01/02/2024
ग्रह और उसका प्रभाव
आज के इस पोस्ट में हम ग्रह और उसके प्रभाव पर चर्चा करेंगे
कुछ ग्रह सौम्य होते हैं जैसे गुरु शुक्र चंद्रमा और बुध...
वहीं कुछ ग्रह क्रूर होते हैं जैसे सूर्य और मंगल...
और कुछ ग्रह बेहद पाप प्रवृत्ति के होते हैं जैसे शनि राहु
यद्यपि केतु ने अमृत पान किया था फिर भी उसे हम पाप ग्रह की ही श्रेणी में रखते हैं ...
हर ग्रह का अपना एक मूल सिद्धांत होता है अपना एक चरित्र होता है जिसे वह किसी भी कीमत पर नहीं छोड़ता है ।।।
उदाहरण के तौर पर शनि वैराग का कारक ग्रह है और कुंडली में वह बेहद राज योग कारक हो जैसे वृषभ लग्न और तुला लग्न की कुंडली और शनि की महादशा चल रही हो, तो बेहद राज योग कारक होने के बाद भी चुकी शनि की प्रवृत्ति अकेलापन और वैराग है तो वह अपना मूल प्रभाव राजयोग होने के बावजूद देगा।।।
गुरु बेहद संवेदनशील और सौम्य ग्रह है, धार्मिक प्रवृत्ति और ब्राह्मण ग्रह है...
तो कुंडली में अनिष्टकारी होने के बावजूद भी गुरु की महादशा में वह अपना मूल सिद्धांत धार्मिकता और सौम्यता जरूर रखेगा ।।।
और सभी ग्रह अपना पूरा प्रभाव महादशा में देते हैं ।।
जैसा हमने पहले भी कहा की दशा, दिशा तय करती हैं ।।।
कुंडली में अगर योग कारक ग्रह पंचमेश, भाग्येश , दशमेश लग्नेश की महादशा चले तो जीवन में सुख शांति संपन्नता रहती है ।।।
वही जीवन में अगर अनिष्टकारी ग्रह की महादशा षष्ठेश अष्टमेश और मारकेश ग्रह के महादशा चले तो जीवन में रोग , विपत्ति दुख और चिंता आती है ।।।
प्रकृति खुद बताती है कि वह परिवर्तनशील है, आज कडाके की ठंड है , तो चंद महीने के पश्चात प्रचंड गर्मी भी आएगी ।।
जिस सूर्य की धूप के लिए आज ठंड में लोग इंतजार कर रहे हैं चंद महीने के पश्चात इसी धूप को कोसा जाएगा, और इसी सूर्य की गर्मी से बच के पंखों और कुलर में जाया जाएगा ।।
1 वर्ष कभी एक समान नहीं रहता कभी सर्द, कभी गर्म, कभी पतझड़ तो कभी बसंत कभी बरसात ...
यहां तक एक दिन भी एक समान नहीं रहता कभी सुबह कभी दोपहर कभी शाम तो कभी रात ।।।
इसी तरह परिस्थिति भी एक समान नहीं रहती, कभी दुख तो कभी सुख.... महादशा बदलती रहती है और अपना प्रभाव दिखाती रहती है
और जीवन के रंग मंच पर लोग अपना किरदार निभाते हैं और चले जाते हैं ।।।
भूमि विवाद, जमीन विवाद, पति-पत्नी क्लेश ,आपसी मतभेद दुख रोग चिंता सभी यहीं छूट जाती है ।।।
दो भाइयों में एक जमीन के टुकड़ी को लेकर विवाद था, और विवाद भी ऐसा की दो सगे भाई आपस में बात तक नहीं करते थे, समय आया दोनों भाई पृथ्वी से विदा लिए जमीन यहीं रह गई दोनों सगे भाई चले गए ।।।
अब उस जमीन के लिए दोनों भाइयों के बेटे आपस में लड़ रहे हैं , कल अगली पीढ़ी लड़ेंगी ...जमीन यही रहेगी , पीढ़ी दर पीढ़ी धीरे-धीरे विदा होती जाएगी ।।।
शनि और राहु की महादशा चले तो ऐसे प्रारब्ध विशेष कर बढ़ जाते हैं ।।।
सतयुग में धर्म चार पायों पर थी...
त्रेता युग में धर्म तीन पाये पर थे...
द्वापर युग में धर्म दो पायों पर...
और आज कलयुग में धर्म केवल एक पाया पर खड़ी है बाकी तीन पाया अधर्म पर है ।।।
कलयुग प्लास्टिक युग में सिमट गई है, जहां रिश्ते से लेकर खाने तक सभी प्लास्टिक हैं ।।।
और प्लास्टिक का कारक राहु है इसलिए कलयुग पर राहु का वर्चस्व माना जाता है ।।।
सतयुग में लोग सोने के थाली में खाना खाया करते थे..
त्रेता में चांदी के थाली का प्रचलन हुआ...
द्वापर में कांसे के थाली का ...
और आज कलयुग में प्लास्टिक के थाली पर खाना खाया जाता है ।।।
सतयुग में लोग 50 हजार वर्ष जीते थे ..
त्रेता में लोग 10 हजार वर्ष वर्ष जीते थे ...
द्वापर में 1000 वर्ष ...
और आज कलयुग में आयु 65 से 70 वर्ष पर सिमट गई है ।।।
सतयुग पर देवगुरु बृहस्पति का प्रभाव था, तो आज कलयुग पर राहु का प्रभाव है ।।।
एक घर में रहकर पति-पत्नी के बीच करोड़ों का फैसला है
सभी रिश्ते नकली हैं
सबके हाथ में कीमती मोबाइल है, सब की कॉलिंग फ्री है पर बातचीत किसी को किसी से नहीं है ।।।
रिश्ते से लेकर खान-पान सब में मिलावट है, सामान्य भोजन चावल दाल रोटी से हटकर लोग पिज़्ज़ा बर्गर जैसे जहर खा रहे हैं ।।।
मैदा और चीनी जैसे सफेद जहर खाया जा रहा है ।।
मन दुषित ,भोजन दूषित, वायु दुषित,इंसान किस दौर में जी रहा है शायद उसे पता भी नहीं ।।।
और कलयुग में जितने भी चीज हैं, एंड्राइड मोबाइल, बाहरी खान-पान, पेट की समस्या, दुषित जलवायु, दूषित भोजन, सबके ऊपर अशुभ राहु का प्रभाव है ।।
दिखावटी जीवन, कर्ज लेकर घी पीने की आदत से हर व्यक्ति परेशान है ।।
यथार्थ जीवन छोड़कर सभी अंधेरे में चिरकाल के लिए भटक रहे हैं ।।।
तेज गति से वाहन चलाना, कम उम्र में बच्चों के हाथ में मोबाइल युवा बुरी तरीके से भटक चुके हैं ।।
और जवानी में ही बुढ़ापे का आनंद ले रहे हैं ।।।
40 से 45 वर्ष के जातकों का तो यह हाल है कि उनकी शक्ति क्षीण हो चुकी है और वह अपने जीवन को जी नहीं ढो रहे हैं ।।
पारिवारिक जिम्मेदारी और कर्ज तले इस कदर दबे हैं कि उनकी कमर टूट चुकी है ।।
और जब इतनी परेशानी हो तो इसका प्रभाव सेहत पर नजर आता है बस यही कारण है कि कलयुग में आयु 60 -65 तक सिमट गई है ।।।
अब इसका उपाय है... आवश्यकता कम कीजिए, दिखावटी जीवन जीना बंद कीजिए , यथार्थ पर चलिए, और सामान्य जीवन और ईमानदारी के साथ जीवन जीना सीखिए ।।।
बंद कमरे में भी लड्डू रखेंगे तो चींटी खोज कर आ ही जाएगी
लड्डू को खुला छोड़ना चींटी को खुला निमंत्रण है ।।।
ठंड में खाली बदन भ्रमण करना ठंड मारने को खुली चुनौती है ।।।
गर्मी को दिनों में धूप में घूमना लू मारने को खुली चुनौती है ।।
इसी प्रकार तेज वाहन चलाना, शराब पीना, चरित्र खराब करना , दूसरे के हक को मारना , इर्ष्या करना, द्वेष करना, बेईमानी करना, राहु और शनि के दुष्प्रभाव को खुली चुनौती है ।।
बस एक महीना अपने दिनचर्या को बदल के पूरी ईमानदारी के साथ जीवन जीकर देखिए राहु और शनि आपका बाल भी बांका नहीं करेंगे ।।।
Er. Bibhash Mishra
Research Scholar
Astrologer Consultant