04/01/2026
#इंसानी_दिमाग_अल्लाह_की_कुदरत_का_हैरतअंगेज़_शाहकार
नीचे दी गई तस्वीर में आप दिमाग़ का नक़्शा देख रहे हैं, उसे हिप्पोकैम्पस कहा जाता है। (जहाँ यादें बनती और सुरक्षित होती हैं) हरे रंग में दिखाया गया है। माहिरीन के मुताबिक इंसान के दिमाग़ में याददाश्त की जो सलाहीयत है, वह क़रीब 2.5 पेटाबाइट्स (25 लाख GB) तक होती है! यानी इसके अंदर ऐसा ख़ज़ाना छुपा है कि उसमें 30 लाख घंटे की वीडियो रिकॉर्ड हो सकती है, जिसे कोई शख़्स लगातार 300 साल तक देखता रहे... फिर भी ख़त्म ना हो।
ज़रा सोचिए… इतनी बे-मिसाल मशीनरी ना कोई वायर, ना कोई चार्जर, ना कोई चाबी लेकिन चलती भी है, याद रखती भी है और भूलती भी है, वो भी उसी ख़ालिक़ के हुक्म से जिसने इसे पैदा किया। #सुब्हानल्लाह!
وَفِيْٓ أَنْفُسِكُمْ ۛۚ أَفَلَا تُبْصِرُوْنَ
“और तुम्हारी अपनी जानों में (भी) उसकी निशानियाँ हैं, क्या तुम देखोगे नहीं?”
और वही फ़रमाता है: فَبِاَىِّ اٰلَاۤءِ رَبِّكُمَا تُكَذِّبٰنِ
"तो ऐ जिनों और इंसानों! तुम अपने रब की कौन कौन सी नेमत को झुठलाओगे?" [55:18]
अब्दुल वहीद
आयुर्वेद (एण्ड) हिज़ामा