Abdul Waheed hijama specialist jarwal kasba

Abdul Waheed hijama specialist jarwal kasba Abdul Waheed Ayurved (And) Hijama Specialist

टॉन्सिल क्यो‍ं होता है? टॉन्सिल गले में सूजन या इंफेक्शन होने से होता है। यह ज़्यादातर वायरल या बैक्टीरियल इंफेक्शन, ठंड...
22/11/2025

टॉन्सिल क्यो‍ं होता है?
टॉन्सिल गले में सूजन या इंफेक्शन होने से होता है। यह ज़्यादातर वायरल या बैक्टीरियल इंफेक्शन, ठंडी चीज़ें ज्यादा खाने, गंदे पानी–खाने, या धूल-मिट्टी से एलर्जी के कारण बढ़ जाता है।

टॉन्सिल के घरेलू इलाज (सरल व असरदार)

1. गुनगुने नमक पानी से गरारे

गले की सूजन कम करता है और बैक्टीरिया खत्म करता है।
➡️ 1 गिलास गर्म पानी + ½ चम्मच नमक – दिन में 2–3 बार गरारे।

2. हल्दी वाला दूध

सूजन और संक्रमण में जल्दी राहत।
➡️ 1 गिलास गर्म दूध + ½ चम्मच हल्दी – रात में पिएँ।

3. तुलसी–शहद

इम्युनिटी बढ़ाती है और गले को आराम देती है।
➡️ 5–7 तुलसी पत्ते उबालें, छानकर शहद मिलाकर पिएँ।

4. अदरक–शहद

गले की जलन और दर्द में फायदेमंद।
➡️ 1 चम्मच अदरक रस + 1 चम्मच शहद – दिन में 2 बार।

5. गर्म भाप (Steam)

गले की सूजन कम करता है।
➡️ 5 मिनट हल्की भाप दिन में 1–2 बार।

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कब डॉक्टर को दिखाएँ?

तेज बुखार

3–4 दिन में आराम न मिले

बार-बार टॉन्सिल होना

गले में पस या सफेद दाग

अब्दुल वहीद
आयुर्वेद एण्ड हिज़ामा

पेट का अल्सर क्यों होता है:पेट में एसिड ज्यादा बनने या पेट की परत कमजोर होने से अल्सर बनता है। मुख्य कारण हैं H. pylori ...
21/11/2025

पेट का अल्सर क्यों होता है:
पेट में एसिड ज्यादा बनने या पेट की परत कमजोर होने से अल्सर बनता है। मुख्य कारण हैं H. pylori बैक्टीरिया, दर्द की दवाएँ, मसालेदार भोजन, तनाव और धूम्रपान।

अल्सर होने के मुख्य कारण:
H. pylori संक्रमण, दर्दनाशक दवाएँ, खट्टा-तीखा खाना, शराब, धूम्रपान, तनाव, भूखे रहना।

लक्षण:
पेट में जलन, सीने में दर्द, खट्टी डकारें, उल्टी, भूख लगने पर दर्द, काला मल (गंभीर स्थिति)।

इलाज:
एसिड कम करने की दवाएँ, H. pylori के लिए एंटीबायोटिक, मसालेदार भोजन बंद, तनाव कम करना, छोटे भोजन लेना।

घरेलू देखभाल:
खट्टा-तीखा बंद, दूध/दलिया/केला/नारियल पानी, धूम्रपान-शराब बंद, रात में भारी भोजन न लें।

कब डॉक्टर को दिखाएं:
काला मल, खून की उल्टी, तेज़ दर्द, कमजोरी या दवाओं से आराम न मिले।

अब्दुल वहीद
आयुर्वेद एण्ड हिज़ामा

सर्दियों में इम्यूनिटी मजबूत करने के लिए गुनगुना पानी – जानें क्यों जरूरी है!* ठंडा मौसम शरीर की नेचुरल इम्यूनिटी पर डाल...
20/11/2025

सर्दियों में इम्यूनिटी मजबूत करने के लिए गुनगुना पानी – जानें क्यों जरूरी है!

* ठंडा मौसम शरीर की नेचुरल इम्यूनिटी पर डालता है दबाव।
* गुनगुना पानी पीने से शरीर को प्राकृतिक गर्माहट मिलती है और इम्यून सिस्टम पर अतिरिक्त दबाव नहीं पड़ता।
* सर्दियों में प्यास कम लगती है, लेकिन हाइड्रेशन जरूरी है – गुनगुना पानी इम्यून सेल्स को एक्टिव रखता है।
* नाक, गला और श्वास नलिका की म्यूकस मेंब्रेन को मॉइश्चराइज रखता है, जिससे संक्रमण का खतरा कम होता है।
* पाचन को आसान बनाता है, गैस, कब्ज और एसिडिटी की समस्या कम करता है।
* ब्लड सर्कुलेशन सुधारता है – ऑक्सीजन और न्यूट्रिएंट्स शरीर के हर हिस्से तक बेहतर पहुँचते हैं।
* सीधे इम्यूनिटी बूस्ट तो नहीं करता, लेकिन शरीर की सुरक्षा और रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत बनाता है।

अब्दुल वहीद
आयुर्वेद एण्ड हिज़ामा

एटा से दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है।13 साल के बच्चे की चिकनपॉक्स से मौत हो गई—क्योंकि परिवार लक्षण दिखने के बाद भ...
20/11/2025

एटा से दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है।
13 साल के बच्चे की चिकनपॉक्स से मौत हो गई—क्योंकि परिवार लक्षण दिखने के बाद भी उसे अस्पताल नहीं ले गया।
बुखार और दाने आने पर उन्होंने कई दिनों तक झाड़-फूंक कराई, लेकिन हालत बिगड़ती चली गई।
समय पर इलाज न मिलने से मासूम ने रास्ते में ही दम तोड़ दिया।

ऐसी लापरवाही पूरे परिवार को भारी पड़ सकती है।
चिकनपॉक्स मामूली नहीं—इग्नोर किया तो जानलेवा भी बन सकता है।

🧠 चिकनपॉक्स में बरतें ये ज़रूरी सावधानियां

किसी भी तरह की झाड़-फूंक या घरेलू इलाज पर निर्भर न रहें
बुखार + शरीर पर दाने = तुरंत डॉक्टर को दिखाएँ
संक्रमित व्यक्ति के कपड़े, तौलिया, बर्तन शेयर न करें
ढीले, सूती कपड़े पहनें
खुजली को खरोंचें नहीं, डॉक्टर द्वारा बताई दवा/लोशन का इस्तेमाल करें
अधिक पानी, दही, लस्सी, नारियल पानी जैसी ठंडी चीज़ें लें
घर का माहौल साफ और हवादार रखें
स्कूल/काम पर न जाएँ, आराम करें

बच्चे की जान इसलिए गई क्योंकि लक्षण को ‘माता निकलना’ समझकर इग्नोर किया गया।
समय पर इलाज सबसे बड़ा बचाव है।

صرف 21 جڑی بوٹیاں 21 سال تک آپکو مردانہ کمزوری نہیں ہونے دینگیچاہے آپ عمر کے کسی بھی حصے میں ہیں شادی شدہ ہیں یا غیر شاد...
18/11/2025

صرف 21 جڑی بوٹیاں
21 سال تک آپکو مردانہ کمزوری نہیں ہونے دینگی
چاہے آپ عمر کے کسی بھی حصے میں ہیں شادی شدہ ہیں یا غیر شادی شدہ
چاہے آپکا مزاج گرم ہے یا سرد
ہر مزاج ہر عمر پہ کام کرنیوالا یہ زبردست شہنشاہی نسخہ
چاہے بے اولادی کا مسئلہ ہو سپرم کم ہوں سختی ختم ہو چکی ہو نفس میں ڈھیلا پن آ چکا ہوں یا نفس چھوٹا رہ گیا ہو چاہے اعصابی کمزوری ہو یا دل و دماغ کی کمزوری انشاءللہ صرف 40 دن کے استعمال سے ہر طرح کی کمزوری کو گارینٹی سے ختم کر کے ازدواجی معاملات میں خوشیاں بھر دیتا ہے بے پناہ منی پیدا کرتا ہے جریان اح**ام زکاوت حس کو ختم کر کے تباہ شدہ جوانی جوش جزبہ نئے سرے سے پیدا کرتا ہے ۔۔

ھوالشافی

موصلی سفید انڈیا 40 گرام
موصلی سیاہ 40 گرام
کونچ بیج مدبر 40 گرام
بدھاری 40 گرام
سگھاڑے خشک 40 گرام
ستاور 40 گرام
مغز تمر ہندی 40 گرام
عقرقرحا مراکش 40 گرام
ثعلب مصری 20 گرام
ثعلب پنجہ 20 گرام
ماکا روٹس برازیل 20 گرام
جنسنگ ریڈ 20 گرام
تل سفید 20 گرام
بیج بند 20 گرام
تخم ریحان 20 گرام
خشخاص 20 گرام
ریگ ماہی 20 گرام
مصطگی رومی 20 گرام
جلوتری 20 گرام
زعفران 10 گرام
کوزہ مصری حسب ضرورت
تمام اجزاء اسی مقدار میں لیکر سفوف بنا لیں
صبح و شام ایک ایک چمچ ہمراہ پانی یا دودھ اللہ کا نام لیکر لینا شروع کریں
مدت کورس 45 دن
مکمل 45 دن کے استعمال کے بعد مزکورہ تمام مسائل میں شفاء ہو گی ۔۔۔۔

نوٹ جن حضرات کو تیار شدہ چاہئے وہ ہمارے واٹس پہ رابطہ فرما لیں
088088 58514

गले का कैंसर (Throat Cancer) क्या है?गले का कैंसर गले के ऊतकों में बनने वाले असामान्य और अनियंत्रित सेल्स की वृद्धि को क...
18/11/2025

गले का कैंसर (Throat Cancer) क्या है?
गले का कैंसर गले के ऊतकों में बनने वाले असामान्य और अनियंत्रित सेल्स की वृद्धि को कहते हैं। यह कैंसर मुख्यतः गले की नली (फैरिंक्स) और आवाज़ की पेटी (लैरिंक्स या वॉयस बॉक्स) में होता है। फैरिंक्स वह नली है जो भोजन और हवा को मुँह से ग्रासनली और श्वासनली तक ले जाती है जबकि लैरिंक्स फेफड़ों तक हवा पहुंचाने का रास्ता है और इसमें वोकल कॉर्ड होते हैं। जब इन जगहों की कोशिकाएं खराब होकर ट्यूमर बना लेती हैं, तो गले का कैंसर होता है। यह ट्यूमर निगलने, बोलने और सांस लेने में दिक्कत पैदा कर सकते हैं।

गले के कैंसर के प्रकार:-----

**नासोफैरिंजियल कैंसर: गले के ऊपरी हिस्से में नाक के पीछे शुरू होता है।

**ओरोफैरिंजियल कैंसर: मुँह और टॉन्सिल के पीछे के मध्य भाग में होता है।

**ग्लोटिक कैंसर: आवाज़ की पेटी के अंदर वोकल कॉर्ड में होता है।

**सुप्राग्लोटिक और सबग्लोटिक कैंसर: आवाज़ की पेटी के ऊपरी और निचले हिस्से में होते हैं।

कारण और जोखिम वाले कारक:-----

**धूम्रपान और तम्बाकू सेवन
**अत्यधिक शराब का सेवन
**मानव पैपिलोमावायरस (HPV) संक्रमण

लक्षण:-----
**गले में लगातार खराश या दर्द
**गले या गर्दन में गांठ
**निगलने में कठिनाई
**आवाज का बैठ जाना या बदलाव
**कान में दर्द या सिरदर्द

इलाज:-----
इलाज इस बात पर निर्भर करता है कि कैंसर कितना फैल चुका है। प्रारंभिक अवस्था में सर्जरी या रेडिएशन थेरेपी से ट्यूमर हटाया जा सकता है। उन्नत स्टेज में कीमोथेरेपी और इम्यूनोथेरेपी की जरूरत पड़ सकती है।

गले का कैंसर गंभीर बीमारी है लेकिन समय पर पहचान और इलाज से इसके बेहतर परिणाम मिल सकते हैं। इसलिए लक्षण दिखने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना आवश्यक है।

अब्दुल वहीद
आयुर्वेद एण्ड हिज़ामा

मुंह का कैंसर, जिसे ओरल कैंसर भी कहा जाता है, वह कैंसर है जो मुंह या मुँह की गुहा के किसी भी हिस्से में शुरू होता है। यह...
15/11/2025

मुंह का कैंसर, जिसे ओरल कैंसर भी कहा जाता है, वह कैंसर है जो मुंह या मुँह की गुहा के किसी भी हिस्से में शुरू होता है। यह आमतौर पर होंठ, जीभ, मुंह के नीचे वाले हिस्से, गाल की अंदरूनी सतह, मसूड़े, तालू और गले में हो सकता है।

मुंह के कैंसर के लगभग 90% मामले स्क्वैमस सेल कार्सिनोमा (squamous cell carcinoma) होते हैं, जो मुँह की अंदरूनी सतह की पतली कोशिकाओं से उत्पन्न होता है। इसके अलावा, मुंह के कैंसर में लसीका ग्रंथियों, किडनी, मेलेनोमा और कुछ अन्य प्रकार भी शामिल हो सकते हैं।

मुंह का कैंसर कई कारणों से हो सकता है, जिनमें तंबाकू का सेवन (सिगरेट, बीड़ी, खैनी), अत्यधिक शराब पीना, एचपीवी (HPV) संक्रमण और बार-बार मुँह में चोट या जलन होना शामिल हैं।

इस कैंसर के लक्षणों में मुंह में घाव या गाँठ जो ठीक नहीं होता, मुंह में सफेद या लाल धब्बे, दर्द या निगलने में कठिनाई, और मुंह का खून आना शामिल हो सकते हैं। अगर इसका समय पर पता चल जाए और इलाज शुरू हो जाए तो मुंह का कैंसर सही किया जा सकता है। इलाज में सर्जरी, कीमोथेरेपी, और रेडिएशन थेरेपी शामिल हो सकती हैं।

भारत में मुंह का कैंसर बहुत सामान्य है और यह समय पर इलाज न मिलने पर खतरनाक हो सकता है, इसलिए नियमित दंत चिकित्सक से जांच करवाते रहना महत्वपूर्ण है

अब्दुल वहीद
आयुर्वेद (एण्ड) हिज़ामा

यहाँ मुख्य कैंसर प्रकारों को आयु समूह के अनुसार  प्रस्तुत किया गया है:----** बच्चे और युवक (20 वर्ष से कम): - * ल्यूकेमि...
14/11/2025

यहाँ मुख्य कैंसर प्रकारों को आयु समूह के अनुसार प्रस्तुत किया गया है:----
** बच्चे और युवक (20 वर्ष से कम): -
* ल्यूकेमिया (ब्लड कैंसर)
* लिम्फोमा (हॉजकिन और नॉन-हॉजकिन)
* मस्तिष्क और केंद्रीय तंत्रिका तंत्र के ट्यूमर
* हड्डी के कैंसर (ओस्टियोसारकोमा, ईविंग सारकोमा)
* रेटिनोब्लास्टोमा (आंख का कैंसर)

** युवा वयस्क (20-39 वर्ष): -
* थायरॉयड कैंसरमेलेनोमा (त्वचा का कैंसर)
* टेस्टिकुलर कैंसर (पुरुषों में)
* स्तन कैंसर (महिलाओं में)
* लिम्फोमा
* नरम ऊतक सारकोमा
* गर्भाशय ग्रीवा कैंसर

** मध्यवर्ती आयु वर्ग (40-59 वर्ष): -
* स्तन कैंसर
* कोलोरेक्टल कैंसर (आंत का कैंसर)
* फेफड़े का कैंसर
* गर्भाशय ग्रीवा कैंसर
* थायरॉयड कैंसर

** बुजुर्ग (60 वर्ष और ऊपर): -
* फेफड़े का कैंसर
* प्रोस्टेट कैंसर (पुरुषों में)
* स्तन कैंसर (महिलाओं में)
* कोलोरेक्टल कैंसर
* अग्न्याशय (पैनक्रियाज) कैंसर
* मूत्राशय कैंसर
* मेलेनोमा

आयु के साथ कैंसर का जोखिम बढ़ता है, और अलग-अलग आयु वर्गों में विभिन्न प्रकार के कैंसर अधिक आम होते हैं।

इसमें प्रमुख कैंसर प्रकारों को उनके संबंधित आयु समूहों के साथ दिखाया गया है।यह जानकारी भारत और विश्व में कैंसर के सामान्य प्रकारों पर आधारित है और स्क्रीनिंग व जागरूकता प्रयासों को मार्गदर्शित करती है।

अब्दुल वहीद
आयुर्वेद (एण्ड) हिज़ामा
जरवल कस्बा जनपद बहराइच उत्तर प्रदेश

ब्लड क्लॉट (Blood Clot) के घरेलू नुस्खे1. लहसुन – रोज सुबह खाली पेट 1-2 कली चबाएं (ब्लड थिनिंग में मददगार)  2. अदरक – अद...
13/11/2025

ब्लड क्लॉट (Blood Clot) के घरेलू नुस्खे

1. लहसुन – रोज सुबह खाली पेट 1-2 कली चबाएं (ब्लड थिनिंग में मददगार)
2. अदरक – अदरक की चाय या कच्चा अदरक रोज खाएं
3. हल्दी – एक गिलास दूध में आधा चम्मच हल्दी मिलाकर रात में पिएं
4. ग्रीन टी – ब्लड सर्कुलेशन सुधारती है और एंटीऑक्सीडेंट देती है
5. दालचीनी – हल्की मात्रा में चाय में मिलाकर लें (खून को पतला करती है)
6. नींबू पानी – सुबह खाली पेट पीने से शरीर डिटॉक्स होता है
7. टमाटर और अनार – खून का प्रवाह बेहतर बनाते हैं
8. हरी सब्ज़ियाँ और ओमेगा-3 युक्त खाद्य पदार्थ लें (जैसे अलसी, मछली)
9. तैलीय, जंक फूड और मीठे पदार्थों से बचें
10. रोजाना 20–30 मिनट टहलें

ब्लड क्लॉट (Blood Clot) का इलाज

1. खून को पतला करने वाली दवाएँ (Blood Thinners) – जैसे Warfarin, Heparin
2. थ्रॉम्बोलिटिक थेरेपी – क्लॉट घोलने के लिए दवाओं का उपयोग
3. कम्प्रेशन सॉक्स – पैरों में रक्त प्रवाह सुधारने के लिए
4. लंबे समय तक बैठने या लेटने से बचें
5. पर्याप्त पानी पिएं ताकि खून गाढ़ा न हो
6. धूम्रपान और शराब से बचें
7. डॉक्टर की सलाह से नियमित ब्लड टेस्ट करवाएं
8. चलने-फिरने की हल्की एक्सरसाइज़ करें
9. गंभीर मामलों में सर्जरी या कैथेटर द्वारा क्लॉट हटाया जा सकता है
10. किसी भी असामान्य सूजन, दर्द या सांस लेने में कठिनाई पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें
11. हर तीन महिने में हिजामा जरूर करवाएं

अब्दुल वहीद
आयुर्वेद (एण्ड) हिज़ामा
सेन्टर जरवल कस्बा जनपद

ब्लैडर कैंसर एक गंभीर बीमारी है जिसमें मूत्राशय (पेशाब की थैली) की परत में असामान्य कोशिकाएं बिना नियंत्रण के बढ़ने लगती...
13/11/2025

ब्लैडर कैंसर एक गंभीर बीमारी है जिसमें मूत्राशय (पेशाब की थैली) की परत में असामान्य कोशिकाएं बिना नियंत्रण के बढ़ने लगती हैं और ट्यूमर बनाती हैं। इसका सबसे आम प्रकार यूरोथीलियल कार्सिनोमा होता है।

ब्लैडर कैंसर के लक्षण----
**पेशाब में खून आना (यह खून आंख से दिख सकता है या माइक्रोस्कोपिक जांच से पता चलता है)।
**बार-बार पेशाब करने की जरूरत महसूस होना।
**पेशाब करते समय जलन या दर्द होना।
**अचानक और तुरंत पेशाब करने की तीव्र आवश्यकता।
**निचले पेट या पीठ के निचले हिस्से में दर्द होना।
**थकान महसूस करना, भूख न लगना और वजन घटना भी हो सकता है।

ब्लैडर कैंसर के कारण----
**पेशाब में मौजूद विषैले पदार्थ, जैसे धूम्रपान (सिगरेट पीना), कैंसर का सबसे बड़ा खतरा है।
**कुछ रसायनों के संपर्क में आना भी जोखिम बढ़ा सकता है।
**बार-बार मूत्र मार्ग में जलन या संक्रमण होना।
**मूत्राशय की पथरी या लंबे समय तक कैथेटर का उपयोग।

रोग पहचान और उपचार-----
ब्लैडर कैंसर का जल्दी पता लग जाना उपचार के लिए फायदेमंद होता है। इसके निदान के लिए पेशाब की जांच, सिस्टोस्कोपी (मूत्राशय की जांच), CT स्कैन आदि किए जाते हैं। उपचार में सर्जरी, कीमोथेरेपी और रेडिएशन थेरेपी शामिल हो सकते हैं।

समय से पहले इलाज से रोग को नियंत्रित किया जा सकता है और जीवन की गुणवत्ता बेहतर होती है। इसलिए पेशाब में खून आना या उपरोक्त लक्षण दिखने पर डॉक्टर से जल्द संपर्क करें।

यह जानकारी ब्लैडर कैंसर की समझ विकसित करने और इसके प्रति सचेत रहने में मदद करेगी.

अब्दुल वहीद
आयुर्वेद एण्ड हिज़ामा
सेन्टर जरवल कस्बा जनपद

यकृत कैंसर (लीवर कैंसर) एक ऐसी बीमारी है जिसमें यकृत (लीवर) की कोशिकाएं असामान्य रूप से बढ़ने लगती हैं और एक गांठ या ट्य...
12/11/2025

यकृत कैंसर (लीवर कैंसर) एक ऐसी बीमारी है जिसमें यकृत (लीवर) की कोशिकाएं असामान्य रूप से बढ़ने लगती हैं और एक गांठ या ट्यूमर बनाती हैं। इसका सबसे सामान्य प्रकार है हेपाटोसेलुलर कार्सिनोमा (HCC), जो लीवर की मुख्य कोशिकाओं (हेपेटोसाइट्स) से शुरू होता है। इसके अलावा चोलैंगियोकार्सिनोमा (पित्त नली का कैंसर) और एंजियोसारकोमा (लीवर की रक्त वाहिकाओं का कैंसर) भी होते हैं।

यकृत कैंसर तब होता है जब लीवर की कोशिकाओं के डीएनए में बदलाव हो जाता है, जिससे वे अनियंत्रित रूप से बढ़ने लगती हैं। इसके प्रमुख कारणों में हेपेटाइटिस बी और सी वायरस का संक्रमण, लीवर सिरोसिस (स्कारिंग), फैटी लीवर रोग, शराब का अधिक सेवन, और कुछ विषाक्त पदार्थ शामिल हैं।

यकृत कैंसर के लक्षण शुरूआती चरण में अक्सर नहीं दिखते, लेकिन बाद में वजन में कमी, भूख की कमी, पेट के ऊपर हिस्से में दर्द या सूजन, पीलिया (त्वचा और आंखों का पीला पड़ना), थकान, मतली, और गहरे रंग का मूत्र हो सकता है।

इसका निदान रक्त परीक्षण, अल्ट्रासाउंड, सीटी स्कैन, एमआरआई और लीवर बायोप्सी के द्वारा किया जाता है।

इलाज में सर्जरी, कीमोथेरेपी, रेडिएशन थेरेपी, टार्गेटेड ड्रग थेरेपी, और लिवर ट्रांसप्लांट जैसी विधियां शामिल हो सकती हैं, जो कैंसर के स्टेज और मरीज की स्थिति पर निर्भर करती हैं।

यकृत कैंसर एक गंभीर बीमारी है, पर समय पर पैमाना लिए जाने पर इलाज संभव है और जीवन प्रत्याशा सुधारी जा सकती है। शुरुआती चरण में इलाज से बेहतर परिणाम मिलते हैं और उन्नत चरण में लक्षणों का प्रबंधन मुख्य होता है।

अब्दुल वहीद
आयुर्वेद (एण्ड) हिज़ामा
सेन्टर जरवल कस्बा जनपद बहराइच उत्तर प्रदेश

सार्कोमा कैंसर मुख्यतः हड्डियों या नरम ऊतकों की कोशिकाओं में जीन में होने वाले उत्परिवर्तनों (म्युटेशन) के कारण होता है,...
12/11/2025

सार्कोमा कैंसर मुख्यतः हड्डियों या नरम ऊतकों की कोशिकाओं में जीन में होने वाले उत्परिवर्तनों (म्युटेशन) के कारण होता है, लेकिन इसके कई कारण हो सकते हैं जो निम्नलिखित हैं:-----

आनुवंशिक कारण---
**कुछ विरासत में मिले सिंड्रोम जैसे ली-फ्रामेनी सिंड्रोम, न्यूरोफाइब्रोमैटोसिस टाइप 1, रेटिनोब्लास्टोमा आदि सार्कोमा के जोखिम को बढ़ाते हैं।
**ये सिंड्रोम जीन में बदलाव लाते हैं जो कोशिकाओं के नियंत्रित विकास को प्रभावित करते हैं।

विकिरण और रसायनों का संपर्क-----
**शरीर को आयनकारी विकिरण (जैसे कैंसर के इलाज में उपयोग होने वाला विकिरण) के संपर्क में आने से बाद में सार्कोमा होने का खतरा बढ़ सकता है।
**कुछ रासायनिक पदार्थ, जैसे प्लास्टिक उद्योग में उपयोग होने वाला विनाइल क्लोराइड और कुछ कीटनाशक, भी जोखिम बढ़ा सकते हैं।

लसीका तंत्र की लंबी सूजन (क्रॉनिक लिम्फ़ेडेमा)----
लसीका द्रव के अवरुद्ध होने या खराब होने से होने वाली सूजन एंजियोसार्कोमा नामक सार्कोमा का खतरा बढ़ाती है।

वायरस का संपर्क-----
**कमजोर प्रतिरक्षा व्यवस्था वाले लोगों में मानव हर्पीसवायरस 8 (HHV8) का संक्रमण कपोसी सार्कोमा का कारण बन सकता है।
**अन्य वायरस भी कुछ प्रकार के सार्कोमा के जोखिम में वृद्धि कर सकते हैं।

अन्य कारण-----
**अधिक उम्र के लोग सार्कोमा से अधिक प्रभावित होते हैं।
**कई बार सार्कोमा के कारण स्पष्ट नहीं होते और यह अचानक उत्पन्न हो सकता है।

संक्षेप में, सार्कोमा कैंसर जीन म्युटेशन और आनुवंशिक, पर्यावरणीय, विकिरण, वायरल संक्रमण तथा अन्य फैक्टर के कारण होता है, जिनके कारण कोशिकाओं का अनियंत्रित वृद्धि होती है और ट्यूमर बन जाता है.

अब्दुल वहीद
आयुर्वेद (एण्ड) हिज़ामा
सेन्टर जरवल कस्बा जनपद बहराइच उत्तर प्रदेश
MOB:8808858514

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