार*
🇮🇳 *आज का हिन्दू पंचाँग*

🕉दिन - गुरूवार
🕉दिनांक - 16
🕉महीना - मई
🕉सन् - 2019
🕉विक्रमी संवत - 2076
🕉शाक: - 1940
🕉हिजरी सन् :- 1440
🕉 ऋतु - ग्रीष्म ऋतु:
🕉 मास - वैशाख
🕉 पक्ष - शुक्ल पक्ष
🕉 तिथि - द्वादशी 12 तिथि प्रांतः 08:16 बजे तक उसके बाद त्रयोदशी 13 तिथि है
🕉 प्रविष्टे- ज्येष्ठ 02 प्रविष्टे
🕉 नक्षत्र - हस्त नक्षत्र प्रांत: 05:42 बजे तक उसके बाद चित्रा नक्षत्र है
🕉 🌞 सूर्य - सूर्य वृष राशि पर
(सूर्य उत्तरायण)
🕉 🌕 चन्द्रमा - 🌙 चन्द्रमा कन्या राशि पर संध्या 04:56 बजे तक उसके बाद चन्द्रमा तुला राशि पर प्रवेश करेंगे
🕉 आज संध्या 04:56 बजे तक किसी बच्चे 👼🏻 का जन्म होता है तो उस बच्चे का नाम कन्या राशि पर होगा
और यदि आज संध्या 04:57 बजे के बाद किसी बच्चे का जन्म होता है तो उस बच्चे का नाम तुला राशि पर होगा
🕉 दिशाशूल - गुरूवार को दक्षिण दिशा मे दिशाशूल रहती है इस लिए
(गुरूवार को दक्षिण दिशा में 🚘 यात्रा करना शुभ नही)

🌹 यदि गुरूवार को दक्षिण दिशा की 🚘 यात्रा करनी हो तो घर से दही खाकर यात्रा के लिए प्रस्थान करे

💥 राहु काल - मध्याह्न (दोपहर) 01:30 बजे से मध्याह्न (दोपहर) 03:00 बजे तक राहु काल है

राहु काल के समय मे कोई भी शुभ कार्य नही करना चाहिए

🥥 *त्योहार:-*

*1.* *प्रदोष व्रत*

*2.* *मेला बंजार (कुल्लू) हिमाचल प्रदेश 14 मई से 18 मई तक*

*3.* *मेला हरिहर - घाट मनीकरण (कुल्लू) हिमाचल प्रदेश 14 मई से 18 मई तक*

*4.* *मेला ढुंगरी जातर (मनाली) हिमाचल प्रदेश 15 एवं 16 मई को*

🚩 आज 16 - मई - 2019 गुरूवार को जालन्धर में संध्या काल 07:13 बजे पर 🌝 सूर्य अस्त होगा एवं
🚩 कल 17 - मई - 2019 शुक्रवार को जालन्धर में प्रांत: काल 05:35 बजे पर 🌞 सूर्य उदय होगा

✅ देवी माता जी के शुभ चणोॅ 👣 मे प्रार्थना 🙏 करते है कि आप की हर मनोकामना संपूर्ण हो

🚩 आज का दिन आपका शुभ मंगलकारी हो प्रांतः काल की शुभ मंगल वेला पर आप को दिल से राम 🙏 राम जी

🌹शुभ प्रभात🌹

🙏आप सबके लिए शुभ मंगल कामना करते हुए
🙏 भगवती ज्योतिष केंद्र
🙏 पंडित मनोज कुमार (लड़ोई वाले)
🕉 पराशर मार्केट शॉप नंबर 9 नजदीक बॉम्बे ड्राइक्लीन वाली गली रेलवे रोड भोगपुर जालंधर पंजाब
☎ *98553 81568


🌹आपको ओर आपके पूरे परिवार को 🌹
🙏 हमारे परिवार की ओर से आज की हार्दिक 🙏
🌹शुभ मंगल कामनाये🌹

ऊ शान्ति: शान्ति: शान्ति:

सफेद रंग की छोटी सी कर्पूर की टिकिया में बड़े-बड़े गुण समाएं हैं। पूजा-पाठ से लेकर तांत्रिक किरयाओ तक में इसका प्रयोग कि...
02/09/2017

सफेद रंग की छोटी सी कर्पूर की टिकिया में बड़े-बड़े गुण समाएं हैं। पूजा-पाठ से लेकर तांत्रिक किरयाओ तक में इसका प्रयोग किया जाता है। कर्पूर का प्रतिदिन उपयोग से घर की परेशानियां अौर दोष दूर होते हैं।

देवी-देवताअों के समक्ष कर्पूर जलाने से अक्षय पुण्य मिलता है। वहीं भृगुसंहिता के अनुसार कर्पूर को जलाने से देवदोष अौर पितृदोष भी कम होते हैं।

प्रतिदिन सुबह शाम कर्पूर को घी में भिगोकर जलाएं अौर सारे घर में उसकी सुगंध फैलाएं। ऐसा करने से घर में नकारात्मक ऊर्जा खत्म हो सकारात्मक ऊर्जा का वास होता है। इसके साथ ही घर में शांति बनी रहती है अौर बुरे सपने भी नहीं आते हैं।

वास्तुशास्त्र के अनुसार घर के जिस कोने में वास्तुदोष होता है, वहां कर्पूर जलाना चाहिए। प्रतिदिन ऐसा करने से वास्तुदोष का प्रभाव कम हो जाएगा।

वैज्ञानिक शोध के अनुसार कर्पूर की सुगंध से जीवाणु, विषाणु रोग फैलाने वाले जीव खत्म हो जाते हैं। इससे वातावरण शुद्ध होता है अौर बीमारियां भी नहीं होती। इसके साथ ही घर में इसे जलाने से अनिद्रा की समस्या दूर होती है।

07/04/2017
पंचाग 7 मई, 2016, शनिवार वैशाख शुक्ल तिथि प्रतिपदा (रात 9.17 तक),  सूर्योदय समय ग्रहों की स्थिति :सूर्य मेष मेंचंद्रमा म...
07/05/2016

पंचाग 7 मई, 2016, शनिवार

वैशाख शुक्ल तिथि प्रतिपदा (रात 9.17 तक),

सूर्योदय समय ग्रहों की स्थिति :
सूर्य मेष में
चंद्रमा मेष में
मंगल वृश्चिक में
बुध मेष में
गुरु सिंह में
शुक्र मेष में
शनि वृश्चिक में
राहू सिंह में
केतु कुंभ में

विक्रमी सवत् : 2073, वैशाख प्रविष्ठ : 25, राष्ट्रीय शक सम्वत्: 1938, दिनांक: 17 (वैशाख), हिजरी साल: 1437, महीना: रजब, तारीख: 29, सूर्योदय: 5.42 बजे, सूर्यास्त: 7.07 बजे (जालंधर समय), नक्षत्र: भरणी (प्रात: 7.25 तक तथा बाद में नक्षत्र कृतिका), योग: सौभाग्य (दोपहर 1.04 तक), चंद्रमा दोपहर 12.41 तक मेष राशि पर तथा उसके बाद वृष राशि पर प्रवेश करेगा। पर्व, दिवस तथा त्यौहार : वैशाख शुक्ल पक्षारभ, श्री रवीन्द्र नाथ टैगोर जयंती, मेला आनी (कुल्लू, हिमाचल) प्रारभ। दिशा शूल: पूर्व एवं ईशान दिशा के लिए, राहू काल: प्रात: 09.00 से 10.30 बजे तक।

Address

Jalandhar
144201

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Tuesday 9am - 5pm
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Friday 9am - 5pm
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