Dr. Rajib Bhattacharjee Cancer Specialist Hindi

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मैं एक मेडिकल ऑन्कोलॉजिस्ट हूँ और कोलकाता के पीयरलेस हॉस्पिटल तथा झारखंड में कैंसर रोगियों का इलाज करता हूँ।
मैं आधुनिक और प्रमाण-आधारित कैंसर उपचार को संवेदनशील देखभाल के साथ जोड़ता हूँ, ताकि मरीज को बेहतरीन इलाज के साथ भरोसा और सहारा भी मिले।

06/03/2026
चाईबासा में विशेष कैंसर ओपीडी, 7 मार्च को निःशुल्क परामर्शचाईबासा के सदर अस्पताल में 7 मार्च 2026 (शनिवार) को एक विशेष क...
06/03/2026

चाईबासा में विशेष कैंसर ओपीडी, 7 मार्च को निःशुल्क परामर्श

चाईबासा के सदर अस्पताल में 7 मार्च 2026 (शनिवार) को एक विशेष कैंसर ओपीडी का आयोजन किया जाएगा। इस अवसर पर डॉ. राजीव भट्टाचार्य (MBBS, MD रेडियोथेरेपी, DNB मेडिकल ऑन्कोलॉजी), पीयरलेस हॉस्पिटल के कैंसर विशेषज्ञ, मरीजों को निःशुल्क परामर्श प्रदान करेंगे।

ओपीडी का समय सुबह 10:00 बजे से दोपहर 2:00 बजे तक रहेगा। मरीजों को “पहले आओ, पहले पाओ” के आधार पर देखा जाएगा। कैंसर से संबंधित किसी भी समस्या से पीड़ित मरीजों को समय पर पहुंचने की सलाह दी गई है।

अस्पताल प्रबंधन के अनुसार, स्थानीय मरीजों को नियमित रूप से विशेषज्ञ सलाह उपलब्ध कराने के उद्देश्य से यह ओंको ओपीडी अब हर महीने के पहले शनिवार को आयोजित की जाएगी। कैंसर उपचार की सुविधाएं मुख्यमंत्री गंभीर बीमारी उपचार योजना के अंतर्गत भी उपलब्ध हैं।

प्री-रजिस्ट्रेशन के लिए मरीज 9163583503 या 9702948645 पर संपर्क कर सकते हैं।

होली के दिन दिल खिल जाते हैं रंगों में रंग मिल जाते हैं....खेलेंगे होली, रंग नहीं लगाएंगे — ऐसा कभी होता है क्या? आइए बा...
03/03/2026

होली के दिन दिल खिल जाते हैं
रंगों में रंग मिल जाते हैं....

खेलेंगे होली, रंग नहीं लगाएंगे — ऐसा कभी होता है क्या? आइए बाहर आइए, डरिए मत…

होली मतलब रंग, हँसी, गुलाल, पानी से भीगा चेहरा और अचानक पीछे से “पकड़ लिया!” वाला हमला।
लेकिन जैसे ही होली खेलने की बात आती है, कई लोगों के मन में एक सवाल उठता है — क्या ये रंग सुरक्षित हैं? कहीं होली खेलते-खेलते स्किन कैंसर तो नहीं हो जाएगा?

होली से ठीक पहले इन डर को थोड़ा दूर करना भी हमारी जिम्मेदारी है।

सबसे पहले एक बात साफ कर लें — एक दिन होली खेलने से स्किन कैंसर नहीं होता।

यह पूरी तरह गलत धारणा है। एक या दो दिन रंग लगाने से कैंसर नहीं होता। कैंसर इतनी आसानी से नहीं होता, और सिर्फ होली के रंग उसका कारण बिल्कुल नहीं हैं।

हाँ, इसका मतलब यह भी नहीं कि हर रंग पूरी तरह सुरक्षित है। आजकल बाजार में मिलने वाले कई सस्ते रंगों में औद्योगिक केमिकल, सिंथेटिक डाई या कभी-कभी भारी धातुएँ भी मिली होती हैं। इनसे त्वचा में खुजली, एलर्जी, रैश, आँखों में जलन या स्किन इरिटेशन हो सकता है।

यानि कैंसर तो शायद नहीं होगा, लेकिन होली की मस्ती खुजली करते-करते खत्म जरूर हो सकती है।

तो समझदार होली खिलाड़ी क्या करते हैं?

रंग खेलने से पहले शरीर पर थोड़ा नारियल तेल या मॉइश्चराइज़र लगा लेते हैं। इससे रंग सीधे त्वचा पर नहीं चिपकता। फुल स्लीव कपड़े और सनग्लास भी स्टाइल के साथ-साथ सुरक्षा देते हैं।

और एक जरूरी बात — जो दोस्त काले, बहुत चमकीले या अजीब गंध वाले रंग लेकर आपकी तरफ दौड़ता हुआ आ रहा हो, उसे थोड़ी दूरी से ही “हैप्पी होली” बोल देना ज्यादा समझदारी है।

तो फिर होली खेलें किससे?

हर्बल या अच्छी गुणवत्ता वाला गुलाल इस्तेमाल करना सबसे सुरक्षित तरीका है। इससे मज़ा भी बना रहता है और बाद में घंटों रगड़-रगड़कर रंग छुड़ाने की परेशानी भी नहीं होती।

आख़िरकार, होली के रंग लोगों को करीब लाने के लिए होते हैं, डर्मेटोलॉजिस्ट के क्लिनिक भेजने के लिए नहीं।

इसलिए डर नहीं, बस थोड़ी सी जागरूकता ज़रूरी है।

हँसिए, खेलिए, रंगों में डूब जाइए — क्योंकि होली साल में एक बार आती है, लेकिन उसकी यादें लंबे समय तक साथ रहती हैं।

हैप्पी होली!

एचपीवी वैक्सीन — कैंसर से बचाव का सबसे आसान मौका, जिसे हम अब तक गंवाते आए हैंज़रा सोचिए — अगर ऐसा कोई कैंसर हो जिसे होने...
01/03/2026

एचपीवी वैक्सीन — कैंसर से बचाव का सबसे आसान मौका, जिसे हम अब तक गंवाते आए हैं

ज़रा सोचिए — अगर ऐसा कोई कैंसर हो जिसे होने से पहले ही रोका जा सके।
ना ऑपरेशन की ज़रूरत, ना कीमोथेरेपी, ना अस्पतालों के चक्कर।
सिर्फ सही समय पर लिया गया एक टीका।

सुनने में आश्चर्य लग सकता है, लेकिन सर्वाइकल कैंसर (गर्भाशय मुख का कैंसर) ठीक ऐसा ही एक रोग है।

इस कैंसर का मुख्य कारण है HPV (ह्यूमन पैपिलोमा वायरस) नाम का एक वायरस। यह शरीर में कई वर्षों तक चुपचाप रहता है और धीरे-धीरे कोशिकाओं में बदलाव लाता है। समय के साथ यही बदलाव कैंसर का रूप ले सकता है।
यानी कैंसर अचानक नहीं होता — उसे बनने में सालों लगते हैं।
और यही वह समय है जब हम इसे रोक सकते हैं।

यहीं पर HPV वैक्सीन की भूमिका शुरू होती है।

हाल ही में सरकार ने 14 वर्ष की किशोरियों को यह टीका मुफ्त देने की घोषणा की है। यह निश्चित रूप से एक बेहद महत्वपूर्ण कदम है। क्योंकि भारत में आज भी बड़ी संख्या में महिलाएँ सर्वाइकल कैंसर से प्रभावित होती हैं — जबकि इनमें से बहुत से मामलों को रोका जा सकता था।

यह वैक्सीन शरीर को पहले से ही वायरस को पहचानना सिखाती है। भविष्य में संक्रमण होने पर शरीर खुद उससे लड़ने के लिए तैयार रहता है।
सिर्फ सर्वाइकल कैंसर ही नहीं, बल्कि गले, एनल और कुछ जननांग संबंधी कैंसर का जोखिम भी कम होता है।

लेकिन यहाँ एक छोटी मगर बेहद ज़रूरी बात समझनी होगी।

टीका मतलब सिर्फ एक इंजेक्शन नहीं।
पूरी सुरक्षा के लिए सभी निर्धारित डोज़ लेना बहुत जरूरी है।
9 से 14 वर्ष की आयु में आमतौर पर दो डोज़ की आवश्यकता होती है।

अब असली सवाल है — क्या सिर्फ शुरुआत होगी, या पूरा कोर्स भी सुनिश्चित होगा?

हमारे देश में अक्सर स्वास्थ्य योजनाएँ बड़े उत्साह से शुरू होती हैं — घोषणाएँ होती हैं, तस्वीरें छपती हैं। लेकिन दूसरी डोज़ के समय किसे याद रहा, किसे मिली — यह कई बार स्पष्ट नहीं रहता।
जबकि अधूरा टीकाकरण मतलब अधूरी सुरक्षा।

फिर भी सच यही है — देर से ही सही, यह एक ऐतिहासिक और जरूरी कदम है।
अब तक हम कैंसर होने के बाद इलाज की बात करते थे। पहली बार बड़े स्तर पर कैंसर न होने की बात हो रही है।

कैंसर के खिलाफ सबसे ताकतवर हथियार हमेशा नई दवाइयाँ नहीं होतीं।
कई बार रोकथाम ही सबसे बड़ा उपचार होती है।

अब जिम्मेदारी सिर्फ सरकार की नहीं है।
माता-पिता को जागरूक होना होगा।
स्कूलों को आगे आना होगा।
और समाज को समझना होगा कि यह टीका भविष्य में हजारों कैंसर मामलों को रोक सकता है।

शुरुआत हो चुकी है।
अब ज़रूरत है — हर लड़की तक पहुँचे और हर बच्ची का पूरा वैक्सीनेशन पूरा हो।

क्योंकि कैंसर से बचाव का मौका बार-बार नहीं मिलता।

कैंसर का इलाज कैसे होता है? यह सवाल अक्सर डर के साथ आता है। लेकिन कहानी यहीं से बदलनी शुरू होती है—डर से नहीं, समझ से।मा...
27/02/2026

कैंसर का इलाज कैसे होता है?

यह सवाल अक्सर डर के साथ आता है। लेकिन कहानी यहीं से बदलनी शुरू होती है—डर से नहीं, समझ से।

मान लीजिए, एक दिन किसी व्यक्ति को पता चलता है कि उसे कैंसर है। पहला झटका बहुत बड़ा होता है। मन में कई सवाल आते हैं—“अब क्या होगा?” “क्या मैं ठीक हो पाऊँगा?” ऐसे समय में सबसे ज़रूरी है सही डॉक्टर से मिलना और पूरी जाँच करवाना। कैंसर एक ही तरह का नहीं होता। हर कैंसर अलग होता है, हर मरीज अलग होता है। इसलिए इलाज भी व्यक्ति के अनुसार तय होता है।

डॉक्टर पहले यह देखते हैं कि कैंसर कहाँ है, कितना फैला है और शरीर की ताकत कैसी है। फिर इलाज की योजना बनती है। कई बार ऑपरेशन से गाँठ निकाल दी जाती है। कभी दवाओं से इलाज होता है, जिसे कीमोथेरेपी कहते हैं। कुछ मामलों में किरणों से इलाज किया जाता है, जिसे रेडियोथेरेपी कहते हैं। आजकल ऐसी दवाएँ भी हैं जो सीधे कैंसर की कोशिकाओं पर असर करती हैं और स्वस्थ कोशिकाओं को कम नुकसान पहुँचाती हैं।

इलाज के दौरान शरीर और मन दोनों का ख्याल रखना बहुत जरूरी है। पौष्टिक खाना, पर्याप्त आराम, हल्की-फुल्की गतिविधि और परिवार का साथ—ये सब दवा जितने ही महत्वपूर्ण हैं। इलाज के दुष्प्रभाव हो सकते हैं, लेकिन डॉक्टर उन्हें संभालने में मदद करते हैं।

सबसे अहम बात—कैंसर का इलाज केवल “कितने दिन जिएँगे” का सवाल नहीं है, बल्कि “कैसे जिएँगे” का भी है। समय पर पहचान, सही इलाज और सकारात्मक सोच से कई लोग सामान्य जीवन में लौट आते हैं।

कैंसर अंत नहीं है। यह एक लड़ाई है—और सही जानकारी, सही इलाज और सही सहयोग से यह लड़ाई जीती जा सकती है।

कैंसर क्या है?कैंसर एक ऐसी बीमारी है जिसमें शरीर की कुछ कोशिकाएँ (cells) अनियंत्रित तरीके से बढ़ने लगती हैं। सामान्य तौर...
09/02/2026

कैंसर क्या है?

कैंसर एक ऐसी बीमारी है जिसमें शरीर की कुछ कोशिकाएँ (cells) अनियंत्रित तरीके से बढ़ने लगती हैं। सामान्य तौर पर हमारी कोशिकाएँ एक नियम के तहत बनती और नष्ट होती रहती हैं। लेकिन जब इस नियंत्रण में गड़बड़ी होती है, तो कोशिकाएँ जरूरत से ज्यादा बढ़कर एक गांठ (ट्यूमर) बना सकती हैं — इसे ही कैंसर कहा जाता है।

कैंसर शरीर के लगभग किसी भी हिस्से में हो सकता है। कुछ ट्यूमर धीरे बढ़ते हैं, जबकि कुछ तेजी से फैल सकते हैं। अगर समय पर पहचान और इलाज हो जाए, तो कई प्रकार के कैंसर का सफल उपचार संभव है।

कैंसर होने के पीछे कई कारण हो सकते हैं — जैसे तंबाकू का सेवन, अस्वस्थ जीवनशैली, संक्रमण, आनुवंशिक कारण या बढ़ती उम्र। लेकिन हर कैंसर का कारण स्पष्ट हो, ऐसा जरूरी नहीं है।

सबसे महत्वपूर्ण बात है जागरूकता। शरीर में कोई असामान्य बदलाव — जैसे लगातार दर्द, बिना कारण वजन घटना, गांठ महसूस होना, या लंबे समय तक खांसी — को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। समय पर जांच और सही इलाज कैंसर से लड़ाई को मजबूत बनाते हैं।

कैंसर डर का नाम नहीं, बल्कि समझ और सही कदम उठाने की जरूरत का संकेत है। सही जानकारी, भरोसेमंद चिकित्सा और परिवार का साथ — ये मिलकर इस बीमारी से लड़ने की ताकत देते हैं।

मैं एक मेडिकल ऑन्कोलॉजिस्ट हूँ और कोलकाता के पीयरलेस हॉस्पिटल तथा झारखंड में कैंसर रोगियों का उपचार करता हूँ। मेरे लिए क...
08/02/2026

मैं एक मेडिकल ऑन्कोलॉजिस्ट हूँ और कोलकाता के पीयरलेस हॉस्पिटल तथा झारखंड में कैंसर रोगियों का उपचार करता हूँ। मेरे लिए कैंसर उपचार केवल चिकित्सा नहीं, बल्कि समुदाय के साथ जुड़ी एक जिम्मेदारी है। हर मरीज अपने परिवार, अपने सपनों और अपनी उम्मीदों के साथ मेरे पास आता है — और मेरा प्रयास रहता है कि उसे इलाज के साथ भरोसा और सहारा भी मिले।

मैं आधुनिक, प्रमाण-आधारित कैंसर उपचार को मानवीय संवेदनशीलता के साथ जोड़ने में विश्वास रखता हूँ। खुला संवाद, ईमानदार मार्गदर्शन और नैतिक चिकित्सा मेरे काम की नींव हैं। मेरा लक्ष्य है कि मरीज और उनका परिवार उपचार की हर अवस्था को समझे और खुद को सुरक्षित महसूस करे।

झारखंड के लोगों के साथ काम करते हुए मैंने महसूस किया है कि जागरूकता, सही समय पर इलाज और सामुदायिक सहयोग कैंसर से लड़ाई को मजबूत बनाते हैं। मैं इस क्षेत्र के लोगों तक उन्नत और भरोसेमंद उपचार पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध हूँ, ताकि वे अपने ही समुदाय के बीच सम्मान और आत्मविश्वास के साथ इस चुनौती का सामना कर सकें।

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Jamshedpur

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