05/03/2022
ग्लूकोमा या काला मोतियाबिंद (Glaucoma) एक ऐसा नेत्र रोग है, जिसके इलाज में लापरवाही बरतने पर सदैव के लिए रोशनी जा सकती है। आंखों की अन्य बीमारियों में खोई हुई रोशनी इलाज से वापस भी लाई जा सकती है, लेकिन काला मोतिया में आंखों की रोशनी का आना मुश्किल होता है। सामान्य तौर पर 35 वर्ष से अधिक आयु के लोगो में यह बीमारी ज्यादा पाई जाती है। अगर शुरू में ही इसकी पहचान हो जाए तो ग्लूकोमा से होने वाले अंधेपन से मरीजों को बचाया जा सकता है।
6 मार्च से 12 मार्च तक चलने वाला विश्व ग्लूकोमा सप्ताह (World Glaucoma Week 2022) भी पूरी दुनिया में मनाया जा रहा है। ग्लूकोमा सप्ताह का इस वर्ष का विषय यह दर्शाता है की आंखों के नियमित परीक्षण के साथ, लोग अपने आस-पास का सौंदर्य, आकर्षण एवं रोमांच से भरपूर दुनिया को देखना जारी रख सकते हैं। दुनिया उज्ज्वल है, अपनी दृष्टि बचाए और समय रहते अपनी आंखों की जांच कराए।
#07 मार्च से 12 मार्च तक निशुल्क नेत्र जांच शिविर में
👁️आपका अपना आँख अस्पताल👁️🏥
आई केयर आई हॉस्पिटल एण्ड रिसर्च सेंटर
डॉ. राजेश मेहता
IOL Microsurgery & Phaco specialist
M.B.B.S., M.D., D.O.M.S (opht.)
कोर्ट रोड जमुई जिला कांग्रेस ऑफिस के बगल में (स्व. त्रिपुरारी सिंह स्मारक के सामने)
ग्लूकोमा को आम भाषा में काला मोतिया या समलबाई भी कहते हैं यह प्रतिबर्ष 12 मार्च को मनाया जाता है यह रोग ऑप्टिक तंत्रिका (²ष्टि के लिए उत्तरदायी तंत्रिका) में गंभीर एवं निरंतर क्षति करते हुए धीरे-धीरे दृष्टि को समाप्त कर देता है। यदि इस रोग का उपचार न किया जाए तो व्यक्ति अंधा भी हो सकता है। अन्य महत्वपूर्ण कारकों में से एक कारक आंखों के दबाव का बढ़ना है, लेकिन किसी व्यक्ति में आंख का सामान्य दबाव रहने पर भी मोतिया¨बद विकसित हो सकता है इस सप्ताह का मुख्य उद्देश्य ऑप्टिक तंत्रिका परीक्षण के साथ लोगों को नियमित आंखों की जांच के लिए प्रोत्साहन देकर ग्लूकोमा से होने वाले अंधेपन को समाप्त करना है। यह बताया गया है, कि किसी व्यक्ति को जीवनपर्यंत ग्लूकोमा का ज़ोखिम लगभग 2.3% होता है, फस्ट डिग्री रिलेटिव (एफडीआर) से पीड़ित ग्लूकोमा रोगी में ग्लूकोमा के ज़ोखिम में दस गुना वृद्धि हो जाती है। इसलिए, ग्लूकोमा के लिए एफडीआर को जागरूक करने की आवश्यकता है, जिससे उन्हें (एफडीआर से पीड़ित बहुत सारे लोगों को) ऑप्टिक तंत्रिका की जांच सहित ग्लूकोमा परीक्षण द्वारा अंधेपन से बचाया जा सकता है।
ग्लूकोमा शब्द का उपयोग आंखों के सामूहिक रोगों को उजागर करने के लिए किया जाता है, जिसे ऑप्टिक तंत्रिका (दृष्टि के लिए उत्तरदायी तंत्रिका) की प्रगतिशील और अपरिवर्तनीय क्षति से जाना जाता है, जो कि धीरे-धीरे दृष्टि समाप्त कर देता है। महत्वपूर्ण कारकों में से एक आंखों पर दवाब का बढ़ना है, लेकिन आंखों के सामान्य दवाब से पीड़ित व्यक्ति में ग्लूकोमा विकसित हो सकता है। डब्लूएचओ के अनुसार, ग्लूकोमा कई प्रकार का होता हैं, हालांकि, दो सबसे सामान्य प्रकार हैं, पहला ओपेन एंगल ग्लूकोमा (पीओजी) है, जिसमें धीमी और घातक शुरुआत होती है तथा क्लोज एंगल ग्लूकोमा (एसीजी) है, जो कि कम सामान्य है और एकदम (एक्यूट/तीव्र) से हो जाता है।
#ओपेन एंगल ग्लूककोमा◆◆
जब कभी आंखों के बढ़े प्रेशर के चलते आंख की ऑप्टिक नर्व खराब हो जाती है और उसके चलते नजर खराब होती है तो उसे ओपन ऐंगल ग्लूकोमा कहा जाता है। इसमें धीरे-धीरे नजर कमजोर होती जाती है। इसमें तरल पदार्थ को सूखाने वाली कनैल ब्लॉक हो जाती है जिससे आंखों का प्रेशर बढ़ जाता है।
#क्लोज एंगल ग्लूलकोमा◆◆
इस प्रकार के ग्लूकोमा में एक्वस ह्यूमर (एक प्रकार का तरल पदार्थ जो आंखों को पोषण देता है) का प्रवाह एकदम से रुक जाता है। तेज सिरदर्द, दिखाई देना बंद होना, आंखें लाल होना, उल्टी और चक्कर आना, धुंधलापन आने की शिकायत होती है। यदि इस समय लापरवाही बरती जाए तो एंगल्स पूरी तरह से बंद हो जाते हैं।
विश्व में #ग्लूकोमा अंधेपन का दूसरा सबसे सामान्य कारण है। डब्ल्यूएचओ के अनुमान के अनुसार ग्लूकोमा के कारण 4.5 मिलियन लोग अंधेपन से पीड़ित हैं। भारत में ग्लूकोमा अपरिवर्तनीय अंधेपन का प्रमुख कारण है, जिससे कम से कम बारह मिलियन लोग प्रभावित हैं और 1.2 मिलियन लोग इस बीमारी से अंधे हो जाते हैं। समुदाय में नब्बे प्रतिशत से अधिक मामलों में ग्लूकोमा का पता नहीं चलता है। उम्र के साथ ग्लूकोमा की संभावना बढ़ जाती है।
ग्लूकोमा की रोकथाम के बारे में कम जानकारी है, हालांकि, ग्लूकोमा से दृष्टि हानि रोकने के लिए शुरुआत में पता लगाना और उपचार करना सबसे बेहतर उपाय है।
ज़ोखिम के कारक:
#आँख पर उच्च आंतरिक दबाव (इंट्राकुलर दबाव)।
#साठ वर्ष से अधिक आयु।
#पारिवारिक इतिहास।
#मधुमेह, हृदय रोग, उच्च रक्तचाप और सिकल सेल एनीमिया जैसी कुछ चिकित्सीय स्थितियां।
#आंख की कुछ स्थितियां जैसे कि मायोपिआ या दूर तक न देख सकना।
कुछ निश्चित प्रकार की नेत्र शल्य चिकित्सा।
#लंबे समय के लिए कॉर्टिकॉस्टिरॉइड दवाएं जैसे कि विशेष रूप से आई ड्राप का उपयोग करना।