समर्पण : एक सेवा भाव

समर्पण : एक सेवा भाव Kind nature &

Doctor by profession

सामान्य वायरल बुख़ार और खांसी ज़ुकाम में एंटीबायोटिक के उपयोग से , इन दवाओं का असर धीरे धीरे कम होता जा रहा है , एंटीबाय...
26/11/2025

सामान्य वायरल बुख़ार और खांसी ज़ुकाम में एंटीबायोटिक के उपयोग से , इन दवाओं का असर धीरे धीरे कम होता जा रहा है , एंटीबायोटिक लोग ,OTC ड्रग ( बिना सलाह ) के खा रहे है , आजकल तो colistin/ ferropenem/lizomac का ट्रेंड चल रहा है , लोग वायरल डाइरिया/बुख़ार और खांसी जुकाम में इतनी बड़ी बड़ी एंटीबायोटिक खा रहे है , मैं ख़ुद डॉक्टर होके परेशान हो जाता हूँ जब मरीज मेरे पास ये दवायें लेके आता है और कहता है सर आराम नहीं लग रहा है , एंटीबायोटिक बदल ले !! बाहर हर आदमी डॉक्टर बन के बैठा है और दवाई , राशन की तरह बिक रही है तो ऐसे ही दवाओ का असर कम हो जाएगा ।।
मेडिकल कॉलेज के जितने हॉस्पिटल है वहाँ ही एंटीबायोटिक का प्रोटोकॉल सही से फ़ॉलो होता है ।। बिना डॉक्टर की सलाह बिना एंटीबायोटिक का इस्तेमाल ना करें. जनहित में जारी 😀

Cervical cancer गर्भाशय में होने वाला कैंसर है।ये विश्व भर में महिलाओं में होने वाला चौथा सबसे बड़ा कैंसर है और भारत में...
26/10/2025

Cervical cancer गर्भाशय में होने वाला कैंसर है।

ये विश्व भर में महिलाओं में होने वाला चौथा सबसे बड़ा कैंसर है और भारत में हर साल क़रीब 1,20,000 महिलाएँ इससे ग्रसित होती हैं।

सामान्यतः ये एक वायरस जिसे HPV कहते हैं उसके कारण होता है।
HPV एक काफ़ी सामान्य वायरस है और ज़्यादातर महिलाओं को कभी ना कभी इस वायरस से इन्फेक्शन होता है।

इसीलिए HPV वायरस से इन्फेक्शन होने का मतलब cervical कैंसर हो जाना नहीं है।
लेकिन जिन महिलाओं के शरीर की प्रतिरोधक क्षमता कम होती है उनमें ये वायरस का इन्फेक्शन कैंसर का रूप ले सकता है।

ये कैंसर उनको भी हो सकता है जिनके सिर्फ़ एक sexual partner हो ।
लेकिन अगर multiple sexual partner हो या किसी ऐसे पुरुष के साथ sexual relation है जिसके मल्टीपल sexual पार्टनर हैं तो cervical कैंसर होने की संभावना बढ़ जाती है।

लक्षण:
पीरियड्स के बीच में या menopause के बाद भी अगर काफ़ी ब्लीडिंग हो।
अगर vaginal discharge बढ़ गया हो या उससे दुर्गंध आये।
पेशाब करने के दर्द हो या कभी कभी उसमें खून आये।

ऐसे लक्षण अगर हों तो अपने gynaecologist से ज़रूर मिलें।

चूँकि HPV की वैक्सीन उपलब्ध है इसलिये 9-14 उम्र में इसकी वैक्सीन लगवा लेनी चाहिये।

30 वर्ष उम्र के बाद कम से कम हर 5 साल में इसकी जाँच करानी चाहिये।

शुरुआती स्तर में अगर पता चल जाये तो ये पूरी तरीक़े से ठीक हो सकता है।

भारत में क़रीब हर साल 65000 मृत्यु cervical कैंसर की वजह से होती है।

जागरूकता फैलाने के कई तरीक़े हैं।
इनमें सबसे निम्नतम तरीक़ा है पब्लिसिटी के लिये अपने मृत्यु का ढोंग करना क्योंकि ऐसा करना उन तमाम महिलाओं का उपहास करना है जो उस गंभीर बीमारी से जूझ रही हैं।

गुर्दे (किडनी) को स्वस्थ रखने और बीमारी से बचाने के लिए कुछ टिप्स – 1. पर्याप्त पानी पिएं – दिन भर में 7–8 गिलास (जरूरत ...
25/10/2025

गुर्दे (किडनी) को स्वस्थ रखने और बीमारी से बचाने के लिए कुछ टिप्स –
1. पर्याप्त पानी पिएं – दिन भर में 7–8 गिलास (जरूरत और मौसम के अनुसार)।
2. नमक कम करें – ज्यादा नमक से ब्लड प्रेशर और किडनी दोनों पर असर पड़ता है।
3. ब्लड प्रेशर और शुगर कंट्रोल रखें – डायबिटीज़ और हाई BP किडनी खराब होने के बड़े कारण हैं।
4. धूम्रपान और शराब से बचें – ये किडनी पर अतिरिक्त बोझ डालते हैं।
5. पेन किलर दवाइयों का ज्यादा इस्तेमाल न करें – बार-बार दर्द की दवा (NSAIDs) से किडनी को नुकसान होता है।
6. संतुलित आहार लें – ताजे फल, हरी सब्ज़ियां, साबुत अनाज ज़्यादा लें। तैलीय और पैकेज्ड खाने से बचें।
7. वजन नियंत्रित रखें – मोटापा किडनी और हार्ट दोनों के लिए हानिकारक है।
8. नियमित जांच कराएं – अगर आपको डायबिटीज़, हाई BP या फैमिली हिस्ट्री है तो हर 6–12 महीने में किडनी टेस्ट ज़रूर कराएं।
9. एक्टिव रहें – रोज़ाना 30 मिनट वॉक या हल्का व्यायाम किडनी और शरीर दोनों को स्वस्थ रखता है।
10. संक्रमण को नजरअंदाज न करें – बार-बार पेशाब की तकलीफ या सूजन जैसी समस्या हो तो तुरंत डॉक्टर से मिलें।

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प्लेसिबो इफेक्ट क्या है?, जिसे आप अपनी स्थानीय भाषा में 'अपने विश्वास की शक्ति से स्वस्थ होने की क्षमता' कह सकते हैं। यह...
24/10/2025

प्लेसिबो इफेक्ट क्या है?, जिसे आप अपनी स्थानीय भाषा में 'अपने विश्वास की शक्ति से स्वस्थ होने की क्षमता' कह सकते हैं। यह एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमें हमारा मस्तिष्क हमारे शरीर को स्वस्थ बनाने में मदद करता है, बशर्ते हमें अपनी बीमारी पर विजय पाने का विश्वास हो।

वैज्ञानिकों का मानना है कि सिर्फ यकीन करने
और हार न मानने की प्रवृत्ति से भी शरीर कई बार खुद को ठीक कर लेता है।
और इसे ही विज्ञान की भाषा मे
प्लेसिबो इफेक्ट कहा जाता है।

जब हम किसी इलाज या दवा पर विश्वास करते हैं तो हमारा दिमाग हार्मोन और न्यूरोट्रांसमीटर छोड़ता है
जो दर्द कम करने,
प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत करने
और शरीर की स्व-उपचार क्षमता बढ़ाने में मदद करता है।

यानी दिमाग में सच में एक तरह का छुपा हुआ डॉक्टर होता है, जो हमारी सोच और यकीन के आधार पर शरीर को स्वस्थ बनाने में भूमिका निभाता है।
तभी तो कई बार कोई इंसान बड़ी बड़ी दवा दारू से ठीक नहीं होता पर किसी बाबा ओझा के पास से थोड़ी भभूति खिलाते ही बीमारी गायब हो जाती है।

वास्तव में असर उस झाड़ फूँक में नहीं मान्यतों के
प्रति व्यक्ति के अंदर छिपे दृढ़ विश्वास में होता है।

तभी तो किसी बीमार व्यक्ति से मिलने जाने पर उसे हर कोई आत्मविश्वास बनाये रखने और बीमारी से लड़ने के लिए हिम्मत देने वाली सकारात्मक बातें कहता है।
ताकि उसके मन का बल बना रहे....।

इस बच्चे के एक हाथ में यूरिन बैग है, दूसरे में बिस्किट का पैकेट। ये अपनी 'डायलेसिस' का इंतज़ार कर रहा है!!इसी जगह 7 साल ...
18/10/2025

इस बच्चे के एक हाथ में यूरिन बैग है, दूसरे में बिस्किट का पैकेट। ये अपनी 'डायलेसिस' का इंतज़ार कर रहा है!!
इसी जगह 7 साल के एक दूसरे बच्चे को "जुवेनाइल डायबिटीज़" है, जो दिन में 3 दफ़े इंसुलिन लेता है!!
यहीं एक 6 साल की बच्ची को तैयार करते हुए उसकी माँ ने कहा,
"जब पैदा हुई थी, 650 ग्राम की थी, छोटी-सी... डॉक्टर ने कहा था — बचेगी नहीं।
पहले दो दिन वो जितनी दफ़े सांस लेती, मैं उसकी छाती पर उतनी दफ़े हाथ रखती...
आज सुबह से जब से उसे तैयार कर रही हूँ, वो दिन याद कर रही हूँ, इसलिए भावुक हो रही हूँ।"

तीनों इसी दुनिया की बातें हैं... असल बातें...!!!

दुनिया में कितने ऐसे लोग हैं, जो खामोशी से अपने हिस्से की लड़ाई लड़ रहे हैं —
उन चीज़ों के लिए जिनकी नेमत हमको, आपको हासिल है,
फिर भी वे तल्ख नहीं हैं, नाराज़ नहीं हैं...
और हम ज़िंदगी में कितना समय बेफ़ज़ूल के गरूर और तल्ख़ी में जाया कर देते हैं...!!

मकसद बस इतना कि यह पोस्ट पढ़ी जानी चाहिए, समझी जानी चाहिए!!
कभी अस्पताल भी आकर देखा करें — असली लड़ाई लड़ते मरीज़॥

बच्चों में खूनी दस्त एक गंभीर स्थिति है, लेकिन इसका इलाज संभव है। इसके कई कारण हो सकते हैं, और यह आमतौर पर किसी संक्रमण ...
02/10/2025

बच्चों में खूनी दस्त एक गंभीर स्थिति है, लेकिन इसका इलाज संभव है। इसके कई कारण हो सकते हैं, और यह आमतौर पर किसी संक्रमण या अन्य स्वास्थ्य समस्या का संकेत होता है। बच्चों में खूनी दस्त के आम कारण वायरल या जीवाणु संक्रमण, एलर्जी या खाद्य असहिष्णुता, और सूजन आंत्र रोग हैं। जल्दी उपचार शुरू करने से बच्चे की सेहत में सुधार लाया जा सकता है। डॉक्टर को कब दिखाना चाहिए: यदि दस्त 48 घंटे से अधिक समय तक रहता है या बिगड़ जाता है। यदि बच्चे को निर्जलीकरण के लक्षण दिखाई देते हैं। यदि बच्चे को तेज बुखार है, खासकर तीन महीने से कम उम्र के शिशुओं में। यदि मल में खून अधिक मात्रा में है या काले रंग का है।

22/06/2025

स्वास्थ्य जागरूकता वीडियो: “डायबिटीज़ का सही नियंत्रण – सिर्फ दवा नहीं, जीवनशैली भी ज़रूरी”

अगर आप या आपके परिवार में कोई डायबिटीज़ (शुगर) से पीड़ित है, तो ये जानकारी आपके लिए बेहद ज़रूरी है।

🍛 1. सिर्फ दवा नहीं, परहेज़ और एक्सरसाइज़ भी ज़रूरी है
डायबिटीज़ को सिर्फ दवा से कंट्रोल नहीं किया जा सकता।
खानपान में परहेज़, वज़न नियंत्रण, और नियमित व्यायाम भी उतने ही ज़रूरी हैं।
अगर कोई व्यक्ति दवा ले रहा है लेकिन खाने में कोई परहेज़ नहीं कर रहा — तो उसकी दवा की मात्रा बढ़ानी पड़ सकती है। और अंत में इंसुलिन का इंजेक्शन भी ज़रूरी हो सकता है।


क्या खाना है और क्या नहीं?

✅ क्या खाएं:
हरी पत्तेदार सब्जियाँ,सलाद (ककड़ी, टमाटर, मूली आदि), दालें और अंकुरित अनाज,मोटा अनाज (जैसे जौ, चना, बाजरा) — सीमित मात्रा में , लो ग्लाइसेमिक इंडेक्स वाले फलों (eg- सेब, अमरूद, नाशपाती) को सीमित मात्रा में ही खाना चाहिए

❌ क्या न खाएं:
ज्यादा चावल या एक बार में ज़्यादा रोटियाँ,मिठाइयाँ, शक्कर, कोल्ड ड्रिंक, और पैक्ड जूस, मैदे से बनी चीज़ें, बिस्किट, नमकीन

खाने का तरीका
एक बार में बहुत सारा खाना खाने के बजाय, दिन में 3–4 बार थोड़ा-थोड़ा खाएं, खाना और दवा समय पर लें
एक्सरसाइज़ ज़रूरी है
दिन में कम से कम 30 मिनट तेज़ चलना, योग ज़रूर करें
इससे शुगर कंट्रोल में रहती है और वजन भी ठीक रहता है

नियमित जाँच
हर 3 महीने में एक बार HbA1c या ब्लड शुगर टेस्ट ज़रूर करवाएं..इसी आधार पर डॉक्टर आपकी दवा की मात्रा कम या ज़्यादा करते हैं

निष्कर्ष
👉 दवा, परहेज़, और एक्सरसाइज़ — ये तीनों मिलकर ही डायबिटीज़ को काबू में रखते हैं।
👉 ध्यान रखें, डायबिटीज़ एक जीवनशैली की बीमारी है — इसे कंट्रोल किया जा सकता है, बस सही जानकारी और थोड़ी समझदारी की ज़रूरत है।

04/02/2024

Cervical cancer गर्भाशय में होने वाला कैंसर है।

ये विश्व भर में महिलाओं में होने वाला चौथा सबसे बड़ा कैंसर है और भारत में हर साल क़रीब 1,20,000 महिलाएँ इससे ग्रसित होती हैं।

सामान्यतः ये एक वायरस जिसे HPV कहते हैं उसके कारण होता है।
HPV एक काफ़ी सामान्य वायरस है और ज़्यादातर महिलाओं को कभी ना कभी इस वायरस से इन्फेक्शन होता है।

इसीलिए HPV वायरस से इन्फेक्शन होने का मतलब cervical कैंसर हो जाना नहीं है।
लेकिन जिन महिलाओं के शरीर की प्रतिरोधक क्षमता कम होती है उनमें ये वायरस का इन्फेक्शन कैंसर का रूप ले सकता है।

ये कैंसर उनको भी हो सकता है जिनके सिर्फ़ एक sexual partner हो ।
लेकिन अगर multiple sexual partner हो या किसी ऐसे पुरुष के साथ sexual relation है जिसके मल्टीपल sexual पार्टनर हैं तो cervical कैंसर होने की संभावना बढ़ जाती है।

लक्षण:
पीरियड्स के बीच में या menopause के बाद भी अगर काफ़ी ब्लीडिंग हो।
अगर vaginal discharge बढ़ गया हो या उससे दुर्गंध आये।
पेशाब करने के दर्द हो या कभी कभी उसमें खून आये।

ऐसे लक्षण अगर हों तो अपने gynaecologist से ज़रूर मिलें।

चूँकि HPV की वैक्सीन उपलब्ध है इसलिये 9-14 उम्र में इसकी वैक्सीन लगवा लेनी चाहिये।

30 वर्ष उम्र के बाद कम से कम हर 5 साल में इसकी जाँच करानी चाहिये।

शुरुआती स्तर में अगर पता चल जाये तो ये पूरी तरीक़े से ठीक हो सकता है।

भारत में क़रीब हर साल 65000 मृत्यु cervical कैंसर की वजह से होती है।

जागरूकता फैलाने के कई तरीक़े हैं।
इनमें सबसे निम्नतम तरीक़ा है पब्लिसिटी के लिये अपने मृत्यु का ढोंग करना क्योंकि ऐसा करना उन तमाम महिलाओं का उपहास करना है जो उस गंभीर बीमारी से जूझ रही हैं।

09/12/2023

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Naya Tola Bihari Behind DM Residence
Jamui
811307

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Monday 8am - 6pm
Tuesday 8am - 6pm
Wednesday 8am - 6pm
Thursday 8am - 6pm
Friday 8am - 6pm
Saturday 8am - 6pm
Sunday 8am - 5pm

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